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Dr. Geeta Chaudhary
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  • Ghaziabad, U.P.
  • India
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Dr. Geeta Chaudhary commented on Samar kabeer's blog post "ओबीओ की सालगिरह का तुहफ़ा"
"आदरणीय समर कबीर सर, सुंदर प्रस्तुति, बिल्कुल सही कहा आपने बहुत ही अनोखा अनुभव इस मंच का।  खुशनसीबी आप जैसे विशेषज्ञों के सानिध्य में बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है। हार्दिक आभार आपका, मंच का और संचालकों का। सभी को हार्दिक बधाई एवं ढेरों…"
8 hours ago
Dr. Geeta Chaudhary commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post ऐ पागल पथिक !
"आदरणीय समर कबीर जी उत्साहवर्धन एवम् बधाई के लिए हार्दिक आभार।"
Mar 28
Samar kabeer commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post ऐ पागल पथिक !
"मुहतरमा डॉ. गीता चौधरी जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Mar 28
Dr. Geeta Chaudhary commented on Usha Awasthi's blog post हिन्दी सी भला मिठास कहाँ?
"आदरणीय उषा मैडम, अदभुत मीठें शब्दों  में हिंदी की मिठास को व्य करती कविता, बहुत अच्छी लगी। हार्दिक बधाई आपको।"
Mar 28
Dr. Geeta Chaudhary posted a blog post

ऐ पागल पथिक !

ऐ पागल पथिक ! ठहरो जरा ,रुको जरा , सांस लो तनिक ,सम्भलो जरा I सब कुछ पाने की चाह में ,कुछ टूट गया उस आशियाने में,कुछ छूट गया उस हसीं फ़सानें में ,ठहरों, रुको, उसे सवारों, उसे खोजो जरा I रुको जरा ........ घर पर नन्हों की आस में , और बुजुर्गों की लम्बी प्यास में ,छूटे किसी साज और रियाज़ में ,वक्त की चीनी घोलो जरा, कोई सुर ताल छेड़ो जरा I रुको जरा ........ लूडो की गोटियाँ खोजो ,शतरंज की बिसात बिछाओ जरा ,कैरम की धूल झाड़ो,रानी पर नजर लगाओ जरा I रुको जरा .......पर भूल न जाना एक नेक काम ,फिर हो न जाना…See More
Mar 27
Dr. Geeta Chaudhary commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post कविता: "तुम्हारे हित देशहित से बड़े क्यूँ है?"
"आदरणीय समर कबीर जी उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार। "
Jan 24
Samar kabeer commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post कविता: "तुम्हारे हित देशहित से बड़े क्यूँ है?"
"मुहतरमा गीता चौधरी जी आदाब,अच्छी जज़्बाती कविता लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 19
Dr. Geeta Chaudhary commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post कविता: "तुम्हारे हित देशहित से बड़े क्यूँ है?"
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी उत्साहवर्धन के लिए सादर आभार।"
Jan 15
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post कविता: "तुम्हारे हित देशहित से बड़े क्यूँ है?"
"आ. गीता जी, समसामयिक विषय पर अच्छी अभिव्यक्ति हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jan 14
Dr. Geeta Chaudhary posted a blog post

कविता: "तुम्हारे हित देशहित से बड़े क्यूँ है?"

तुम्हारे हित देशहित से बड़े क्यूँ है?ये दुश्चरित्र है तुम्हारा,सताता मुझे क्यूँ है?तुम इन्सान ही बुरे हो,इल्जाम धर्म और जात पर क्यूँ है?तुम्हे इसमें सुकून है बहुत,ये मेरे सुकूं को खाता क्यूँ है?ये धर्म के ठेकेदार हैं,फिर मानवता के भक्षक क्यूँ हैं?ये दोषी है समाज के, कतार में इतने रक्षक क्यूँ है?क्या तेरा ईमान है, कहाँ तेरा ज़मीर है?भौंडे कुतर्कों का इतना गुमान क्यूँ है?कर्म- संदेशी इस धरा पर,कर्म से भटका मानव क्यूँ है?गंगा- जमुनी इस तहजीब में,लगा ये कलंक क्यूँ है?कौन रहेगा कौन सहेगा?किसकी होगी…See More
Jan 12
Dr. Geeta Chaudhary commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post गीत: तब तुम कोई गीत लिखना प्रिये!
"आदरणीय समर कबीर जी बधाई के लिए सादर आभार। सुझाव एवम् संशोधन के लिए मै विशेष रूप से आपका आभार व्यक्त करती हूं। आपकी प्रतिक्रिया का बहुत इंतजार रहता है जो आगे बढ़ने एवम् नया सीखने, लिखने की प्रेरणा देता है। सादर आभार।"
Jan 4
Samar kabeer commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post गीत: तब तुम कोई गीत लिखना प्रिये!
"मुहतरमा डॉ. गीता चौधरी जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें । और संभाले ना संभले मन' "और सँभाले न सँभले मन" 'और खोजे अक्श मेरा तुम्हारा मन' इस पंक्ति में 'अक्श' को "अक्स" कर लें । "
Jan 3
Dr. Geeta Chaudhary commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post गीत: तब तुम कोई गीत लिखना प्रिये!
"आदरणीय प्रदीप देवीशरण जी रचना आपको पसंद आईI हार्दिक आभारI"
Jan 2
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Dr. Geeta Chaudhary's blog post गीत: तब तुम कोई गीत लिखना प्रिये!
"बहुत खूब गीता जी, जब मेरी कमी तुमको खले,और खोजे अक्श* मेरा तुम्हारा मन *(अक्स) और आसुओं से धुँधले हो जाएं नयन।"
Jan 2
Dr. Geeta Chaudhary and आशीष यादव are now friends
Jan 1
Dr. Geeta Chaudhary commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post नववर्ष की शुभकामनाएं (मत्तगयंद छंद)
"नववर्ष पर नव शुभ भाव एवम् सुंदर शब्दों में प्रस्तुति, बहुत आकर्षक लगी। बहुत बधाई आपको।"
Jan 1

Profile Information

Gender
Female
City State
Ghaziabad
Native Place
Ghaziabad
Profession
Associate professor

Dr. Geeta Chaudhary's Blog

ऐ पागल पथिक !

ऐ पागल पथिक ! ठहरो जरा ,

रुको जरा , सांस लो तनिक ,

सम्भलो जरा I

सब कुछ पाने की चाह में ,

कुछ टूट गया उस आशियाने में,

कुछ छूट गया उस हसीं फ़सानें में ,

ठहरों, रुको, उसे सवारों, उसे खोजो जरा I

रुको जरा ........

घर पर नन्हों की आस में ,

और बुजुर्गों की लम्बी प्यास में ,

छूटे किसी साज और रियाज़ में ,

वक्त की चीनी घोलो जरा, कोई सुर ताल छेड़ो जरा I

रुको जरा ........

लूडो की गोटियाँ खोजो ,

शतरंज की बिसात बिछाओ जरा ,

कैरम की धूल…

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Posted on March 27, 2020 at 3:32pm — 2 Comments

कविता: "तुम्हारे हित देशहित से बड़े क्यूँ है?"

तुम्हारे हित देशहित से बड़े क्यूँ है?

ये दुश्चरित्र है तुम्हारा,

सताता मुझे क्यूँ है?

तुम इन्सान ही बुरे हो,

इल्जाम धर्म और जात पर क्यूँ है?

तुम्हे इसमें सुकून है बहुत,

ये मेरे सुकूं को खाता क्यूँ है?

ये धर्म के ठेकेदार हैं,

फिर मानवता के भक्षक क्यूँ हैं?

ये दोषी है समाज…

Continue

Posted on January 12, 2020 at 8:09pm — 4 Comments

गीत: तब तुम कोई गीत लिखना प्रिये!

जब पीड़ा आसुओं को मात दे,

और संभाले ना संभले मन।

जब यादें मेरी दिल पर दस्तक दें,

और बेचैन हो ये अंतर्मन।

तब तुम कोई गीत लिखना प्रिये,

मैं आऊँगी भाव बनकर ज़रूर।

जब मेरी कमी तुमको खले,

और खोजे अक्श मेरा तुम्हारा मन।

जब बोझिल हो रातें काटे ना कटे,

और नींद से आँख-मिचौली खेले नयन।

तब तुम कोई सपना सजाना प्रिये,

मैं आऊँगी तुमसे मिलने ज़रूर।

जब पतझड़ में झड़ते हो पत्ते पुरातन,

और लहरों को देख विचलित हो मन।…

Continue

Posted on December 26, 2019 at 2:00pm — 6 Comments

कविता: कुछ ख़ास है उन बातों की बात

वो लड़कपन के सपनों की बात,
काग़ज की नाव और कागज़ी जहाजों की बात।
वो जवानी की ज़िद्दी उमंगों की बात,
हर ख़्वाब को हकीकत बनाने की बात।
कुछ ख़ास है उन बातों की बात।
वो हसीं ख्वाबों, ख्यालों की रात,
वो चुराई हसीं मुलाकातों की बात।
वो कही अनकही बातों की बात,
वो बिखरते सिमटते जज्बातों की बात।
कुछ ख़ास है उन बातों की बात।
वो चाही, अनचाही विदाई की बात,
और जुदाई में छलके आंसुओ की…
Continue

Posted on November 10, 2019 at 6:30pm — 8 Comments

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