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Dr Ashutosh Mishra
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"आदरणीय नीलेश भाई जी हमेशा की तरह यह भी आपकी शानदार ग़ज़ल है/ हार्दिक बधाई आपको सादर "
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Dr Ashutosh Mishra commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post उपेक्षा (लघुकथा )
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"परम आदरणीय समीर सर बहुत ही उत्कृष्ट रचना है / हम सबके जीवन में इस मंच का बिशेस महत्व है/ आज बहत दिनों बाद इस मंच पर आना हुआ / इस रचना के लिए आपको तहे दिल बधाई सादर प्रणाम के साथ"
Nov 26
Rahul Dangi Panchal and Dr Ashutosh Mishra are now friends
Oct 1

Profile Information

Gender
Male
City State
Uttar Pradesh
Native Place
Agra
Profession
ACADEMIC
About me
DIRECTOR AT ANDCP BABHNAN GONDA UP

Dr Ashutosh Mishra's Blog

इजाजत हो तुम्हारी तो चिरागों को बुझा लूँ मैं

नजर अपनी उठा लो तो गिले शिकवे भुला लूँ मैं

मुझे बस एक पल दे दो है क्या दिल में बता लूँ मैं

निगाहें तो मिला लेता मगर ये खौफ है दिल में

कही ऐसा न हो दिल का चमन खुद ही जला लूँ मैं

कभी तो मेरी गलियों से मेरा वो यार गुजरेगा

मेरा भी फ़र्ज़ बनता है गुलों से रह सजा लूँ मैं

तुम्हारे पग जहाँ पड़ते वहीं पर फूल खिल जाते

है हसरत दिल के सहारा में हसीं गुल इक ऊगा लूँ मैं

अगर ओंठों से निकली शै तो हंगामा…

Continue

Posted on February 9, 2019 at 11:20am — 1 Comment

रिश्तों में दूरी

रिश्तों में दूरी 

जब से मैंने अपने दोस्त को

सूरज के बड़े होकर भी छोटे लगने में

धरती से उसकी दूरी की भूमिका समझाई है

बड़ा दिखने के लिए कद बढाने की जगह

दोस्त मुझसे लगातार दूरियां बढ़ा रहा है

ताकि मैं मान लूं वो बृहत् आकार पा रहा है

पर दूरी के कारन छोटा नजर आ रहा है 

मौलिक व अप्रकाशित 

Posted on September 29, 2018 at 10:55am — 6 Comments

सौदागर

सौदागर

” प्रोफेसर सैन और प्रोफेसर देशपांडे  सरकारी मुलाजिम हैं, तनख्वाह भी एकै जैसी मिलत है लेकिन ई दुइनो जब से निरीक्षक भइ गए हैं तब से प्रोफेसर सैन तो बड़ी बड़ी लग्जरी गाड़ियों में दौरा करत है और बड़े आलीशान होटलों में बसेरा करत हैं लेकिन ..लेकिन बेचारे देशपांडे कभी धर्मशाला में ठहरत हैं तो कभी सरकारी गेस्ट हाउसन  में ...कभी ऑटो से चलत हैं तो कभी बस में ....जब सब सुख सुबिधा बरोबर है तब  ई फरक काहे है ई बात  तनिक हमरी  समझ में नाहीं  आवत है  “ राहुल ने अपने मित्र सुजीत से बडी…

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Posted on September 19, 2018 at 1:54pm — 9 Comments

मेरी आँखों में कभी अक्स ये अपना देखो

मेरी आँखों में कभी अक्स ये अपना देखो

इस बहाने ही सही प्यार का सहरा देखो

बेखबर गुल के लवों को छुआ ज्यों भँवरे ने

ले के अंगड़ाई कहा गुल ने ये पहरा देखो

वो नजाकत से मिले फिर उतर गये दिल में

अब कहे दिल की सदा हुस्न का जलवा देखो

मौला पंडित की लकीरों पे यहाँ सब चलते

तुम लकीरों से हटे हो तो ये फतवा देखो

वो भिखारी का भेष धरके बनेगा मालिक

अब सियासत में यूं ही रोज तमाशा देखो

साइकिल हाथ के हाथी के हैं जलवे देखे

अब कमल खिलने…

Continue

Posted on May 27, 2018 at 5:30pm

Comment Wall (22 comments)

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At 9:15am on July 19, 2018, TEJ VEER SINGH said…

जन्मदिन की हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ आशुतोष मिश्रा जी।

At 12:24pm on March 27, 2017, नादिर ख़ान said…

 आदरणीय डा आशुतोष मिश्रा जी आदाब,जनाब समर कबीर साहब का मोबाईल नम्बर 09753845522  है किसी करणवश  समर साहब मैसेज नहीं कर पा रहे हैं | आप उनसे इस नंबर पे रास्ता कायम कर सकते है बाकी शुभ शुभ..... 

At 5:30pm on January 1, 2017, Mohammed Arif said…
आदरणीय आशुतोषजी देश भक्ति से ओतपप्रोत रचना के लिए बधाई कुबूल फरमाये । यह देश सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व करता है । यही इस देश की विशेषता है ।नववर्ष की शुभकामनाएँ स्वीकार करें ।
At 5:30pm on April 1, 2016, Sushil Sarna said…

आ. डॉ. आशुतोष मिश्रा  जी आपकी  बधाई का हार्दिक आभार। ये सब आपके स्नेह का प्रतिफल है। 

At 4:28pm on July 20, 2015, kanta roy said…
आभार आपको आदरणीय डा. आशुतोष मिश्रा जी हृदयतल से ।
At 8:29pm on June 17, 2015, Dr. Vijai Shanker said…

बहुत बहुत बधाई , आदरणीय डॉo आशुतोष मिश्रा जी , सादर।  

At 8:22pm on June 17, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० आशुतोष जी

आपको सक्रिय सदस्य बनना ही था बस  इन्तजार समय का था . आपको बहुत बहुत बधाई.  

At 4:05pm on June 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय
डॉ आशुतोष मिश्रा जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 4:42pm on October 23, 2014, Sushil Sarna said…

आपको  सपरिवार ज्योति पर्व की हार्दिक एवं मंगलमय शुभकामनाएं...

At 11:30am on August 10, 2014, Dr. Vijai Shanker said…
Thank you very much Dr. Ashutosh Misraa ji .
Regards .
Vijai
 
 
 

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