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Chetan Prakash
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Chetan Prakash commented on amita tiwari's blog post बरगद गोद ले लिया
"आ.अमिता तिवारी जी, समीक्षक की दृष्टि  से जो औचित्य पूर्ण लगा, मैं कह चुका हूँ। आप उसे  सकारात्मक  ढंग  से लें तो कृपा  होगी, अन्यथा  क्षमा प्रार्थी हूँ । रहा वर्तनी दोष  देखिएगा ,    त्रुटियाँ 1 …"
May 13
Chetan Prakash commented on amita tiwari's blog post बरगद गोद ले लिया
"पुनश्च  : वर्तनी  के दोष भी कमोबेश  दिखाई  देते हैं !"
May 12
Chetan Prakash commented on amita tiwari's blog post बरगद गोद ले लिया
"नमन,  आ. अमिता  तिवारी  जी, और, हाँ शुभ प्रभात  !  माननीया,  अतुकांत  ( छंद मुक्त ) कविता  में भी आपने क्षमा करें, अनावश्यक  तुकांतता  पर आश्रय , भाव के अपेक्षाकृत  अधिक  लेकर …"
May 12
Chetan Prakash commented on Sushil Sarna's blog post बुझते नहीं अलाव. . . . (दोहा गज़ल )
"कोमल भावों को कवि की बहु-श्रुत संवेदना  से सहेजते  मार्मिक  दोहा--गज़ल  हुई  है, बधाई आपको  आ. सुशील सरना जी  !"
May 11
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-85 (विषय: अहसास)
"आदाब, Sheikh Shahzad Usmani जी, प्रथमत: रचना को संस्तुत  करने हेतु आपका अशेष  आभार  । पात्रों के नाम और संदर्भ गत  परिवेश में उनकी  स्थिति  के बिना लघुकथा का उठ  खड़े होना  संभव  ही नहीं था । सादर "
Apr 30
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-85 (विषय: अहसास)
"नमन, सु श्री प्रतिभा पाण्डे , अशेष आभार आपका प्रोत्साहन मिला !"
Apr 30
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-85 (विषय: अहसास)
"नमन आदरणीया, अपना अमूल्य समय देकर आपने रचना को मान ही नहीं दिया, अपितु सराहना भी की, इसके लिए आपका कोटिशः धन्यवाद ! "
Apr 30
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-85 (विषय: अहसास)
"                                                बड़प्पन हरद्वारी लाल और रामजी लाल  दो भाई पुश्तैनी गद्दी पर बैठ …"
Apr 30
Chetan Prakash replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"हृदय विदारक...मेरी उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि !"
Apr 29
Chetan Prakash commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post लघुकथा : बँटवारा (गणेश जी बाग़ी)
"नमस्कार,  आदरणीय  इं. गणेश बागी जी, बहुत  सटीक और सार्थक , इतिहास  से सीख  लेती , लघुकथा कही  आपने ! बधाई स्वीकार करें !"
Apr 28
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-142
"मैं ही पड़ौसी से ताज़िन्दगी कभी न मिला जो आशना हुआ उस पे तो अजनबी न मिला वो फर्क़ अपने-पराये का भी जाता रहा जाँ भला हो तीरगी अहसास ए क़मतरी न मिला वो बुतक़दों में खुदा ढूढ़ते रहे यारो वो मुफलिसों में रहा मन्दिरों कभी न मिला साक़ी पिला मुझे इस तरह…"
Apr 28
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132 in the group चित्र से काव्य तक
"अच्छे छंद लिखे हैं, किंतु " चैत्र और बैशाख महीना" सत्तरह मात्राएं हैं !"
Apr 24
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132 in the group चित्र से काव्य तक
"सुनसान है  सकल  वातायन, गर्म - गर्म लू बहती ।  खून सोखती काया का वो,  सांस धोंकनी चलती ।। एकाकी  परिवेश  सुखाता,  रक्त बूँद की नाहक । कृषकाया जुटी रही खेतों, बन जंगल की शासक ।।  फसल पकी है बढ़ते गरमी, बाली…"
Apr 23
Chetan Prakash commented on Samar kabeer's blog post ओबीओ की बारहवीं सालगिरह का तुहफ़ा
"आदाब,  मुहतरम  समर कबीर साहब,  अस्वस्थता के कई दिन बाद  ब्लाग्स  झाँकना  शुरु हुआ , आपकी  ओ बीओ  जयंती विषयक  गज़ल  पढ़कर  मन आह्लादित हो गया। मेरे  लिए  ओ.बी.ओ  मन्दिर …"
Apr 20
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-138
"             मुक्तक   ( 1 ) वक्त देता  है थपेड़े बार हा हमको  जहाँ वो सँभाले भी हमे  है जा ब जा सुन लो जहाँ मत थको तुम दोस्त और चलते रहो दुनिया सदा ईश के अवतार हो तुम कर दो जो चाहो जहाँ…"
Apr 19
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-138
"नमस्कार,  आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी मुसाफिर , सभी  दोहे  बहुत अर्थवान  और  सटीक  है। इस  पोस्ट को मै उल्लेखनीय मानता  हूँ, और  आपको  निश्चय ही बधाई का  पात्र  ! शुभकामनाओं सहित.."
Apr 19

Profile Information

Gender
Male
City State
Baraut
Native Place
Hapur
Profession
Teaching
About me
I'm a poet rather born than made or trained since my childhood

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पाँच दोहे

 घटा - घोप   अन्धेर  है, कहीं    न   पहरेदार ।

 तक्षक  बनता काल है, क्या  होगा  घर-बार ।। ( 1 )

+++++++++++++++++++++++++ 

 

नागफनी  वन हो गये, जंगल  ...नम्बरदार  ।

बना कैक्टस मुँहलगा, फुदकता - बार  बार ।।   ( 2 )

++++++++++++++++++++++++++++++

रोशन  जो  दिखती  नहीं, गाँव  सखा  तक़दीर  ।

बुझा- बुझा सा मन हुआ, सोच  रहा ताबीर  ।।  ( 3…

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Posted on March 27, 2022 at 12:30am — 2 Comments

दोहावली.... स्वागत करो बसंत का....

स्वागत करो बसंत का, अब.. अनंग दरवेश। 

बदन..सुलगने ..हैं लगे, खिल उठा परिवेश ।।

रथ सवार सूरज हुआ,  बढ़ती ..आँगन ..धूप। 

मकरंद  बसा प्राण में,  प्रतिपल प्रिया अनूप ।।

अलसाया सी डाल पर, उतर ..पड़ी  है.. धूप। 

कलियाँ  मुस्काने लगीं, जगमग गाँव अनूप ।।

गंधायी ..अब है ..हवा,  खिलने.. लगे.. प्रसून। 

गश्त बढ़ गई भ्रमर की, कली लाल सी खून ।।

मौलिक व अप्रकाशित 

प्रोफ. चेतन प्रकाश…

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Posted on February 8, 2022 at 9:22am

ग़ज़ल......अब आदमी में जोश का ज़ज्बा नहीं रहा !

221     2121     1221     212

अब आदमी में जोश का ज़ज्बा नहीं रहा

मौसम  बहार का  वो सुहाना नहीं रहा 

हमको  तुम्हारा  तो सहारा  नहीं  रहा

वो  दर्द  ज़िन्दगी का अपना नहीं रहा

उम्मीद कब रही हमें इस ज़ीस्त से कभी

मंज़िल का जाँ कभी भी वो चहरा नहीं रहा

कोशिश बहुत की कोई हमदम कहाँ हुआ

इक दोस्त न मिला कभी साया नहीं रहा 

धोका मिला जहाँ हमें वुसअत के नाम पर 

सुन दोस्त ज़िन्दगी  का निशाना नहीं…

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Posted on February 3, 2022 at 7:00pm — 1 Comment

दोहा - छक्का

उम्र  गँवा  दी  लोमड़ी, उछल- कूद  वनवास। 

 ईश  साधना की नहीं, भजन हुआ सन्यास।।

दोहा  कवि को  साध्य है, मूर्ख सदैव असाध्य। 

लंगड़ी  जब  भी  मारता, गिरता ठोकर खाय।।

काव्य - धर्म है साधना, प्राण बसे मम आग ।

साधू - संगति  चाहिए , तुलसी सम अनुराग।।

काव्य - कर्म जागृति जगत, हास्य-व्यंग्य है राग।

कविता  -  गंगा   है    सदा, नवरस का अनुराग।।

काव्यशास्त्र  विलास  कवि, पंडित को ही साध्य। 

तप - काव्य विरल भाव…

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Posted on February 1, 2022 at 6:30pm — 5 Comments

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At 6:35am on July 22, 2021, रणवीर सिंह 'अनुपम' said…
आदरणीय, चेतन जी, "दोहे : कैसे- कैसे  लोग" शीर्षक के तहत लिखे गए दोहे बहुत सुंदर हैं और बहुत अच्छे लगे।

निम्न चरण विधान में न होने से इनमें लय भंग है। जिसे दूर करने की जरूरत है।

जन्म-भूमि स्वर्ग सम हो
(कारण-नवीं मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

कृतघ्न पक्के लोग
(कारण-आरंभ में जगण "कृतघ्न"आ रहा है, जो नहीं होना चाहिए)

कर रहे बस भोग
(कारण-एक मात्राभार कम है, साथ ही पाँचवीं मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

न हों कभी बदनाम
(कारण-पहली मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

विद्या  हमें  सिखाती है,
(कारण-13 मात्राओं की जगह 14 मात्राएँ हैं, जो नहीं होनी चाहिए)

कर अन्याय प्रतिकार
(कारण-11 की जगह 12 मात्राएँ हैं जो नहीं होनी चाहिए)
At 11:46pm on November 22, 2020, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

भाई चेतन जी
नमन -
इस्लाह का
सलीका आ जायेगा
मैंने आज तलक
मुकम्मल तो कोई देखा नहीं
गलतियां निकालोगे-
तो सीखूंगा ही ।।
मैं तो अधूरा था
अधूरा रहा
और हूँ अब तलक
आज आया हूँ आपकी बज्म में
कुछ सिखा दोगे -
तो सीखूंगा भी ।।

At 11:59am on June 27, 2020, Samar kabeer said…

जनाब चेतन प्रकाश जी,ये टिप्पणी आप मुशाइर: में दें,तो मुझे जवाब देने में आसानी होगी ।

 
 
 

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