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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत '
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क्यों चिंता की लहरें मुख पर आखिर क्या है बात प्रिये ? (५७)

एक गीत प्रीत का --------------------क्यों चिंता की लहरें मुख पर आखिर क्या है बात प्रिये ? पलकों के कोरों पर ठहरी क्यों कर है बरसात प्रिये ?**शुष्क अधर क्यों बाल बिखर कर अलसाये हैं शानों पर ?काजल क्रोधित होकर पिघला जा पहुँचा है कानों पर | मीत कपोलों पर जो रहती वह गायब है अरुणाई | ऐसा लगता है ज्यों खो दी चंद पलों में तरुणाई | सजना धजना भूल गयी सब और मलिन मुख हो बैठी क्या है दुख जो आज अचानक जागी सारी रात प्रिये ?पलकों के कोरों पर ठहरी क्यों कर है बरसात प्रिये ?**पहला पहला प्यार ह्रदय में परिवर्तन…See More
Thursday
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क्यों चिंता की लहरें मुख पर आखिर क्या है बात प्रिये ? (५७)

एक गीत प्रीत का --------------------क्यों चिंता की लहरें मुख पर आखिर क्या है बात प्रिये ? पलकों के कोरों पर ठहरी क्यों कर है बरसात प्रिये ?**शुष्क अधर क्यों बाल बिखर कर अलसाये हैं शानों पर ?काजल क्रोधित होकर पिघला जा पहुँचा है कानों पर | मीत कपोलों पर जो रहती वह गायब है अरुणाई | ऐसा लगता है ज्यों खो दी चंद पलों में तरुणाई | सजना धजना भूल गयी सब और मलिन मुख हो बैठी क्या है दुख जो आज अचानक जागी सारी रात प्रिये ?पलकों के कोरों पर ठहरी क्यों कर है बरसात प्रिये ?**पहला पहला प्यार ह्रदय में परिवर्तन…See More
Tuesday
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किसी के प्यार की ख़ातिर हमारा दिल तरसे (५६ )

किसी के प्यार की ख़ातिर हमारा दिल तरसे घटा-ए-इश्क़ तो छाई न जाने कब बरसे ** न तीर दिल पे चला यार ज़ख़्म गर देना कि इस पे ज़ख़्म हुआ करते जब गुल-ए-तर से ** क़दम बढ़ाना भी मुश्किल है जानिब-ए-मंज़िल मिला फ़रेब हमें इस क़दर है रहबर से ** करेगा चूर अगर ज़ुल्म की हदें टूटें उमीद और है क्या आईने को पत्थर से ** ख़ुदाया देख ज़रा भी किसी को, दर्द नहीं किसी के दर्द बड़े हो गए समंदर से ** लकीरें हाथों की जिसने बनाई मेहनत से उसे हुआ है भला कब गिला मुक़द्दर से ** उगलते बनते न ग़म और निगलते भी न बनें हुए है हाल…See More
Monday
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मिटाने फासले तुझको अगर है गुफ़्तगू कर ले (५५ )

मिटाने फासले तुझको अगर हैं  गुफ़्तगू कर ले  सियेगा ज़ख्म कोई सोच मत ख़ुद ही रफ़ू कर ले  ** मुक़ाबिल ख़ौफ़-ए-ग़म होजा अगर पीछा छुड़ाना है ग़मों से भाग मत इक बार तू रुख़ रूबरू कर ले  ** नहीं महफ़ूज़ गुलशन में कली कच्ची अभी तक भी  बचा है कौन अब उसकी जो फ़िक्र-ए-आबरू कर ले  ** कोई तो दर्द है दिल में लबों पर आ नहीं पाता  वगरना कौन है जो चश्म दोनों आबजू कर ले  ** नहीं तूने ख़ता कोई अगर की ख़ौफ़ किसका है  नहीं मुमकिन कोई मर्ज़ी से अपना ज़र्द-रू कर ले  **छुपाएगा अगर ग़म को बढ़ेगा दर्द ज़िद मत कर  यही बेहतर किसी के साथ तू…See More
Jul 30
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post मिटाने फासले तुझको अगर है गुफ़्तगू कर ले (५५ )
"कमियों पर नज़र डालकर दुरुस्त करवाने के लिए बहुत बहुत आभार आदरणीय समर कबीर साहेब ,सादर नमन | "
Jul 30
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post मिटाने फासले तुझको अगर है गुफ़्तगू कर ले (५५ )
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 'मिटाने फासले तुझको अगर है गुफ़्तगू कर ले' इस मिसरे में 'फ़ासले' शब्द बहुवचन है,इस कारण 'है' को "हैं" कर लें…"
Jul 30
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मिटाने फासले तुझको अगर है गुफ़्तगू कर ले (५५ )

मिटाने फासले तुझको अगर हैं  गुफ़्तगू कर ले  सियेगा ज़ख्म कोई सोच मत ख़ुद ही रफ़ू कर ले  ** मुक़ाबिल ख़ौफ़-ए-ग़म होजा अगर पीछा छुड़ाना है ग़मों से भाग मत इक बार तू रुख़ रूबरू कर ले  ** नहीं महफ़ूज़ गुलशन में कली कच्ची अभी तक भी  बचा है कौन अब उसकी जो फ़िक्र-ए-आबरू कर ले  ** कोई तो दर्द है दिल में लबों पर आ नहीं पाता  वगरना कौन है जो चश्म दोनों आबजू कर ले  ** नहीं तूने ख़ता कोई अगर की ख़ौफ़ किसका है  नहीं मुमकिन कोई मर्ज़ी से अपना ज़र्द-रू कर ले  **छुपाएगा अगर ग़म को बढ़ेगा दर्द ज़िद मत कर  यही बेहतर किसी के साथ तू…See More
Jul 26
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post "मुहब्बत की नहीं मुझसे " , प्रिये ! तुम झूठ मत बोलो |  (५३ )
"आपकी स्नेहिल सराहना से उत्साहवर्धन के लिए ह्रदय तल से आभार narendrasinh chauhan साहेब "
Jul 25
narendrasinh chauhan commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post "मुहब्बत की नहीं मुझसे " , प्रिये ! तुम झूठ मत बोलो |  (५३ )
"खूब सुंदर रचना सर"
Jul 25
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post "मुहब्बत की नहीं मुझसे " , प्रिये ! तुम झूठ मत बोलो |  (५३ )
"आदरणीया समर कबीर   जी, आपकी स्नेहिल सराहना से उत्साहवर्धन के लिए ह्रदय तल से आभार |"
Jul 24
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post बीच समंदर कश्ती छोड़े धोका गर मल्लाह करे (५४)
"बहुत बहुत शुक्रिया समर सर जी ,आपकी नज़रसानी के लिए | है भी बड़ी छोटी होती है मुझे पता ही नहीं इसलिए ये गड़बड़ हुई है | सादर नमन | "
Jul 24
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post बीच समंदर कश्ती छोड़े धोका गर मल्लाह करे (५४)
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'घर घर की चर्चा है अपने अपनों से ही डाह करे' इस मिसरे में रदीफ़ 'करे' की बजाय "करें" हो रही है,ग़ौर करें । 'वरना कौन…"
Jul 24
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post "मुहब्बत की नहीं मुझसे " , प्रिये ! तुम झूठ मत बोलो |  (५३ )
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,अच्छा गीत लिखा आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Jul 24
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Jul 23
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post "मुहब्बत की नहीं मुझसे " , प्रिये ! तुम झूठ मत बोलो |  (५३ )
"बहुत बहुत आभार Amit Kumar "Amit"  जी उत्साहवर्धन के लिए "
Jul 22
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़म को क़रीब से कभी देखा है इसलिए(५१)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय  Samar kabeer साहेब |  सलामत रहें | "
Jul 22

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क्यों चिंता की लहरें मुख पर आखिर क्या है बात प्रिये ? (५७)

एक गीत प्रीत का 

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क्यों चिंता की लहरें मुख पर आखिर क्या है बात प्रिये ? 

पलकों के कोरों पर ठहरी क्यों कर है बरसात प्रिये ?

**

शुष्क अधर क्यों बाल बिखर कर अलसाये हैं शानों पर ?

काजल क्रोधित होकर पिघला जा पहुँचा है कानों पर | 

मीत कपोलों पर जो रहती वह गायब है अरुणाई | 

ऐसा लगता है ज्यों खो दी चंद पलों में तरुणाई…

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Posted on August 20, 2019 at 9:00am

किसी के प्यार की ख़ातिर हमारा दिल तरसे (५६ )

किसी के प्यार की ख़ातिर हमारा दिल तरसे

घटा-ए-इश्क़ तो छाई न जाने कब बरसे

**

न तीर दिल पे चला यार ज़ख़्म गर देना

कि इस पे ज़ख़्म हुआ करते जब गुल-ए-तर से

**

क़दम बढ़ाना भी मुश्किल है जानिब-ए-मंज़िल

मिला फ़रेब हमें इस क़दर है रहबर से

**

करेगा चूर अगर ज़ुल्म की हदें टूटें

उमीद और है क्या आईने को पत्थर से

**

ख़ुदाया देख ज़रा भी किसी को, दर्द नहीं

किसी के दर्द बड़े हो गए समंदर से

**

लकीरें हाथों की जिसने बनाई मेहनत से

उसे…

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Posted on August 18, 2019 at 1:00am

मिटाने फासले तुझको अगर है गुफ़्तगू कर ले (५५ )



मिटाने फासले तुझको अगर हैं  गुफ़्तगू कर ले 

सियेगा ज़ख्म कोई सोच मत ख़ुद ही रफ़ू कर ले 

**

मुक़ाबिल ख़ौफ़-ए-ग़म होजा अगर पीछा छुड़ाना है

ग़मों से भाग मत इक बार तू रुख़ रूबरू कर ले 

**

नहीं महफ़ूज़ गुलशन में कली कच्ची अभी तक भी 

बचा है कौन अब उसकी जो फ़िक्र-ए-आबरू कर ले 

**

कोई तो दर्द है दिल में लबों पर आ नहीं पाता …

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Posted on July 26, 2019 at 5:30pm — 2 Comments

बीच समंदर कश्ती छोड़े धोका गर मल्लाह करे (५४)

बीच समंदर कश्ती छोड़े धोका गर मल्लाह करे 

मंज़िल कैसे ढूंढोगे जब रहबर ही गुमराह करे 

**

आज हुआ है इंसानों में प्यार मुहब्बत क्यों ग़ायब 

घर घर की चर्चा है अपने अपनों से ही डाह करे 

**

पानी मांग नहीं पाता है साँपों का काटा जैसे 

ऐसा काम भयानक अक़्सर मज़्लूमों की आह करे 

**

आज अक़ीदत और इबादत का जज़्बा गुम सा देखा 

दिल में जब…

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Posted on July 22, 2019 at 8:00pm — 2 Comments

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