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Manoj kumar Ahsaas
  • 38, Male
  • saharanpur uttar pradesh
  • India
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"बढ़िया कहा भाई मनोज जी...बधाई कुबूल करें..."
Apr 16
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"जनाब मनोज कुमार अहसास जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ। जनाब लक्ष्मण धामी जी से सहमत हूँ उनकी इस्लाह पर ग़ौर कीजियेगा। 'इक न इक दिन आपसे जब सामना हो जाएगा' इस मिसरे की शुरुआत यूँ करना बहतर होगा - उसका इक…"
Apr 11
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज जी सादर अभिवादन। अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई। /छोड़ दूँ शेरों सुखन और तेरी यादों का सफर/ में शेर - ओ-सुखन(शेरोसुखन) कर लें। /रख किसी मायूम के हाथों पर अपना हाथ तू /में मुझे मायूम का अर्थ समझ नहीं आया। कहीं मासूम तो नहीं । /आपने वा…"
Apr 8
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

2122   2122   2122   212इक न इक दिन आपसे जब सामना हो जाएगा ।जो भरम दिल में बचा है खुद रिहा हो जाएगा ।इतने बुत मौजूद है तेरे खुदा के भेष में, सजदा करते-करते तू खुद से जुदा हो जाएगा ।सब पुराने पेड़ों को गर काट दोगे तुम यूं ही,घर सलामत भी रहा तो लापता हो जाएगा।ढूंढना अब छोड़ दे उस तक पहुँच का रास्ता,खुद को पाले तो तू खुद ही रास्ता हो जाएगा ।छोड़ दूँ शेरों सुखन और तेरी यादों का सफर ,ऐसा करने से तो खुद से फ़ासला हो जाएगा।रख किसी मायूम के हाथों पर अपना हाथ तू ,इन लकीरों में जमा लावा हिना हो जाएगा…See More
Apr 8
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"बहुत ही खूब ग़ज़ल कही भी मनोज जी...बधाई"
Feb 18
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"जनाब मनोज 'अह्सास' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें।  जनाब 'जान' गोरखपुरी साहिब की इस्लाह पर ग़ौर कीजियेगा,  सफर उदास रहा जिनकी आस में अपना, किसी के साथ वो चुपचाप चल पड़े होंगे।  इस शे'र के…"
Feb 16
gumnaam pithoragarhi commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"वाह बहुत खूब।, अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई।"
Feb 16
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"बहुत बहुत आभार आदरणीय जान गोरखपुरी साहब  "
Feb 15
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"बहुत ख़ूब, मनोज अहसास जी,ये ग़ज़ल निश्चत रूप से सुखद अहसास दे रही है बहुत बहुत बधाई। कुछ मिसरों को और स्पष्टता की दरकार है।जैसे //पुराने ख़त मेरे अब भी जो सामने होंगे,तो पढ़के होंठ यकीनन ही कांपते होंगे।//  ऐसे कहे तो अधिक स्पष्टता होगी पुराने खत…"
Feb 15
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

1212    1122     1212     112/22पुराने ख़त मेरे अब भी जो सामने होंगे, तो पढ़के होंठ यकीनन ही कांपते होंगे।सफर उदास रहा जिनकी आस में अपना, किसी के साथ वो चुपचाप चल पड़े होंगे।तुम्हारे होठों को छूकर करार पाएंगे, इसी ख्याल से मिसरे बहक रहे होंगे।बिछड़ के उनसे मैं कितना उदास रहता हूँ, मैं सोचता हूँ वो अक्सर ये सोचते होंगे।मैं अपने बच्चों को ख़्वाबों में देखता हूँ यहाँ, वह सोके उठते ही मुझको पुकारते होंगे।तुम्हें जो फूल किताबों में देके आया था, कई बरस से वो तुमने नहीं छुए होंगे।निकलके भीड़ से मिल पाते…See More
Feb 15
Manoj kumar Ahsaas's blog post was featured

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

221   2121  1221  212ये मानता हूँ पहले से बेकल रहा हूँ मैं,लेकिन तेरे ख़्यालों का संदल रहा हूँ मैं।अब होश की ज़मीन पर टिकते नहीं क़दम,बरसों तुम्हारे प्यार में पागल रहा हूँ मैं।हैरत से देखते हैं मुझे रास्ते के लोग,बिल्कुल किनारे राह के यूँ चल रहा हूँ मैं।मुझको उदासियां मिली है आसमान से,चुपचाप इन के आसरे में जल रहा हूँ मैं।साहिल पर जाके तू मुझे मुड़ कर तो देखता,इक वक्त तेरी रूह की हलचल रहा हूँ मैं।मेरी खुशी है किसमें मुझे खुद नहीं पता,दुनिया की नाप तौल में बेकल रहा हूँ मैं।अब खुद को ढूंढ लेने की…See More
Feb 9
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर साहब पूरी ग़ज़ल को दोबारा देखता हूं और आपके सुझाव पर अमल करने की कोशिश करता हूं सादर आभार"
Jan 30
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । 'ये मानता हूँ पहले से बेकल रहा हूँ मैं,लेकिन तेरे ख़्यालों का संदल रहा हूँ मैं' मतले के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है,देखियेगा । 'अब होश की ज़मीन पर टिकते नहीं…"
Jan 30
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय जान गोरखपुरी साहब बहुत दिनों बाद आप मेरी ग़ज़ल पर आए  हार्दिक आभार"
Jan 29
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"221 2121 1221 212 ये मानता हूँ पहले से बेकल रहा हूँ मैं, लेकिन तेरे ख़्यालों का संदल रहा हूँ मैं।..... मिसरों में रब्त नहीं दिख रहा। अब होश की ज़मीन पर टिकते नहीं क़दम, बरसों तुम्हारे प्यार में पागल रहा हूँ मैं।.....अच्छा शेर हैरत से देखते हैं मुझे…"
Jan 29
Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"आदरणीय अमर उद्दीन अमीर साहब बहुत-बहुत शुक्रिया आपके सुझाव पर गौर कर लूंगा"
Jan 28

Profile Information

Gender
Male
City State
saharanpur uttarpradesh
Native Place
India
Profession
Teaching
About me
Gazal sikhna chhahta hu

Manoj kumar Ahsaas's Blog

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

2122   2122   2122   212

इक न इक दिन आपसे जब सामना हो जाएगा ।

जो भरम दिल में बचा है खुद रिहा हो जाएगा ।

इतने बुत मौजूद है तेरे खुदा के भेष में,

सजदा करते-करते तू खुद से जुदा हो जाएगा ।

सब पुराने पेड़ों को गर काट दोगे तुम यूं ही,

घर सलामत भी रहा तो लापता हो जाएगा।

ढूंढना अब छोड़ दे उस तक पहुँच का रास्ता,

खुद को पाले तो तू खुद ही रास्ता हो जाएगा ।

छोड़ दूँ शेरों सुखन और तेरी यादों का सफर ,

ऐसा करने…

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Posted on April 8, 2021 at 12:14am — 3 Comments

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

1212    1122     1212     112/22

पुराने ख़त मेरे अब भी जो सामने होंगे,

तो पढ़के होंठ यकीनन ही कांपते होंगे।

सफर उदास रहा जिनकी आस में अपना,

किसी के साथ वो चुपचाप चल पड़े होंगे।

तुम्हारे होठों को छूकर करार पाएंगे,

इसी ख्याल से मिसरे बहक रहे होंगे।

बिछड़ के उनसे मैं कितना उदास रहता हूँ,

मैं सोचता हूँ वो अक्सर ये सोचते…

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Posted on February 14, 2021 at 11:07pm — 5 Comments

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

221   2121  1221  212

ये मानता हूँ पहले से बेकल रहा हूँ मैं,

लेकिन तेरे ख़्यालों का संदल रहा हूँ मैं।

अब होश की ज़मीन पर टिकते नहीं क़दम,

बरसों तुम्हारे प्यार में पागल रहा हूँ मैं।

हैरत से देखते हैं मुझे रास्ते के लोग,

बिल्कुल किनारे राह के यूँ चल रहा हूँ मैं।

मुझको उदासियां मिली है आसमान से,

चुपचाप इन के आसरे में जल रहा हूँ मैं।

साहिल पर जाके तू मुझे मुड़ कर तो देखता,

इक वक्त तेरी रूह की हलचल रहा हूँ…

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Posted on January 28, 2021 at 11:35pm — 5 Comments

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

221   2121    1221    212

अपनी खता लिखूं या ख़ुदा का किया लिखूं .

इस दौरे नामुराद को किसका लिखा लिखूं .

उठती नहीं है तेरी तरफ मेरी उंगलियां,

फिर कौन सी कलम से तुझे बेवफा लिखूं.

मैं तेरा नाम ला नहीं सकता बयान में,

अपने ख़्याल पर बता किस का पता लिखूं.

मेरी पुकार तो नहीं जाएगी आप तक,

मैं किसके जरिए साल मुबारक नया लिखूं.

है याद मुझको तेरा वो छूना मेरे क़दम,

तब कैसे खुद को तेरी नज़र से गिरा…

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Posted on January 15, 2021 at 11:33pm — 6 Comments

Comment Wall (10 comments)

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At 9:21pm on October 23, 2015, BAIJNATH SHARMA'MINTU' said…

शुक्रिया मनोज जी |

At 3:57pm on July 28, 2015, Rahul Dangi Panchal said…
बहुत बहुत स्वागत आदरणीय मनोज भाई जी
At 3:13pm on July 3, 2015, Rajat rohilla said…
धन्यवाद मनोज जी
At 11:40pm on July 1, 2015, Sandeep Kumar said…

आपका हार्दिक आभार :)

At 3:51pm on June 29, 2015, pratibha pande said…

 आभार 

At 11:10am on June 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० मनोज जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन कभी भी आसान नहीं होता . आपको इस सम्मान के लिये मेरी और  से बधाई . सादर .

At 10:37pm on June 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय मनोज कुमार एहसास जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना "मेरी बेटी" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:02am on May 28, 2015, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय मनोज जी
सादर!

At 11:15am on April 30, 2015, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

जिंदगी की कशमकश  व्यक्त करती अच्छी गजल। प्रयास अच्छा है

जय  श्री राधे
भ्रमर ५

At 9:03pm on April 14, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है !
 
 
 

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