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Chetan Prakash
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Chetan Prakash replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
" जनाब Sheikh Shahzad Usmani,  साहब मेरी  प्रस्तुति  तक पहुँचने और अपनी  संस्तुति  प्रदान करने हेतु आपका  अशेष आभार ! जनाब,  लघुकथा का एक मात्र ध्येय पाठक  को संवेगात्मक प्रक्रियात्मक से गुजारकर प्रेरणा…"
Jul 31
Chetan Prakash replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
"आदरणीया, " ये अवश्य है कि फाँसी को लेकर कुछ  तथ्यात्मक बातों का ध्यान आवश्यक था " कितने लोगों को स्वतंत्र भारत के इतिहास  में दंगों में शामिल होने के कारण फाँसी हुई है कि आप  कबीर  की मनगढ़ंत  फाँसी को तथ्य  /…"
Jul 31
Chetan Prakash replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
"जनाब,  आप  पंच पंक्ति की बात  कर रहे  हैं, मैं उसे उद्धृत करता हूँ, पढ़िए,  " बेटा  हकीकत यही है कि नक्कारखाने  में तूती की आवाज किसी को नहीं सुनाई पड़ती।" एक धर्म / पंथ निरपेक्ष संवैधानिक व्यवस्था …"
Jul 31
Chetan Prakash replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
"जननीजन्मभूमिस्वर्गादपि गरीयसी तीन बहनों में इकलौता और सबसे छोटा बचपन से ही प्रतिभाशाली राजेश ने एम. बी. बी एस की परीक्षा गोल्ड मैडल लेकर इसी वर्ष पास की थी। जिला मुख्ययालय के सूदूर छोटे से अपने गाँव का राजेश लाड़ला बेटा था सो ग्राम प्रधान ने राजेश…"
Jul 31
Chetan Prakash replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
"आदाब,  भाई  मनन कुमार सिंह,  बधाई।  बहुत अच्छी  लघुकथा लिखी  आपने, विषयानुकूल और दो  पीढ़ियों  के  अंतराल  प्रतीकों के माध्यम से !"
Jul 31
Chetan Prakash replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
"शुभ प्रभात, तेजवीर सिंह जी, आपकी, लघुकथा  मुझे,मुआफ करें, श्रीहीन  लगी ! प्रस्तुति  न केवल लघुकथा  के स्वरूप  के विरुद्ध है बल्कि, आदरणीय,  अस्वाभाविक,  अनावश्यक  घुमाव  लिए और यथार्थ की कसौटी पर खरी नहीं…"
Jul 31
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-145
"नमस्कार,  दिनेश कुमार विश्वकर्मा,  आपका  ग़ज़ल का प्रयास अच्छा ही कहा जाएगा  !  मतला  थोड़ा संशोधन  चाहता है, जिसकी  पूर्ति  ऊला में " मिरा" के स्थान पर 'मुझे' से  हो जाएगी …"
Jul 29
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-145
"आदाब,  भाई लक्ष्मण सिंह मुसाफिर,  खूबसूरत गिरह के साथ  बेहतरीन गज़ल हुई है,  बधाई स्वीकार करें  !"
Jul 29
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-145
"आदाब,  मेठानी  साहब , ग़ज़ल अपेक्षाकृत बेहतर प्रतीत हुई  । लेकिन  मक़ता , ऊला "जाना" आप  ( 11) पर  ले  रहे  हैं, जो उचित  नहीं है !ऊला  भी रब्त  में नहीं है । सादर  !"
Jul 29
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-145
"आदाब,  "तल्ख" साहब,  गज़ल बेहतर हुई है । बधाई  ! है ।"
Jul 29
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-145
"नमन, आदरणीया, मतले का ऊला, मुआफ करें,  मुझे अटपटा लगा । ' एक अरसा हुआ जब तुमने मुझे याद किया', अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प होगा।तीसरे शे'र का सानी  "तरह" को आप  ( 21) पर ले रही हैं। आपका  " तखल्लुस"…"
Jul 29
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-145
"आ. भाई लक्ष्मण सिंह 'मुसाफिर ' साहब,  मेरी प्रस्तुति  / गज़ल  को आप  की अनुशंसा  प्राप्त हुई,  आभारी हूँ। "
Jul 29
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-145
"आदाब,  सलिक गणवीर साहब,  अच्छी गज़ल हुई है! फिर भी दूसरा  शे'र का सानी मिसरा मुझे रब्त  में नहीं लगा ।शायद आप इरशाद के अभिप्राय को लेकर भ्रम में हैं। चौथा शे'र  के ऊला में भी सुधार  की गुंजाइश है । देखिएगा ।…"
Jul 29
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-145
"तरही गज़लः 2122 1122 1122 22 ( 112 ) टूट कर हमने मुहब्बत की उसे याद किया मुब्तिला इश्क़ रहे हैं खुदा ईज़ाद किया तुम कहते हो कि तुमने मुझे आबाद किया लोग कहते हैं कि तुमने मुझे बरबाद किया ( गिरह बराए मतला ) लाख वो कोशिशें यारों ने की अच्छा हो सकूँ…"
Jul 28
Chetan Prakash replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव’ अंक 135 in the group चित्र से काव्य तक
"जहाँ रास्तों भी बरसती रहीं । किनारों नदी खेत बूंदे कहीं ।। सरकते रहे बाल- छतरी वहाँ । भयातुर रहे आज बच्चे जहाँ ।। शरण छत्र ..सावन बनी बात जो । कड़कती रहीं बिजलियाँ घात जो।। जरूरी... अभी ..छुट्टिया हों सखा । असर.. खूब ..बारिशों ..का दिखा ।। कि…"
Jul 23
Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post करो जुर्म जमकर ये अन्धेर नगरी-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदाब  , भाई लक्ष्मण धामी मुसाफिर  बह्रे मुतकारिब  मुसम्मन सालिम में कही बढ़िया हुई गज़ल, बधाई ।तीसरे शे'र की शुरुआत  रवैया से होनी चाहिए,  न कि 'रवैय्या' से" ! आखिरी  शे'र को पढ़कर  मुझे…"
Jul 19

Profile Information

Gender
Male
City State
Baraut
Native Place
Hapur
Profession
Teaching
About me
I'm a poet rather born than made or trained since my childhood

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गज़ल

गज़ल

221 2121 1221 212

अख़लाक पर मुहब्बत  भरोसा रहा नहीं

हमदम रहा कोई कहाँ जानाँ हुआ नहीं

दिल जानता है तुझसे अभी प्यार भी कहाँ

जो बिक चुका है वो जहाँ तो मन बसा नहीं

लगता उन्हे नहीं है वो दरकार भारती

गर चाहिए है मुल्क तो मौसम रहा नहीं

गुलदस्ता हिन्दुस्तान है था और होगा भी

क़मज़र्फ था सदा वो तो भाई हुआ नहीं

औरंगजेब तेरा तो राणा हमारा है

मत खेल तू ज़मीर से…

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Posted on June 30, 2022 at 10:00am — 1 Comment

पाँच दोहे

 घटा - घोप   अन्धेर  है, कहीं    न   पहरेदार ।

 तक्षक  बनता काल है, क्या  होगा  घर-बार ।। ( 1 )

+++++++++++++++++++++++++ 

 

नागफनी  वन हो गये, जंगल  ...नम्बरदार  ।

बना कैक्टस मुँहलगा, फुदकता - बार  बार ।।   ( 2 )

++++++++++++++++++++++++++++++

रोशन  जो  दिखती  नहीं, गाँव  सखा  तक़दीर  ।

बुझा- बुझा सा मन हुआ, सोच  रहा ताबीर  ।।  ( 3…

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Posted on March 27, 2022 at 12:30am — 2 Comments

दोहावली.... स्वागत करो बसंत का....

स्वागत करो बसंत का, अब.. अनंग दरवेश। 

बदन..सुलगने ..हैं लगे, खिल उठा परिवेश ।।

रथ सवार सूरज हुआ,  बढ़ती ..आँगन ..धूप। 

मकरंद  बसा प्राण में,  प्रतिपल प्रिया अनूप ।।

अलसाया सी डाल पर, उतर ..पड़ी  है.. धूप। 

कलियाँ  मुस्काने लगीं, जगमग गाँव अनूप ।।

गंधायी ..अब है ..हवा,  खिलने.. लगे.. प्रसून। 

गश्त बढ़ गई भ्रमर की, कली लाल सी खून ।।

मौलिक व अप्रकाशित 

प्रोफ. चेतन प्रकाश…

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Posted on February 8, 2022 at 9:22am

ग़ज़ल......अब आदमी में जोश का ज़ज्बा नहीं रहा !

221     2121     1221     212

अब आदमी में जोश का ज़ज्बा नहीं रहा

मौसम  बहार का  वो सुहाना नहीं रहा 

हमको  तुम्हारा  तो सहारा  नहीं  रहा

वो  दर्द  ज़िन्दगी का अपना नहीं रहा

उम्मीद कब रही हमें इस ज़ीस्त से कभी

मंज़िल का जाँ कभी भी वो चहरा नहीं रहा

कोशिश बहुत की कोई हमदम कहाँ हुआ

इक दोस्त न मिला कभी साया नहीं रहा 

धोका मिला जहाँ हमें वुसअत के नाम पर 

सुन दोस्त ज़िन्दगी  का निशाना नहीं…

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Posted on February 3, 2022 at 7:00pm — 1 Comment

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At 6:35am on July 22, 2021, रणवीर सिंह 'अनुपम' said…
आदरणीय, चेतन जी, "दोहे : कैसे- कैसे  लोग" शीर्षक के तहत लिखे गए दोहे बहुत सुंदर हैं और बहुत अच्छे लगे।

निम्न चरण विधान में न होने से इनमें लय भंग है। जिसे दूर करने की जरूरत है।

जन्म-भूमि स्वर्ग सम हो
(कारण-नवीं मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

कृतघ्न पक्के लोग
(कारण-आरंभ में जगण "कृतघ्न"आ रहा है, जो नहीं होना चाहिए)

कर रहे बस भोग
(कारण-एक मात्राभार कम है, साथ ही पाँचवीं मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

न हों कभी बदनाम
(कारण-पहली मात्रा पर शब्द पूरा हो रहा है जो नहीं होना चाहिए)

विद्या  हमें  सिखाती है,
(कारण-13 मात्राओं की जगह 14 मात्राएँ हैं, जो नहीं होनी चाहिए)

कर अन्याय प्रतिकार
(कारण-11 की जगह 12 मात्राएँ हैं जो नहीं होनी चाहिए)
At 11:46pm on November 22, 2020, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

भाई चेतन जी
नमन -
इस्लाह का
सलीका आ जायेगा
मैंने आज तलक
मुकम्मल तो कोई देखा नहीं
गलतियां निकालोगे-
तो सीखूंगा ही ।।
मैं तो अधूरा था
अधूरा रहा
और हूँ अब तलक
आज आया हूँ आपकी बज्म में
कुछ सिखा दोगे -
तो सीखूंगा भी ।।

At 11:59am on June 27, 2020, Samar kabeer said…

जनाब चेतन प्रकाश जी,ये टिप्पणी आप मुशाइर: में दें,तो मुझे जवाब देने में आसानी होगी ।

 
 
 

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