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Manan Kumar singh
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आशीष यादव commented on Manan Kumar singh's blog post एनकाउंटर(लघुकथा)
"जी बिलकुल, "यही सच है"। अच्छी लघुकथा।"
8 hours ago
आशीष यादव commented on Manan Kumar singh's blog post नागरिक(लघुकथा)
"अच्छी लघुकथा।"
9 hours ago
आशीष यादव commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(वोटर.....)
"बहुत सटीक सर।"
9 hours ago
Manan Kumar singh posted a blog post

गजल(वोटर.....)

वोटर पापड़ बेल रहे हैंऔर मसीहे खेल रहे हैं।1उम्मीदें जिनकी मुरझाईंउट्ठक - बैठक पेल रहे हैं।2मत देने पर स्याही सूखी,दाग लगे, सब झेल रहे हैं।3लड़ते - मरते लोग - लुगाईनेता भरसक रेल रहे हैं।4'अक्ल बड़ी कह भैंस लजाई,अंधे गाड़ी ठेल रहे हैं।5जिसकी पूंछ मिले,पकड़ें सबबैतरणी को हेल रहे हैं।6पाठ पढ़ाते चलते हैं वेजो जीवन भर फेल रहे हैं।7कुर्सी खातिर मिल जाते हैंजो हरदम बेमेल रहे हैं।8ख़बरें बिकती खुल्लमखुल्ला जैसे भजिए भेल रहे हैं।9"मौलिक व अप्रकाशित"See More
18 hours ago
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post एनकाउंटर(लघुकथा)
"शुक्रिया आदरणीय लक्ष्मण जी।"
Friday
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post एनकाउंटर(लघुकथा)
"शुक्रिया आदरणीय समर जी।"
Friday
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post नागरिक(लघुकथा)
"शुक्रिया आदरणीय।"
Friday
Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post नागरिक(लघुकथा)
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने, बधाई स्वीकार करें ।"
Friday
Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post एनकाउंटर(लघुकथा)
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Friday
Manan Kumar singh posted a blog post

नागरिक(लघुकथा)

' नागरिक...जी हां नागरिक ही कहा मैंने ', जर्जर भिखारी ने कहा।' तो यहां क्या कर रहे हो?' सूट बूट धारी लोगों ने उसे घुड़का।' अपना सच ढूंढ रहा हूं ।'' मतलब?'' नहीं समझे?'' नहीं।समझा दो।'' सच यानी अपने यहां का होने का प्रमाण साहिब।'' तुम यहीं के हो?'' पीढ़ियां गुजर गईं यहीं।'' फिर प्रमाण क्या?'' अपने हाकिमों को दिखाना होगा न।वरना कहां भीख मांगूंगा?'' तुम्हारा मतलब भीख मांगने के लाइसेंस से है क्या?'' हे हे हे...नहीं समझे फिर से।'' ऐं..? सूटवाले बुदबुदाए।' मतलब यहां का होने से है।भीख तो तुम भी मांग…See More
Thursday
Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post अप टू डेट लोग(लघुकथा)
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 9
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manan Kumar singh's blog post एनकाउंटर(लघुकथा)
"आ. भाई मनन जी, समसामयिक विषय पर अच्छी कथा हुई है । हार्दिक बधाई।"
Dec 9
Manan Kumar singh posted a blog post

एनकाउंटर(लघुकथा)

'कभी - कभी विपरीत विचारों में टकराव हो जाया करता है। चाहे - अनचाहे ढंग से अवांछित लोग मिल जाते हैं,या वैसी स्थितियां प्रकट हो जाती हैं। या विपरीत कार्य - व्यवसाय के लोगों के बीच अपने - अपने कर्तव्य - निर्वहन को लेकर मरने - मारने तक की नौबत आ जाती है। यदा कदा तो परस्पर की लड़ाई भिड़ाई में प्राणी इहलोक - परलोक के बीच का भेद भी भुला बैठते हैं।अभी यहां हैं,तो तुरंत ऊपर पहुंच जाते हैं।पहुंचा भी दिए जाते हैं।' प्रोफेसर पांडेय ने अपना लंबा कथन समाप्त किया। मंगल और झगरू उनका मुंह देखते रह गए। ' टुकुर…See More
Dec 9
Manan Kumar singh posted a blog post

अप टू डेट लोग(लघुकथा)

'भूं  भूं...भूं' की आवाज सुन भाभी भुनभुनाई-- ' भोरे भोरे कहां से यह कुक्कुड़ आ गया रे?' '  कुक्कुड़ मत कहना फिर, वरना....', बगल वाली आंटी गुर्राई। ' अरे तो क्या कहूं, डॉगी?' ' नहीं।' ' तो फिर?' ' पपलू है यह।पप्पू के पापा इसे प्यार से इसी नाम से बुलाते हैं।समझ गईं, कि नहीं?' ' बाप रेे..ऐसा?' ' और क्या?हमारे परिवार का हिस्सा है अपना पपलू। हमारे संग नहाता - धोता,खाता - पीता है यह।' ' और सब....?' ' और..?सब कुछ हमारे जैसा ही करता है।बिलकुल आदमी हो गया है यह।' ' हूं हूं..छछूंदर के माथे चमेली का…See More
Dec 7
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-56 (विषय: समय)
"आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय योगराज जी।"
Nov 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-56 (विषय: समय)
"आभार आदरणीय लक्ष्मण भाई।"
Nov 29

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Mumbai
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E 52 Krishna Apt , Patna
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गजल(वोटर.....)

वोटर पापड़ बेल रहे हैं

और मसीहे खेल रहे हैं।1

उम्मीदें जिनकी मुरझाईं

उट्ठक - बैठक पेल रहे हैं।2

मत देने पर स्याही सूखी,

दाग लगे, सब झेल रहे हैं।3

लड़ते - मरते लोग - लुगाई

नेता भरसक रेल रहे हैं।4

'अक्ल बड़ी कह भैंस लजाई,

अंधे गाड़ी ठेल रहे हैं।5

जिसकी पूंछ मिले,पकड़ें सब

बैतरणी को हेल रहे हैं।6

पाठ पढ़ाते चलते हैं वे

जो जीवन भर फेल रहे हैं।7

कुर्सी खातिर मिल…

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Posted on December 14, 2019 at 4:44pm — 1 Comment

नागरिक(लघुकथा)



' नागरिक...जी हां नागरिक ही कहा मैंने ', जर्जर भिखारी ने कहा।

' तो यहां क्या कर रहे हो?' सूट बूट धारी लोगों ने उसे घुड़का।

' अपना सच ढूंढ रहा हूं ।'

' मतलब?'

' नहीं समझे?'

' नहीं।समझा दो।'

' सच यानी अपने यहां का होने का प्रमाण साहिब।'

' तुम यहीं के हो?'

' पीढ़ियां गुजर गईं यहीं।'

' फिर प्रमाण क्या?'

' अपने हाकिमों को दिखाना होगा न।वरना कहां भीख मांगूंगा?'

' तुम्हारा मतलब भीख मांगने के लाइसेंस से है क्या?'

' हे हे हे...नहीं समझे फिर…

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Posted on December 12, 2019 at 9:44am — 3 Comments

एनकाउंटर(लघुकथा)

'कभी - कभी विपरीत विचारों में टकराव हो जाया करता है। चाहे - अनचाहे ढंग से अवांछित लोग मिल जाते हैं,या वैसी स्थितियां प्रकट हो जाती हैं। या विपरीत कार्य - व्यवसाय के लोगों के बीच अपने - अपने कर्तव्य - निर्वहन को लेकर मरने - मारने तक की नौबत आ जाती है। यदा कदा तो परस्पर की लड़ाई भिड़ाई में प्राणी इहलोक - परलोक के बीच का भेद भी भुला बैठते हैं।अभी यहां हैं,तो तुरंत ऊपर पहुंच जाते हैं।पहुंचा भी दिए जाते हैं।' प्रोफेसर पांडेय ने अपना लंबा कथन समाप्त किया। मंगल और झगरू उनका मुंह देखते रह गए।

'…

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Posted on December 9, 2019 at 7:00am — 5 Comments

अप टू डेट लोग(लघुकथा)

'भूं  भूं...भूं' की आवाज सुन भाभी भुनभुनाई--

' भोरे भोरे कहां से यह कुक्कुड़ आ गया रे?'

'  कुक्कुड़ मत कहना फिर, वरना....', बगल वाली आंटी गुर्राई।

' अरे तो क्या कहूं, डॉगी?'

' नहीं।'

' तो फिर?'

' पपलू है यह।पप्पू के पापा इसे प्यार से इसी नाम से बुलाते हैं।समझ गईं, कि नहीं?'

' बाप रेे..ऐसा?'

' और क्या?हमारे परिवार का हिस्सा है अपना पपलू। हमारे संग नहाता - धोता,खाता - पीता है यह।'

' और सब....?'

' और..?सब कुछ हमारे जैसा ही करता…

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Posted on December 7, 2019 at 11:00am — 1 Comment

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At 2:33pm on September 28, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी आदाब बहुत शुक्रिया आपने समय निकाला और मेरा हौसला बढ़ाया मैं ह्रदय से शुक्रगुज़ार हूँ| बहुत शुक्रिया!
At 11:05pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी बहुत शुक्रिया आपने जो हौसला बढ़ाया है
At 11:03pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय
श्री मनन कुमार सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
At 8:47pm on May 24, 2015, kanta roy said…
स्वागत आपका दोस्त
At 5:20pm on April 12, 2015, Manan Kumar singh said…
आदरणीय गोपालजी, आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है।
At 8:29pm on April 7, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ0 मनन जी

आपकी मित्रता मेरा गौरव है . सादर .

 
 
 

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