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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव
  • Male
  • Lucknow Uttar Pradesh
  • India
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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Discussions

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्यिक-परिचर्चा माह दिसम्बर 2020 - एक प्रतिवेदन :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की ऑनलाइन मासिक ‘साहित्य संध्या’ 20  दिसम्बर 2020 (रविवार) को सायं 3 बजे प्रारंभ हुई I इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध कवयित्री सुश्री आभा खरे ने की I संचालन का दायित्व सीतापुर के…Continue

Started Jan 7

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्यिक-परिचर्चा माह नवंबर 2020 - एक प्रतिवेदन  :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

 ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की ऑनलाइन मासिक ‘साहित्य संध्या’ 22 नवंबर 2020 (रविवार) को सायं 3 बजे प्रारंभ हुई I इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध कवयित्री सुश्री संध्या सिंह ने की I संचालन का दायित्व मनोज…Continue

Started Jan 7

साहित्य-संध्या ओबीओ लखनऊ-चैप्टर माह दिसंबर 2020–एक प्रतिवेदन   ::   डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव
2 Replies

                                                                                                                                                         ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की ऑनलाइन मासिक काव्य-गोष्ठी…Continue

Started this discussion. Last reply by Alok Rawat on Wednesday.

साहित्य-संध्या ओबीओ लखनऊ-चैप्टर माह नवंबर 2020–एक प्रतिवेदन  :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

 बीओ लखनऊ-चैप्टर की ऑनलाइन मासिक काव्य-गोष्ठी 22 नवम्बर 2020 दिन रविवार को सायं 3 बजे प्रारंभ हुई I इस कार्यक्रम की अध्यक्षता सुख्यात कवयित्री सुश्री संध्या सिंह ने की I संचालन का दायित्व श्री मनोज…Continue

Started Jan 2

 

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Page

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Alok Rawat replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion साहित्य-संध्या ओबीओ लखनऊ-चैप्टर माह दिसंबर 2020–एक प्रतिवेदन   ::   डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव
"आदरणीय गोपाल दादा, आपका हर प्रतिवेदन अपने आप में अद्वितीय होता है | वास्तव में हर कवि की रचना को पढ़कर, उसकी गहराई में उतरकर उसे अपनी सार्थक अभिव्यक्ति प्रदान करना अद्भुत है | मैंने कई अन्य लोगों के प्रतिवेदन भी पढ़े हैं लेकिन यह निश्चित रूप से कह…"
Wednesday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post नारी की प्रकृति
"आ. समर कबीर साहिब आपका शुक्रिया "
Jan 9
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post नारी की प्रकृति
"आ. धामी जीआभार "
Jan 9
Samar kabeer commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post नारी की प्रकृति
"जनाब गोपाल नारायण जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 8
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted discussions
Jan 7
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post नारी की प्रकृति
"आ. भाई गोपाल नारायण जी, सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
Jan 7
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a blog post

नारी की प्रकृति

विश्वासऔर समर्पणबस इतनी सी व्याख्या मेंसिमटी है नारीइसी विश्वास मेंउसे मिले हैं धोखेइसी समर्पण में वहबनी है कुंवारी माँकोठे में बैठी है कभीजान भी दी है, कई बारफिर भी नहीं छोड़ा उसनेविश्वास करनासमर्पित होनाक्योंकि यह है नारी की प्रकृतिउसकी नैसर्गिकताघाततो तब होता हैजब नहीं कर पाती वह चुनावसही साथी का, सच्चे चरित्र कामानवता की छवि काऔर ऐसा होता हैअक्सर तबजब आत्ममेधा से करती है वहअपने भाग्य का निर्णयऔर छली जाती हैसमाज के श्वान औरदुर्दांत भेड़ियों सेहालाँकि कदापि वर्जनीय नहीं हैआत्म-मेधा का अधिकारपर…See More
Jan 7
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion साहित्य-संध्या ओबीओ लखनऊ-चैप्टर माह दिसंबर 2020–एक प्रतिवेदन   ::   डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव
"आ. भाई गोपाल नारायण जी, सादर अभिवादन । आपका यह प्रतिवेदन पढ़ गोष्ठी में उपस्थिति सी महसूस हुई । कामयाब गोष्ठी व आपकी इस प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई ।"
Jan 7
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted discussions
Jan 3
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

साहित्य-संध्या ओबीओ लखनऊ-चैप्टर माह अक्तूबर 2020–एक प्रतिवेदन        ::    डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की ऑनलाइन मासिक काव्य-गोष्ठी 18 अक्टूबर 2020 (रविवार) को सायं 3 बजे प्रारंभ हुई I इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. अंजना मुखोपाध्याय ने की I संचालन का दायित्व श्री मनोज कुमार शुक्ल ‘मनुज’ ने संभाला I इस कार्यक्रम के प्रथम सत्र का समारंभ डॉ, गोपाल नारायन श्रीवास्तव की एक गजल पर हुए विमर्श से हुआ, जिसमें ओबीओ लखनऊ-चैप्टर के लगभग सभी सदस्य प्रतिभागी बने I इस विमर्श का प्रतिवेदन अलग से तैयार कर ओबीओ एडमिन को भेजा जा चुका है I कार्यक्रम के दूसरे सत्र में संचालक मनुज की सरस्वती-वंदना के…See More
Dec 12, 2020
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्यिक-परिचर्चा माह अक्टूबर 2020- एकप्रतिवेदन      :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

 ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की ऑनलाइन मासिक ‘साहित्य संध्या’ 18 अक्टूबर 2020 (रविवार) को सायं 3 बजे प्रारंभ हुई I  इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. अंजना मुखोपाध्याय ने की I संचालन के दायित्व का निर्वहन मनोज कुमार शुक्ल ‘मनुज’ ने किया I कार्यक्रम के प्रथम सत्र में डॉ.गोपाल नारायन श्रीवास्तव की निम्नाकित रचना पर उपस्थित विद्वानों ने अपने विचार रखे I            /ग़ज़ल                                                                                                                                                 …See More
Nov 19, 2020
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्य-संध्या माह सितंबर 2020 : एक प्रतिवेदन - नमिता सुंदर

 ओबीओ लखनऊ चैप्टर की ऑनलाइन मासिक साहित्य-संध्या, 20 सितंबर 2020 को अपराह्न 3 बजे प्रारंभ हुई । इस माह की संगोष्ठी के अध्यक्ष का पद-भार आदरणीय श्री मृगांक श्रीवास्तव जी ने वहन किया I संचालन श्री मनोज शुक्ल के निपुण एवं सिद्धहस्त करों में रहा । गोष्ठी का शुभारंभ डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत माँ सरस्वती की भाव-प्रवण वंदना से हुआ।काव्य रसिक समवेत है, अद्भुत दिव्य समाज Iमाते! अपनी   कच्छपी,  लेकर  आओ  आज IIसात्विक भावों से संचरित कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए, मनोज जी ने अध्यक्ष जी की…See More
Oct 28, 2020
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्यिक परिचर्चा माह सितंबर 2020 :: एक प्रतिवेदन     :: सुश्री नमिता सुंदर

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की ऑनलाइन मासिक ‘साहित्य संध्या’  20 सितंबर 2020 (रविवार) को सायं 3 बजे प्रारंभ हुई I  इस कार्यक्रम की अध्यक्षता हास्य के पुरोधा श्री मृगांक श्रीवास्तव  ने की I संचालन कवि मनोज कुमार शुक्ल ‘मनुज’ ने किया I कार्यक्रम के प्रथम सत्र में कवयित्री डॉ. अर्चना प्रकाश की निम्नाकित कविता पर उपस्थित विद्वानों ने अपने विचार रखे I                      मृत्यु (कविता ) मृत्यु एक आगाज़ है ,भव्य नव निर्माण का !यह सरल कायाकल्प ,जीर्ण शीर्ण के उद्धार का।चिर विश्राम स्थल ये ,श्रांत क्लांत आत्मा का…See More
Oct 17, 2020
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

सशोधित ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्यिक परिचर्चा माह अगस्त 2020 :: एक प्रतिवेदन :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

 ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की ऑनलाइन मासिक ‘साहित्य संध्या’ 23 अगस्त 2020 (रविवार) को सायं 3 बजे प्रारंभ हुई i इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ, शरदिंदु मुकर्जी ने की I संचालन कवि मनोज कुमार शुक्ल ‘मनुज’ ने किया I कार्यक्रम के प्रथम सत्र में कवि श्री अजय कुमार श्रीवास्तव ‘विकल’ की निम्नाकित कविता पर उपस्थित विद्वानों ने अपने विचार रखे I                  कविता - कर्मपथजिसने नभ की ऊंचाई को, अपना लक्ष्य बनाया है lवही व्यक्ति इस धरा गर्भ से, रत्न ग्रहण कर पाया है llधाराओं को चीर बहे, अवरोधों की परवाह नहीं lदौड़…See More
Sep 18, 2020
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्य-संध्या माह अगस्त  2020–एक प्रतिवेदन       :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

 ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की ऑनलाइन मासिक काव्य गोष्ठी 23 अगस्त 2020 (रविवार) को सायं 3 बजे प्रारंभ हुई i इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. शरदिंदु मुकर्जी ने की I संचालन श्री  मनोज कुमार शुक्ल ‘मनुज’ ने किया I इस कार्यक्रम का प्रथम सत्र श्री अजय कुमार श्रीवास्तव ‘विकल’ की कविता पर एक विमर्श से प्रारंभ हुआ, जिसमें ओबीओ लखनऊ-चैप्टर के लगभग सभी सदस्य प्रतिभागी बने I इस विमर्श का प्रतिवेदन अलग से तैयार कर ओबीओ एडमिन को भेजा जा रहा है Iकार्यक्रम के दूसरे चरण में अध्यक्ष महोदय की अनुमति से काव्य-पाठ प्रारंभ हुआ…See More
Sep 14, 2020

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post गीत (रोला छंद पर आधारित )
"अंतर्निहित उत्कट-भावों को समर्थ शब्द तथा सुगढ़ विन्यास मिले हैं. सादर बधाइयाँ, आदरणीय गोपाल नारायनजी     अलबत्ता, ’कठिन’ को पचा पाना मेरे लिए वस्तुतः कठिन हो रहा है. मैं शब्दकल के अनुसार इसके ’न’ को मात्र एक…"
Sep 2, 2020

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Gender
Male
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LUCKNOW (UTTAR PRADESH)
Native Place
LUCKNOW
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RETD. GOVT. SERVANT
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Ph.D. in Hindi Lit. AND ACTIVE IN CREATIVE HINDI LITERATURE

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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Blog

नारी की प्रकृति

Posted on January 7, 2021 at 11:26am — 3 Comments

गीत (रोला छंद पर आधारित )

मेरा सीमित प्यार तुम्हे आयाम चाहिए

सीता बनना कठिन पर तुम्हे राम चाहिए
बाबुल का घर छोड़
आत्म अनुमति से आई
नर के दृढ भुजपाश
में सदा तृप्ति समाई
अब गंगोदक छोड़ तुम्हे क्यों जाम चाहिये …
Continue

Posted on August 24, 2020 at 2:55pm — 4 Comments

गीत (सरसी छंद में )

तू मेरी साँसों का परिमल,  मैं तेरा  उच्छ्वास I

 

बन उपवन भौरे गुंजन सब

देते है अवसाद I

तृप्ति मुझे मिल जाती है यदि

थोड़ा मिले प्रसाद I

अनुभव के पन्नों में बिखरा, रागायित इतिहास I

 

जाने कहाँ तिरोहित हैं सब

मान और सम्मान I

घुल जाता है तेरे सम्मुख

पुरुषोचित अभिमान I

अग्नि-खंड यह बन जाता है, मुग्ध प्रणय का दास I

 

उल्काओं को धूल बनाने

की है तुममें शक्ति I

वही शक्ति…

Continue

Posted on June 15, 2020 at 7:50pm — 3 Comments

टिड्डियाँ चीन नहीं जायेंगी

टिड्डियाँ   

चीन नहीं जायेंगी

वह आयेंगी 

तो सिर्फ भारत

क्योंकि वह जानती हैं

कि चीन में

बौद्ध धर्म आडंबर में है

और भारत में

आचरण है, संस्कार है

यहाँ अहिंसा  

परम धर्म है

यहाँ आजादी है  

अभिव्यक्ति की

भ्रमण की, निवास की

व्यवसाय की. समुदाय की

जो चीन में नहीं है

वे जानती हैं

चीन यदि जायेंगी

तो बच नहीं पाएंगी 

आहार पाने की कोशिश में

आहार बन…

Continue

Posted on May 28, 2020 at 4:59pm — 4 Comments

Comment Wall (53 comments)

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At 7:06pm on October 30, 2017, Alok Rawat said…

आदरणीय डॉक्टर साहेब
आपके द्वारा रचित खंडकाव्य मेघदूत का कथानक पढ़ा .बड़ा साहसिक कदम उठाया है आपने .आपने मेरी जिज्ञासा बहुत बढ़ा दी है .पूरा मेघदूत पढ़ने के लिए मन लालायित हो उठा है . आशा करता हूँ की बहुत जल्दी आपका खंडकाव्य पढ़ने को मिलेगा .महाकवि कालिदास की रचना का हिंदी काव्यानुवाद कितना बड़ा कार्य है और इसके लिए कितनी हिम्मत चाहिए मैं समझ सकता हूँ .किन्तु आपने इस कार्य को पूर्ण करके सामान्य जनमानस को भी मेघदूत की जो सौगात भेंट की है उसके लिए हिंदी साहित्य सदैव आपका ऋणी रहेगा . आप ऐसे ही पुनीत कार्य करते रहें .हमारी शुभकामनाएं सदैव आपके साथ हैं .

At 9:17pm on June 27, 2016, Sulabh Agnihotri said…

स्वागत है आदरणीय !

At 7:02pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 12:44pm on September 23, 2015, gaurav bhargava said…

वह अगले साल आएगा - इस वाक्य में कौन सा कारक है?
1)  कर्म कारक
2) अपादान कारक
3) अधिकरण कारक
4) सम्बन्ध कारक

At 6:35pm on August 6, 2015, Harash Mahajan said…

आदरणीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी कृतज्ञ हूँ सर !!

At 8:06pm on August 1, 2015, Prashant Priyadarshi said…

आ. गोपाल नारायन सर, ये घटना मेरे सामने की है(मेरे परम मित्र के साथ घटी हुई) इसीलिए मैंने इस पर लिखने का प्रयास किया है. एक प्रयास थी इस संवेदनशील मुद्दे पर लिखने की, काफ़ी कमियाँ रह गई हैं. सुधरा हुआ रूप निकट भविष्य में पुनः आप सभी श्रेष्ठ एवं गुणीजनों के समक्ष प्रस्तुत करूँगा. कहानी पर समय देकर मार्गदर्शन के लिए आपको कोटिशः धन्यवाद. आपके द्वारा इंगित किए गए बिन्दुओं  पर काम करके यह कहानी पुनः पोस्ट करूँगा.

At 12:16am on July 19, 2015, kanta roy said…
नतमस्तक हुई मै पाकर यह सम्मान , आदर में श्री माननीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आपके साथ ही ओबीओ की भी करती हूँ गुणगान ।
At 9:23am on June 5, 2015, Manan Kumar singh said…

'

यही है कविता का मर्म

नियम नहीं, धर्म नहीं

बस केवल कर्म'.....आदरणीय गोपाल भाईजी, बहुत बढ़िया, कविता कर्म प्रधान हो यह लक्ष्य होना चाहिए, सादर। 

At 2:07pm on April 16, 2015, jaan' gorakhpuri said…

बहुत बहुत आभार! आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव सर! स्नेह बनाये रक्खे!

At 5:37pm on February 28, 2015, maharshi tripathi said…

आ. डॉ गोपाल नारायण जी ,,,कविता के इस मंच पर ,,अपना मित्र बनाकर  आपने  मुझे पुरस्कार  दिया ,,आपका हार्दिक आभार और आशा है ,यूँ ही हम छोटों को आशीष देते रहेंगे |

 
 
 

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