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Manoj kumar Ahsaas
  • 38, Male
  • saharanpur uttar pradesh
  • India
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Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"आदरणीय समर कबीर साहब आपके मार्गदर्शन से सुधार करता हूँ  सादर आभार"
Sep 7
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'बिन मेरे जब दिल तुम्हारा जीने के काबिल हुआ।देख ले मझधार ही मेरे लिए साहिल हुआ' मतले के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है, सुधार का प्रयास करें । 'उसको जाया कर…"
Sep 6
Manoj kumar Ahsaas commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post पर्व गुरुओं का मनाते आज हम -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"शिक्षक दिवस के अवसर पर सुंदर गजल प्रस्तुत करने के लिए हार्दिक बधाई ऐसा प्रतीत होता है कि ग़ज़ल कुछ जल्दबाजी में प्रस्तुत की गई है इसको थोड़े और तराशने की जरूरत है"
Sep 5
Manoj kumar Ahsaas commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-मिलती दुआ है
"नमस्कार आदरणीय ऐसा प्रतीत होता है कि आपने बहर के हिसाब से शब्दों को बिठाया है अभी आपको बहर पर मेरे ख्याल से और अधिक मेहनत करनी चाहिए बाकी भाव आपके बहुत अच्छे हैं और एक अच्छी गजल की बधाई आपको देता हूं"
Sep 5
Chetan Prakash commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"आदाब, मनोज अहसास साहब, मतला, मुझे रब्त का अभाव लगा! वक़्त भी आपने ग़ज़ल को क़म दिया है, आप स्वयं बेहतर कर सकते हैं, ऐसा प्रतीत हुआ! देखिए गा! "
Sep 4
Manoj kumar Ahsaas commented on Sushil Sarna's blog post एक दोहा गज़ल - नज़रें
"दोहा गजल के लिए अच्छा प्रयास हुआ है आदरणीय बहुत-बहुत आभार"
Sep 3
Manoj kumar Ahsaas commented on मोहन बेगोवाल's blog post कीमत
"लघु कथा का अच्छा प्रयास हुआ है आदरणीय अभी कथनों को स्पष्ट रूप से प्रगट करने के लिए आप को और अधिक प्रयास करना चाहिए सादर आभार"
Sep 3
Manoj kumar Ahsaas commented on आशीष यादव's blog post कहो सूरमा! जीत लिए जग?
"इस लंबी रचना में आप ने मानवता के जिस पक्ष को उजागर किया है उसके लिए आप हार्दिक बधाई के पात्र हैं सादर आभार"
Sep 2
Manoj kumar Ahsaas commented on AMAN SINHA's blog post आखिर क्यों?
"प्रस्तुति के लिए हार्दिक स्वागत आदरणीय कृपया यह बताने का कष्ट करें यह कौन सी विधा है आपने किस विधा में रचना की है तथा यह जो आपने हाईलाइट किए हैं शब्द इसका क्या कारण है सादर"
Sep 2
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

2122   2122    2122    212बिन मेरे जब दिल तुम्हारा जीने के काबिल हुआ। देख ले मझधार ही मेरे लिए साहिल हुआ।जो नहीं है पास अपने उसकी बेचैनी के साथ, उसको जाया कर दिया है जो हमें हासिल हुआ।सामने आकर खड़ी हो जाती हैं सूरत कईं,खुद में खुद को खोजना मेरे लिए मुश्किल हुआ।कह नहीं पाया मैं अपने दिल की सारी बात पर, तू मेरी ग़ज़लों में लगभग हर दफा शामिल हुआ।वेदनाओं के सफर में साथ है तू हर घड़ी,और तेरा महसूस होना ही मेरा कातिल हुआ।कोई सन्नाटे में पहरा दे रहा है रात भर,कोई यादों की तरफ से हर तरह ग़ाफ़िल हुआ।हमने…See More
Sep 2
Manoj kumar Ahsaas commented on Om Parkash Sharma's blog post दोहे
"आपने बहुत अच्छे दोहे लिखे आदरणीय सादर बधाई"
Sep 2
Manoj kumar Ahsaas commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post मुसल्सल ग़ज़ल (नसीहत प्यार की)
"बहुत खूबसूरत गजल हुई है आदरणीय कृपया बताने का कष्ट करें कि आपने जो 2 शब्द प्रयोग किए हैं व्यापार और तैयार यह क्या आपने सही प्रयोग किए हैं या उर्दू में इनको ऐसे लिखा जाता है"
Sep 2
Sushil Sarna commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"आदरणीय बहुत सुंदर प्रस्तुति हुई है ।हार्दिक बधाई"
Aug 31
Manoj kumar Ahsaas replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-134
"बहुत बहुत आभार आदरणीय"
Aug 27
Manoj kumar Ahsaas replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-134
"आदरणीय समर कबीर साहब  सादर प्रणाम आपका आशीर्वाद हमारी पूंजी है बहुत बहुत आभार"
Aug 27
Manoj kumar Ahsaas replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-134
"हार्दिक आभार आदरणीय"
Aug 27

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Male
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saharanpur uttarpradesh
Native Place
India
Profession
Teaching
About me
Gazal sikhna chhahta hu

Manoj kumar Ahsaas's Blog

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

2122   2122    2122    212

बिन मेरे जब दिल तुम्हारा जीने के काबिल हुआ।

देख ले मझधार ही मेरे लिए साहिल हुआ।

जो नहीं है पास अपने उसकी बेचैनी के साथ,

उसको जाया कर दिया है जो हमें हासिल हुआ।

सामने आकर खड़ी हो जाती हैं सूरत कईं,

खुद में खुद को खोजना मेरे लिए मुश्किल हुआ।

कह नहीं पाया मैं अपने दिल की सारी बात पर,

तू मेरी ग़ज़लों में लगभग हर दफा शामिल हुआ।

वेदनाओं के सफर में साथ है तू हर घड़ी,

और तेरा…

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Posted on September 2, 2021 at 11:51pm — 3 Comments

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

1222    1222     1222     1222

चलो अच्छा हुआ वो अब पता पाने नहीं आते ।

खलिश ये रह गई दिल में सितम ढाने नहीं आते।

मुझे उस पार के लोगों से बस इतनी शिकायत है,

सफर कैसा रहा वो ये भी बतलाने नहीं आते।

तमाशा बन गई है दोस्ती नफरत की दुनिया में,

पुराने यार भी मुश्किल में समझाने नहीं आते।

हमारी बात तो दिलकश तुम्हें लग ही नहीं सकती,

हमें तहज़ीब तो आती है अफसाने नहीं आते ।

झुलस जाती है मेरी सोच अनचाहे ख्यालों से…

Continue

Posted on August 24, 2021 at 11:47pm — 3 Comments

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

221    2121    1221     212

वो सिलसिला मिला ही नहीं जो जुड़ा रहे।

हम सबके होके दोस्तो सबसे जुदा रहे।

दीवारें आंधियों का असर सह रही है पर,

ये देखना है घर मेरा कब तक खड़ा रहे।

टुकड़े तुम्हारी याद के दिल में समेटकर,

सारे जहां के रिश्तों से हम बावफ़ा रहे।

बचपन से ही उदास रही है मेरी नज़र,

दो चार रोज साथ तेरे खुशनुमा रहे।

तेरे क़रीब कौन है इसका मलाल क्या,

मेरे लबों पर बस तेरे हक़ में दुआ…

Continue

Posted on July 25, 2021 at 11:35pm — 2 Comments

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

1222    1222    122

खबर झूठी उड़ाना चाहता हूँ,

तेरी यादें छुपाना चाहता हूँ।

तुम्हारे पास थोड़ा वक्त हो तो,

मैं हाले दिल सुनाना चाहता हूँ।

रकीबों की गली में आ गया हूँ,

तेरे घर में ठिकाना चाहता हूँ।

जो मेरी जान के दुश्मन बने हैं,

उन्हीं के हाथ आना चाहता हूँ।

बवंडर क्यों उठा है सरहदों पर,

मैं सबको सच बताना चाहता हूँ।

सियासत ,घर के झगड़े, दिल की बातें

मैं सब से दूर जाना…

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Posted on July 3, 2021 at 8:39pm — 2 Comments

Comment Wall (10 comments)

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At 9:21pm on October 23, 2015, BAIJNATH SHARMA'MINTU' said…

शुक्रिया मनोज जी |

At 3:57pm on July 28, 2015, Rahul Dangi Panchal said…
बहुत बहुत स्वागत आदरणीय मनोज भाई जी
At 3:13pm on July 3, 2015, Rajat rohilla said…
धन्यवाद मनोज जी
At 11:40pm on July 1, 2015, Sandeep Kumar said…

आपका हार्दिक आभार :)

At 3:51pm on June 29, 2015, pratibha pande said…

 आभार 

At 11:10am on June 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० मनोज जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन कभी भी आसान नहीं होता . आपको इस सम्मान के लिये मेरी और  से बधाई . सादर .

At 10:37pm on June 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय मनोज कुमार एहसास जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना "मेरी बेटी" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:02am on May 28, 2015, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय मनोज जी
सादर!

At 11:15am on April 30, 2015, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

जिंदगी की कशमकश  व्यक्त करती अच्छी गजल। प्रयास अच्छा है

जय  श्री राधे
भ्रमर ५

At 9:03pm on April 14, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है !
 
 
 

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