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Chetan Prakash
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Samar kabeer commented on Chetan Prakash's blog post ग़ज़ल
"जनाब चेतन प्रकाश जी आदाब, आपकी ग़ज़ल क़वाफ़ी,मिसरों के रब्त,और बह्र पर अभी समय चाहती है,बहरहाल इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । 'आग़ाज मुहब्बत का तो मुश्किल भी नहीं है आजन्म बँधा भारती हूँ, कल भी नहीं है' इस मतले के ऊला में क़ाफ़िया…"
Oct 13
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-120
"अवसर......कविता अवसर.... जीवन में जीवन में बार-बार नहीं आते... परन्तु यह सच है कि द्वन्द साथ भी लाते हैं यह सार्वकालिक सत्य है या कहूँ ध्रुव सत्य है कि अवसर चुनौती के वाहक हैं और कई विकल्पों में से एक चुनने का दवाब सदैव अवसर के मुँह बायें खड़़ा…"
Oct 10
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-120
"कुण्डलिया ः अवसर अवसर .मिलता .जब उसे, करता .है .वो वार । कूट नीति .खाद्य .जिसकी, चालाकी अवतार।। चालाकी ...अवतार, फिरे ..जब.. वोट ...माँगता । झुक- झुक जाता द्वार, खाक दर ब दर छानता।। कह.. चेतन ..कविराय, विकल पसीने तर ब तर। नेता .माँगे. वोट, है जन -…"
Oct 10
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Oct 9
Chetan Prakash posted blog posts
Oct 7
Chetan Prakash commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post मगर होता नहीं दिखता - गजल
"ग़जल छोटी हो, लेकिन सरोकारों को आगे रखकर लिखी जाए तो श्रोता अथवा पाठक गद्-गद् हो जाता है, मेरी मनःस्थिति भी ग़ज़ल पढ़ते हुए कदाचित ऐसी ही थी। ग़जलकार श्री बसंत कुमार शर्मा को हृदय-तल से मेरी बधाई और भविष्य के लिए शुभकामनाए एतद्वारा प्रस्तुत हैं।"
Oct 5
Chetan Prakash commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (न यूँ दर-दर भटकते हम...)
"बह्रे हज़ज मुसम्मन सालिम में कही गयी साफ-सुथरी बढ़िया ग़ज़ल, वाह क्या कहने, बधाई शायर 'अमीर' साहब को !"
Oct 5
Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post जन के हाथों थमी थालियाँ - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"कृपया बधाई, स्वीकार करे, पढ़े।"
Oct 5
Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post जन के हाथों थमी थालियाँ - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"समसामयिक परिदृश्य पर अच्छी ग़ज़ल कही आपने, बंधुवर, लक्ष्मण धामी जी, बझाई स्वीकार करे। दोनों मतले विशेष रूप से सीधे दिल पर दस्तक देते हैं।"
Oct 5
Chetan Prakash commented on सालिक गणवीर's blog post सूखी हुई है आज मगर इक नदी है तू...( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"बढिया साफ सुथरी गज़ल हुई है, बंधुवर सालिक गणवीर महोदय, नाचीज़ की बधाई स्वीकार करें। बस एक जगह तीसरे शेर के सानी मिसरे के पहले हिस्से आप मुझे चूकते दिखाई दिए, आवाज़ "मिरे दर पे" ( 1 2 2 ), मेरी अल्प बुद्धि से "मेरे दर पे" होना…"
Sep 29
Chetan Prakash commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी)
"मोहतरम अमीर साहब, आप अच्छे से ग़ज़ल कहते हैं। खुद पर विश्वास रखिए, बस। हाँ बहुत जल्दी, आप असहज हों जाते है। आपको समझना चाहिए हम सब उम्र दराज़ है,पर मुशायरे में प्रतिभागी भी हैं। कोई अपने आपको क़मतर नहीं मानता। सो, आपके साथ हूँ, थोड़ा धैर्य आपको…"
Sep 28
Chetan Prakash commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (वो नज़र जो क़यामत की उठने लगी)
"मोहतरम अमीर साहब, भाई नीलेश जी सही कह रहे है। असल में सारी समस्या ध्वनयात्मक विज्ञान को ठीक से न समझ पाने की है।"
Sep 28
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय समर कबीर साहब, आपका शत़्-शत़ धन्यवाद, आपने मेरी बात का संज्ञान लिया। भविष्य मे, मैं हमेशा आपके निर्देशानुसार मुशायरे के प्रारम्भ में ही ग़ज़ल पोस्ट करने का प्रयास करूँगा। शुभ रात्रि, वन्दे !"
Sep 26
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय, समर कबीर साहब, आप कमजोर स्थलों को चिन्हिंत करते तो बेहतर होता। मेरे लिए उन बिन्दुओं पर काम करना भी अपेक्षाकृत सरल होता । सिरे से किसी के प्रयास को नकारना न तो न्यायसंगत और उत्साह- वर्धक ! आशा करता हूँ, आप मेरा कुछ ज्ञान वर्द्धन ज़़रूर करेंगे।"
Sep 26
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"लोगों ने फूलों के बदले तलवारे मँगवा ली थीं ग़ज़लः शरम बेच दी बाजारों, गरदन अपनी झुकवा ली थीं नायिकाओ ने उससे पहले इज्जत उतरवा लीं थी आप से क्या बतलाऊँ मैं, क्या गुजरी है मेरे साथ मरने से पहले ही उसने जायदाद बँटवा ली थी। अर्पण-तर्पण माँ का हुआ गंगा…"
Sep 26
Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शूल सम यूँ खुरदरे ही रह गये जीवन में सच-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"साफ सुथरी हिन्दी ग़ज़ल, बधाई ! उद्धरणीय हो सकती थी, मकते के साथ।"
Sep 23

Profile Information

Gender
Male
City State
Baraut
Native Place
Hapur
Profession
Teaching
About me
I'm a poet rather born than made or trained since my childhood

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ग़ज़ल

2 2 1 1 2 2 1 1 2 2 1 1 2 2

आग़ाज मुहब्बत का तो मुश्किल भी नहीं है

आजन्म बँधा भारती हूँ, कल भी नहीं है।

क्या हिन्दू मुसलमाँ बना फिरता है ज़माने

जिस देश मिला जन्म वो हलचल भी नही है

आसान नहीं होता जहाँ रोटी का जुटाना

तू मौज मनाता दुखी बिल्कुल भी नहीं है

क़मज़र्फ बने मत कि कमाना नहीँ पड़ता

मुँहजोर  वो औलाद अक़ल बल भी नहीं है

है एक मुसीबत कि निभाने हैं मरासिम

अब वक्त…

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Posted on October 6, 2020 at 6:30pm — 1 Comment

रोटी.....( अतुकांत कविता)

रोटी का जुगाड़

कोरोना काल में

आषाढ़ मास में

कदचित बहुत कठिन रहा

आसान जेठ में भी नहीं था.

पर, प्रयास में नए- नए मुल्ला

अजान उत्साह से पढ रहे थे...

दारु मृत संजीवनी सुरा बन गयी थी

सरकार के लिए भी,

कोरोना पैशैन्ट्स के लिए भी

और, पीने वालों का जोश तो देखने लायक था,

सबकी चाँदी थी...!

आषाढ़ तो बर्बादी रही..

इधर मानसून की बारिश

उधर मज़दूरो की भुखमरी

और, बेरोज़गारी.....

सच, मानो कलेजा मुुँह

को आ गय़ा...!…

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Posted on July 11, 2020 at 1:00pm

हादसा

बाबू राम नाथ पचहत्तर पार कर चुके हैं। शरीर अब जवाब देने लगा है। अभी कई दिन पहले जरा डाॅक्टर से चैक-अप कराने गये थे कि देर तक धूप में खड़ा रहना पड़ा । घर लौटते तेज़ बुखार हो गया। बेटा संयोग से इस वीक एन्ड पर सपत्नीक चला आया। दोनों बहनें जो अपने बच्चों के गर्मियो की छुट्टियों में आयी हुईं थी।सो डाॅक्टर को घर बुला लाया।

"हीट स्ट्रोक हुआ है', ङाॅक्टर बोला था। दवा दे गया था। अब आराम था। लेकिन कमजोरी बहुत थी। लू मानो सारा खून चूस गई थी। बाथरूम भी मुश्किल से जा पाते थे।



अभी कल…

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Posted on June 30, 2018 at 6:00pm — 14 Comments

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At 11:59am on June 27, 2020, Samar kabeer said…

जनाब चेतन प्रकाश जी,ये टिप्पणी आप मुशाइर: में दें,तो मुझे जवाब देने में आसानी होगी ।

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

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सालिक गणवीर posted a blog post

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