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Manoj kumar Ahsaas
  • 36, Male
  • saharanpur uttar pradesh
  • India
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बसंत कुमार शर्मा commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए
"आदरणीय मनोज अहसास जी सादर नमस्कार, बधाई हो आपको खूबसूरत ग़ज़ल के क लिए "
Friday
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

एक ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए

11212×4मुझे पीसते हैं जो हर घड़ी,न वो दर्द मुझसे लिखे गए किसी बेजुबान ख्याल में कई शेर यूं ही कहे गएभरी रात में तेरी याद के जो चिराग बुझ के महकते हैं, उन्हें जिंदा रखने की चाह में कई जाम हमसे पिये गयेजिसे हम समझते थे अपना घर वो जहान हमसे था बेखबरकई रास्ते तो मकान के मुझे तोड़कर भी बुने गएमुझे ढूंढ लाने की चाह में ,मेरे दोस्तों के वो मशवरे मेरी जिंदगी का अज़ाब थे सो इसीलिए न सुने गएकहीं सर छुपाने का आसरा, कोई प्यार पाने का रास्ता यें सवाल इतने अजीब थे जो बसर से हल न किए गएचली जब सितम की घनी…See More
Thursday
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

एक ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए

2122×3+212जिंदगी ने सब दिया पर चैन का बिस्तर नहींजिस जगह सर को न पटका ऐसा कोई दर नहींहार कर मजबूर होकर आज ये कहना पड़ा इश्क इक ऐसा परिंदा है कि जिसका घर नहींमुझको मंजिल से जुदा कर तूने साबित कर दिया मैं तेरे रस्ते पे हूं पर तू मेरा रहबर नहींइस जहां में बस वही आराम से जीता मिलाजिसको अपनी ही गरज है आसमां का डर नहींआंखों से ख्वाबों के संग तेरा भरोसा भी गयामुझको जीना तो पड़ेगा पर तेरा होकर नहींमेरे दिल की खैरियत आकर बता दे चारागरयाद उनकी अब भी आती है मगर अक्सर नहींअपने दिल की बात कहने का नतीजा ये…See More
Wednesday
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए
"जनाब मनोज कुमार अहसास जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'तुमने अपने मातम पर भी खर्च किया मोटा पैसा  इस मिसरे में 'मोटा' की जगह "कितना" शब्द उचित होगा । 'उपहास,निरादर,अपमानों आज वही हकदार…"
Tuesday
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए
"ग़ज़ल पर बहुमूल्य प्रतिक्रिया ,इस्लाह के लिए हार्दिक आभार आदरणीया समर कबीर साहब सादर"
Sep 9
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब,बहुत उम्द: ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । 'दुनिया भर में खोजा तुझको पता नहीं पाया तेरा' इस मिसरे को यूँ कर लें:- 'दुनिया भर में ढूँढा लेकिन फिर भी नज़र न आया तू'"
Sep 9
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

एक ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए

2×15इस दुनिया में एक तमाशा जाने कितनी बार हुआवो दरिया में डूब गया जो तैर समंदर पार हुआअच्छे दिन की चाहत वालों ऐसी भी क्या बेताबी चार नियम बनते ही बोले जीना ही दुश्वार हुआएक पहाड़ी पर शीशे के घर में बैठा बाजीगर नाच नचाकर देख रहा है कौन बड़ा फनकार हुआतुमने अपने मातम पर भी खर्च किया मोटा पैसा और किसी निर्धन के घर में मुश्किल से त्यौहार हुआचार कदम की दूरी पर थी मंजिल जब दम टूट गया लेकिन यह भी बात बड़ी है चंदा का दीदार हुआकौन सुरीले गीतों से अब अपने दिल को बहलायेदिल से लिखना,दिल से गाना इस युग में…See More
Sep 9
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए
"आपकी बहुमूल्य इस्लाह के लिए हार्दिक आभार सुझावों का सादर स्वागत"
Sep 8
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

एक ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए

2×15सबका इक दिन आता है दिन मेरा भी आ जायेगा जीवन पूरा होते-होते जीना भी आ जायेगाआहें भरना सीख गए तो लिखना भी आ जायेगा इन शब्दों में इक दिन उसका चेहरा भी आ जायेगाइसको मन की लाचारी भी कहते हैं दुनिया वाले खुद से बातें करते करते कहना भी आ जायेगाआलू पर मिट्टी लिपटी थी ,मिट्टी से जब आया था दुनिया में कुछ रोज रहेगा छिलका भी आ जायेगाजिसकी चाहत में इतने दिन आस लगाकर जिंदा थे मिल न सका तो क्या उसके बिन जीना भी आ जायेगा?इतना गहरा सन्नाटा है इस छोटे से कमरे में, खामोशी को पी पी कर चुप रहना भी आ जायेगाजग…See More
Sep 7
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'मेरे मन की लाचारी में जल जायें ना मेरे हाथ' उर्दू शायरी में 'न' को 2 पर लेना उचित नहीं । 'अपना मानना,अपना कहना,अपना होना बात कई' 'मानना'…"
Sep 7
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

एक ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए

2×15मेरे मन की लाचारी में जल जायें ना मेरे हाथ मुझको फिर से पावन कर दे तू हाथों में लेके हाथमम्मी,पापा,बहना,भाई,बीवी,बच्चे और साथी काम-समय अपने हाथों में दिखते मुझको सबके हाथसुन लेने की आदत को कमजोरी समझा जाता है सच्चे साबित हो जाते हैं पल-पल हाथ नचाते हाथसच कहने की चाहत तो है लेकिन इन झूठों के बीच कैसे सबको बतलाऊं मैं मेरे भी हैं काले हाथअपना मानना,अपना कहना,अपना होना बात कई लेकिन मुश्किल से मिलते हैं साथ निभाने वाले हाथबन जाएगा रास्ता कोई बियाबान अंधियारों में छूट ना जाए इन हाथों से मेरे साथी…See More
Sep 3
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल (2×16): मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Aug 28
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए
":प्रिय मनोज अच्छे खयालात.... वह इसलिए ही जीत के बेहद करीब है कितने कुचल गये हैं ये उसको पता नहीं अच्छों के साथ अच्छा हो ज़रुरी नहीं 'मनोज' कहने को तो मैं कह दूँ जहाँ में खुदा नहीं"
Aug 26
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए
"हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब"
Aug 26
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए
"जनाब मनोज कुमार अहसास जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'मुझको तेरे रहम से मयस्सर तो क्या नहीं ' इस मिसरे में 'रहम' शब्द ग़लत है,सहीह शब्द "रह्म" है और इसका वज़्न 21 होता है,आप यहाँ "करम"…"
Aug 25
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल (2×16): मनोज अहसास
"हार्दिक आभार आदरणीय कबीर साहब आपकी बात पर विचार कर रहा हूँ सादर आभार"
Aug 25

Profile Information

Gender
Male
City State
saharanpur uttarpradesh
Native Place
India
Profession
Teaching
About me
Gazal sikhna chhahta hu

Manoj kumar Ahsaas's Blog

एक ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए

11212×4

मुझे पीसते हैं जो हर घड़ी,न वो दर्द मुझसे लिखे गए

किसी बेजुबान ख्याल में कई शेर यूं ही कहे गए

भरी रात में तेरी याद के जो चिराग बुझ के महकते हैं,

उन्हें जिंदा रखने की चाह में कई जाम हमसे पिये गये

जिसे हम समझते थे अपना घर वो जहान हमसे था बेखबर

कई रास्ते तो मकान के मुझे तोड़कर भी बुने गए

मुझे ढूंढ लाने की चाह में ,मेरे दोस्तों के वो मशवरे

मेरी जिंदगी का अज़ाब थे सो इसीलिए न सुने गए

कहीं सर…

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Posted on September 12, 2019 at 11:33pm — 1 Comment

एक ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए

2122×3+212

जिंदगी ने सब दिया पर चैन का बिस्तर नहीं

जिस जगह सर को न पटका ऐसा कोई दर नहीं

हार कर मजबूर होकर आज ये कहना पड़ा

इश्क इक ऐसा परिंदा है कि जिसका घर नहीं

मुझको मंजिल से जुदा कर तूने साबित कर दिया

मैं तेरे रस्ते पे हूं पर तू मेरा रहबर नहीं

इस जहां में बस वही आराम से जीता मिला

जिसको अपनी ही गरज है आसमां का डर नहीं

आंखों से ख्वाबों के संग तेरा भरोसा भी गया

मुझको जीना तो पड़ेगा पर तेरा होकर…

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Posted on September 10, 2019 at 10:17pm

एक ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए

2×15

इस दुनिया में एक तमाशा जाने कितनी बार हुआ

वो दरिया में डूब गया जो तैर समंदर पार हुआ

अच्छे दिन की चाहत वालों ऐसी भी क्या बेताबी

चार नियम बनते ही बोले जीना ही दुश्वार हुआ

एक पहाड़ी पर शीशे के घर में बैठा बाजीगर

नाच नचाकर देख रहा है कौन बड़ा फनकार हुआ

तुमने अपने मातम पर भी खर्च किया मोटा पैसा

और किसी निर्धन के घर में मुश्किल से त्यौहार हुआ

चार कदम की दूरी पर थी मंजिल…

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Posted on September 8, 2019 at 10:40pm — 1 Comment

एक ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए

2×15

सबका इक दिन आता है दिन मेरा भी आ जायेगा

जीवन पूरा होते-होते जीना भी आ जायेगा

आहें भरना सीख गए तो लिखना भी आ जायेगा

इन शब्दों में इक दिन उसका चेहरा भी आ जायेगा

इसको मन की लाचारी भी कहते हैं दुनिया वाले

खुद से बातें करते करते कहना भी आ जायेगा

आलू पर मिट्टी लिपटी थी ,मिट्टी से जब आया था

दुनिया में कुछ रोज रहेगा छिलका भी आ जायेगा

जिसकी चाहत में इतने दिन आस लगाकर जिंदा थे

मिल…

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Posted on September 6, 2019 at 11:41pm — 2 Comments

Comment Wall (10 comments)

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At 9:21pm on October 23, 2015, BAIJNATH SHARMA'MINTU' said…

शुक्रिया मनोज जी |

At 3:57pm on July 28, 2015, Rahul Dangi said…
बहुत बहुत स्वागत आदरणीय मनोज भाई जी
At 3:13pm on July 3, 2015, Rajat rohilla said…
धन्यवाद मनोज जी
At 11:40pm on July 1, 2015, Sandeep Kumar said…

आपका हार्दिक आभार :)

At 3:51pm on June 29, 2015, pratibha pande said…

 आभार 

At 11:10am on June 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० मनोज जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन कभी भी आसान नहीं होता . आपको इस सम्मान के लिये मेरी और  से बधाई . सादर .

At 10:37pm on June 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय मनोज कुमार एहसास जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना "मेरी बेटी" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:02am on May 28, 2015, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय मनोज जी
सादर!

At 11:15am on April 30, 2015, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

जिंदगी की कशमकश  व्यक्त करती अच्छी गजल। प्रयास अच्छा है

जय  श्री राधे
भ्रमर ५

At 9:03pm on April 14, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है !
 
 
 

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"आदरणीय गणेश जी 'बागी' जी आदाब और बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने के लिए आपका शुक्रगुज़ार हूँ…"
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मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"आदरणीय दण्डपाणि नाहक जी, अच्छी ग़ज़ल कही है, दाद कुबूल करें ।"
22 hours ago
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"ग़ज़ल 1212 1122 1212 22 जुनूँ गज़ब का मगर ये अज़ब कहानी है तलाश जारी है क्या चाँद में भी पानी है इधर…"
22 hours ago
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"बेहतरीन बाल गीत, बधाई स्वीकार कीजिएगा आदरणीय सतविन्द्र सरजी। "
22 hours ago

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"सराहना हेतु आभार आदरणीया बबिता गुप्ता जी."
22 hours ago

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"आभार आदरणीय डॉ छोटे लाल जी, सराहना से रचना सार्थक हुई."
22 hours ago
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"बेहतरीन पंक्तियाँ, आदरणीय गणेश सरज बधाई स्वीकार कीजिएगा।"
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अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"आदरणीया  बबिताजी हृदय से धन्यवाद आभार आपका"
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babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"बेहतरीन पंक्तियाँ चांद को परिभाषित करती,बधाई स्वीकार कीजिएगा आदरणीय लक्ष्मण सरजी। "
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