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Manan Kumar singh
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Manan Kumar singh posted a blog post

मारे गए गुलफाम(लघुकथा)

फिर कौवा पहचान लिया गया ', वृद्ध काक अपने साथियों से बोला। ' उस मूर्ख काक की दुर्दशा - कथा शुरू कैसे हुई?' काक मंडली ने सवाल उछाला। ' वही रंग का गुमान उसको ले डूबा।कोयल अपने सुमधुर सुर के चलते पूजी जाती।लोग उसे सुनने का जतन करते।यह देख वह ठिंगना कौवा कोयल बनने चला।रंग कोयल जैसा था ही।बस मौका देखकर कोयलों के समूह में शामिल हो गया। उनके साथ लगा रहता। उसे गुमान हो गया कि अब वह भी कोयल हो गया। वह अन्य कौवों को टेढ़ी नजर से देखता।' 'फिर क्या हुआ दद्दा?' बाल कौवे जिज्ञासु भाव से बोले। 'जब बसंत ऋतु…See More
Sunday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-64 (विषय: प्रयास)
"आदरणीय योगराज जी द्वारा इंगित किए जाने पर पात्रानुकूल भाषा का प्रयोग करने के उपरांत बनी लघुकथा: खेत और कब्र 127 ***'जुताई हुई।बीज पड़े। रात को खेत से रोशनी उठने लगी। मैं दौड़ते हुए वहां पहुंचा।.....' किसान एक ही सांस में बोल गया।'…"
Friday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-64 (विषय: प्रयास)
"लघुकथा के बारे में आपकी टिप्पणी निश्चित तौर पर इस अर्थ प्रदान करती है आदरणीय योगराज जी। एतदर्थ में आपको दिली आभार व्यक्त करता हूं। हां,जहां तक ग्रामीणों/किसानों की भाषा का सवाल है,वह जरूर ध्यान देने योग्य है,जिसे मैं सहज और सरल भाषा में कहने का…"
Jul 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-64 (विषय: प्रयास)
"भाषा को सहेजने से तात्पर्य भाषा गत त्रुटियों को ठीक करने से था।"
Jul 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-64 (विषय: प्रयास)
"आदरणीय सिद्दीकी जी,नई पीढ़ी को संदेश भेजती लघुकथा हेतु आपको बढ़ाई।"
Jul 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-64 (विषय: प्रयास)
"सरकारी दफ्तरों की कार्य कलाप संबंधी  दुरवस्था पर प्रहार करती लघुकथा ध्यान खींचती है।बढ़ाई आपको आदरणीया,प्रतिभा जी।"
Jul 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-64 (विषय: प्रयास)
"आदरणीय ओम प्रकाश जी, 'असफलता में भी सफलता छिपी रहती है 'को प्रतिपादित करती लघुकथा हेतु आपको बढ़ाई।टंकण जनित विचलन ध्यान आकृष्ट करते हैं,सादर।"
Jul 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-64 (विषय: प्रयास)
"आदरणीया अर्चना जी,लघुकथा में उठाए गए बिंदु बेशक आज कि भागम भाग वाली दुनिया की मानसिकता पर चोट करते हैं।बच्चे की सेहत पहले जरूरी है,न कि पढ़ाई। हां, रचना में भाषा को सहेजना जरूरी है।लघुकथा हेतु बधाई।"
Jul 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-64 (विषय: प्रयास)
"आपका बहुत बहुत आभार आदरणीया प्रतिभा जी।आपने जो इंगित किया है,वह ध्यातव्य है। हां,इस लघुकथा में कुछ ज्यादा पढ़े लिखे ग्रामीण भी पात्र हैं।वैसे ही किसान भी पढ़ा लिखा हो सकता है।"
Jul 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-64 (विषय: प्रयास)
"आभार आदरणीय इकबाल जी।"
Jul 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-64 (विषय: प्रयास)
"आभार आ.कनक जी।"
Jul 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-64 (विषय: प्रयास)
" यह लघुकथा  अच्छी है आदरणीय कनक जी।पर,यह पहले फेसबुक पर आईं थीं। गौर करें।"
Jul 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-64 (विषय: प्रयास)
"बेजोड़,संदेशप्रद लघुकथा आदरणीय भाई तेजवीर जी। बधाइयां।"
Jul 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-64 (विषय: प्रयास)
"खेत और कब्र'खेत जुता।बीज पड़े। रात को खेत से रोशनी उठने लगी। मैं दौड़ते हुए वहां पहुंचा।.....' किसान एक ही सांस में बोल गया।' फिर?' अन्य कृषकों ने सवाल किया।' फिर क्या,खेत के नजदीक पहुंचकर मैंने देखा कि खेत में ढेर सारी…"
Jul 30
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post पर्याय(लघुकथा)
"आपका आभार आदरणीय लक्ष्मण भाई।"
Jul 21
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manan Kumar singh's blog post पर्याय(लघुकथा)
"आ. भाई मनन जी, सादर अभिवादन । उत्तम कथा हुई है । हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Jul 20

Profile Information

Gender
Male
City State
Mumbai
Native Place
E 52 Krishna Apt , Patna
Profession
Service
About me
A poet/ Writer

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मारे गए गुलफाम(लघुकथा)

फिर कौवा पहचान लिया गया ', वृद्ध काक अपने साथियों से बोला।

' उस मूर्ख काक की दुर्दशा - कथा शुरू कैसे हुई?' काक मंडली ने सवाल उछाला।

' वही रंग का गुमान उसको ले डूबा।कोयल अपने सुमधुर सुर के चलते पूजी जाती।लोग उसे सुनने का जतन करते।यह देख वह ठिंगना कौवा कोयल बनने चला।रंग कोयल जैसा था ही।बस मौका देखकर कोयलों के समूह में शामिल हो गया। उनके साथ लगा रहता। उसे गुमान हो गया कि अब वह भी कोयल हो गया। वह अन्य कौवों को टेढ़ी नजर से देखता।'

'फिर क्या हुआ दद्दा?'…

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Posted on August 2, 2020 at 6:30am

पर्याय(लघुकथा)

सोनी अब क्या करेगी? नेवला तो उसके सांपों को खाता जा रहा है।' चुनचुन ने मुनमुन चिड़िया से पूछा।

' खायेगा ही,खाता जाएगा।' मुनमुन बोली।

' फिर? अब तो सोनी के द्वारा पंछियों के नुचवाये पंख भी उगने लगे हैं।' चुन चुन बोली।

' उगेंगे। नई पौध भी पनप रही है,लाल टेस अंखुओं वाली।' मुनमुन बोली।

' वो तो है,मुनमुन।पर इस सोनी का क्या करें?आए दिन इसके हंगामे बढ़ रहे हैं;कभी हंसों पर वार,तो कभी कौवों पर।बस गिरगिट पिछलग्गू बने हुए हैं।' चुन चुन चिढ़ कर बोली।

' लंबी पारी है, चुन चुन।कुछ भी हो…

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Posted on July 17, 2020 at 8:49am — 2 Comments

केंचुआ(लघुकथा)

वह मिट्टी खोदता,ढेर लगाता। समझा जाता,राजा मिट्टी को उपजाऊ बना रहा है।समय गुजरता गया।कालांतर में नेवला राजा बना।खुदी हुई मिट्टी की सुरंगों से बाहरी अजगर आने लगे। आते पहले भी थे।डंसते,निकल जाते। अब नेवला उन्हें खा जाता।इलाके में ' हाय दैया 'मचाई गई कि अजगर ने इसे डंसा,तो उसे डंसा।कितने अजगर तमाम हुए,यह बात गौण थी।

पुराना राजा: राजा कर क्या रहा है?ये अजगर आ कैसे रहे हैं?

रा,जा:'उन्हीं सुरंगों से,जो तुमने…

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Posted on June 26, 2020 at 8:30am — 4 Comments

पिछलग्गू परिंदे

जासूसी उपन्यास पढ़ चुके एक मित्र से दूसरे मित्र ने उसकी कहानी का आशय पूछा।पहले ने जवाब में कहा,'

भरोसा, चोट......।'

' मतलब?' दूसरी तरफ से सवाल हुआ।

' परी कथा समझते हो न?'

' बिलकुल।'

' बस वैसा ही समझ लो।खेतों से पेट पालनेवाले चिड़ों के इलाके में एक सफेद चिड़ी उतरी। धूप में झुलसे उन बाशिंदों में वह गोरी थी, परी समझ ली गई।सुनहरी होने के चलते उसे सोनी नाम मिला। परिंदों का सरदार चिड़ा उसपर फिदा हुआ।दोनों का चोंच - बंधन हो गया। एक दिन ऊंची उड़ान भरते वक्त चिड़ा काल कवलित हो…

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Posted on June 21, 2020 at 12:52pm — 2 Comments

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At 12:51pm on January 23, 2020, TEJ VEER SINGH said…

जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनायें आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।

At 2:33pm on September 28, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी आदाब बहुत शुक्रिया आपने समय निकाला और मेरा हौसला बढ़ाया मैं ह्रदय से शुक्रगुज़ार हूँ| बहुत शुक्रिया!
At 11:05pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी बहुत शुक्रिया आपने जो हौसला बढ़ाया है
At 11:03pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय
श्री मनन कुमार सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
At 8:47pm on May 24, 2015, kanta roy said…
स्वागत आपका दोस्त
At 5:20pm on April 12, 2015, Manan Kumar singh said…
आदरणीय गोपालजी, आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है।
At 8:29pm on April 7, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ0 मनन जी

आपकी मित्रता मेरा गौरव है . सादर .

 
 
 

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