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Manoj kumar Ahsaas
  • 37, Male
  • saharanpur uttar pradesh
  • India
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Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।"
Mar 7
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास
"आदरणीय मुसाफ़िर जी हार्दिक आभार"
Mar 5
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास
"आदरणीय कबीर साहब महत्वपूर्ण इस्लाह के लिए हार्दिक आभार सुधार के लिए सदैव प्रयासरत रहने का प्रयास करूंगा आभार सादर"
Mar 5
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

ग़ज़ल मनोज अहसास

1222×4किसी की याद में ज़ख्मों को दिल मे पालते रहना, तबाही का ही रस्ता है यूँ शोलों पर खड़े रहना।न जाने कौन से पल में कलम गिर जाए हाथों से,मगर तुम आखिरी पल तक ग़ज़ल के सामने रहना।जहाँ पर शाम ढलती है वहाँ पर देखकर सोचा, मेरी यादों में रहकर तुम यूँ ही मेरे बने रहना।वो आएं या न आएं ये तो उनकी मर्जी है लेकिन, मुहब्बत की है तो बस रास्ते को देखते रहना।किसी सूरत भी मेरा दिल बहल सकता नहीं फिर भी, तकल्लुफ का तकाज़ा है तबीअत पूछते रहना।लगाकर आग तुम खुश हो रहे हो जिस बगीचे में, उसी की राख में तुम उम्र भर तन्हा…See More
Mar 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई । आ. भाई समर जी की बातों का संज्ञान लें ..."
Mar 4
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'कोई अपनी मंजिल पर तन्हा खड़ा है,कोई जिंदगी के भंवर में फंसा है' इस मिसरे में 'पर' को "पे" कर लें,मिसरा बह्र से ख़ारिज हो रहा है । तेरा सबसे मिलना वो…"
Mar 3
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

ग़ज़ल मनोज अहसास

122×8मेरे साथ कोई ज़रा मुस्कुरा ले,कलेजा बहुत भारी होने लगा है।ये जीवन का रस्ता वहाँ आ गया है,जहाँ हर किसी को मुझी से गिला है।वो बचपन के साथी जो खाते थे कसमें,रहेंगे सदा साथ जीवन डगर में।कोई अपनी मंजिल पर तन्हा खड़ा है,कोई जिंदगी के भंवर में फंसा है।जो पाए हैं तुझको खुदी को मिटा कर,वो पैगाम ए उल्फत ही देकर गए पर,तेरा सबसे मिलना वो चेहरे बदल कर,जमाने में झगड़े का जरिया बना है।मुलाकात का कोई वादा नहीं है,मगर मेरी उम्मीद मिट जाए कैसे,हमें भी यकीनन मिलेंगे कभी वो,तलबगारों को तो खुदा भी मिला है।फसाना…See More
Mar 2
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Feb 19
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है, बधाई स्वीकार करें । आपने ग़ज़ल के अरकान ग़लत लिख दिए हैं,इसके अरकान हैं 2122 1122 1122 22"
Feb 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज जी, अच्छी गजल हुई है , हार्दिक बधाई । 'बेटी जब कालेज में पढ़ने' कर लीजिएगा ...सादर"
Feb 17
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास
"हार्दिक आभार प्रिय मित्र शाहिद जी सादर"
Feb 17
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास
"प्रिय मनोज भाई, आदाब। इस ख़ूबसूरत ग़ज़ल की रचना पर आपको हार्दिक बधाई।     मेरे ज़ख़्मों पे बड़ी तेरी इनायत होगी    संग हाथों में कोई तू भी उठा ले अब तो आपका ये शेअर ख़ास तौर पे बहुत अच्छा लगा।"
Feb 16
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

ग़ज़ल मनोज अहसास

2122   2122   2122   22जनाब क़तील शिफ़ाई साहब की एक ग़ज़ल 'अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको' जिसे जगजीत सिंह साहब ने गाया है उसी ग़ज़ल को गुनगुनाते हुए ये ग़ज़ल हुई है बहर थोड़ी परिवर्तित हुई है तमाम दोस्तों को सादर समर्पित स्वीकारेंकुछ हसीं फूलों से जीवन को सजा ले अब तो, खुद को गुमनामी के पतझड़ से बचा ले अब तो.मेरे जख्मों पे बड़ी तेरी इनायत होगी, संग हाथों में कोई तू भी उठा ले अब तो.अपनी गुल्लक को दिखा माँ को कहा बेटी ने, है बहुत पैसे तू पापा को बुला ले अब तो.अपने आपे में नहीं कब से मुझे क्या…See More
Feb 16
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास
"आदरणीय रवि भसीन शाहिद जी बहुत-बहुत शुक्रिया मेरे दिमाग में भी यह बात थी और कई लोगों ने भी सुझाव दिया आपका सुझाव उत्तम है मुझ को स्वीकार करता हूं"
Feb 14
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल मनोज अहसास
"आदरणीय मनोज भाई, आपको इस ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर हार्दिक बधाई। ख़ास तौर से मुझे आपका ये शेर बहुत अच्छा लगा:पापा की आंखों ने उसको जाने क्या क्या समझायाबेटी जब कालेज की खातिर घर से पहली बार गईएक सुझाव देना चाहूँगा कि "कालेज की ख़ातिर" की जगह…"
Feb 14
Manoj kumar Ahsaas commented on Samar kabeer's blog post एक ताज़ा ग़ज़ल
"एक बेमिसाल ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय आपको तो पता ही है मैं इस बहर पर भी आजकल काम कर रहा हूँ  मुझे इस ग़ज़ल से बड़ी प्रेरणा मिलेगी सादर"
Feb 14

Profile Information

Gender
Male
City State
saharanpur uttarpradesh
Native Place
India
Profession
Teaching
About me
Gazal sikhna chhahta hu

Manoj kumar Ahsaas's Blog

ग़ज़ल मनोज अहसास

1222×4

किसी की याद में ज़ख्मों को दिल मे पालते रहना,

तबाही का ही रस्ता है यूँ शोलों पर खड़े रहना।

न जाने कौन से पल में कलम गिर जाए हाथों से,

मगर तुम आखिरी पल तक ग़ज़ल के सामने रहना।

जहाँ पर शाम ढलती है वहाँ पर देखकर सोचा,

मेरी यादों में रहकर तुम यूँ ही मेरे बने रहना।

वो आएं या न आएं ये तो उनकी मर्जी है लेकिन,

मुहब्बत की है तो बस रास्ते को देखते रहना।

किसी सूरत भी मेरा दिल बहल सकता नहीं फिर…

Continue

Posted on March 4, 2020 at 11:00pm — 1 Comment

ग़ज़ल मनोज अहसास

122×8



मेरे साथ कोई ज़रा मुस्कुरा ले,

कलेजा बहुत भारी होने लगा है।

ये जीवन का रस्ता वहाँ आ गया है,

जहाँ हर किसी को मुझी से गिला है।



वो बचपन के साथी जो खाते थे कसमें,

रहेंगे सदा साथ जीवन डगर में।

कोई अपनी मंजिल पर तन्हा खड़ा है,

कोई जिंदगी के भंवर में फंसा है।



जो पाए हैं तुझको खुदी को मिटा कर,

वो पैगाम ए उल्फत ही देकर गए पर,

तेरा सबसे मिलना वो चेहरे बदल कर,

जमाने में झगड़े का जरिया बना है।



मुलाकात का कोई वादा… Continue

Posted on March 1, 2020 at 10:45pm — 4 Comments

ग़ज़ल मनोज अहसास

2122   2122   2122   22

जनाब क़तील शिफ़ाई साहब की एक ग़ज़ल 'अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको' जिसे जगजीत सिंह साहब ने गाया है उसी ग़ज़ल को गुनगुनाते हुए ये ग़ज़ल हुई है बहर थोड़ी परिवर्तित हुई है

तमाम दोस्तों को सादर समर्पित

स्वीकारें

कुछ हसीं फूलों से जीवन को सजा ले अब तो,

खुद को गुमनामी के पतझड़ से बचा ले अब तो.

मेरे जख्मों पे बड़ी तेरी इनायत होगी,

संग हाथों में कोई तू भी उठा ले अब तो.

अपनी गुल्लक को दिखा माँ को…

Continue

Posted on February 16, 2020 at 10:00pm — 4 Comments

ग़ज़ल मनोज अहसास

2×15

बीच सफर में धीरज टूटा,हाथों से पतवार गई.

मेरे मन की लाचारी से मेरी कोशिश हार गई.

एक अधूरा ख्वाब जो मुद्दत से आंखों में जिंदा है,

उसको लिखने की कोशिश में स्याही भी बेकार गई.

पिछले साल में और कोई था अब के साल में और कोई,

एक नए इजहार को चाहत फूलों के बाजार गई.

बरसों पहले जिसको चाहा उसकी यादें साथ रहें,

एक दुआ के आगे मेरी हर इक ख्वाहिश हार गई.

पापा की आंखों ने उसको जाने क्या क्या समझाया,

बेटी जब…

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Posted on February 12, 2020 at 1:10pm — 5 Comments

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At 9:21pm on October 23, 2015, BAIJNATH SHARMA'MINTU' said…

शुक्रिया मनोज जी |

At 3:57pm on July 28, 2015, Rahul Dangi Panchal said…
बहुत बहुत स्वागत आदरणीय मनोज भाई जी
At 3:13pm on July 3, 2015, Rajat rohilla said…
धन्यवाद मनोज जी
At 11:40pm on July 1, 2015, Sandeep Kumar said…

आपका हार्दिक आभार :)

At 3:51pm on June 29, 2015, pratibha pande said…

 आभार 

At 11:10am on June 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० मनोज जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन कभी भी आसान नहीं होता . आपको इस सम्मान के लिये मेरी और  से बधाई . सादर .

At 10:37pm on June 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय मनोज कुमार एहसास जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना "मेरी बेटी" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:02am on May 28, 2015, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय मनोज जी
सादर!

At 11:15am on April 30, 2015, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

जिंदगी की कशमकश  व्यक्त करती अच्छी गजल। प्रयास अच्छा है

जय  श्री राधे
भ्रमर ५

At 9:03pm on April 14, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है !
 
 
 

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