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Manan Kumar singh
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Manan Kumar singh posted a blog post

गजल( कैसी आज करोना आई)

22 22 22 22कैसी आज करोना आईकरते है सब राम दुहाई।आना जाना बंद हुआ है,हम घर में रहते बतिआई!दाढ़ी मूंछ बना लेते हैंसिर के बाल करें अगुआई।बंद पड़े सैलून यहां केरोता फिरता अकलू नाई।डर के मारे दुबके हैं सबनाई कहता, 'आओ भाई!मास्क लगाकर मैं रहता हूंतुम क्योंकर जाते खिसियाई?मुंह ढको,फिर आ जाओ जी,घर जाओ तुम बाल कटाई।एक दिवस की बात नहीं यहआगे बढ़ती और लड़ाई।झाड़ू पोंछा,बर्तन बासन,अपना कर,अपनी सुथराई।वैक्सीन अगर कोई आए, भागे कोरो ना हरजाई।'"मौलिक व अप्रकाशित"See More
48 minutes ago
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post सफेद कौवा(लघुकथा)
"सादर आभार आदरणीय लक्ष्मण भाई जी।"
Monday
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post सफेद कौवा(लघुकथा)
"सादर आभार आदरणीय समर जी।"
Monday
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post खुश हुआ तू बोलकर....(गजल)
"आपका दिली आभार आदरणीय छोटेलाल जी।"
Monday
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Manan Kumar singh's blog post खुश हुआ तू बोलकर....(गजल)
"आदरणीय मनन कुमार जी बहुत ही शानदार गजल लिखने के लिए दिली मुबारकबाद कुबूल कीजिये"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manan Kumar singh's blog post सफेद कौवा(लघुकथा)
"आ. भाई मनन जी, सादर अभिवादन । अच्छी कथा हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Monday
Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post सफेद कौवा(लघुकथा)
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब, अच्छी लघुकथा हुई, बधाई स्वीकार करें ।"
Monday
Manan Kumar singh posted a blog post

सफेद कौवा(लघुकथा)

कौवा तब सफेद था।बगुलों के साथ आहार के लिए मरी हुई मछलियां, कीड़े वगैरह ढूंढ़ता फिरता। फिर बगुलों ने जीवित मछलियों का स्वाद चखा।वह उन्हें भा गया। अब वे जीवित मछलियां ही उड़ाने लगे।सोचते कि भला कौन मुर्दों की खिंचाई करे।उन्हें भी तो चैन नसीब हो।जिंदगी भर हुआ कि नहीं,किसे पता।अहले सुबह वे कुछ मरी हुई छोटी छोटी मछलियां और कीड़े मकोड़े लिए तालाब के ऊपर मंडराने लगते।उनके टुकड़े कर पानी में फेंकते...मछलियां अपने आहार की खातिर झुंड के झुंड पानी की सतह पर आतीं....फिर बगुले झपट्टा मारते.....चोंचभर दाना…See More
Sunday
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post खुश हुआ तू बोलकर....(गजल)
"आपका तहे दिल से आभार आदरणीय तेजवीर सिंह जी।"
May 20
TEJ VEER SINGH commented on Manan Kumar singh's blog post खुश हुआ तू बोलकर....(गजल)
"हार्दिक बधाई आदरणीय मनन कुमार सिंह जी । बेहतरीन गज़ल। हर्फ हासिल हो गए तो शायरी कर,क्यूं अंधेरों को बढ़ाता है बशर तू?"
May 20
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post खुश हुआ तू बोलकर....(गजल)
"आदरणीय लक्ष्मण भाई,आपका बहुत बहुत आभारी हूं।गाहे - बेगाहे प्रयास चलता रहता है।"
May 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manan Kumar singh's blog post खुश हुआ तू बोलकर....(गजल)
"आ. भाई मनन जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
May 19
Manan Kumar singh posted a blog post

खुश हुआ तू बोलकर....(गजल)

2122 2122 2122खुश हुआ तू बोलकर,' है जानवर तू'लग रहा खुद को बताता,बेसबर तू। सांस बनकर बह रहीं ठंडी हवाएं आग की लपटें उठा मत बन, कहर तू। ख्वाब पाले  मौन बैठी हैं सदाएं कानफाड़ू! ला सके तो,ला सहर तू? तार होती हो नहीं उम्मीद कोई, हो अगरचे तो बता,कोई पहर तू? हर्फ हासिल हो गए तो शायरी कर, क्यूं अंधेरों को बढ़ाता है बशर तू? मत बिठा मेरी गजल को हाशिए पर छटपटाती है बहर,देखे अगर तू। रुक्न रोते, बुदबुदाते शब्द सारे, नज़्म कहकर फेंकता कंकड़,मगर तू। बंट सका पानी कभी क्या बावरी का? प्रेम -धुन गाती लहर, बस मत…See More
May 18
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post खुश हुआ तू बोलकर....(गजल)
"देशकाल और वातावरण के अनुरूप जनाभिव्य क्ति को मुखर करते हुए प्रचलित शब्दों के व्यवहार को अज्ञता - विज्ञता की परिधि में संकुचित करना अपरिहार्य नहीं होना चाहिए।"
May 18
Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post खुश हुआ तू बोलकर....(गजल)
"//बेसबर और बहर जैसे शब्द अब अप्रचलित नहीं है,यह कहना अप्रासंगिक नहीं होगा।मेरे विचार में हमें अब इन चीजों को स्वीकार करना चाहिए// ये शब्द उन्हीं लोगों के लिए प्रचलित हैं जो शब्दों का सहीह ज्ञान नहीं रखते,अन्यथा अधिकतर शाइर जो हिन्दी भाषी हैं,सहीह…"
May 18
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post खुश हुआ तू बोलकर....(गजल)
"आभार और नमन आदरणीय समर जी।दूसरे शेर में उला में बहर में त्रुटि है। मैं उसमें चुप की जगह मौन कर दूंगा,मात्रा पूर्ण हो जाएगी।यह इंगित करने के लिए आपका आभार व्यक्त करता हूं। हां, बेसबर और बहर जैसे शब्द अब अप्रचलित नहीं है,यह कहना अप्रासंगिक नहीं…"
May 18

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Male
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Mumbai
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गजल( कैसी आज करोना आई)

22 22 22 22

कैसी आज करोना आई

करते है सब राम दुहाई।

आना जाना बंद हुआ है,

हम घर में रहते बतिआई!

दाढ़ी मूंछ बना लेते हैं

सिर के बाल करें अगुआई।

बंद पड़े सैलून यहां के

रोता फिरता अकलू नाई।

डर के मारे दुबके हैं सब

नाई कहता, 'आओ भाई!

मास्क लगाकर मैं रहता हूं

तुम क्योंकर जाते खिसियाई?

मुंह ढको,फिर आ जाओ जी,

घर जाओ तुम बाल कटाई।

एक दिवस की बात नहीं यह

आगे बढ़ती और लड़ाई।

झाड़ू पोंछा,बर्तन बासन,

अपना कर,अपनी…

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Posted on May 27, 2020 at 1:15pm

सफेद कौवा(लघुकथा)



कौवा तब सफेद था।बगुलों के साथ आहार के लिए मरी हुई मछलियां, कीड़े वगैरह ढूंढ़ता फिरता। फिर बगुलों ने जीवित मछलियों का स्वाद चखा।वह उन्हें भा गया। अब वे जीवित मछलियां ही उड़ाने लगे।सोचते कि भला कौन मुर्दों की खिंचाई करे।उन्हें भी तो चैन नसीब हो।जिंदगी भर हुआ कि नहीं,किसे पता।अहले सुबह वे कुछ मरी हुई छोटी छोटी मछलियां और कीड़े मकोड़े लिए तालाब के ऊपर मंडराने लगते।उनके टुकड़े कर पानी में फेंकते...मछलियां अपने आहार की खातिर झुंड के झुंड पानी की सतह पर आतीं....फिर बगुले झपट्टा…

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Posted on May 24, 2020 at 6:30am — 4 Comments

खुश हुआ तू बोलकर....(गजल)

2122 2122 2122

खुश हुआ तू बोलकर,' है जानवर तू'

लग रहा खुद को बताता,बेसबर तू।

सांस बनकर बह रहीं ठंडी हवाएं

आग की लपटें उठा मत बन, कहर तू।

ख्वाब पाले  मौन बैठी हैं सदाएं

कानफाड़ू! ला सके तो,ला सहर तू?

तार होती हो नहीं उम्मीद कोई,

हो अगरचे तो बता,कोई पहर तू?

हर्फ हासिल हो गए तो शायरी कर,

क्यूं अंधेरों को बढ़ाता है बशर तू?

मत बिठा मेरी गजल को हाशिए पर

छटपटाती है बहर,देखे अगर तू।

रुक्न रोते, बुदबुदाते शब्द सारे,

नज़्म कहकर…

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Posted on May 17, 2020 at 11:30am — 11 Comments

ग़ज़ल(अश्क धोकर आदमी....)

2122  2122  2122

अश्क धोकर आदमी थकने लगा है

सोचता - अब और रोना तो बला है।1

गर्दिशों का दौर बढ़ता,देखिए तो

शोर का कुछ भाव ज्यादा ही चढ़ा है।2

गुम हुई - सी जा रही पहचान फिर से

जिंदगी जो दे,उसे मरना पड़ा है।3

डंस रहा जाहिल अंधेरा आदमी को,

क्यूं उजाला रेत बन धुंधला हुआ है?4

कोसते हैं लोग कुछ भगवान को भी

जब संजोई गांठ में विष ही भरा है।5

ख्वाब चकनाचूर, आंखें पूछती हैं…

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Posted on May 10, 2020 at 9:45pm — 6 Comments

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At 12:51pm on January 23, 2020, TEJ VEER SINGH said…

जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनायें आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।

At 2:33pm on September 28, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी आदाब बहुत शुक्रिया आपने समय निकाला और मेरा हौसला बढ़ाया मैं ह्रदय से शुक्रगुज़ार हूँ| बहुत शुक्रिया!
At 11:05pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी बहुत शुक्रिया आपने जो हौसला बढ़ाया है
At 11:03pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय
श्री मनन कुमार सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
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सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
At 8:47pm on May 24, 2015, kanta roy said…
स्वागत आपका दोस्त
At 5:20pm on April 12, 2015, Manan Kumar singh said…
आदरणीय गोपालजी, आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है।
At 8:29pm on April 7, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ0 मनन जी

आपकी मित्रता मेरा गौरव है . सादर .

 
 
 

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Samar kabeer commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़़ज़़ल- फोकट में एक रोज की छुट्टी चली गई
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Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़़ज़़ल- फोकट में एक रोज की छुट्टी चली गई
"धन्यवाद आदरणीय समर कबीर साहब जी मैं रदीफ को बदलकर बेवजह कर दूंगा।"
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