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Manan Kumar singh
  • बिहार
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Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आपका आभार आ. अमित जी।"
Saturday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय अमीर जी, आदाब! खुद संज्ञान लेते हुए मैंने अपनी गजल को दुबारा लिखा है, जो अग्रांकत है: टूटते हैं सपने उनको जिंदगानी चाहिएसूखते बिरवों को थोड़ा और पानी चाहिए।1 सागरों को पी गए शमशीर वाले रहनुमाकह रहे वे लोग से, गंगा बहानी चाहिए।2 इंकलाबी लोग…"
Saturday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आ. बबीता जी,गजल के लिए बधाई! मतला की सानी पर गौर लाजिमी है। 'गीत सी है जिंदगी यह गुनगुनानी चाहिए', होना चाहिए। 'ये' तो बहुबचन सूचक सर्वनाम है न, कि नहीं?"
Saturday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आभार आ. अमीर जी।"
Saturday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आभार आ. अमीर जी।"
Saturday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आ. नीलेश जी,गजल में कहना क्रिया व्यवहत हुई है,करना क्रिया नहीं। गौर करें।"
Saturday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आपका आभार आदरणीय नाहक जी।"
Saturday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आपका आभार आदरणीया डिंपल जी।"
Saturday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आपका आभार आदरणीय सुरेंदर जी।"
Saturday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"समर जी, सहीह यानी?"
Saturday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आपका आभार आ. दयाराम जी।"
Saturday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"उम्द: या उम्दा?"
Friday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"शिरकत। आभार आ. समर जी,नमन।"
Friday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आ॰  नीलेश जी, लगता है: 'तुमको भी तो बात अपनी कहने  आनी चाहिए', होगा । "
Friday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"एक उम्दा गजल हेतु ढेर सारी बधाइयां, आदरणीय योगराज जी।"
Friday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"शुक्रिया जी।"
Friday

Profile Information

Gender
Male
City State
Mumbai
Native Place
E 52 Krishna Apt , Patna
Profession
Service
About me
A poet/ Writer

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लेडी डॉक्टर(लघुकथा)

माधवी पटना की लेडी डॉक्टर से मिलकर बाहर आते ही पति से बोली,' यह ओवरी वाला क्या चक्कर था मधुप?'
' बकवास ही समझो '
' वाकई दोनों ओवरी बराबर आकार की होती है?छपरा वाली डॉक्टरनी बोली थी।'
' नहीं होती।मैंने अपने दोस्त डॉक्टरों से सलाह की थी।' पति बोला।
' फिर वह मुई ऑपरेशन किस चीज का करती?'
' पता नहीं। डोनेशन वाले डॉक्टर - डॉक्टरनी भी तो होते हैं भई।'
' ऐसा?'
'और क्या? यहां सब चलता है।' पति हिकारत भरे लहजे में बोला।
' मौलिक व अप्रकाशित'

Posted on September 26, 2020 at 1:20pm — 1 Comment

हवाओं के झोंके....(गजल)

122 122 122 12

 हवाओं के' झोंके मचलने लगे,

अदाओं के' आंचल सरकने लगे।1

दबे दिल के' कोने में ' जो थे कभी
परत दर परत राज खुलने लगे।2

बसाए फिरे जो जिगर में कभी
हकीकत बताने से बचने लगे।3

कहा था कभी, हम न होंगे जुदा,
मिले ही कहां,अब वो ' कहने लगे।4

नज़ाकत भरे थे जो लमहे कभी,
शरारत जदा आज डंसने लगे।5

"मौलिक व अप्रकाशित"
@

Posted on August 29, 2020 at 4:36pm — 4 Comments

गजल(रात क्या क्या गुनगुनाती...)

2122  2122  212

रात क्या क्या गुनगुनाती रह गई

आपकी बस याद आती रह गई।1

सर्द मौसम हो गया कातिल बहुत

सांस अपनी सनसनाती रह गई।2

चांद में है दाग़,देखा आपने,

चांदनी यूं मुस्कुराती रह गई।3

सिलसिले सब याद में आते रहे

आरज़ू तो कुनमुनाती रह गई।4

गीत बनता लय पिरोकर,क्या कहूं?

बात दिल की ही लजाती रह गई।5

आंख हरदम जो बिछाती थी हवा,

इस दफा वह भाव खाती रह गई। 6

आशिया रौशन हुआ था बस…

Continue

Posted on August 22, 2020 at 9:44pm — 6 Comments

गजल(शायरी अब क्या रूठेगी...)

2122 2122 2122 212

शायरी अब क्या रूठेगी,सोचता हूं आजकल,

हो रही बुझती अंगीठी,सोचता हूं आजकल।1

शेर मुंहफट हो गए हैं,हर्फ लज्जित हो रहे,

शायरों की सांस फूली,सोचता हूं आजकल।2

मुंह चिढ़ातीं आज बहरें,खुल रहे हैं राज कुछ,

पिट रही कैसी मुनादी? सोचता हूं आजकल।3

राह अब अंधे दिखाते,झूठ ताना दे रहा,

हो रही सच की गवाही, सोचता हूं आजकल।4

शब्द सारे मौन लगते,अर्थ होता गौण है,

चल रही हैं गाली ' - ताली, सोचता हूं…

Continue

Posted on August 21, 2020 at 9:30am — 12 Comments

Comment Wall (7 comments)

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At 12:51pm on January 23, 2020, TEJ VEER SINGH said…

जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनायें आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।

At 2:33pm on September 28, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी आदाब बहुत शुक्रिया आपने समय निकाला और मेरा हौसला बढ़ाया मैं ह्रदय से शुक्रगुज़ार हूँ| बहुत शुक्रिया!
At 11:05pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी बहुत शुक्रिया आपने जो हौसला बढ़ाया है
At 11:03pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय
श्री मनन कुमार सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
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सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
At 8:47pm on May 24, 2015, kanta roy said…
स्वागत आपका दोस्त
At 5:20pm on April 12, 2015, Manan Kumar singh said…
आदरणीय गोपालजी, आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है।
At 8:29pm on April 7, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ0 मनन जी

आपकी मित्रता मेरा गौरव है . सादर .

 
 
 

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