For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Naveen Mani Tripathi
Share

Naveen Mani Tripathi's Friends

  • Ajay Tiwari
 

Naveen Mani Tripathi's Page

Latest Activity

Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब डॉ. नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'मुहब्बत की ख़ातिर ज़िगर कीजिये ।अभी से न यूँ चश्मे तर कीजिये ।।' मतले के ऊला मिसरे का शिल्प कमज़ोर है,और सानी में 'चश्म' शब्द में इज़फ़त मुनासिब नहीं,मतला…"
Apr 15
बसंत कुमार शर्मा commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी सादर नमस्कार , शानदार ग़ज़ल हुई है, बहुत बहुत बधाई आपको - बसंत "
Apr 13
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

122 122 122 12मुहब्बत की ख़ातिर ज़िगर कीजिये ।अभी से न यूँ चश्मे तर कीजिये ।।गुजारा तभी है चमन में हुजूऱ ।हर इक ज़ुल्म को अपने सर कीजिये ।।करेगी हक़ीक़त बयां जिंदगी ।मेरे साथ कुछ दिन सफ़र कीजिये ।।पहुँच जाऊं मैं रूह तक आपकी ।ज़रा थोड़ी आसां डगर कीजिये ।।वो पढ़ते हैं जब खत के हर हर्फ़ को ।तो मज़मून क्यूँ मुख़्तसर कीजिए ।।लगे मुन्तज़िर गर मेरा दिल सनम ।तो नज़रे इनायत इधर कीजिये ।।ज़रूरत बहुत रोशनी की यहां ।तबस्सुम से शब को सहर कीजिए ।।है उतरा जमीं पर अगर चाँद है ।तो रुख आज अपना उधर कीजिये ।।मुक़द्दर में जो शख्स…See More
Apr 13
TEJ VEER SINGH commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी। बेहतरीन गज़ल। इस जात धर्म वाली सियासत के बीच में ।खोता रहा है देश का मुद्दा यहीँ कहीं ।। इतना बता रही हैं मेरी हिचकियाँ मुझे ।महबूब मेरा शह्र में ठहरा यहीं कहीं।।"
Apr 9
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 गुरुदेव कबीर साहब हार्दिक आभार ।"
Apr 9
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post खैरमक़दम हमारा हुआ तो हुआ
"आ0 समर कबीर साहब सादर नमन के साथ आभार"
Apr 9
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post खैरमक़दम हमारा हुआ तो हुआ
"आ0 बृजेश कुमार ब्रज जी हार्दिक आभार "
Apr 9
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post खैरमक़दम हमारा हुआ तो हुआ
"बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल आदरणीय त्रिपाठी जी.."
Apr 9
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post खैरमक़दम हमारा हुआ तो हुआ
"जनाब डॉ. नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें । 'मुझको मालूम था तीर तरकस में है' इस मिसरे में 'तरकस' को "तरकश" कर लें ।"
Apr 8
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें । 'अजब कसमकश है मैं किससे कहूँ अब' इस मिसरे में 'कसमकश'     को "कशमकश" कर लें ।"
Apr 7
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post खैरमक़दम हमारा हुआ तो हुआ
"आ0 तेजवीर सिंह साहब हार्दिक आभार ।"
Apr 7
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post खैरमक़दम हमारा हुआ तो हुआ
"आ0 सुशील शरण साहब हार्दिक आभार। तहे दिल से शुक्रिया।"
Apr 7
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 तेजवीर सिंह साहब हार्दिक आभार"
Apr 7
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 ब्रजेश कुमार ब्रज साहब हार्दिक आभार"
Apr 7
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 सुशील शरण साहब तहेदिल से बहुत बहुत शुक्रिया ।"
Apr 7

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

ग़ज़ल

122 122 122 12

मुहब्बत की ख़ातिर ज़िगर कीजिये ।

अभी से न यूँ चश्मे तर कीजिये ।।

गुजारा तभी है चमन में हुजूऱ ।

हर इक ज़ुल्म को अपने सर कीजिये ।।

करेगी हक़ीक़त बयां जिंदगी ।

मेरे साथ कुछ दिन सफ़र कीजिये ।।

पहुँच जाऊं मैं रूह तक आपकी ।

ज़रा थोड़ी आसां डगर कीजिये ।।

वो पढ़ते हैं जब खत के हर हर्फ़ को ।

तो मज़मून क्यूँ मुख़्तसर कीजिए ।।

लगे मुन्तज़िर गर…

Continue

Posted on April 12, 2019 at 10:34pm — 2 Comments

खैरमक़दम हमारा हुआ तो हुआ

212 212 212 212

ख़ैरमक़दम हमारा हुआ  तो हुआ ।

वार फिर. कातिलाना हुआ तो हुआ ।।

फर्क पड़ता कहाँ अब सियासत पे है ।

रिश्वतों पर खुलासा हुआ तो हुआ ।।

ये ज़रुरी था सच की फ़ज़ा के लिए ।

झूठ पर जुल्म ढाना हुआ तो हुआ ।।

आप आये यहाँ तीरगी खो गयी ।

मेरे घर में उजाला हुआ तो हुआ ।।

हिज्र के दौर में हम सँभलते रहे ।

आपके बिन गुजारा हुआ तो हुआ ।।



मुझको मालूम था…

Continue

Posted on April 4, 2019 at 12:46pm — 8 Comments

ग़ज़ल

122 122 122 122

वो मक़तल में कैसी फ़ज़ा माँगते हैं ।।

जो क़ातिल से उसकी अदा माँगते हैं ।।

जुनूने शलभ की हिमाकत तो देखो ।

चरागों से अपनी क़ज़ा माँगते हैं।।

उन्हें भी मिला रब सुना कुफ्र में है ।

जो अक्सर खुदा से जफ़ा माँगते हैं ।।

असर हो रहा क्या जमाने का उन पर ।

वो क्यूँ बारहा आईना माँगते हैं ।।

अजब कसमकश है मैं किससे कहूँ अब ।

यहां बेवफ़ा ही वफ़ा माँगते हैं…

Continue

Posted on April 2, 2019 at 6:42pm — 8 Comments

ग़ज़ल

221, 2121, 1221, 212



दैरो हरम से दूर वो अंजान ही तो है ।

होंगी ही उससे गल्तियां इंसान ही तो है ।।

हमको तबाह करके तुझे क्या मिलेगा अब ।

आखिर हमारे पास क्या, ईमान ही तो है ।।

खुलकर जम्हूरियत ने ये अखबार से कहा ।

सारा फसाद आपका उन्वान ही तो है ।।

खोने लगा है शह्र का अम्नो सुकून अब ।

इंसां सियासतों से परेशान ही तो है ।।

उसने तुम्हें हिजाब में रक्खा है रात दिन ।

वह भी तुम्हारे हुस्न का दरबान ही तो है…

Continue

Posted on March 22, 2019 at 4:39pm — 2 Comments

Comment Wall (2 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 6:32am on August 5, 2018, Kishorekant said…

लाजवाब रचना केलिये आपको बहुत बहुत बधाइयाँ आदरणीय नविनमणी त्रिपाठी जी  ,

At 2:14am on May 8, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें!

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अजय गुप्ता commented on Samar kabeer's blog post एक ग़ज़ल रुबाइ की बह्र में
"इस बेमिसाल ग़ज़ल को पढ़कर मन प्रसन्न हो गया। इस प्रस्तुति के लिए आभार समर साहब। एक शंका का निवारण…"
2 hours ago
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post अधूरी सी ज़िंदगी ....
"लाजवाब सर"
5 hours ago
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post प्रतीक्षा लौ ...
"खुब सुन्दर रचना सर"
5 hours ago
दिगंबर नासवा commented on दिगंबर नासवा's blog post गज़ल - दिगंबर नास्वा - 4
"बहुत आभार आदरणीय समर कबीर ..."
5 hours ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post कनक मंजरी छंद "गोपी विरह"
"आदरणीय समर कबीर जी इस छंद बद्ध रचना को आपकी प्रशंसा मिली लेखन सार्थक हुआ। आपका हृदय तल से आभार।"
7 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani posted a blog post

"ओ आली, कौन अली; कौन महाबली?" (लघुकथा) :

छकपक ... छकपक ... करती आधुनिक रेलगाड़ी बेहद द्रुत गति से पुल पर से गुजर रही थी। नीचे शौच से फ़ारिग़ हो…See More
8 hours ago
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

सभी कुछ बता दिया - ग़ज़ल

मापनी २२१२ १२१ १२२ १२१२ हमने रखा न राज़ सभी कुछ बता दियाखिड़की से आज उसने भी परदा हटा दिया बंजर जमीन…See More
8 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सभी कुछ बता दिया - ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर जी सादर नमस्कार, जी कर देता हूँ ,आपकी हौसलाअफजाई के लिए दिल से शुक्रिया "
9 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post प्रतीक्षा लौ ...
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी कविता हुई,बधाई स्वीकार करें ।"
10 hours ago
Samar kabeer commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post कनक मंजरी छंद "गोपी विरह"
"जनाब बासुदेव अग्रवाल 'नमन' जी आदाब,अच्छे छन्द लिखे आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
10 hours ago
Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post आम चुनाव और समसामायिक संवाद (लघुकथाएं) :
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,अच्छी लघुकथाएं हुईं,बधाई स्वीकार करें ।"
10 hours ago
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post कोई तो दीद के क़ाबिल है आया
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । शिल्प और व्याकरण पर क़ाबू पाना…"
10 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service