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मोहन बेगोवाल
  • Male
  • Amritsar
  • India
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मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-53 (विषय अधिकार)
"आदरणीय विनय जी, बहुत  शुक्रिया "
Aug 31
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-53 (विषय अधिकार)
"आदरणीय तेजवीर जी, शुक्रिया "
Aug 31
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-53 (विषय अधिकार)
"आदरणीय अशफ जी, बहुत  सुंदर लघुकथा के लिए  बधाई हो "
Aug 31
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-53 (विषय अधिकार)
"आदरणीय मनन जी, सुंदर लघु कथा के लिए  बधाई हो "
Aug 31
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-53 (विषय अधिकार)
"            अधिकार वैसे तो बंटवारे के बाद से ही दादी ने घर बार संभाल लिया था जिससे हौंसला और भी बढ़ गया था l यूँ तो दादे के होते ही दादी अपनी खूब चलाती थी l वहअपनी बात मनाने व् हक लेने के लिए किसी से भी भिड़ जाती…"
Aug 31
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-53 (विषय अधिकार)
"आदरणीय जी, बहुत  सुंदर लघुकथा के लिए  बधाई हो "
Aug 31
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-53 (विषय अधिकार)
"अधिकार वैसे तो बंटवारे के बाद से ही दादी ने सारा घर बार संभाल लिया था और उसका हौंसला और भी बढ़ गया था l दादे के होते भी दादी अपनी खूब चलाती थी l अब तो अपने हक के लिए, वह किसी से भी जा कर भिड़ जाती थी l जब एक बार मेरी माँ सांझे नल से पानी भरने के लिए…"
Aug 31
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीय रचना जी, बढ़िया  ग़ज़ल के लिए  बहुत मुबारकबाद कुबूल  करें "
Aug 24
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीय पंकज जी,  सुंदर ग़ज़ल के लिए  बधाई  हो "
Aug 24
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीय  शेख जी, बहुत उम्दा ग़ज़ल के लिए  बधाई  हो "
Aug 24
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीय मुसाफिर जी,  ग़ज़ल के लिए  बहुत बधाई हो "
Aug 24
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीय नमन जी, सुंदर ग़ज़ल के लिए  मुबारकबाद "
Aug 24
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
" आदरणीय जी, बहुत ही सुंदर ग़ज़ल के लिए  बहुत  बहुत  बधाई  हो "
Aug 24
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"  जिंदगी रही उलझी रोज़ जब सवालों में lसोच फिर नई आ कब खेलती ख्यालों मेंl सोचता रहा जलते क्यूँ न घर यहाँ दीये,है छुपा कोई तो अब राज इन उजालों मेंlउम्र बीत जानी थी ढूंढते जवाबों को ,"हम जवाब क्या देते खो गए सवालों मेंl " ज़ाम आज भी…"
Aug 23
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"जब मिरी रही उलझी जिंदगी सवालों में रोशनी कहाँ आ क् र खेलती ख्यालों में सोचता रहा क्यूँ घर नहीं जले दीये , कुछ अगर अंधेरे हो राज़ इन उजालों में उम्र बीत जानी थी ढूंढते हकीकत उन , "हम जवाब क्या देते खो गए सवालों में " जाम आज भी मिलता है तिरे…"
Aug 23
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 (विषय: अस्तित्व)
"      आदरणीय शेख उस्मानी जी, कमाल की सुंदर लघुकथा के लिए आप जी को बहुत बधाई हो "
Jul 31

Profile Information

Gender
Male
City State
Amritsar
Native Place
Begowal
Profession
Medical Teacher
About me
Gazalgo , Punjabi Writer

मोहन बेगोवाल's Blog

है ख़ाक काम किया तूने जिंदगी के लिए।

है ख़ाक काम किया तूने जिंदगी के लिए।

मुनीर जब किया दीया न रौशनी के लिए।

बताई जो मेरी माँ ने वही तो मैं भी कही,

अ़मल कहाँ हुआ बस बात शायरी के लिए।

फ़िराग कब मिली जब ये है जिंदगी झमेला,

नसीब कब हुआ वो चाँद आशिकी के लिए।

ख्याल ढूँढ रखा जो बता सकूँ मैं तुझे,

रखी ये चीज़ जो है खास आप ही के लिए।

ख़ता कभी न हो ऐसा कहाँ लिखा है बता,

तभी हुई है कहानी ये आदमी के लिए ।

फ़जा तलाश जहाँ में कहीं यहाँ या…

Continue

Posted on July 23, 2019 at 12:00pm — 1 Comment

इक कदम (लघुकथा)

गाड़ी रूकते ही मैं ढाबे की तरफ़़ बढ़ा। कुर्सी पर बैठते हुए छोटू को पास बुलाया।

उस से बात करने लगा, जैसे अक्सर ही मैं ऐसा   करता हूँ, ऐसा करना मेरा काम है, किसी को अच्छा या नहीं लगता।  ये जानना मेरा काम नहीं ।"

“आप इन से क्या बात करते हो?" दूसरी तरफ बैठे मालिक ने उठ कर बालो से उस  पकड़ा अंदर की ओर ले कर जाते हुए कहा

 आप को यहाँ काम के लिए रखा है, बातों के लिए नहीं।

"भाई साहिब,कुछ लेना है,आप ने।" उसने मेरी तरफ 

देखते हुए कहा

“नहीं,बात करनी है,इस और आप से।"…

Continue

Posted on June 2, 2019 at 4:30pm — 6 Comments

जो पतंगों को उड़ाता है।

जो पतंगों को उड़ाता है।
डोर खुद भी छोड़ जाता है।
जख्म सबको दिखाना मत,
हर न मरहम इस लगाता है।
पास आकर बैठ जाये जो,
क्यूँ वो आसूँ फिर छुपा ता है।
क्या हुआ देखों अँधेरे को,
बीज सपने क्यूँ चुराता है।
कलम कैसी भी रही होगी,
सोच अक्सर वो लिखाता है।
“मौलिक व अप्रकाशित

Posted on January 14, 2019 at 4:30pm — 2 Comments

ग़ज़ल

पास  रखना है भला जो।
छोड़ देेेेना दिल जला  जो।

क्या मनाये वो  खुशी को,
खुद मनाने  दिल चला जो।

रौशनी हम तब  मिली है ,
रात भर  दीया जला जो।

आम का   बन  खास  जाना,
कुछ तो अच्छा दिन ढला जो।

रोज़   कहता   मुझ  बता दे
राज़  उस  खोला  भला जो।

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on January 2, 2019 at 5:00pm — 3 Comments

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At 5:28pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय मोहन जी
बहुत बहुत शुक्रिया
At 9:08pm on March 1, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

जन्म दिन की हार्दिक बधाई, ईश्वर आपको प्रत्येक क्षेत्र में सफल करें ......

At 8:14pm on September 5, 2013, mrs manjari pandey said…

       

      आदरणीय मोहन बेगोवाल जी आपको शेर पसन्द आये . मै कृतार्थ हुई

 
 
 

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