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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव
  • Male
  • Lucknow Uttar Pradesh
  • India
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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Discussions

ओ बीओ लखनऊ-चैप्टर के वार्षिक कार्यक्रम माह 24 नवंबर 2019 में प्रदत्त विषय “ छंद-बद्ध   कविता ::  पुनर्स्थापना  की आहट” पर  वक्तव्य :: डॉ. बलराम वर्मा

 हिंदी साहित्य  के उत्तर आधुनिक काल में कई काव्य प्रवृत्तियों ने जन्म लिया , पर कोई भी प्रवृत्ति स्थायी नहीं  हुयी I  इस दौड़ में कविता के जिस स्वरुप  की छाप आज भी व्यापक और लोकप्रिय है , वह  समकालीन…Continue

Started on Monday

ओ बीओ लखनऊ-चैप्टर के वार्षिक कार्यक्रम माह 24 नवंबर 2019 में प्रदत्त विषय “ छंद-बद्ध कविता :: पुनर्स्थापना की आहट” पर वक्तव्य :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

  प्रदत्त विषय से ऐसा आभासित होता है कि  हिदी साहित्य जगत में शायद कुछ ऐसे लोग है जिन्होंने यह मान लिया है कि छंद कालातीत एव निष्प्रयोज्य हो चुका है और आज का समय केवल  गद्याधारित एवं वैचारिक मुक्त…Continue

Started on Monday

ओपेन बुक्स ऑनलाइन, लखनऊ चैप्टर का वार्षिकोत्सव – 2019 : एक प्रतिवेदन ::डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

रविवार दिनांक 24 नवम्बर 2019 को पेपर मिल कॉलोनी, निशातगंज, लखनऊ स्थित कैफ़ी आज़मी अकादमी के सभागार में ओपेन बुक्स ऑनलाइन, लखनऊ चैप्टर ने एक गरिमामय कार्यक्रम प्रस्तुत कर अपना वार्षिकोत्सव मनाया I इस…Continue

Started on Sunday

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह अक्टूबर 2019 – एक प्रतिवेदन   ::  डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

 दिनांक 20 अक्टूबर  2019  को सायं 3 बजे ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या का आयोजन  37, रोहतास एन्क्लेव, फैजाबाद रोड (डॉ. शरदिंदु जी के आवास) पर आदरणीय डॉ. अंजना मुखोपाध्याय के   सौजन्य से हुआ  I…Continue

Started Nov 23

 

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Page

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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted discussions
Tuesday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओपेन बुक्स ऑनलाइन, लखनऊ चैप्टर का वार्षिकोत्सव – 2019 : एक प्रतिवेदन ::डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

रविवार दिनांक 24 नवम्बर 2019 को पेपर मिल कॉलोनी, निशातगंज, लखनऊ स्थित कैफ़ी आज़मी अकादमी के सभागार में ओपेन बुक्स ऑनलाइन, लखनऊ चैप्टर ने एक गरिमामय कार्यक्रम प्रस्तुत कर अपना वार्षिकोत्सव मनाया I इस अवसर मुख्य अतिथि थे सुपरिचित साहित्यकार एवं चिंतक-दार्शनिक डॉ. अनिल मिश्र I नगर के जानेमाने छंदकार डॉ. अशोक कुमार पाण्डेय ‘अशोक‘ तथा सहयोगी महाविद्यालय, खुशहालपुर, बाराबंकी के निवर्तमान प्राचार्य डॉ. बलराम वर्मा ने विशिष्ट अतिथि के आसन सुशोभित किए I कार्यक्रम का सूत्रपात करते हुए संस्था के संयोजक डॉ.…See More
Sunday
Dr. Vijai Shanker commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's photo
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" स्वागत है। आयोजन पर बधाई।  "
Nov 27
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted photos
Nov 27
Harish Chandra Lohumi commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post उपेक्षा (लघुकथा )
"गहन और भावपूर्ण लघुकथा ! वाह !"
Nov 26
Sushil Sarna commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's photo
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"आदरणीय डॉ गोपाल जी आपको हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।"
Nov 26
Dr Ashutosh Mishra commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post उपेक्षा (लघुकथा )
"आदरणीय गोपाल सर . इस मर्मस्पर्शी लघु कथा के लिए तहे दिल बधाई सादर प्रणाम के साथ "
Nov 26
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह अक्टूबर 2019 – एक प्रतिवेदन   ::  डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

 दिनांक 20 अक्टूबर  2019  को सायं 3 बजे ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या का आयोजन  37, रोहतास एन्क्लेव, फैजाबाद रोड (डॉ. शरदिंदु जी के आवास) पर आदरणीय डॉ. अंजना मुखोपाध्याय के   सौजन्य से हुआ  I कार्यक्रम के प्रथम चरण का संचालन चैप्टर के संयोजक डॉ. गोपाल नारायन  श्रीवास्तव ने किया  ,जिसमें  माह नवंबर 2019  में होने वाले वार्षिक कार्यक्रम पर चर्चा करते हुए अब तक संपन्न कार्य की समीक्षा की गई I संयोजक  ने कार्यक्रम संबंधित जानकारी देते हुए सदस्यों को हॉल के बुक होने और अतिथियों के बारे में…See More
Nov 23
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आ० योगराज जी  आपके जीवन में यह दिन शताधिक  बार आये i सादर i "
Nov 19
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted an event

OPEN BOOKS ONLINE LUCKNOW CHAPTER at KAIFEE AAJMEE ACADEMY , NISHATGANJ, LUCKNOW

November 24, 2019 from 3pm to 6pm
DISCUSSIONS , CRITICISM , CULTURAL ACTIVITY  AND RECITING OF POEMS etc.See More
Nov 18
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"ओ बी ओ परिवार और एडमिन का सादर अभिवादन I अवगत कराना है की प्रतिवर्ष की भाँति  इस बार भी ओ बी ओ लखनऊ चैप्टर अपना वार्षिक कार्यक्रम  24  नवम्बर 2019 को मनाने जा रहा है  i कार्यक्रम का पूर्ण  विवरण EVENTS पर डाल  दिया गया…"
Nov 16
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post नेता (लघुकथा )
"ब्रज जी आभार "
Oct 13
Shyam Narain Verma commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post प्यार
"आदरणीय, प्रणाम, बहुत ही सुंदर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Oct 12
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion फर्क है ग़ज़ल  और छंद के मात्रिक विधान में     :: डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव in the group भारतीय छंद विधान
"आ० गहलौत जी, आपका सदर आभार I "
Oct 12
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion फर्क है ग़ज़ल  और छंद के मात्रिक विधान में     :: डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव in the group भारतीय छंद विधान
"बहुत सुन्दर आलेख के लिए आपको बधाई | निश्चय ही हिंदी छंदों को उनके मूल रूप में ही रहने देना चाहिए | लेकिन समस्या यही है कि परिश्रम कौन करे | आजकल वाचिक एक नया नाम रख दिया गया है ,जब कि छंद तो केवल दो प्रकार के ही रहे हैं वर्णिक और मात्रिक | लेकिन…"
Oct 12
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव added a discussion to the group भारतीय छंद विधान
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फर्क है ग़ज़ल  और छंद के मात्रिक विधान में     :: डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव

 \जब से हिन्दी में ‘ग़ज़ल ’ लिखना शरू हुआ तब से हिन्दी के वर्णिक गण ‘नगण’ को हिन्दी के कवियों ने भी लगभग नकार दिया है I इससे हिन्दी की छंद रचना कुछ आसान तो हुई है,  पर यह छंदों  की वैज्ञानिकता पर एक बड़ा संकट है I हिन्दी छंदों में तमाम संस्कृत से ग्रहीत छंद है और संस्कृत का छान्दसिक  व्याकरण कितना वैज्ञानिक और पुराना है,  यह बताने की आवश्यकता नहीं है I आज हिन्दी छंद के वैयाकरण, जिनकी साहित्य जगत में प्रतिष्ठा भी है, वे भी कमल को ‘नगण’ नहीं मानते , क्योंकि उर्दू में  कमल को क+म+ल (111   ) न मानकर …See More
Oct 12

Profile Information

Gender
Male
City State
LUCKNOW (UTTAR PRADESH)
Native Place
LUCKNOW
Profession
RETD. GOVT. SERVANT
About me
Ph.D. in Hindi Lit. AND ACTIVE IN CREATIVE HINDI LITERATURE

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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Blog

प्यार

 फूलो की

वादियों से गुजरते हुए

तमाम खिली रौनकों के बीच  

हठात वह

मन को खींच लेता है

एक अदना सा फूल

 

जिसके आगे

हो जाते है

आसमान  के सितारे फीके

नीरस लगते है

प्रकृति  के सारे उपादान

  

बेचैन मन को

तब निखिल ब्रह्मांड में

यदि  कुछ भाता है

तो सिर्फ वही

अदना सा फूल

 

बन जाता है जब

अपनी सहजता और सादगी में

साधारण सा वह

अपने  ही…

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Posted on October 11, 2019 at 2:05pm — 3 Comments

नेता (लघुकथा )

 आपने कभी आत्मा की आवाज सुनी  है ?’‘- बाबा ने पूछा I

‘कौन आत्मा  ? ‘

‘वही जो हर मनुष्य के अंतर में रहती है  I ‘

‘बाबा मैं  नेता हूँ , मुझे आत्मा-अंतरात्मा से क्या ?

(मौलिक/अप्रकाशित )

Posted on October 4, 2019 at 11:47am — 8 Comments

दो पल (बह्र-ए-मीर)

22 22 22 22 22 22 22 2   

 -चॉंदी-सोने  से  दो  पल  हैं,  प्रिय देखॅूं या बात करूं  ।

या बांहों  में चाँद खिलाकर  जगमग सारी रात करूं II

                         

आज असंयम को  बहलाऊॅं –‘मेरा पुण्य तुझे मिल जाये ।

जब मैं शांत,  अशांत हृदय का पागल झंझावात करूं I।

 

                         

गजरे का आडंबर तोडूँ , कुंतल शशि -मुख पर छा जाये I   

मैं कर से उलझन सुलझाऊॅ, प्रेम -प्रकंपित गात करूं …

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Posted on September 26, 2019 at 12:30pm — 3 Comments

दु:स्वप्न (लघुकथा )

‘सीते ---- ?’

‘कौन --- स्वामी ?’

‘नही मैं अभाग्य हूँ I’

‘ तो मुझसे क्या चाहती हो ?’

‘मैं कुछ चाहती नहीं , मैं तो तुम्हे सावधान करने आयी हूँ I ‘

‘किस बात के लिए ?’

‘तुम्हारा राम से बिछोह होगा I…

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Posted on September 19, 2019 at 2:00pm — 6 Comments

Comment Wall (53 comments)

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At 7:06pm on October 30, 2017, Alok Rawat said…

आदरणीय डॉक्टर साहेब
आपके द्वारा रचित खंडकाव्य मेघदूत का कथानक पढ़ा .बड़ा साहसिक कदम उठाया है आपने .आपने मेरी जिज्ञासा बहुत बढ़ा दी है .पूरा मेघदूत पढ़ने के लिए मन लालायित हो उठा है . आशा करता हूँ की बहुत जल्दी आपका खंडकाव्य पढ़ने को मिलेगा .महाकवि कालिदास की रचना का हिंदी काव्यानुवाद कितना बड़ा कार्य है और इसके लिए कितनी हिम्मत चाहिए मैं समझ सकता हूँ .किन्तु आपने इस कार्य को पूर्ण करके सामान्य जनमानस को भी मेघदूत की जो सौगात भेंट की है उसके लिए हिंदी साहित्य सदैव आपका ऋणी रहेगा . आप ऐसे ही पुनीत कार्य करते रहें .हमारी शुभकामनाएं सदैव आपके साथ हैं .

At 9:17pm on June 27, 2016, Sulabh Agnihotri said…

स्वागत है आदरणीय !

At 7:02pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 12:44pm on September 23, 2015, gaurav bhargava said…

वह अगले साल आएगा - इस वाक्य में कौन सा कारक है?
1)  कर्म कारक
2) अपादान कारक
3) अधिकरण कारक
4) सम्बन्ध कारक

At 6:35pm on August 6, 2015, Harash Mahajan said…

आदरणीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी कृतज्ञ हूँ सर !!

At 8:06pm on August 1, 2015, Prashant Priyadarshi said…

आ. गोपाल नारायन सर, ये घटना मेरे सामने की है(मेरे परम मित्र के साथ घटी हुई) इसीलिए मैंने इस पर लिखने का प्रयास किया है. एक प्रयास थी इस संवेदनशील मुद्दे पर लिखने की, काफ़ी कमियाँ रह गई हैं. सुधरा हुआ रूप निकट भविष्य में पुनः आप सभी श्रेष्ठ एवं गुणीजनों के समक्ष प्रस्तुत करूँगा. कहानी पर समय देकर मार्गदर्शन के लिए आपको कोटिशः धन्यवाद. आपके द्वारा इंगित किए गए बिन्दुओं  पर काम करके यह कहानी पुनः पोस्ट करूँगा.

At 12:16am on July 19, 2015, kanta roy said…
नतमस्तक हुई मै पाकर यह सम्मान , आदर में श्री माननीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आपके साथ ही ओबीओ की भी करती हूँ गुणगान ।
At 9:23am on June 5, 2015, Manan Kumar singh said…

'

यही है कविता का मर्म

नियम नहीं, धर्म नहीं

बस केवल कर्म'.....आदरणीय गोपाल भाईजी, बहुत बढ़िया, कविता कर्म प्रधान हो यह लक्ष्य होना चाहिए, सादर। 

At 2:07pm on April 16, 2015, jaan' gorakhpuri said…

बहुत बहुत आभार! आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव सर! स्नेह बनाये रक्खे!

At 5:37pm on February 28, 2015, maharshi tripathi said…

आ. डॉ गोपाल नारायण जी ,,,कविता के इस मंच पर ,,अपना मित्र बनाकर  आपने  मुझे पुरस्कार  दिया ,,आपका हार्दिक आभार और आशा है ,यूँ ही हम छोटों को आशीष देते रहेंगे |

 
 
 

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