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Aazi Tamaam
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  • Bareilly, UP
  • India
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Aazi Tamaam commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post पहरूये ही सो गये हों जब चमन के- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"वाह आदरणीय धामी सर बहुत सुंदर ग़ज़ल है बधाई स्वीकार करें"
yesterday
Aazi Tamaam commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-क्या करे कोई
"अच्छी ग़ज़ल है आदरणीय रचना जी गुस्ताखी माफ़ हो वैसे तो मैं अभी इस काबिल नही कि राय दे सकूँ फ़िर भी मेरे जहन में ये जो आया आपसे साझा कर रहा हूँ अगर आपको उचित लगे तो मतले को कुछ यूँ कह सकते हैं "दिल दूर दूर से ही न फेंका करे कोई आकर करीब इश्क़…"
yesterday
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल ~ "ठहर सी जाती है"
"सादर प्रणाम जी गुरु जी प्रयासरत हूँ हौसला बड़ाने के लिये सहृदय धन्यवाद"
yesterday
Samar kabeer commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल ~ "ठहर सी जाती है"
"प्रयासरत रहें ।"
yesterday
Aazi Tamaam posted blog posts
yesterday
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post "कोई क्यों रहे "
"सादर प्रणाम गुरु जी कोशिश करके देखता हूँ कथ्य और रब्त स्पष्ट करने का फ़िर से एडिट करके"
Tuesday
Samar kabeer commented on Aazi Tamaam's blog post "कोई क्यों रहे "
"जनाब आज़ी तमाम जी आदाब, अव्वल तो ग़ज़ल की बह्र प्रचलित नहीं, कथ्य भी नहीं, मिसरों में रब्त भी नहीं, बहरहाल इस प्रस्तुति पर बधाई ।"
Tuesday
Aazi Tamaam posted a blog post

"कोई क्यों रहे "

1212 222 212चढ़ान   में   भी    कोई   क्यों   रहेढलान में भी कोई क्यों रहेसियासती   हो   रंग  ए  आसमाँउड़ान में भी कोई क्यों रहेदुकान-ए-दिल ही जब हो लुट चुकीअमान में भी कोई क्यों रहेनज़र  उठे   तो  दिल  में  जा  लगेकमान में भी कोई क्यों रहेजहाँ से ऊब आया हो दिल अगरज़हान में भी कोई क्यों रहेउजड़ गया है सब "आज़ी" की अबमकान में भी कोई क्यों रहे"तमाम आज़ी" गम ए फ़ुर्क़त निहाँध्'यान में भी कोई क्यों रहेजो  डोम    होना    घृणा   पात्र होमसान में भी कोई क्यों रहेइबादतें    हीं   गर   ढायें   सितमअज़ान…See More
Monday
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Monday
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदरणीय dandpani nahak ji दिल से शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई के लिये आभार स्वीकार करें"
Feb 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"माफ़ कीजियेगा गुरु जी नियम ध्यान में नहीं था आगे से ऐसा नहीं होगा"
Feb 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"सादर प्रणाम आदरणीय जान जी ग़ज़ल तक आने और हौसला बड़ाने के लिये आभार कुबूल कीजिये"
Feb 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"सादर प्रणाम डॉ सिंह जी दिल से धन्यवाद ग़ज़ल तक आने व हौसला अफ़ज़ाई करने के लिये आभार कुबूल कीजिये"
Feb 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
" आदरणीय राजेश कुमारी जी सादर प्रणाम  ग़ज़ल तक आने और मार्गदर्शन करने के लिये दिल से शुक्रिया मेरे ध्यान में आखिरी शेर की बेहतरी के लिये कुछ आ नहीं पा रहा है यदि आपके ध्यान में कुछ आता हो तो जरूर साझा करें आपकी इस्लाह सर आँखों पर धन्यवाद"
Feb 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदरणीय चेतन जी खूबसूरत ग़ज़ल और मुशायरा प्रारंभ के लिये दिल से बधाई स्वीकार करें"
Feb 26
Aazi Tamaam replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"2122 1122 1122 22 अपने ही दिल को सज़ा हमसे सुनाई न गई बे-वफ़ा से तो वफ़ा हमसे निभाई न गई दर्द-ए-दिल सहते रहे सहते रहे सहते रहे चोट कुछ ऐसे लगी दिल पे दिखाई न गई बज़्म-ए-जानाँ में अगर आज़ है फिर चश्म-ए-तर आज़ फिर दिल की रज़ा हमसे छुपाई न…"
Feb 26

Profile Information

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Male
City State
Uttar Pradesh
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CHANDAUSI
Profession
Poet, Lawer, Engineer
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Poetic Nature

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ग़ज़ल ~ "ठहर सी जाती है"

22 22 22 22 22 22 22 22

जब तन्हाई में यादों की बरसात ठहर सी जाती है

इक हूक सी उठती है दिल में ह'यात ठहर सी जाती है



चुपके चुपके आँखों ही आँखों में इश्क़ जवाँ होता है

गर जुम्बिश ना हो आँखों में शुरुआत ठहर सी जाती है



हर पल मिलने की चाहत में पल पल बेताबी रहती है

दिन ढलते ढलते ढल जाता है रात ठहर सी जाती है



होठों पर बात न आ जाये दिल बेचैनी में रहता है

होठों पर आते ही दिल की हर बात ठहर सी जाती है



रह रह कर आहें…

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Posted on March 2, 2021 at 9:30pm — 2 Comments

"कोई क्यों रहे "

1212 222 212

चढ़ान   में   भी    कोई   क्यों   रहे

ढलान में भी कोई क्यों रहे

सियासती   हो   रंग  ए  आसमाँ

उड़ान में भी कोई क्यों रहे

दुकान-ए-दिल ही जब हो लुट चुकी

अमान…

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Posted on March 1, 2021 at 10:30am — 2 Comments

ग़ज़ल : "मदारी"

बह्र - मुतक़ारिब मुसम्मन सालिम

अरकान - 122 122 122 122

किसी को मुकम्मल जहाँ देने वाले

किसी को नया आसमां देने वाले

                    **

कि बहती हवा…

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Posted on February 17, 2021 at 4:30am — 5 Comments

ग़ज़ल~ "न मर ही पाये कोई"

बह्र ~ "बह्र-ए- वाफिर मुरब्बा सालिम"  

12112 12112 12112 12112

न चैन पाये है की न सुकूँ .....................ही पाये कोई

ऐसे ले के दर्द ए दिल है जिये.................ही जाये कोई

के चोट जो खाये अपनो से ही ...............अगर

तो ले के भी दिल को अपने कहाँ.............ही जाये कोई

अज़ीब है हाल इश्क में भी.....................सनम है न दवा दिल…

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Posted on February 16, 2021 at 10:00am — 4 Comments

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At 1:08pm on January 16, 2021, लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' said…

आ. भाई आज़ी तमाम जी, सादर अभिवादन । मेरी गजलें आपको अच्छी लगीं यह हर्ष का विषय है । आपके इस स्नेह के लिए हार्दिक धन्यवाद।

मंच पर अपनी रचनाओं का आनन्द लेने का अवसर प्रदान करें और अन्य रचनाकारों का भी अपनी प्रतिक्रिया से उत्साहवर्धन करते रहिए ।

At 8:15pm on January 12, 2021, Samar kabeer said…

जनाब आज़ी साहिब,तरही मुशाइर: में शामिल सभी ग़ज़लों पर लाइव ही तफ़सील से गुफ़्तगू होती है, शिर्कत फ़रमाएँ, और कोई उलझन हो तो मुझसे 09753845522 पर बात कर सकते हैं ।

 
 
 

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amita tiwari commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post दिया जला के उसी सम्त फिर हवा न करे (-रूपम कुमार 'मीत')
" बहुत  अच्छी,सरल और सच्ची भाव रचना "
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amita tiwari commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post दिया जला के उसी सम्त फिर हवा न करे (-रूपम कुमार 'मीत')
"  "
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Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा त्रयी : वृद्ध
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार। जी, अवगत हुआ। हार्दिक आभार।"
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Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-क्या करे कोई
"//भाई समर जी, मेरे हिसाब से मतला इस प्रकार करने से कुछ बात बन सकती है// भाई,आपका सुझाव अच्छा…"
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अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-क्या करे कोई
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें। ग़ज़ल के मतले के लिए जनाब…"
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