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Chetan Prakash
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  • DR ARUN KUMAR SHASTRI
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Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
" आजी तमाम, भाई, आप ने मेरी राय बिना सोचे समझ े ग़लत बयान ी की है, मैं ने कब कहा कि आप की ग़ज़ल उबाऊ है! और, शास्त्रीय आधार पर आपको ख़तरे से आगाह किया है! रहा, मेरी ग़ज़ल का प्रश्न प्रश्नगत समझ रखते क्या आप पाओगे! "
Apr 24
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आदाब,  भाई! ग़ज़ल नफ़ासत और  अपने माधुर्य के लिए  जानी  जाती है, न कि अभद्र शब्दों के असंयमित प्रयोग के लिए, " चोर उचक्कों के हाथों में दे दी सरदारी " से आप क्या  कहना चाहते  हैं, स्पष्ट करना  चाहेंगे !…"
Apr 24
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"बधाई, भाई दिनेश कुमार विश्वकर्मा, अच्छी  ग़ज़ल हुई।  हाँ, शाब्दिक स्तर पर  कहूँ तो आप को वर्तनी पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता  है । झूठ,  हासिल सही शब्द हैं । इतिहास !"
Apr 24
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आदाब, जिन बड़े शायरों के नाम  आपने दिये है, ज़ाहिर  है, सभी  रूढ़िगत व्यवहार/ चलन को आगे बढ़ा  रहे थे ! ऐसे सामान्य /   सामाजिक  / साहित्यिक  जीवन  में अनेक  उदाहरण  हैं ।  जहाँ तक मेरी…"
Apr 24
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"भाई आजी तमाम, आदाब, तमाम ग़ज़ल में क्रियाओं का दुहराव ग़ज़ल की मूल उद्भावना के विरुद्ध है !  कहने की आवश्यकता नहीं ग़ज़ल का मूल स्वरूप तात्पर्य और तकनीक दोनों में ही विविधता की माँग करता है! अन्यथा ग़ज़ल उबाऊ हो जाती है, एकरसता के होते,…"
Apr 24
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"नमन, भाई, अनिल कुमार सिंह, ग़ज़ल डालते हुए थोड़ा असावधानी बरती आपने, अन्यथा अच्छी ग़ज़ल कही है, आपने  ! " राह - ए - मुहब्बत मे ं चल चल कर हम भी बहुत नाकाम हुए " चल" का दुहराव भर्ती का प्रयास है, बंधुवर, त्याज्य है! इति …"
Apr 24
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
" और, हाँ, पुनश्च आदाब, निलेश जी, " गर्म और सर्द इश्क़ की हम महसूस भी करते तो कैसे " व्याकरण की दृष्टि से वाक्यांश " गर्म ओ सर्द इश्क़ की" ग़लत है, दोनों विशेषण है ं जबकि आपका आशय, गर्मी और सर्दी से है जो, कहना न होगा,…"
Apr 24
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"ठीक- ठाक ग़ज़ल हुई है, लेकिन " मेरे शेर पर मेरा दिल तक दाद-वाद नहीं दे देता है" शब्द-युग्म भर्ती का जान पड़ा और मात्रा- गठन भी आदर्श मालूम नहीं पड़ा! इति! "
Apr 24
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"नमस्कार, भाई लक्ष्मण सिंह मुसाफ़िर, सराहनीय प्रस्तुति है, आपकी, सिवाय तद्भव शब्द, ' दसक' के प्रयोग के! कुल शेर, मौलिक शब्दावली में होते यहाँ, 'दशक' सही था! कदाचित मातृभाषा के रूढ़ होने से ऐसा हुआ है, इति  ! "
Apr 24
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"नमस्कार, आदरेया, मात्रिक गठन की दृष्टि से उल्लेखनीय ग़ज़ल है, आप की  ! बाक़ी प्रवाह को लेकर आदरणीय भाई लक्ष्मण सिंह मुसाफ़िर की बात सही है! इति! "
Apr 24
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई, जनाब, सालिक गणवीर, साहब,  ! लेकिन  काफिया " साम" ग़लत है  !अमेरिकन अंग्रेजी का शब्द  " Uncle Sam" है, जिसका उच्चारण ' साम" कतई  नहीं हो सकता  ! " कैसे कैसे…"
Apr 24
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-130
"तरही ग़ज़ल : 22    22    22    22    22    22    22    2 इक सच क्या हमने बोल दिया यारों हम बदनाम हुए  !  नाराज़ दोस्त हो गये और सर अपने इल्जाम हुए …"
Apr 23
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 120 in the group चित्र से काव्य तक
" नमस्कार,  भाई  लक्ष्मण  सिंह  धामी  मुसाफिर  साहब,  " चाहते होना जरा से दूर कैस तुम अजर , अशुद्ध  है  ! और, गीतिका  मात्रिक  छ॔द है, अत: व्याप्त  चार मात्राएं है, न कि ( 21 ) तीन…"
Apr 18
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Chetan Prakash's blog post लघुकथा-- नहले पर दहला
"आ. भाई चेतन जी, अच्छी लघुकथा हुई है । हार्दिक बधाई।"
Apr 18
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 120 in the group चित्र से काव्य तक
"भाई, लक्ष्मण सिंह धामी, मुसाफिर, गीतिका छ॔द मैं रचता रहा हूँ, अप्रैल  में भी ओ बी ओ मे गीतिका  छंद में मेरी प्रस्तुति  आप देख सकते  हैं ! लेकिन  मैंने चित्रोक्त  विषय  पर गीत  रचा  है, जिस का…"
Apr 17
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 120 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय, नमन ! निम्न  गीत मंच को समर्पित कर रहा हूँ : खतरा कोई नहीं माँ यहाँ है  ! रहतवारे दोस्त हम जंगल  के हैं  कि माँ प्रकृति की रक्षा में रहते हैं  मास्क जंगल का पत्ता पत्ता है, आक्सीजन बसे स्वयं वायु में है खतरा कोई…"
Apr 17

Profile Information

Gender
Male
City State
Baraut
Native Place
Hapur
Profession
Teaching
About me
I'm a poet rather born than made or trained since my childhood

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लघुकथा-- नहले पर दहला

" कूड़े मल इस दुकान को मैंने खरीद लिया है, अब से एक हफ़्ते में खाली कर देना"

" क्या.... क्या बकवास कर ती हो, मैं कई वर्ष पुराना किरायेदार हूँ, मेरी रोज़ी - रोटी चलती है, यहाँ से! बिल्कुल खाली नहीं करूँगा" ! कूड़े मल कस्बे का बड़ा किराना व्यापारी था! बूढ़े, कमज़ोर राम आसरे का मूल किरायेदार था जिसको उसने किराया देना बंद कर दिया था! हारकर राम आसरे ने दबंग, झगड़ालू औरत सुनहरी देवी को आधी कीमत अग्रिम लेकर पावर आफ अटार्नी कर दी थी! 

कूड़े मल अब परेशान था! भागा-भागा अपने वकील साहब के…

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Posted on April 11, 2021 at 4:00am — 1 Comment

ग़ज़ल

2122    1212    22/ 112

  

भारती धर्म  अपना क़द करे हैं !

माँ की खायी कसम न मद करे हैं !

तीरगी को हटाया जाँ हमी ने,

रघुवंशी  हम उजालों क़द  करे है !

मोमबत्ती भी जिनसे जल न सकी,

सूरज  होने का दावा ज़द करे  हैं !

जाने  क्या वो अँधेरों  के  हामी 

वरिष्ठों के है अदु वो हद करे  हैं !

सावन  अंधे जुड़ाव  हो  कैसे ?

है  रतौंधी  उन्हें  अहद  करे…

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Posted on April 7, 2021 at 9:30am

गीतिका छंद

दूर तक फैला हुआ है, राज सम्यक शान्ति ।

हूर जीवन - धौंकनी है, गूँजता वन शान्ति ।।

नीर सूखा नालियों का, आँख ज्यौं पानी नही ।

लाज जैसे मर गयी हो, आजमा जीवन कहीं ।।

एक चुप पसरा हुआ है, पर्वतों से घाट तक ।

देखिय़े तट सखिविहीना, कृष्ण-राधा ठाठ तक ।।

ज़िन्दगी यदि मर रही है जग, मारता मन आज मद ।

आदमी रहता यहाँ खुश, मन प्रकृति वन मौज- मद ।।

गाँव की शालीनता मिल जायगी क्या शहर में ।

हैं खुशी छोटी मगर सुख,…

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Posted on March 22, 2021 at 12:00am

गीत

उतरा है मधु मास धरा पर

हर शय पर मस्ती छाई है !

जन गण के तन मन सुरा घुली

गुनगुनी धूप की चोट लगी

कली खुल, वन प्रसफुटित हुई,

मुस्काय बेला चमेली है !

उतरा है मधुमास धरा पर

हर शय पर मस्ती छाई है !!

कमल खिले हैं सरोवरों मेंं

मौज करे हम नावों में

मगन चिड़िया झील के तन हैं

वर बसन्त, प्रकृति मुस्काई है !

उतरा है मधुमास धरा पर

हर शय  पर मस्ती  छाई है !!

बाण चलाया कामदेव ने

घायल चम्पा गुलमोहर…

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Posted on March 5, 2021 at 1:30am — 3 Comments

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At 11:46pm on November 22, 2020, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

भाई चेतन जी
नमन -
इस्लाह का
सलीका आ जायेगा
मैंने आज तलक
मुकम्मल तो कोई देखा नहीं
गलतियां निकालोगे-
तो सीखूंगा ही ।।
मैं तो अधूरा था
अधूरा रहा
और हूँ अब तलक
आज आया हूँ आपकी बज्म में
कुछ सिखा दोगे -
तो सीखूंगा भी ।।

At 11:59am on June 27, 2020, Samar kabeer said…

जनाब चेतन प्रकाश जी,ये टिप्पणी आप मुशाइर: में दें,तो मुझे जवाब देने में आसानी होगी ।

 
 
 

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