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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत '
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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वक़्त ने हमसे मुसल्सल इस तरह की रंजिशें (११९ )
"आपकी स्नेहिल सराहना के लिए हार्दिक आभार Dimple Sharma जी  एवं नमन | "
16 hours ago
Dimple Sharma commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वक़्त ने हमसे मुसल्सल इस तरह की रंजिशें (११९ )
"आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत'तुरंत'जी नमस्ते, इस खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
19 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वक़्त ने हमसे मुसल्सल इस तरह की रंजिशें (११९ )
"आशीष यादव जी , हौसला आफ़जाई के लिए दिल से शुक्रिया | "
Wednesday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वक़्त ने हमसे मुसल्सल इस तरह की रंजिशें (११९ )
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी , स्नेहिल सराहना के लिए दिली शुक्रिया एवं सादर नमन | "
Wednesday
आशीष यादव commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वक़्त ने हमसे मुसल्सल इस तरह की रंजिशें (११९ )
"एक बढ़िया ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वक़्त ने हमसे मुसल्सल इस तरह की रंजिशें (११९ )
"आ. भाई गिरधारी सिंह जी, सादर अभिवादन । बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Tuesday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

वक़्त ने हमसे मुसल्सल इस तरह की रंजिशें (११९ )

एक ग़ैर मुरद्दफ़ ग़ज़ल (2122 2122 2122 212 )वक़्त ने हमसे मुसल्सल इस तरह की रंजिशेंख़ुदक़ुशी को हो गईं मज़बूर अपनी ख़्वाहिशेंअजनबी जो भी मिले सारे मुहब्बत से मिलेऔर की हैं ख़ास अपनों ने हमेशा साज़िशेंक्या ख़ुदा नाराज़ है कुछ आदमी से इन दिनोंगर्मियोँ के बाद आईं थोक में हैं बारिशेंक्यों नुज़ूमी को दिखाता हाथ है तू बार बारक्या लकीरें हाथ की रोकेंगीं तेरी गर्दिशेंबात सब करते हैं लेकिन दी कहाँ आज़ादियाँमुल्क में हैं बेटियों पर अब तलक भी बंदिशेंकब तलक बरपा रहेगा क़ह्र क़ुदरत का ख़ुदाऔर जलाएँगीं हमें कब तक वबा की…See More
Tuesday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post तू अपने आप को अब मेरे रू ब रू कर दे(११८ )
"हौसला आफ़जाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया भाई बृजेश कुमार 'ब्रज'  जी , सादर नमन | "
Tuesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post तू अपने आप को अब मेरे रू ब रू कर दे(११८ )
"बेहतरीन ग़ज़ल कही आदरणीय गिरधारी जी..."
Tuesday
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post तू अपने आप को अब मेरे रू ब रू कर दे(११८ )
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी , हौसला आफ़जाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया | "
Aug 2
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post तू अपने आप को अब मेरे रू ब रू कर दे(११८ )
"आ. भाई गिरधारी सिंह जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Aug 2
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post अपने हिसार-ए-फ़िक्र से बाहर बशर निकल (११७ )
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सराहना के लिए सादर आभार एवं नमन | "
Aug 1
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post अपने हिसार-ए-फ़िक्र से बाहर बशर निकल (११७ )
"आ. भाई गिरधारी सिह जी, सादर अभिवादन । सुन्दर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Aug 1
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post तू अपने आप को अब मेरे रू ब रू कर दे(११८ )
"बहुत बहुत शुक्रिया Dimple Sharma जी  "
Jul 30
Dimple Sharma commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post तू अपने आप को अब मेरे रू ब रू कर दे(११८ )
"आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत'तुरंत'जी नमस्ते, वाह बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है आदरणीय खासतौर पर सातवें शेर ने तो जैसे खुद ही वाह करवाई हो , खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Jul 30
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted a blog post

तू अपने आप को अब मेरे रू ब रू कर दे(११८ )

(1212 1122 1212 22 /112 )तू अपने आप को अब मेरे रू ब रू कर देबहुत दिनों की मेरी पूरी आरज़ू कर दे**वबा के वार से दुश्वार हो गया जीनाख़ुदाया अम्न को तारी तू चार सू कर दे**बता मैं दश्त में पानी कहाँ तलाश करूँचल अपनी चश्म के अश्कों से बा-वज़ू कर दे**ख़ुदा किसी को न औलाद ऐसी अब देनाजो वालिदेन की इज़्ज़त लहू लहू कर दे**मैं जानता हूँ सदाओं की भीड़ है फिर भीख़ुदाया मुझ पे करम भी कभू कभू कर दे**सभी का फ़र्ज़ है रखना नज़र पड़ोसी परकि अम्न ख़त्म वतन का न ये अदू कर दे**तलाश करने हैं तुझको कभी जो ऐब तेरेतो ख़ुद को आइने के…See More
Jul 30

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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s Blog

वक़्त ने हमसे मुसल्सल इस तरह की रंजिशें (११९ )

एक ग़ैर मुरद्दफ़ ग़ज़ल 

(2122 2122 2122 212 )

वक़्त ने हमसे मुसल्सल इस तरह की रंजिशें

ख़ुदक़ुशी को हो गईं मज़बूर अपनी ख़्वाहिशें

अजनबी जो भी मिले सारे मुहब्बत से मिले

और की हैं ख़ास अपनों ने हमेशा साज़िशें

क्या ख़ुदा नाराज़ है कुछ आदमी से इन दिनों

गर्मियोँ के बाद आईं थोक में हैं बारिशें

क्यों नुज़ूमी को दिखाता हाथ है तू बार बार

क्या लकीरें हाथ की रोकेंगीं तेरी…

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Posted on August 4, 2020 at 9:30pm — 6 Comments

तू अपने आप को अब मेरे रू ब रू कर दे(११८ )

(1212 1122 1212 22 /112 )

तू अपने आप को अब मेरे रू ब रू कर दे

बहुत दिनों की मेरी पूरी आरज़ू कर दे

**

वबा के वार से दुश्वार हो गया जीना

ख़ुदाया अम्न को तारी तू चार सू कर दे

**

बता मैं दश्त में पानी कहाँ तलाश करूँ

चल अपनी चश्म के अश्कों से बा-वज़ू कर दे

**

ख़ुदा किसी को न औलाद ऐसी अब देना

जो वालिदेन की इज़्ज़त लहू लहू कर दे

**

मैं जानता हूँ सदाओं की भीड़…

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Posted on July 30, 2020 at 4:00pm — 6 Comments

अपने हिसार-ए-फ़िक्र से बाहर बशर निकल (११७ )

(221 2121 1221 212 )

अपने हिसार-ए-फ़िक्र से बाहर बशर निकल

दुनिया बदल गई है तू भी अब ज़रा बदल

**

रफ़्तार अपनी वक़्त कभी थामता नहीं

अच्छा यही है वक़्त के माफ़िक तू दोस्त ढल

**

पीछे रहा तो होंगी न दुश्वारियां ये कम

चाहे तरक़्क़ी गर तो ज़माने के साथ चल

**

रिश्ते निभाने के लिए है सब्र लाज़मी

रखना तुझे है गाम हर एक अब सँभल सँभल

**

तूफ़ान में चराग़ की मानन्द क्यों…

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Posted on July 27, 2020 at 10:30pm — 6 Comments

मुहब्बत कीजिए यारो सदा दिलदार की सूरत (११६ )

ग़ज़ल (1222 1222 1222 1222 )

.

मुहब्बत कीजिए यारो सदा दिलदार की सूरत

भरोसा कीजिए मज़बूत इक दीवार की सूरत

**

रहें कुछ राज़ अपनी ज़िंदगी के राज़ ही बेहतर

नहीं अच्छा कि हो ये ज़िंदगी अख़बार की सूरत

**

ख़ुशी के चंद पल ही ज़िंदगी में दोस्त मिलते हैं

मगर आते हैं ग़म अक्सर सबा-रफ़्तार की सूरत

**

भले पैदा हुए हैं आप मुफ़लिस कीजिए कोशिश

न समझें आप ख़ुद को…

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Posted on July 7, 2020 at 6:30pm — 5 Comments

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