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Mahendra Kumar
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Ajay Tiwari commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : मैं अपने आप को दफ़ना रहा हूँ
"'मुहब्बत रात दिन करनी थी तुमसे तुम्हीं से रात दिन लड़ता रहा हूँ' बहुत खूब! आदरणीय महेंद्र जी, ख़ूबसूरत अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई."
Jul 20
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीया बबिता जी। हार्दिक आभार। सादर।"
May 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"इशारों-इशारों में आपने बहुत बड़ी बात कह दी. जो न समझे वो अनाड़ी है. वर्तमान परिदृश्य पर एकदम सटीक लघुकथा. देर से ही सही पर इस लाजवाब लघुकथा के लिए दिल से ढेर सारी बधाई स्वीकार कीजिए आदरणीय समर कबीर सर. सादर."
May 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"बढ़िया संदेशप्रद लघुकथा है आदरणीय विनय जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
May 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"देश विरोधी ताकतों को आईना दिखाती बढ़िया लघुकथा कही है आपने आदरणीय मृणाल आशुतोष जी. मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए.  1. //अब्दुल बमुश्किल एक फलांग चला गया होगा// "अब्दुल बमुश्किल एक फलांग चला होगा" 2. //मुड़ा तो पीछे तो…"
May 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"उम्दा और सशक्त लघुकथा. बहुत ही अच्छे विषय का चयन किया है आपने आदरणीया रचना जी. इस सन्देशप्रद लघुकथा के लिए दिल से बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
May 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय तस्दीक़ जी. हार्दिक आभार. सादर."
May 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"हौसलाफजाई का बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीया रचना जी. हृदय से आभारी हूँ. सादर."
May 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय ओमप्रकाश जी। हार्दिक आभार। सादर।"
May 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"आदरणीया नीता जी, अच्छी लघुकथा हुई है. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए.  1. आनन्द, जो पहले किसी के हाथों का ट्रेन में नहीं खाता है वो दोबारा (मात्र भूख लगने पर) किसी के हाथ का कैसे खा लेता है?   2. "मां अपने बेटे को जहर नही दे…"
May 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"आदरणीय केशव जी, जहाँ तक मेरी जानकारी और समझ है यह शैली उपन्यास और कहानी की है, लघुकथा की नहीं. इस बिन्दु को यदि हटा दिया जाए तो यह एक बढ़िया रचना है. बाकी इस पर गुणीजन कहेंगे. मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
May 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"दुखद ख़बर! प्रार्थना है कि ईश्वर उन्हें जल्दी स्वस्थ करे. "
May 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीया राजेश कुमारी जी. हृदय से आभारी हूँ. सादर."
May 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"सादर आदाब आदरणीय समर कबीर सर. आपके साथ-साथ अन्य सभी साथियों को मेरी तरफ़ से भी "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक की हार्दिक शुभकामनाएँ. बेहद ख़ुशी हुई कि लघुकथा आपको पसन्द आयी. लिखना सार्थक रहा. आपका बहुत-बहुत शुक्रिया. हार्दिक…"
May 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"बढ़ते हुए कंक्रीट के जंगलों पर बढ़िया लघुकथा कही है आपने आदरणीय अतुल जी. शीर्षक भी सटीक है. बस एक बात कहनी है कि मुख्य पात्र का नाम यदि 'संतोष' की जगह कुछ और होता तो बेहतर होता क्योंकि यह नाम सामान्यतः पुरुषों का होता है. इससे मुख्य पात्र को…"
May 31
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"स्त्री विमर्श पर बढ़िया लघुकथा कही है आपने आदरणीया अर्चना जी. मेरी तरफ़ से भी हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. कृपया गुणीजनों की बातों का संज्ञान लें. सादर."
May 31

Profile Information

Gender
Male
City State
Allahabad
Native Place
Fatehpur

Mahendra Kumar's Blog

ग़ज़ल : मैं अपने आप को दफ़ना रहा हूँ

बह्र : 1222 1222 122

तुम्हारे शहर से मैं जा रहा हूँ

बिछड़ने से बहुत घबरा रहा हूँ

 

वहाँ दुनिया को तू अपना रही है

यहाँ दुनिया को मैं ठुकरा रहा हूँ

 

उठा कर हाथ से ये लाश अपनी

मैं अपने आप को दफ़ना रहा हूँ

 

तुम्हारे इश्क़ में बन कर मैं काँटा

सभी की आँख में चुभता रहा हूँ

 

नहीं मालूम जाना है कहाँ पर

न जाने मैं कहाँ से आ रहा हूँ

 

मुहब्बत रात दिन करनी थी तुमसे

तुम्हीं से…

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Posted on January 31, 2019 at 7:51pm — 8 Comments

ग़ज़ल : मुझसे मत बोलिए मंज़ूर-ए-ख़ुदा होता है

बह्र : 2122 1122 1122 22/112

मैंने देखा है कि दुनिया में क्या क्या होता है

मुझसे मत बोलिए मंज़ूर-ए-ख़ुदा होता है

 

इश्क़ ही सबसे बड़ा ज़ुर्म है इस दुनिया में

ये ख़ता कर लो तो हर शख़्स ख़फ़ा होता है

 

जो गलत करते हैं, वो लोग सही होते हैं

और जो अच्छा करे तो वो बुरा होता है

 

मैं भी इस ज़ख़्म को नासूर बना डालूँगा

दर्द बतलाओ मुझे कैसे दवा होता है

 

कभी दिखता था ख़ुदा मुझको भी मेरे अन्दर

और अब इस पे भी…

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Posted on January 27, 2019 at 11:30am — 10 Comments

ग़ज़ल : अशआर मेरे जिनको सुनाने के लिए हैं

बह्र : 221 1221 1221 122

अशआर मेरे जिनको सुनाने के लिए हैं

वो लोग किसी और ज़माने के लिए हैं

कुछ लोग हैं जो आग बुझाते हैं अभी तक

बाकी तो यहाँ आग लगाने के लिए हैं

यूँ आस भरी नज़रों से देखो न हमें तुम

हम लोग फ़क़त शोर मचाने के लिए हैं

हर शख़्स यहाँ रखता है अपनों से ही मतलब

जो ग़ैर हैं वो रस्म निभाने के लिए हैं

अब क्या किसी से दिल को लगाएँगे भला हम

जब आप मेरे दिल को दुखाने के लिए…

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Posted on January 16, 2019 at 4:00pm — 14 Comments

ग़ज़ल : कैसे बनता है कोई शख़्स तमाशा देखो

बह्र : 2122 1122 1122 22

कैसे बनता है कोई शख़्स तमाशा देखो

आओ बैठो यहाँ पे हश्र हमारा देखो

कैसे हिन्दू को किया दफ़्न वहाँ लोगों ने

एक मुस्लिम को यहाँ कैसे जलाया देखो

जिस तरह लूटा था दिल्ली को कभी नादिर ने

उसने लूटा है मेरे दिल का ख़ज़ाना देखो

आदमी वो नहीं होता जो दिखा करता है

जो नहीं दिखता हो जैसा उसे वैसा देखो

नूर से जल के, फ़लक से कोई साज़िश करके

चाँद को कैसे सितारों…

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Posted on January 13, 2019 at 7:30pm — 18 Comments

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At 9:45am on January 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय महेंद्र जी
बहुत शुक्रिया
 
 
 

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