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Dr Vandana Misra
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Samar kabeer commented on Dr Vandana Misra's blog post लघुकथा- "एक और गैंगरेप"
"मुहतरमा डॉ. वंदना मिश्रा जी आदाब, आज के हालात पर लघुकथा का प्रयास अच्छा है,लेकिन कसावट की कमी है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Tuesday
Dr Vandana Misra posted a blog post

लघुकथा- "एक और गैंगरेप"

नमिता गाड़ी की पिछली सीट पर आंखें मूंदे हुए सिर टिकाए सोच में डूबी हुई थी। यूं तो उसे फिल्म इंडस्ट्री में आए 3 साल हो गए थे। वह एक छोटे से कस्बे से आती थी, शुरू में उसको काम मिलने में बहुत दिक्कत हुई, दरअसल वह बोल्ड सीन देने से बचना चाहती थी, लेकिन बॉलीवुड में यह संभव न था। इधर 6 महीनों में उसने दो बड़ी फिल्में साइन की थीं, लेकिन आज उसका मन बहुत ज्यादा उद्वेलित था, क्योंकि अपनी मर्जी के विरुद्ध उसे आज काफी बोल्ड दृश्य करने पड़े थे। यही सब सोचते सोचते वह अपने घर पहुंच गई। फ्लैट का ताला खोला और…See More
Oct 17
Dr Vandana Misra replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-120
"सुन्दर रचना"
Oct 11
Dr Vandana Misra replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-120
"बढ़िया रचना"
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"उत्कृष्ट दोहे, साधुवाद।"
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"सुन्दर रचना"
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"वाह, बहुत सुंदर कुंडलिया, बधाई"
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"बहुत सुंदर ग़ज़ल"
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"काल तरंगिनि बह रही, अंजुलि भर भर लूट। अवसर कभी न लौटता, गया हाथ से छूट।। सेवा का अवसर कभी, नहीं गँवाना व्यर्थ। साधन है संतोष का, मिलता जीवन अर्थ।। अवसर से जो चूकते, वे सहते नुकसान। वही सफल जिसने किया, सही समय सन्धान।। अवसर मिलते हैं बहुत, लेकिन जाते…"
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Dr Vandana Misra replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत सुन्दर रचना है"
Sep 20
Dr Vandana Misra replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया पुष्पा जी, बहुत आभार आपका, मुझे जैसा समझ में आया, उस हिसाब से दूसरे मात्रिक छंद जो गेय हों, वह भी लिख सकते हैं, आखिर की पंक्तियों से ऐसा अर्थ मुझे लगा था, हरिगीतिका छंद एक दो लिखे हैं, पर अभी मेरी पकड़ नहीं है उस ऊपर, उत्साहवर्धन हेतु पुनः…"
Sep 20
Dr Vandana Misra replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
""दोहा छंद" प्रमुदित बालाएं सभी, खेल रहीं फुटबॉल। चेहरों पर ही है लिखा, सारा दिल का हाल।। दन्त पंक्ति है खिल रही, चेहरों पर उत्साह। जो भी देखें जन सभी, कह उठते हैं वाह।। पिछड़ा इन्हें न मानिए, जिन्हें न अक्षर ज्ञान। इनमें जो प्रतिभा भरी, हम…"
Sep 19
Dr Vandana Misra joined Admin's group
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चित्र से काव्य तक

"ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोंत्सव" में भाग लेने हेतु सदस्य इस समूह को ज्वाइन कर ले |See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr Vandana Misra's blog post सृष्टि का चलन
"आ. वंदना जी, सुन्दर रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Sep 11
आशीष यादव commented on Dr Vandana Misra's blog post सृष्टि का चलन
"एक अच्छी रचना हुई है। बधाई स्वीकार करें आदरणीया। "
Sep 10
Dimple Sharma commented on Dr Vandana Misra's blog post सृष्टि का चलन
"आदरणीया डॉ. वंदना मिश्रा जी नमस्ते, वाह बहुत खुबसूरत रचना हुई है आपकी बधाई स्वीकार करें आदरणीया।"
Sep 2

Profile Information

Gender
Female
City State
Lucknow
Native Place
Lucknow
Profession
Doctor
संदेश समय यह देता है!
प्रभु ने तुम्हें बनाया था जब
साथ तुम्हारे और बहुत कुछ
भी सिरजा था,
तुम अपने मद में भूल गए
किरदार में अपने फूल गए
दोहन तो सबका खूब किया
पोषण पर किंतु न ध्यान दिया
सब जीव-जंतु और वृक्ष, नदी
ये सब तुमको कुछ देते हैं
बदले में कुछ ना लेते हैं
अस्तित्व से तेरे जुड़े हैं ये
सबके पीछे कुछ कारण हैं
उस कारण को भी भूल गए
तुम सीमित ज्ञान में फूल गए
संतुलन प्रकृति का छेड़ोगे
या अपनी आंखें मूंदोगे
यदि अब भी तुम ना चेतोगे
तो काल यही दिन लाएगा
ये वक़्त मिला है इसीलिये
तुम सीखो, गुनो और समझो
फिर औरों को भी समझाओ
जिनको तुम जाहिल कहते हो
है प्रकृति तुम्हें ये सिखा रही
एक सूक्ष्म तार से जुड़े हैं सब
न भेद करो न बाँटो अब
अपनी भाषा में बता रही
तुम ज्ञानवान, वो ज्ञानहीन
तुम पर ही जिम्मेदारी है
देना होगा तुमको ही उन्हें
तुम समय की अब ये पुकार सुनो
निष्क्रियता में यूँ न बैठो
ख़ुद करो सृजन और करवाओ
तुम मेरा यूँ उपयोग करो 
सन्देश समय ये देता है...
सन्देश समय ये देता है....
सन्देश समय ये देता है!!
मौलिक व अप्रकाशित

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Dr Vandana Misra's Blog

लघुकथा- "एक और गैंगरेप"

नमिता गाड़ी की पिछली सीट पर आंखें मूंदे हुए सिर टिकाए सोच में डूबी हुई थी। यूं तो उसे फिल्म इंडस्ट्री में आए 3 साल हो गए थे। वह एक छोटे से कस्बे से आती थी, शुरू में उसको काम मिलने में बहुत दिक्कत हुई, दरअसल वह बोल्ड सीन देने से बचना चाहती थी, लेकिन बॉलीवुड में यह संभव न था। इधर 6 महीनों में उसने दो बड़ी फिल्में साइन की थीं, लेकिन आज उसका मन बहुत ज्यादा उद्वेलित था, क्योंकि अपनी मर्जी के विरुद्ध उसे आज काफी बोल्ड दृश्य करने पड़े थे। यही सब सोचते सोचते वह अपने घर पहुंच गई। फ्लैट का ताला खोला…

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Posted on October 16, 2020 at 9:00pm — 1 Comment

सृष्टि का चलन

सृष्टि का चलन

चाँद चमकता

सूर्य की ही रोशनी से

हर दिन,

एक दिन क्यों आ जाता

सूर्य और पृथ्वी के बीच,

लगाता सूर्य को ग्रहण

बहुत पास जाकर

रोकता उसका प्रकाश, 

बना देता है उसे

अपने ही जैसा,

यह प्यार है चाँद का

या जलन,

नहीं नहीं....

चन्द्र किरणों की तो

शीतल है छुअन

यह तो है बस

रचयिता की लीला

और सृष्टि का चलन !…

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Posted on August 31, 2020 at 4:12pm — 4 Comments

शुतुरमुर्ग

शुतुरमुर्ग

सामने आई
विपदा देख
शुतुरमुर्ग सा
रेत में सिर धँसाये पड़ा,
बिल्ली को देख
कबूतर सा
आँखें मूँदे
सहमा बड़ा,
आज मानव
युद्ध सामने देखकर भी
क्यों कायर सम खड़ा,
काश! फिर कोई

जामवंत आये
हनुमान को
उनका बल
याद दिलाये।

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on May 8, 2020 at 3:30pm — 2 Comments

"विश्व स्वास्थ्य दिवस" पर एक मुक्तक

विश्व स्वास्थ्य दिवस" पर एक मुक्तक
*****************************

सर्वे भवन्तु सुखिनः की आज करें मिल प्रार्थना
स्वास्थ्य दिवस की आज है बस यह शुभकामना
कोई भूखा न रहे और न कोई अस्वस्थ
विश्व शांति की जाग उठे सब में शुद्ध भावना

------ मौलिक व अप्रकाशित

Posted on April 7, 2020 at 1:36pm

 
 
 

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नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
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अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय दण्डपाणि नाहक़ जी आदाब ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई के लिए शुक्रिया।…"
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अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय निलेश जी ख़ाकसार की ग़ज़ल तक आने के लिये आभार। आपको भी आयोजन में सहभागिता हेतु बधाई। "
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नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"जी कोशिश करेंगे जल्दी आने की लेकिन ... और भी ग़म हैं .........   देर हो जाती है । सादर"
20 hours ago

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