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It's Naveen Mani Tripathi's birthday today!

Naveen Mani Tripathi
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  • Ajay Tiwari
 

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Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आ0 कबीर सर सादर नमन । बहुत अच्छी इस्लाह हो गयी है सर । कमियों को अवश्य दूर करता हूँ ।पुनः सादर आभार ।"
Jan 22
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"यह एक शेर भी बहुत खूब"
Jan 22
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आ0 धामी साहब साहब बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है आपको हार्दिक बधाई "
Jan 22
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"साहब बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है आपको हार्दिक बधाई "
Jan 22
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आ0अज़ीम साहब बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है आपको हार्दिक बधाई "
Jan 22
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"2122 1122 1122 22जिनके चेहरे पे क़शिश जुल्फ़ में रानाई हो काश उनसे भी मेरी थोड़ी शनासाई हो ।।1 लफ़्ज़ ख़ामोश रहें दिल की बात हो दिल से।रब करे उसकी मुहब्बत में ये गहराई हो ।।2 चाँद छूने की तमन्ना तो हो जाए पूरी ।मेरी चाहत पे अगर आपकी बीनाई हो ।।3 वो…"
Jan 22
TEJ VEER SINGH commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल-क़ातिलों के साथ जब हमको नज़र आई सियासत
"हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ नवीन मणि त्रिपाठी जी। बेहतरीन गज़ल। मन्दिरो मस्ज़िद में बैठे खून के प्यासे बहुत हैं ।क्या हुआ इस मुल्क में जो इस कदर आई सियासत ।। आदमी का ख़्वाब देखो फिर ठगा सा रह गया है ।जाने कितने वादे करके फिर मुकर आई सियासत ।।"
Jan 1
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल-क़ातिलों के साथ जब हमको नज़र आई सियासत
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । 'जाने कितने वादे करके फिर मुकर आई सियासत' इस मिसरे में 'मुकर आई' वाक्य विन्यास ठीक नहीं है, देखियेगा । 'कर लिया मैंने जो सज़दा उस ख़ुदा के नाम…"
Dec 27, 2020
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-126
"आ0 अमीर साहब ग़ज़ल तक आने के लिए तहेदिल से बहुत बहुत शुक्रिया । आपके सुझाव का पूरा सम्मान है । "
Dec 25, 2020
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-126
"आ0 अनीस साहब बेहतरीन ग़ज़ल हुई बधाई आपको । तीसरे शेर में रब्त और बेहतर हो सकता है । जो डरा करता था अंजाम से पहले पहले ।"
Dec 25, 2020
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-126
"आ0 बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई आपको ।"
Dec 25, 2020
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-126
"आ0 तस्दीक़ अहमद खान साहब अच्छी ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद स्वीकार करें ।"
Dec 25, 2020
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-126
"आ0 मुसाफ़िर साहब तहेदिल से शुक्रिया"
Dec 25, 2020
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-126
"आ0 सालिक गनवीर साहब अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई आपको । आ0 अनिल कुमार सिंह साहब सहमत हूँ । आखिरी शेर में ऊला में कैद के स्थान पर मोल भाव या खरीदने की बात और बेहतर रहेगी । सादर सादर।"
Dec 25, 2020
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-126
"आ0 अनिल कुमार सिंह साहब अच्छी ग़ज़ल हुई है बहुत बहुत बधाई आपको। सोच ले मुझ पे तू"
Dec 25, 2020
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-126
"आ0 लक्ष्मण धामी साहब बहुत खूब और बधाई"
Dec 25, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

ग़ज़ल-क़ातिलों के साथ जब हमको नज़र आई सियासत

2122 2122 2122 2122

कैसे कह दें मुल्क में कितनी निखर आयी सियासत ।

क़ातिलों के साथ जब हमको नज़र आई सियासत ।।

चाहतें सब खो गईं और खो गए अम्नो सुकूँ भी ।

इक तबाही का लिए मंज़र जिधर आई सियासत ।।

नफ़रतों के ज़ह्र से भीगा मिला हर शख़्स मुझको ।

कुर्सियों के वास्ते जब गाँव- घर आई सियासत।।

मन्दिरो मस्ज़िद में बैठे खून के प्यासे बहुत हैं ।

क्या हुआ इस मुल्क में जो इस कदर आई सियासत ।।

आदमी का ख़्वाब देखो फिर ठगा सा…

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Posted on December 23, 2020 at 1:00am — 8 Comments

ग़ज़ल

212 1212 1212 1212



ख़ाक हो गयी खुशी, था आग का पता नहीं ।

ख़्वाब सारे जल गए, मगर धुआँ उठा नहीं ।

पूछिये न हाले दिल यूँ बारहा मेरा सनम ।

ये हमारे दर्दोगम का सिलसिला नया नहीं ।।

इक नज़र से दिल मेरा वो लूट कर चला गया ।

इस सितम पे क्यूँ अभी तलक कोई खफ़ा नहीं ।।

रूबरू था हुस्न …

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Posted on August 4, 2020 at 11:31pm — 7 Comments

ग़ज़ल

2212 2212 2212 2212

मैं ठोकरें खाता रहा मुझ पर तरस आता था कब ।

इस ज़िंदगी पर सच बताएं आपका साया था कब ।।1

जीता रहा मैं बेखुदी में मुस्कुरा कर उम्र भर।

अब याद क्या करना कि मैंने होश को खोया था कब ।।2

वो कहकशां की बज़्म थी, उन बादलों के दरमियां ।

मुझको अभी तक याद है वो चाँद शर्माया था कब ।।3

जलते रहे क्यूँ शमअ में परवाने सारी रात तक ।

तू वस्ल के अंज़ाम का ये फ़लसफ़ा समझा था कब ।।4

जो अश्क़ में डूबा मिला था…

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Posted on August 4, 2020 at 5:44pm — 4 Comments

ग़ज़ल

2122 2122 2122

अपनी  रानाई  पे  तू  मग़रूर  है  क्या ।

बेवफ़ाई  के  लिए  मज़बूर  है  क्या ।।

कम न हो पाये अभी तक फ़ासले भी ।।

तू  बता  उल्फ़त  की  दिल्ली  दूर  है क्या ।।

दूर तक चर्चा है क़ातिल के हुनर की ।

वो ज़रा  सी उम्र में मशहूर  है  क्या ।।

तोड़ देना दिल किसी का बेसबब ही ।

शह्र   का   तेरे  नया  दस्तूर  है  क्या ।।…

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Posted on July 9, 2020 at 3:00pm — 3 Comments

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At 10:37pm on May 11, 2020, Naveen Mani Tripathi said…

आ0 मिथिलेश वामनकर साहब

आ0 किशोर कान्त साहब

आ0तेजवीर सिंह साहब

आ0 दण्ड पाणि नाहक साहब

आप सभी आदरणीय को तहेदिल से शुक्रिया और नमन ।

At 12:06pm on May 8, 2020, TEJ VEER SINGH said…

आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी को जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम असीमित शुभ कामनायें। ईश्वर सदैव सुख, शाँति और समृद्धि प्रदान करें। स्वस्थ रहें। दीर्घायु बनें।जीवन में हमेशा उन्नति के पथ पर अग्रसर रहें।

At 11:34am on September 29, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय नवीन मणी त्रिपाठी जी ग़ज़ल तक आने का शुक्रिया आपने समय निकला इसके लिए ह्रदय से शुक्रगुज़ार हूँ हौसला बढ़ने का बहुत बहुत शुक्रिया!
At 10:44am on May 8, 2019, TEJ VEER SINGH said…

जन्मदिन की हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी साहब जी।

At 6:32am on August 5, 2018, Kishorekant said…

लाजवाब रचना केलिये आपको बहुत बहुत बधाइयाँ आदरणीय नविनमणी त्रिपाठी जी  ,

At 2:14am on May 8, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें!

 
 
 

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