For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव
  • Male
  • Lucknow Uttar Pradesh
  • India
Share

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Friends

  • Pratibha Pandey
  • आशीष सिंह ठाकुर 'अकेला'
  • Kalipad Prasad Mandal
  • सुरेश कुमार 'कल्याण'
  • रामबली गुप्ता
  • बृजेश कुमार 'ब्रज'
  • सतविन्द्र कुमार राणा
  • gaurav bhargava
  • Prashant Priyadarshi
  • amod shrivastav (bindouri)
  • Sahil verma
  • jaan' gorakhpuri
  • Samar kabeer
  • maharshi tripathi
  • Hari Prakash Dubey

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Groups

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Discussions

सशोधित ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्यिक परिचर्चा माह अगस्त 2020 :: एक प्रतिवेदन :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

 ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की ऑनलाइन मासिक ‘साहित्य संध्या’ 23 अगस्त 2020 (रविवार) को सायं 3 बजे प्रारंभ हुई i इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ, शरदिंदु मुकर्जी ने की I संचालन कवि मनोज कुमार शुक्ल ‘मनुज’ ने किया…Continue

Started Sep 18

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्य-संध्या माह अगस्त  2020–एक प्रतिवेदन       :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

 ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की ऑनलाइन मासिक काव्य गोष्ठी 23 अगस्त 2020 (रविवार) को सायं 3 बजे प्रारंभ हुई i इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. शरदिंदु मुकर्जी ने की I संचालन श्री  मनोज कुमार शुक्ल ‘मनुज’ ने किया I…Continue

Started Sep 14

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्य-संध्या माह जुलाई 2020–एक प्रतिवेदन      ::  डॉ. गोपाल नारा

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की ऑनलाइन मासिक काव्य गोष्ठी 26 जुलाई 2020 (रविवार) को दिन में 2 बजे प्रारंभ हुई i इस कार्यक्रम की अध्यक्षता सुश्री कुंती मुकर्जी ने की I कार्यक्रम के बीच अचानक अस्वस्थ हो जाने पर यह…Continue

Started Aug 24

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्यिक परिचर्चा माह जुलाई 2020:: एक प्रतिवेदन     ::   डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्यिक परिचर्चा माह जुलाई  2020 (दिनांक 26 जुलाई 2020, रविवार) का ऑन लाइन आयोजन हुआ I इसके प्रथम चरण में डॉ, शरदिंदु मुकर्जी के आलेख ‘गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर –एक सरव,…Continue

Started Aug 10

 

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Page

Latest Activity

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

सशोधित ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्यिक परिचर्चा माह अगस्त 2020 :: एक प्रतिवेदन :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

 ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की ऑनलाइन मासिक ‘साहित्य संध्या’ 23 अगस्त 2020 (रविवार) को सायं 3 बजे प्रारंभ हुई i इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ, शरदिंदु मुकर्जी ने की I संचालन कवि मनोज कुमार शुक्ल ‘मनुज’ ने किया I कार्यक्रम के प्रथम सत्र में कवि श्री अजय कुमार श्रीवास्तव ‘विकल’ की निम्नाकित कविता पर उपस्थित विद्वानों ने अपने विचार रखे I                  कविता - कर्मपथजिसने नभ की ऊंचाई को, अपना लक्ष्य बनाया है lवही व्यक्ति इस धरा गर्भ से, रत्न ग्रहण कर पाया है llधाराओं को चीर बहे, अवरोधों की परवाह नहीं lदौड़…See More
Friday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्य-संध्या माह अगस्त  2020–एक प्रतिवेदन       :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

 ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की ऑनलाइन मासिक काव्य गोष्ठी 23 अगस्त 2020 (रविवार) को सायं 3 बजे प्रारंभ हुई i इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. शरदिंदु मुकर्जी ने की I संचालन श्री  मनोज कुमार शुक्ल ‘मनुज’ ने किया I इस कार्यक्रम का प्रथम सत्र श्री अजय कुमार श्रीवास्तव ‘विकल’ की कविता पर एक विमर्श से प्रारंभ हुआ, जिसमें ओबीओ लखनऊ-चैप्टर के लगभग सभी सदस्य प्रतिभागी बने I इस विमर्श का प्रतिवेदन अलग से तैयार कर ओबीओ एडमिन को भेजा जा रहा है Iकार्यक्रम के दूसरे चरण में अध्यक्ष महोदय की अनुमति से काव्य-पाठ प्रारंभ हुआ…See More
Sep 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post गीत (रोला छंद पर आधारित )
"अंतर्निहित उत्कट-भावों को समर्थ शब्द तथा सुगढ़ विन्यास मिले हैं. सादर बधाइयाँ, आदरणीय गोपाल नारायनजी     अलबत्ता, ’कठिन’ को पचा पाना मेरे लिए वस्तुतः कठिन हो रहा है. मैं शब्दकल के अनुसार इसके ’न’ को मात्र एक…"
Sep 2
आशीष यादव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post गीत (रोला छंद पर आधारित )
"बिल्कुल सच्चे भावों से बनी है यह रचना। एक बेहतरीन गीत है।"
Aug 25
Samar kabeer commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post गीत (रोला छंद पर आधारित )
"जनाब गोपाल नारायण जी आदाब, अच्छा गीत लिखा आपने, बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 25
Sushil Sarna commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post गीत (रोला छंद पर आधारित )
"परम् आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी, सादर प्रणाम ... अद्भुत,अनुपम और अप्रतिम सृजन ... भावों की कल कल करती धारा इस ह्रदय पर अपनी अमिट छाप छोड़ गई। दिल की असीम गहराईयों से आपको हार्दिक बधाई और सादर नमन।"
Aug 24
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्य-संध्या माह जुलाई 2020–एक प्रतिवेदन      ::  डॉ. गोपाल नारा

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की ऑनलाइन मासिक काव्य गोष्ठी 26 जुलाई 2020 (रविवार) को दिन में 2 बजे प्रारंभ हुई i इस कार्यक्रम की अध्यक्षता सुश्री कुंती मुकर्जी ने की I कार्यक्रम के बीच अचानक अस्वस्थ हो जाने पर यह दायित्व प्रसिद्ध कवयित्री आभा खरे ने निभाया I संचालन ओज के कवि मनोज कुमार शुक्ल ‘मनुज’ ने किया I इस कार्यक्रम के प्रथम सत्र में डॉ. शरदिंदु मुकर्जी के आलेख ‘गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर–एक सरव, विच्छिन्न चिंतन’ पर साहित्यिक परिचर्चा हुयी, जिसमें ओबीओ लखनऊ-चैप्टर के लगभग सभी सदस्यों ने प्रतिभाग लिया,…See More
Aug 24
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a blog post

गीत (रोला छंद पर आधारित )

मेरा सीमित प्यार तुम्हे आयाम चाहिएसीता बनना कठिन पर तुम्हे राम चाहिएबाबुल का घर छोड़आत्म अनुमति से आईनर के दृढ भुजपाशमें सदा तृप्ति समाईअब गंगोदक छोड़ तुम्हे क्यों जाम चाहिये मुझमे पाती त्राणकहाँ विश्वास खो गया ?उर में बसते प्राणआज क्यों स्वप्न हो गया ?वह मादक मनुहार तुम्हे अविराम चाहिए Iपावन मंगल-सूत्रआज क्या नाग हो गए ?माथे का सिदूरकहो कब आग हो गये ?तुमको कैसा साथ प्रिये अभिराम चाहिएघर का मधु उद्यानबन गया कब से कारा ?मेरा हर उच्छ्वासबना उत्पीडन सारा Iभरा मुक्ति का राग, अहो घनश्याम चाहिएरति…See More
Aug 24
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्यिक परिचर्चा माह जुलाई 2020:: एक प्रतिवेदन     ::   डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्यिक परिचर्चा माह जुलाई  2020 (दिनांक 26 जुलाई 2020, रविवार) का ऑन लाइन आयोजन हुआ I इसके प्रथम चरण में डॉ, शरदिंदु मुकर्जी के आलेख ‘गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर –एक सरव, विच्छिन्न चिंतन’ पर साहित्यिक परिचर्चा हुयी, जिसमें ओबीओ लखनऊ-चैप्टर के लगभग सभी सदस्यों ने प्रतिभाग लिया I गुरुदेव को भारत ही नहीं सारा विश्व जानता है I उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उनका ज्ञान क्षेत्र असीमित और बहुमुखी था I धर्म, अध्यात्म, दर्शन, विज्ञान, ज्योतिष, संगीत, चित्रकारिता आदि गुण…See More
Aug 10
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर – एक सरव, विच्छिन्न चिंतन      ::डॉ, शरदिंदु मुकर्जी

(इस आलेख पर ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की गोष्ठी जुलाई 2020 में परिचर्चा हुयी)“जॉनोमॉनो मुग्धोकॉरो उच्चो ओभिलाष.  तोमार बोंधुर पॉथ ऑनोन्तो ऑपारओतिक्रोम कॉरा जाए जॉतो पान्थोशाला   तॉतो जैनो ऑग्रोशॉर होते इच्छा हॉय”                                   (‘अभिलाष’ कविता से : रवींद्रनाथ ठाकुर)जनमन मुग्धकारी उच्च अभिलाष  कष्टकारी पथ है यह अनन्त अपारजैसे जैसे विश्रामालय करें अतिक्रम  और और जाने की इच्छा हो चरम                                          (भावानुवाद : डॉ शरदिंदु मुकर्जी )उपरोक्त ऐतिहासिक पंक्तियाँ भारत…See More
Aug 2
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्यिक परिचर्चा माह जून 2020:: एक प्रतिवेदन   ::    संकलनकर्ता - डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

 दिनांक21.06.2020, रविवार को ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्यिक परिचर्चा माह जून   2020 का ऑन लाइन आयोजन हुआ I इसके प्रथम चरण में गज़लकार श्री भूपेन्द्र सिंह की निम्नांकित ग़ज़ल पर परिचर्चा हुयी Iयूँ तो कमी न थी कोई इल्मो वक़ार में,फिर भी खड़े रहे उसी लम्बी क़तार में. II1IIजब जानते हैं चार दिनों की है ज़िन्दगी,नफ़रत में क्यों बिताएँ बिताएँगे प्यार में. II2IIटूटा जो सिलसिला-ए-शबे-हिज़्र पूछ मत,क्या-क्या उठे ख़याल दिलेबेक़रार में. II3IIअब अपनी ख़्वाहिशों पे तू क़ाबू तो रख बशर,             खुशियाँ रहेंगी ख़ुद ही…See More
Jul 21
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्य-संध्या माह जून 2020–एक प्रतिवेदन  :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की ऑनलाइन मासिक काव्य गोष्ठी 21 जून 2020 (रविवार) को हुई I सभी उत्साही सुधीजनों ने इसे एक अविस्मरणीय ’धज’ देकर गौरवान्वित किया I अध्यक्ष डॉ. कौशाम्बरी के निर्देशन में संचालक आलोक रावत ’आहत लखनवी’ ने अपनी भूमिका का समीचीन निर्वाह करते हुए डॉ. अशोक को सबसे पहले काव्य-पाठ के लिए बुलाया I डॉ. शर्मा आज अपनी कविता में भौतिक विज्ञान की Quantum theory लेकर आये I वैज्ञानिक प्लांक का यह सिद्धांत ऊर्जा के उत्सर्जन एवं अवशोषण और कणों की गति की बात करता है I डॉ. शर्मा ने इसमें एक सूत्र और…See More
Jul 14
Alok Rawat replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्य-संध्या माह मई 2020–एक प्रतिवेदन ::  डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव
"वाक़ई, ओबीओ लखनऊ चैप्टर की माह मई 2020 की मासिक गोष्ठी बहुत ही शानदार ढंग से सम्पन्न हुई | इस गोष्ठी में सभी रचनाकारों ने अपने बेहतरीन कलाम पेश किये थे और गोष्ठी अपने उरूज़ पर पहुंची थी | भले ही लखनऊ चैप्टर में कम लोग हों लेकिन ये 10 - 12 लोग अपनी…"
Jul 4
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post गीत (सरसी छंद में )
"आद0 गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन वाह वाह वाह वाह,, बहुत बेहतरीन और उम्दा सृजन हुआ है आदरणीय। बधाई स्वीकार कीजिये"
Jun 16
Samar kabeer commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post गीत (सरसी छंद में )
"जनाब डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छा गीत हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।"
Jun 16
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post गीत (सरसी छंद में )
"आद0 गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन वाह वाह वाह वाह,, बहुत बेहतरीन और उम्दा सृजन हुआ है आदरणीय। बधाई स्वीकार कीजिये"
Jun 16

Profile Information

Gender
Male
City State
LUCKNOW (UTTAR PRADESH)
Native Place
LUCKNOW
Profession
RETD. GOVT. SERVANT
About me
Ph.D. in Hindi Lit. AND ACTIVE IN CREATIVE HINDI LITERATURE

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Photos

  • Add Photos
  • View All

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Blog

गीत (रोला छंद पर आधारित )

मेरा सीमित प्यार तुम्हे आयाम चाहिए

सीता बनना कठिन पर तुम्हे राम चाहिए
बाबुल का घर छोड़
आत्म अनुमति से आई
नर के दृढ भुजपाश
में सदा तृप्ति समाई
अब गंगोदक छोड़ तुम्हे क्यों जाम चाहिये …
Continue

Posted on August 24, 2020 at 2:55pm — 4 Comments

गीत (सरसी छंद में )

तू मेरी साँसों का परिमल,  मैं तेरा  उच्छ्वास I

 

बन उपवन भौरे गुंजन सब

देते है अवसाद I

तृप्ति मुझे मिल जाती है यदि

थोड़ा मिले प्रसाद I

अनुभव के पन्नों में बिखरा, रागायित इतिहास I

 

जाने कहाँ तिरोहित हैं सब

मान और सम्मान I

घुल जाता है तेरे सम्मुख

पुरुषोचित अभिमान I

अग्नि-खंड यह बन जाता है, मुग्ध प्रणय का दास I

 

उल्काओं को धूल बनाने

की है तुममें शक्ति I

वही शक्ति…

Continue

Posted on June 15, 2020 at 7:50pm — 3 Comments

टिड्डियाँ चीन नहीं जायेंगी

टिड्डियाँ   

चीन नहीं जायेंगी

वह आयेंगी 

तो सिर्फ भारत

क्योंकि वह जानती हैं

कि चीन में

बौद्ध धर्म आडंबर में है

और भारत में

आचरण है, संस्कार है

यहाँ अहिंसा  

परम धर्म है

यहाँ आजादी है  

अभिव्यक्ति की

भ्रमण की, निवास की

व्यवसाय की. समुदाय की

जो चीन में नहीं है

वे जानती हैं

चीन यदि जायेंगी

तो बच नहीं पाएंगी 

आहार पाने की कोशिश में

आहार बन…

Continue

Posted on May 28, 2020 at 4:59pm — 4 Comments

मसीहा

अधूरा था

मेरा ज्ञान

सर्वभक्षी के बारे में

मै जानता था

केवल अग्नि है सर्व भक्षी



मगर

सब कुछ खाते थे वे

सांप, झींगुर,कीट –पतंग

यहाँ तक कि चमगादड़ भी

असली सर्वभक्षी तो ये थे

इन्हें पता था

प्रकृति लेती है बदला

पर उन्हें भरोसा था

कि वे बदल देंगे

अपने ज्ञान-विज्ञान से

विनाश की दशा और गति

पर जब हुआ

विनाश का तांडव्

फिर कोई न बचा पाया

और न कोइ…

Continue

Posted on April 22, 2020 at 1:30pm — 2 Comments

Comment Wall (53 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 7:06pm on October 30, 2017, Alok Rawat said…

आदरणीय डॉक्टर साहेब
आपके द्वारा रचित खंडकाव्य मेघदूत का कथानक पढ़ा .बड़ा साहसिक कदम उठाया है आपने .आपने मेरी जिज्ञासा बहुत बढ़ा दी है .पूरा मेघदूत पढ़ने के लिए मन लालायित हो उठा है . आशा करता हूँ की बहुत जल्दी आपका खंडकाव्य पढ़ने को मिलेगा .महाकवि कालिदास की रचना का हिंदी काव्यानुवाद कितना बड़ा कार्य है और इसके लिए कितनी हिम्मत चाहिए मैं समझ सकता हूँ .किन्तु आपने इस कार्य को पूर्ण करके सामान्य जनमानस को भी मेघदूत की जो सौगात भेंट की है उसके लिए हिंदी साहित्य सदैव आपका ऋणी रहेगा . आप ऐसे ही पुनीत कार्य करते रहें .हमारी शुभकामनाएं सदैव आपके साथ हैं .

At 9:17pm on June 27, 2016, Sulabh Agnihotri said…

स्वागत है आदरणीय !

At 7:02pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 12:44pm on September 23, 2015, gaurav bhargava said…

वह अगले साल आएगा - इस वाक्य में कौन सा कारक है?
1)  कर्म कारक
2) अपादान कारक
3) अधिकरण कारक
4) सम्बन्ध कारक

At 6:35pm on August 6, 2015, Harash Mahajan said…

आदरणीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी कृतज्ञ हूँ सर !!

At 8:06pm on August 1, 2015, Prashant Priyadarshi said…

आ. गोपाल नारायन सर, ये घटना मेरे सामने की है(मेरे परम मित्र के साथ घटी हुई) इसीलिए मैंने इस पर लिखने का प्रयास किया है. एक प्रयास थी इस संवेदनशील मुद्दे पर लिखने की, काफ़ी कमियाँ रह गई हैं. सुधरा हुआ रूप निकट भविष्य में पुनः आप सभी श्रेष्ठ एवं गुणीजनों के समक्ष प्रस्तुत करूँगा. कहानी पर समय देकर मार्गदर्शन के लिए आपको कोटिशः धन्यवाद. आपके द्वारा इंगित किए गए बिन्दुओं  पर काम करके यह कहानी पुनः पोस्ट करूँगा.

At 12:16am on July 19, 2015, kanta roy said…
नतमस्तक हुई मै पाकर यह सम्मान , आदर में श्री माननीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आपके साथ ही ओबीओ की भी करती हूँ गुणगान ।
At 9:23am on June 5, 2015, Manan Kumar singh said…

'

यही है कविता का मर्म

नियम नहीं, धर्म नहीं

बस केवल कर्म'.....आदरणीय गोपाल भाईजी, बहुत बढ़िया, कविता कर्म प्रधान हो यह लक्ष्य होना चाहिए, सादर। 

At 2:07pm on April 16, 2015, jaan' gorakhpuri said…

बहुत बहुत आभार! आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव सर! स्नेह बनाये रक्खे!

At 5:37pm on February 28, 2015, maharshi tripathi said…

आ. डॉ गोपाल नारायण जी ,,,कविता के इस मंच पर ,,अपना मित्र बनाकर  आपने  मुझे पुरस्कार  दिया ,,आपका हार्दिक आभार और आशा है ,यूँ ही हम छोटों को आशीष देते रहेंगे |

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Nilesh Shevgaonkar commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शूल सम यूँ खुरदरे ही रह गये जीवन में सच-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"वाह वाह लक्ष्मण जी .. आज तो ग़ज़ब कर दिए आप .. बहुत ख़ूब.. एक दो साधारण सुझाव ,,.दूर रह कर  याद…"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शूल सम यूँ खुरदरे ही रह गये जीवन में सच-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद ।"
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शूल सम यूँ खुरदरे ही रह गये जीवन में सच-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन ।गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए आभार ।"
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
8 hours ago
अजेय updated their profile
18 hours ago
अजेय commented on अजेय's blog post ग़ज़ल (और कितनी देर तक सोयेंगें हम)
"आपकी आमद से मन को अतीव प्रसन्नता हुई समर साहब। आपका बहुत बहुत शुक्रिया। जी मुख्य ग़ज़ल से इस शेर को…"
18 hours ago
Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शूल सम यूँ खुरदरे ही रह गये जीवन में सच-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"साफ सुथरी हिन्दी ग़ज़ल, बधाई ! उद्धरणीय हो सकती थी, मकते के साथ।"
18 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शूल सम यूँ खुरदरे ही रह गये जीवन में सच-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।"
19 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (मैं जो कारवाँ से बिछड़ गया)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद जिज्ञासा और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे-दिल से…"
20 hours ago
सालिक गणवीर posted blog posts
20 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post कल कहा था आज भी कल भी कहो..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय समर कबीर साहिब आदाब ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिये ह्रदय तल से आभार. नया मतला कहने की…"
21 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएं : जिन्दगी पर
"आ. भाई सुशील सरना जी, सादर अभिवादन । अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं । हार्दिक बधाई ।"
21 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service