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Aazi Tamaam
  • Male
  • Bareilly, UP
  • India
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Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post नग़मा: माँ की ममता
"सादर प्रणाम आ विनय जी सहृदय शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का"
3 hours ago
विनय कुमार commented on Aazi Tamaam's blog post नग़मा: माँ की ममता
"बेहद खूबसूरत और बेहतरीन नगमा, माँ के लिए जो लिखा जाए वह कम है. बहुत बहुत बधाई आ अज़ीज़ तमाम साहब"
yesterday
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post नग़मा: माँ की ममता
"सादर प्रणाम आ धामी सर जी सहृदय शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाय व मार्गदर्शन के लिये सर मुझे कुछ अच्छा सूझ नहीं रहा है अगर कुछ अच्छा ज़हन में आता है तो अवश्य कोशिस करूँगा"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Aazi Tamaam's blog post नग़मा: माँ की ममता
"आ. भाई आज़ी तमाम जी, अभिवादन। अच्छा नगमा हुआ है । हार्दिक बधाई। अंतिम दोनों पंक्तियो में लय (गेयता) बाधित हो रही है । बदलाव का प्रयास करे। सादर.."
Monday
Aazi Tamaam posted a blog post

नग़मा: माँ की ममता

22 22 22 22 22 22 22माँ की ममता सारी खुशियों से प्यारी होती हैमाँ तो माँ है माँ सारे जग से न्यारी होती हैमैंने शीश झुकाया जब चरणों में माँ के जानामाँ के ही चरणों में तो जन्नत सारी होती हैदुनिया भर की धन दौलत भी काम नहीं आती जबमाँ की एक दुआ तब हर दुख पे भारी होती हैमाँ से ही हर चीज के माने माँ से ही जग सारामाँ ख़ुद इक हस्ती ख़ुद इक ज़िम्मेदारी होती हैऔर बताऊँ क्या मैं तुमको आज़ी माँ की महिमामाँ से ही जग जन्मा है माँ अवतारी होती हैइन सांसों और इस प्रकृति का सार यही है मौलामाँ से ही माँ जन्मे रोज़…See More
Monday
सुचिसंदीप अग्रवालl and Aazi Tamaam are now friends
May 3
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"दुखद समाचार है सभी आदरणीय गुरुजन एवं मित्रगण अपना ध्यान रक्खे बेहद कठिन समय है गुजर जायेगा आदरणीय नारायण जी को प्रकृति आत्मीय शांति प्रदान करे"
May 2
Aazi Tamaam posted a blog post

नग़मा: जगाकर दिल में उम्मीदें दिलों को तोड़ने वालो

1222 1222 1222 1222जगाकर दिल में उम्मीदें दिलों को तोड़ने वालोहमारा क्या है हम तो बेसहारा हैं सो जी लेंगेतुम्हारा दिल अगर टूटा तो फ़िर तुम जी न पाओगेमिरे लख़्त-ए-जिगर सुन लो गमों को पी न पाओगेजरा सा नर्म रक्खो इस गुमाँ के सख़्त लहजे कोये चादर फट गयी गर ज़िंदगी की सी न पाओगेयहाँ हर शय पे रहता है मिरी जाँ वक़्त का पहराअगर जो वक़्त बदला तो बचा हस्ती न पाओगेहमें आदत है पीने की सो हम तो ज़ह्र भी पी लेंमगर तुम ज़िंदगी के घूँट कड़वे पी न पाओगेहवाएँ गर्म भी होंगी हवाएँ सर्द भी होंगींकभी होंगी खिलाफ़त…See More
Apr 30
Aazi Tamaam commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अब हो गये हैं आँख वो भूखे से गिद्ध की- लक्ष्मण धामी'मुसाफिर'
"सादर प्रणाम आ धामी सर आपकी ग़ज़लों में एक अलग ही बात होती है सुंदर ग़ज़ल है कहीं कहीं टंकण त्रुटियां हैं एक बार देख लीजियेगा सादर"
Apr 28
Aazi Tamaam commented on सुचिसंदीप अग्रवालl's blog post "करो उजागर प्रतिभा अपनी"
"सादर प्रणाम आ सुचसंदीप जी बेहद उत्तम रचना है बधाई स्वीकारें सादर"
Apr 28
Aazi Tamaam posted a blog post

नज़्म: किंदील

जलता है जिस्म सुर्ख है किंदील के जैसेइक झील दिन में लगती है किंदील के जैसेहर शाम उतर आता है ये दरियाओं झीलों परमर फ़ासलाई होगी इक खगोलिये इकाईदिखता भी सुर्ख सुर्ख है घामें लपेटे हैसूरज भी तो जलता है इक किंदील के जैसेहै तीरगी घनी घनी ज़हनों के अंदर तकसब भूल जायें जात-पात हद-कद और सरहदसब ख़ाक करके बंदिशें रौशन करें ख़ुद कोमैं भी जलू तू भी जले किंदील के जैसेचलो मिलके सारे जलते हैं किंदील के जैसेहै धरती के अंदर लावा किंदील के जैसेऊपर भी काशी कावा है किंदील के जैसेकिंदील ही तो हैं जो बातें दिल जलाती…See More
Apr 28
Aazi Tamaam commented on Sushil Sarna's blog post काँटा
"सुंदरता से कांटे की अहमियत का वर्णन करती रचना अच्छी लगी सादर प्रणाम आ सरना जी"
Apr 27
Aazi Tamaam commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post चूड़ी भरी कलाईयाँ, कँगना बसंत है - ग़ज़ल
"सादर प्रणाम आदरणीय बसंत जी सुंदर ग़ज़ल है सादर"
Apr 27
Aazi Tamaam commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post किसी रात आ मेरे पास आ मेरे साथ रह मेरे हमसफ़र (ग़ज़ल)
"सादर प्रणाम आदरणीय धर्मेंद्र जी अच्छी ग़ज़ल हुई है"
Apr 27
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post गीतिका छंद: रास्ते सुनसान और घर, कैद खाने हो गये
"सादर प्रणाम आदरणीय धामी सर हौसला अफ़ज़ाई व सराहना के लिये सहृदय शुक्रिया ये मेरी पहली छंद रचना है सादर"
Apr 26
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Aazi Tamaam's blog post गीतिका छंद: रास्ते सुनसान और घर, कैद खाने हो गये
"आ. भाई आजी तमाम जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
Apr 26

Profile Information

Gender
Male
City State
Uttar Pradesh
Native Place
CHANDAUSI
Profession
Poet, Lawer, Engineer
About me
Poetic Nature

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नग़मा: माँ की ममता

22 22 22 22 22 22 22

माँ की ममता सारी खुशियों से प्यारी होती है

माँ तो माँ है माँ सारे जग से न्यारी होती है

मैंने शीश झुकाया जब चरणों में माँ के जाना

माँ के ही चरणों में तो जन्नत सारी होती है

दुनिया भर की धन दौलत भी काम नहीं आती जब

माँ की एक दुआ तब हर दुख पे भारी होती है

माँ से ही हर चीज के माने माँ से ही जग सारा

माँ ख़ुद इक हस्ती ख़ुद इक ज़िम्मेदारी होती है

और बताऊँ क्या मैं तुमको आज़ी माँ की…

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Posted on May 9, 2021 at 3:29pm — 4 Comments

नग़मा: जगाकर दिल में उम्मीदें दिलों को तोड़ने वालो

1222 1222 1222 1222

जगाकर दिल में उम्मीदें दिलों को तोड़ने वालो

हमारा क्या है हम तो बेसहारा हैं सो जी लेंगे

तुम्हारा दिल अगर टूटा तो फ़िर तुम जी न पाओगे

मिरे लख़्त-ए-जिगर सुन लो गमों को पी न पाओगे

जरा सा नर्म रक्खो इस गुमाँ के सख़्त लहजे को

ये चादर फट गयी गर ज़िंदगी की सी न पाओगे

यहाँ हर शय पे रहता है मिरी जाँ वक़्त का पहरा

अगर जो वक़्त बदला तो बचा हस्ती न पाओगे

हमें आदत है पीने की सो हम तो…

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Posted on April 30, 2021 at 11:22am

नज़्म: किंदील

जलता है जिस्म सुर्ख है किंदील के जैसे

इक झील दिन में लगती है किंदील के जैसे

हर शाम उतर आता है ये दरियाओं झीलों पर

मर फ़ासलाई होगी इक खगोलिये इकाई

दिखता भी सुर्ख सुर्ख है घामें लपेटे है

सूरज भी तो जलता है इक किंदील के जैसे

है तीरगी घनी घनी ज़हनों के अंदर तक

सब भूल जायें जात-पात हद-कद और सरहद

सब ख़ाक करके बंदिशें रौशन करें ख़ुद को

मैं भी जलू तू भी जले किंदील के जैसे

चलो मिलके सारे जलते हैं किंदील के जैसे

है धरती के…

Continue

Posted on April 28, 2021 at 10:59am

गीतिका छंद: रास्ते सुनसान और घर, कैद खाने हो गये

14-12

रास्ते सुनसान और घर, कैद खाने हो गये

खुशनुमा इंसान दहशत, के निशाने हो गये

बेबसी का हाल देखा, दिल दहल कर रह गया

मुफ़्लिसी में ज़िंदगी का, ख़्वाब जल कर रह गया

डर से कोरोना के भी, वो भला अब क्या डरे…

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Posted on April 24, 2021 at 11:30pm — 2 Comments

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At 1:08pm on January 16, 2021, लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' said…

आ. भाई आज़ी तमाम जी, सादर अभिवादन । मेरी गजलें आपको अच्छी लगीं यह हर्ष का विषय है । आपके इस स्नेह के लिए हार्दिक धन्यवाद।

मंच पर अपनी रचनाओं का आनन्द लेने का अवसर प्रदान करें और अन्य रचनाकारों का भी अपनी प्रतिक्रिया से उत्साहवर्धन करते रहिए ।

At 8:15pm on January 12, 2021, Samar kabeer said…

जनाब आज़ी साहिब,तरही मुशाइर: में शामिल सभी ग़ज़लों पर लाइव ही तफ़सील से गुफ़्तगू होती है, शिर्कत फ़रमाएँ, और कोई उलझन हो तो मुझसे 09753845522 पर बात कर सकते हैं ।

 
 
 

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"सादर प्रणाम आ विनय जी सहृदय शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का"
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विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post हम क्यों जीते हैं--कविता
"इस प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार आ लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' साहब"
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Sachidanand Singh is now a member of Open Books Online
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मातृ दिवस पर ताजातरीन गजल -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई विनय जी, अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए धन्यवाद।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on विनय कुमार's blog post हम क्यों जीते हैं--कविता
"आ. भाई विनय जी, सादर अभिवादन । प्रासंगिक व सुन्दर रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
yesterday
विनय कुमार commented on Aazi Tamaam's blog post नग़मा: माँ की ममता
"बेहद खूबसूरत और बेहतरीन नगमा, माँ के लिए जो लिखा जाए वह कम है. बहुत बहुत बधाई आ अज़ीज़ तमाम साहब"
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विनय कुमार commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मातृ दिवस पर ताजातरीन गजल -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"बेहद खूबसूरत और बेहतरीन गजल, माँ के लिए जो लिखा जाए वह कम है. बहुत बहुत बधाई आ लक्ष्मण धामी…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मातृ दिवस पर ताजातरीन गजल -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई गुरप्रीत जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थित, सराहना व सुझाव के लिए हार्दिक…"
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Gurpreet Singh jammu commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मातृ दिवस पर ताजातरीन गजल -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"वाह वाह आदरणीय लक्ष्मण धामी जी । मात्र दिवस पर मां को समर्पित बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही आप ने ।…"
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