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Mohammed Arif
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डॉ छोटेलाल सिंह commented on Mohammed Arif's blog post कविता -तुम्हें मेरी फ़िक्र कहाँ है
"आदरणीय मो आरिफ साहब सुंदर भावों से सजी अच्छी कविता के लिए दिली मुबारकबाद कुबूल कीजिए"
Feb 21
Mohammed Arif posted a blog post

कविता -तुम्हें मेरी फ़िक्र कहाँ है

तुम्हें मेरी फिक्र कहाँ हैसाँझ के आगोश मेंदिन भर की थकान राहत ले रही हैविश्वास की लौ धीरे-धीरे टिमटिमा रही हैऐसे में अब तुम्हारी प्रतीक्षा शेष हैतुम्हें मेरा वादा कहाँ याद हैकह दो आज फिर मैं झूठ नहीं बोलूँगातुम्हारे झूठ पर मेरा विश्वास टिका हैशहर के कॉफी हाऊस सेबूढ़ों की टोलियाँ भी घर जा रही हैमस्जिद की मीनार औरमंदिर के कलश पर दिन भर मंडराने वालेकबूतरों का झुंड भी चला गया हैऐसे में मेरे भरोसे की पतवार कहाँ हैबच्चे भी माँ के साथघोसले में दुबक गए हैंऔर माँ ने आख़िरी तिनके से घोसला पूरी तरह से ढँक…See More
Feb 21
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय दयाराम मेथानी जी ।"
Dec 29, 2018
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"लाजवाब अश'आरों से सजी ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दिली मुबारकबाद आदरणीय शिज्जू शकूर जी ।"
Dec 28, 2018
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"बहुत उम्दा ग़ज़ल ।दिली मुबारकबाद आदरणीय रवि शुक्ला जी ।"
Dec 28, 2018
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"बेहतरीन ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दिली मुबारकबाद आदरणीय मुनव्वर अली ताज साहब ।"
Dec 28, 2018
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"शे'र दर शे'र दिली मुबारक आदरणीय अजय गुप्ता जी ।"
Dec 28, 2018
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"लाजवाब अश'आरों से सुसज्जित ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दिली मुबारकबाद आदरणीया अंजलि गुप्ता जी ।"
Dec 28, 2018
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"शे'र दर शे'र दिली मुबारकबाद आदरणीय अनीस शेख जी ।"
Dec 28, 2018
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"ग़ज़ल का अच्छा प्रयास । दिली मुबारकबाद कुबूल करें आदरणीय मोहन बेगोवाल जी । आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब की इस्लाह का संज्ञान लें ।"
Dec 28, 2018
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"आदरणीय गजेंद्र श्रोत्रिय जी आदाब,                 बहुत उम्दा अश'आरों से सजी ग़ज़ल के लिए दिली मुबारकबाद कुबूल करें । आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब की इस्लाह का संज्ञान लें ।"
Dec 28, 2018
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"शे'र दर शे'र दिली मुबारकबाद आदरणीय गुरप्रीत जी । आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब की इस्लाह का संज्ञान लें ।"
Dec 28, 2018
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"शे'र दर शे'र दिली दाद के साथ मुबारकबाद आदरणीय वासुदेव जी ।"
Dec 28, 2018
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"बहुत ही उम्दा अश'आरों से सजी ग़ज़ल जिसमें हर शे'र एक से बढ़कर एक । दिली मुबारक कुबूल करें आदरणीय तस्दीक़ अहमद जी ।"
Dec 28, 2018
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"आदरणीय अमित कुमार जी आदाब,                         बहुत ही उम्दा अश'आरों से सुसज्जित ग़ज़ल । ख़ासतौर से 5वाँ शे'र अच्छा लगा । दिली मुबारक कुबूल करें ।"
Dec 28, 2018
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"बहुत ही उम्दा ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दिली मुबारकबाद कुबूल करें आदरणीय लक्ष्मण धामी जी ।"
Dec 28, 2018

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कविता -तुम्हें मेरी फ़िक्र कहाँ है



तुम्हें मेरी फिक्र कहाँ है

साँझ के आगोश में

दिन भर की थकान

राहत ले रही है

विश्वास की लौ धीरे-धीरे टिमटिमा रही है

ऐसे में अब तुम्हारी प्रतीक्षा शेष है

तुम्हें मेरा वादा कहाँ याद है

कह दो आज फिर मैं झूठ नहीं बोलूँगा

तुम्हारे झूठ पर मेरा विश्वास टिका है

शहर के कॉफी हाऊस से

बूढ़ों की टोलियाँ भी घर जा रही है

मस्जिद की मीनार और

मंदिर के कलश पर

दिन भर मंडराने वाले

कबूतरों का झुंड भी चला गया है

ऐसे में मेरे भरोसे की पतवार कहाँ…

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Posted on February 21, 2019 at 3:18pm — 1 Comment

कविता- हिन्दी है मेरी धड़कन



देश की धड़कन

वाणी का यौवन

संवाद का आँगन

हिंदी है मेरा तन-मन

अपनों से रखती है लगाव

भरती दिलों के घाव

मिटाती है अलगाव

हिंदी में है मेरा झुकाव

सबकी ज़रूरत

दिलों की हसरत

मिटाती नफ़रत

हिंदी है मेरी वकालत

शब्दों का हल

खुशियों का हर पल

सरस कलकल छलछल

हिंदी है मेरा आत्मबल

भारत की है शान

संपर्क की पहचान

सरगम की तान

हिंदी है मेरा स्वाभिमान

भेदभाव भी सहती है

मगर सच को सच कहती है

दिलों में…

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Posted on September 14, 2018 at 8:00am — 5 Comments

ग़ज़ल बह्र -फऊलुन -फऊलुन -फऊलुन -फऊलुन

ज़माने को मेरी ज़रूरत नहीं है

मुझे  तो किसी से शिकायत नहीं है ।

.

अकेले में रहने की आदत है मुझको

किसी से भी मेरी अदावत नहीं है ।

.

नई पीढ़ी का ये चलन आज देखो

ज़रा सी भी इनमें लियाक़त नहीं है ।

.

है कितना यहाँ झूट महफ़ूज़ यारो

कि सच्चों की कोई अदालत नहीं है ।

.

सरे आम लुटती है इज़्ज़त यहाँ पर

किसी की यहाँ अब हिफ़ाज़त नहीं है ।

.

लगा मुझको झूटों के बाज़ार में यूँ

कि सच बोलने की इजाज़त नहीं है ।

.

मौलिक…

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Posted on September 5, 2018 at 11:30pm — 18 Comments

बारिश की क्षणिकाएँ



(1) बूँदें नहीं

चाँदी के सिक्के गिरते हैं

बादलों की झोली से

और धरती लूट लेती है ।

*******

(2) वर्षा कुबेर

दोनों हाथों से लुटाता है

वर्षा -धन

नदियाँ, सरोवर और तालाब

लूटकर संग्रहित कर लेते हैं ।

*******

(3) बारिश की आत्मकथा

साल भर लिखते रहते हैं

पेड़-पौधे और हरियाली ।

*******

(4) बारिश की बूँदें

नई धुनें

तैयार करने लगती है

राग-मल्हार के लिए ।

*******

(5) बारिश का

अहसास कब होता है ?

जब…

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Posted on July 17, 2018 at 8:36am — 27 Comments

Comment Wall (6 comments)

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At 8:39pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय आरिफ़ मोहम्मद साहब प्रणाम
बहुत शुक्रिया
आपकी सलाह पर तुरंत अमल होगा
At 8:57am on March 6, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय आरिफ़ सर
आपको कविता अच्छी लगी मेरा लिखना सार्थक हुआ बहुत शुक्रिया
At 2:08pm on January 18, 2018, dandpani nahak said…
जनाब मोहम्मद आरिफ़ जी आदाब
शुक्रगुज़ार हूँ की आपको मेरी ग़ज़ल पसंद आई और गुणी जनों की राय जानने को बेक़रार भी हूँ आशा है गुणीजन मेरी गलतियों को बताएं ताकि मैं आगे सुधर कर सकूँ! आपका बहुत शुक्रिया
At 5:05pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय जनाब मोहम्मद आरिफ साहब आदाब ,नमस्कार
ये मेरा परम सौभाग्य की मेरी पहली ही रचना हेतु आपने अपना बहुमूल्य समय निकाला,पढ़ा और सराहा .निश्चित ही मुझमें अभी बहुत कमियाँ हैं आशा करता हूँ आप जैसे गुणीजनों के सानिध्य में कुछ सीख सकूँगा
बहुत बहुत शुक्रिया तथा देरी के लिए माफ़ी चाहता हूँ
At 10:54am on January 2, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय आरिफ जी ..आपके मित्रों की श्रेणी में खुद को पाकर मैं सुखद अनुभव कर रहा हूँ ..सादर 

At 4:59pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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