For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Dharmendra Kumar Yadav
  • Male
  • Maharashtra
  • India
Share
 

Dharmendra Kumar Yadav's Page

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post तब जाकर नानी कहलाई
"आ. भाई धर्मेन्द्र जी, अच्छी समसामयिक रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Apr 29
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post तब जाकर नानी कहलाई
"आद0 धर्मेंद्र कुमार यादव जी सादर अभिवादन। बढ़िया बाल कविता लिखी है आपने, बधाई स्वीकार कीजिये।"
Apr 29
Dharmendra Kumar Yadav posted a blog post

तब जाकर नानी कहलाई

नन्हीं बिटिया जग में आईबड़ी उदासी घर में छाई! सब के सब हैं चुपचाप मगर मैया की छाती भर आई।।जन्म दिया मैया कहलाई पर इक बात समझ ना आई नानी है या कोई मिसरी? माँ से भी मीठी कहलाई।।पहले बिटिया बनकर आई फिर बिटिया को जग में लाई माँ बनती जब, माँ की बिटिया तब जाकर नानी कहलाई।।"मौलिक व अप्रकाशित"See More
Apr 28
Manoj Yadav commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post भूल गया मैं लिखना कविता
"VERY NICE POEM  KEEP IT UP !!!!!!! मन को छू गयी यह कविता  !!!!"
Apr 14
Dharmendra Kumar Yadav posted a blog post

भूल गया मैं लिखना कविता

जब से तुमको, देखा सविता। भूल गया मैं, लिखना कविता।।भाता मुझको, पैदल चलना।तुम चाहो, अंबर में उड़ना। सैर-सपाटा, बँगला-गाड़ी। फैशन नया, रेशमी साड़ी। सखियाँ तेरी, इशिता शमिता। भूल गया मैं, लिखना कविता।।तुमको प्यारे, गहने जेवर। नखरे न्यारे, तीखे तेवर। होकर विह्वल, संयम खोती। हँसती पल में, पल में रोती। आँसू बहते, जैसे सरिता। भूल गया मैं, लिखना कविता।।नारी धर्म, निभाया तूने। माँ बनकर, दिखलाया तूने। स्वाति बूँद मैं, तू है सीपी। चातक बनूँ, पुकारूँ पी पी। पी हूँ मैं, तू मेरी वनिता। लिख दी मैंने, तुम पर…See More
Apr 14
Dharmendra Kumar Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-114
"कोरोना के कहर से, जीना हुआ हराम।किरण नई उम्मीद की, तुम ही भेजो राम। "मौलिक व अप्रकाशित""
Apr 12
Manoj Yadav commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post इक देश बनाएं सपनों का
"बहुत अच्छी रचना !!!!! Congratulation"
Apr 6
Samar kabeer commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post इक देश बनाएं सपनों का
"जनाब धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी,आदाब, अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Apr 6
Shyam Narain Verma commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post इक देश बनाएं सपनों का
"नमस्ते जी, बहुत ही सुंदर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Apr 6
Dharmendra Kumar Yadav posted a blog post

इक देश बनाएं सपनों का

सुख-दुख में साथ निभाएं अपनों का | आओ, इक देश बनाएं सपनों का ||फसलों पर, ना मौसम की मार पड़े | कृषि हो उन्नत, ना हों परिवार बड़े | घर-घर नलका, बिजली, शौचालय हो | गाँव-गाँव रुग्णालय, विद्यालय हो | तजि कुरीति, संग धरें नव चलनों का | आओ, इक गांव बसाएं सपनों का ||जन-जन को, उपयुक्त रोजगार मिले | जीवन को, सुरभित स्वच्छ बयार मिले | सुलभ निवास, सुविधाजनक प्रवास हो | धवल सादगी का बिखरा प्रकाश हो | फीकी जो करे चमक, नव रतनों का | आओ, इक शहर सजाएं सपनों का ||भेद-भाव, मन के भीतर न द्वेष हो | धर्म-जाति, भाषा…See More
Apr 6
Dharmendra Kumar Yadav posted a photo
Apr 6
Dharmendra Kumar Yadav updated their profile
Apr 6
Dharmendra Kumar Yadav is now a member of Open Books Online
Apr 6

Profile Information

Gender
Male
City State
Thane, Maharashtra
Native Place
Village- Soirai, Post-Baresta Kalan, District- Allahabad
Profession
Auditing
About me
Simple Person

Dharmendra Kumar Yadav's Photos

  • Add Photos
  • View All

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!

Dharmendra Kumar Yadav's Blog

तब जाकर नानी कहलाई

नन्हीं बिटिया जग में आई

बड़ी उदासी घर में छाई!
सब के सब हैं चुपचाप मगर
मैया की छाती भर आई।।

जन्म दिया मैया कहलाई
पर इक बात समझ ना आई
नानी है या कोई मिसरी?
माँ से भी मीठी कहलाई।।

पहले बिटिया बनकर आई
फिर बिटिया को जग में लाई
माँ बनती जब, माँ की बिटिया
तब जाकर नानी कहलाई।।

"मौलिक व अप्रकाशित"

Posted on April 26, 2020 at 3:30pm — 3 Comments

भूल गया मैं लिखना कविता

जब से तुमको, देखा सविता।

भूल गया मैं, लिखना कविता।।

भाता मुझको, पैदल चलना।

तुम चाहो, अंबर में उड़ना।

सैर-सपाटा, बँगला-गाड़ी।

फैशन नया, रेशमी साड़ी।

सखियाँ तेरी, इशिता शमिता।

भूल गया मैं, लिखना कविता।।

तुमको प्यारे, गहने जेवर।

नखरे न्यारे, तीखे तेवर।

होकर विह्वल, संयम खोती।

हँसती पल में, पल में रोती।

आँसू बहते, जैसे सरिता।

भूल गया मैं, लिखना कविता।।

नारी धर्म, निभाया तूने।

माँ बनकर,…

Continue

Posted on April 14, 2020 at 4:30pm — 1 Comment

इक देश बनाएं सपनों का

सुख-दुख में साथ निभाएं अपनों का |

आओ, इक देश बनाएं सपनों का ||

फसलों पर, ना मौसम की मार पड़े |

कृषि हो उन्नत, ना हों परिवार बड़े |

घर-घर नलका, बिजली, शौचालय हो |

गाँव-गाँव रुग्णालय, विद्यालय हो |

तजि कुरीति, संग धरें नव चलनों का |

आओ, इक गांव बसाएं सपनों का ||

जन-जन को, उपयुक्त रोजगार मिले |

जीवन को, सुरभित स्वच्छ बयार मिले |

सुलभ निवास, सुविधाजनक प्रवास हो |

धवल सादगी का बिखरा प्रकाश हो |

फीकी जो करे चमक, नव…

Continue

Posted on April 6, 2020 at 4:00pm — 4 Comments

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' updated their profile
8 minutes ago
Samar kabeer is now friends with Dimple Sharma and Rupam kumar -'मीत'
2 hours ago
Samar kabeer commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post मुँह ज़ख्मों के शे'र सुनाकर सीता है
"हाँ, ठीक है ।"
2 hours ago
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post "बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ"
"//"राम करता चलूँ" यह मैं समज नहीं पाया इस लिए आपसे पूछ रहा हूँ// 'राम…"
2 hours ago
Profile IconRupam kumar -'मीत' and Dimple Sharma joined Admin's group
Thumbnail

ग़ज़ल की कक्षा

इस समूह मे ग़ज़ल की कक्षा आदरणीय श्री तिलक राज कपूर द्वारा आयोजित की जाएगी, जो सदस्य सीखने के…See More
2 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post मुँह ज़ख्मों के शे'र सुनाकर सीता है
"दोस्त मुझे बस तुझसे एक शिकायत है तू पहले से काफ़ी सिगरेट पीता है    मुहतरम समर कबीर साहब…"
2 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Samar kabeer's blog post "बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ"
"अब आख़िरत का भी कुछ इन्तिज़ाम करता चलूँ दिल-ओ-ज़मीर को अपने मैं राम करता चलूँ      …"
2 hours ago
Samar kabeer commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post मुँह ज़ख्मों के शे'र सुनाकर सीता है
"इसकी तक़ती'अ ऐसे नहीं होगी,22 से करें:- तू पह-22 ले से-22 ज़ियादा-122 जो उचित नहीं…"
3 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post करेगा तू क्या मिरी वकालत (ग़ज़ल)
"आदरणीय रवि भसीन जी, मुझे अभी बहुत पढ़ना होगा इस ग़ज़ल को समझने के लिए आप ने बड़ी बात कही है शायद इस ग़ज़ल…"
3 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post जो तेरी आरज़ू (ग़ज़ल)
"जो दबती जा रही हैं ख़्वाहिशें अबसवेरे देर तक सोने लगा हूँ  यह शेर मुझे बहुत पसंद आया रवि भसीन…"
3 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post ख़ुदा ख़ैर करे (ग़ज़ल)
"बड़े शाइर की यही पहचान होती है, अगर काफ़िया साथ देने लगे तो ग़ज़ल में ५ शेर से ज़ियादा शेर दिखते है,रवि…"
3 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post ये ग़म ताज़ा नहीं करना है मुझको
"डॉ छोटेलाल सिंह  जी आपका तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ की आपने इस छोटे से बालक का हौसला…"
3 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service