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Amit Kumar "Amit"
  • Male
  • ujhani
  • India
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Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आदरणीय अजय गुप्ता जी अच्छी ग़ज़ल कहने के लिए बधाइयां"
Sep 27
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आदरणीय आसिफ साहब हौसला अफजाई के लिए धन्यवाद"
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Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आदरणीय अजय गुप्ता जी हौसला अफजाई के लिए धन्यवाद"
Sep 27
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"आदरणीय आसिफ जैदी जी बहुत ही खूबसूरत गजल करें दाद के साथ बधाइयां कबूल करें। अंधेरा ये मिरा जीवन, दिया होने से पहले था।। ....... अंधेरा को अंधेरों कर ले तो और अच्छा हो जाएगा। ये क़िस्सा तेरी ज़ुल्फ़ों के घटा होने से पहले था....... सनी में के की जगह…"
Sep 27
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"बहुत ही नेक दिल इंसा बुरा होने से पहले था।मेरा हमदम मेरे जैसा जुदा होने से पहले था।।१।। समंदर में उतर कर ही इसे तुम जान पाये हो।ये तुझको इश्क का एहसास क्या होने से पहले था।।२।। अभी बीवी के आगे दुम दबा कर के जो बैठा है।वो बब्बर शेर सा शादीशुदा होने…"
Sep 27
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"आदरणीय मुनीश तन्हा जी हौसला अफजाई के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।"
Jul 27
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"आदरणीय मोहम्मद अनीस शेख जी गजल पसंद करने के लिए और हौसला अफजाई के लिए धन्यवाद"
Jul 27
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"आदरणीया रचना भाटिया जी अच्छी ग़ज़ल हुई बधाईयां"
Jul 27
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"आदरणीय नीलेश जी बहुत ही उम्दा ग़ज़ल हुई शेर दर शेर दाद कबूल फरमाए"
Jul 27
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"आदरणीय अंजली गुप्ता जी गजल का अच्छा प्रयास हुआ बधाइयां"
Jul 27
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"आदरणीय लक्ष्मण भाई जी बहुत गहरी गजल हूं बधाइयां कबूल करेंं। अपने तो  मेरे  छेद  गये नाव अकेलीतारेगा भला और मुझे कौन भँवर से - बहुत खूब"
Jul 27
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"अरुण कुमार निगम जी गजल का अच्छा प्रयास हुआ है बधाइयां स्वीकार करें"
Jul 27
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"आदरणीय समर कबीर सर जी आपका स्वास्थ्य ठीक ना होते हुए भी आप हर गजल और हर शेर को पूरा समय दे रहे हैं इसके लिए आपको बार-बार सलाम । चाहो तो "अमित" जी मुझे दुनिया से मिटा दो" अगर इसे ऐसे करते हैं तो कैसा रहेगा चाहो तो "अमित" अब…"
Jul 27
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"आदरणीया अन्जली गुप्ता जी हौसला अफजाई के लिए धन्यवाद  आपकी सलाह का ध्यान रखूंगा"
Jul 27
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"आदरणीय अरुण कुमार सिंह गजल पसंद करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद कृपया संशोधित गजल पर एक बार नया डालें और मार्गदर्शन करें सादर"
Jul 27
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी बदल पसंद करने और हौसला अफजाई के लिए धन्यवाद"
Jul 27

Profile Information

Gender
Male
City State
Ujhani ,UP
Native Place
Ujhani
Profession
DM QA
About me
Amit

Amit Kumar "Amit"'s Blog

गीत - मैं तुमको अपनी सबसे प्यारी गजल समझता हूं।

तुम मुझको चाहे जो भी समझो लेकिन सुनो प्रिय।

मैं तुमको अपनी सबसे प्यारी गजल समझता हूं।।



तुम अमृत जैसी दुर्लभ हो, तुम गंगाजल सी पावन हो।

तुम खुशबू से लबरेज पवन, तुम बहका-बहका सावन हो।

तुम कलियों में कचनार प्रिय, तुम नील गगन में चंदा हो।

उर्वशी-मेनका से सुंदर, जो जग पूजे वो वृंदा हो।



उस जीवन दाता रब का मुझ पर फजल समझता हूं।

मैं तुमको अपनी सबसे प्यारी गजल समझता हूं।।१।।



सांसो की मधुमय हाला से मदहोश सदा हो जाता हूं।

इन नैनो की मधुशाला… Continue

Posted on July 19, 2019 at 6:09pm — 3 Comments

गज़ल - गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से साकी।

पिला दे घूंट दो मुझको, ज़रा नजरों से ऐ साकी।।

मिलुंगा मैं तुझे हर मोड़ पे पहचान ले साकी।।१।।

अभी तो दिन भी बाकी है ये सूरज ही नहीं डूबा।

इसे दिलबर के आंचल में जरा छुप जान दे साकी।।२।।

जिसे पूजा किये हरदम जिसे समझा खुदा मैंने।

किया बर्बाद मुझको तो उसी इन्सान ने साकी।।३।।

मेरा महबूब भी तू है मेरा हमराज भी तू है।

वे दुश्मन थे मेरे पक्के जो मेरे साथ थे साकी।।४।।

नहीं इससे बड़ी कोई भी अब अपनी तमन्ना है।

गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से…

Continue

Posted on January 6, 2019 at 10:30pm — 10 Comments

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At 7:42am on June 29, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय अमित कुमार अमित जी
At 10:31am on May 26, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अमित कुमार 'अमित' जी हौसला अफजाई का बहुत शुक्रिया
At 6:50am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

आदरणीय Amit Kumar साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर

At 5:13pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
शीमान अमित कुमार जी नमस्कार
शुक्रिया आपका
At 5:01pm on September 29, 2014, Vivek Jha said…

थैंक्स अमित जी, उस दिन आपसे मिलकर काफी अच्छा लगा 

 
 
 

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