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Nilesh Shevgaonkar
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Nilesh Shevgaonkar commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post अतुकांत कविता : आजादी (गणेश बाग़ी)
"आ. बागी जी,कल विस्तृत टिप्पणी नहीं कर  सका . आज करता हूँ ...//साथियो, सबसे पहले अनुरोध है कि इस कविता को संकुचित रूप से न लेकर तनिक उदारतापूर्वक लें, और निम्न तथ्यों पर ध्यान देते हुए खुले हृदय से विवेचना करें ।// क्या आपने उतनी ही उदारता…"
Feb 7
Nilesh Shevgaonkar commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post अतुकांत कविता : आजादी (गणेश बाग़ी)
"आदरणीय, आप अपनी रचना के साथ रहें। मैं रविवार को अपनी सभी रचनाएं स्वयं हटा लूँगा। और मैं भी यहां से चला जाऊँगा। आपके तर्क आपकी कविता से कम प्रभावशाली हैं। आज्ञा दीजिये। अब इस मंच पर मेरी अंतिम रचना आने वाली है। रविवार को। आपसे, योगराज सर से और सौरभ…"
Feb 6
Nilesh Shevgaonkar commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post अतुकांत कविता : आजादी (गणेश बाग़ी)
"अगर इस कविता का शीर्षक अंधभक्त की सींच होता तो मैं आपका सनर्थन करता"
Feb 6
Nilesh Shevgaonkar commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post अतुकांत कविता : आजादी (गणेश बाग़ी)
"आ. बागी जी, आपकी टिप्पणी पढ़ी। आपने सफाई दी है कि इसमें किसी धर्म विशेष का उल्लेख नहीं है लेकिन आप स्वयं कितने आश्वस्त हैं अपने इस झूठ से जो आप अपने पाठकों को समझाना चाह रहे हैं। क्या आप अपनी संतानों की शपथ लेकर कह सकते हैं कि आपकी कविता किसी धर्म…"
Feb 6
Nilesh Shevgaonkar commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post अतुकांत कविता : आजादी (गणेश बाग़ी)
"आ. बागी जी,आप की कविता अपना हक मांगने वाली ,महिलाओं के प्रति ठीक रवैया नहीं दर्शाती .. साथ ही ये सभी महिलाहों को नहीं एक वर्ग विशेष की महिलाओं को टारगेट कर के उन की सामूहिक निर्णय क्षमता पर भद्दा मज़ाक है.भारत की आज़ादी के आन्दोलन में शामिल महिलाओं पर…"
Feb 2
Dr Ashutosh Mishra commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए
"आदरणीय भाई नीलेश जी बहुत उम्दा रचना है दुबारा पढ़ी।आपसे यह निवेदन करने । इसमें बहर कौन सी है। इन दिनों पोस्ट की गयी आपकी रचनाओं में इसका जिक्र नहीं है जिसके होने से सीखने में सुबिधा होती है सादर"
Feb 2
Nilesh Shevgaonkar commented on Saurabh Pandey's blog post ग़ज़ल - पत्थरों से रही शिकायत कब ? // --सौरभ
"आ. सौरभ सर.  लम्बे समय बाद आपको पढ़ना सुखद है. ऐसा लगता है मानों ग़ज़ल कच्ची ही उतार ली आपने. अभी पकने की गुंजाइश बाकी है..हममें जो ढूँढते रहे थे कमीकह रहे, ’ढूँढ मत कमी हममें’ !.. ऊला में "थे" भूत काल है और सानी में…"
Jan 16
Nilesh Shevgaonkar commented on SALIM RAZA REWA's blog post कैसे कहें की इश्क़ ने क्या क्या बना दिया - सलीम 'रज़ा'
"आ. सलीम साहब,अच्छा प्रयास है। . पोस्ट करने की जल्दबाज़ी में यूसुफ़ तो नहीं था वो मेरा चाहने वाला..बहर चूक गए इस मिसरे में ये सोच के ख़ुदा ने है दुनिया बना दिया.. दुनिया स्त्रीलिंग है। .बना दिया में पुल्लिंग का भाव है सादर "
Dec 10, 2019
Nilesh Shevgaonkar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : इक दिन मैं अपने आप से इतना ख़फ़ा रहा
"बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है आ. महेंद्र जी। .ख़ुद को लगा दी ..ख़ुद को लगा के . बस ऐसी ही छोटी मोटी गुँजाइश है। .बहुत बहुत बधाई "
Dec 10, 2019
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- तू ये कर और वो कर बोलता है.
"शुक्रिया आ. समर सर,आपके कहे अनुसार ज़बां का टाइपो एरर मूल प्रति में दुरुस्त क्र लिया है. मेरे शानों धरा वाले शेर के ऊला में थोडा जम का अहसास भी था सो उसे अभी निकाल दिया है..सिकंदर पर काम जारी है ..सादर "
Dec 10, 2019
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- तू ये कर और वो कर बोलता है.
"शुक्रिया आ. लक्ष्मण जी "
Dec 10, 2019
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- तू ये कर और वो कर बोलता है.
"जनाब निलेश 'नूर' साहिब आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 'जुबां दिल की; मेरे दिल से गुज़रकर' इस मिसरे में 'जुबां' को "ज़बाँ" कर लें । 'मेरे शानों धरा सर बोलता है' इस मिसरे में वाक्य…"
Dec 8, 2019
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- तू ये कर और वो कर बोलता है.
"आ. भाई नीलेश जी, सादर अभिवादन। बहुत ही उम्दा गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Dec 7, 2019
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- तू ये कर और वो कर बोलता है.
"शुक्रिया आ. सुरेन्द्र भाई "
Dec 7, 2019
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- तू ये कर और वो कर बोलता है.
"शुक्रिया आ. सलीम रज़ा साहब "
Dec 7, 2019
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- तू ये कर और वो कर बोलता है.
"शुक्रीआ आ. प्रदीप जी "
Dec 7, 2019
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- तू ये कर और वो कर बोलता है.
"आद0 नीलेश भाई जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कहीं आपने। बहुत दिन बाद आपकी ग़ज़ल से मुखातिब भी हो रहा हूँ। शेर दर शैर बधाई स्वीकार कीजिए"
Dec 3, 2019
SALIM RAZA REWA commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- तू ये कर और वो कर बोलता है.
"भाई नीलेश जी (करो हौ ) का ज़बाब नहीं। खूबसूरत ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
Dec 3, 2019
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- तू ये कर और वो कर बोलता है.
"बहुत खूब निलेश जी, गज़ल में से अच्छा खासा नूर टपक रहा है "
Dec 2, 2019
Nilesh Shevgaonkar posted a blog post

ग़ज़ल नूर की- तू ये कर और वो कर बोलता है.

तू ये कर और वो कर बोलता है. न जाने कौन अन्दर बोलता है . मेरे दुश्मन में कितनी ख़ामियाँ हैं मगर मुझ से वो बेहतर बोलता है. . जुबां दिल की; मेरे दिल से गुज़रकर मेरे दुश्मन का ख़ंजर बोलता है. . मैं कट जाऊं मगर झुकने न देना मेरे शानों धरा सर बोलता है.…See More
Dec 2, 2019

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Indore-MP
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Indore-MP
Profession
Civil Engineer

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ग़ज़ल नूर की- तू ये कर और वो कर बोलता है.

तू ये कर और वो कर बोलता है.

न जाने कौन अन्दर बोलता है

.

मेरे दुश्मन में कितनी ख़ामियाँ हैं

मगर मुझ से वो बेहतर बोलता है.

.

जुबां दिल की; मेरे दिल से गुज़रकर

मेरे दुश्मन का ख़ंजर बोलता है.

.

मैं कट जाऊं मगर झुकने न देना

मेरे शानों धरा सर बोलता है.

.

मैं हारा हर लड़ाई जीत कर भी

जहां सुन ले! सिकंदर बोलता है.

.

बहुत भारी पडूँगा अब कि तुम पर

अकेलों से दिसम्बर बोलता है.

.

नया मज़हब नई दुनिया बनाओ

ये…

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Posted on November 30, 2019 at 11:30pm — 10 Comments

ग़ज़ल नूर की - उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए

उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए,

पंछी जो उड़ चले तो घरौंदे बिख़र गए.

.

सरहद पे गोलियों ने किया रक्स रात भर,

कितने घरों के नींद में सपने बिखर गए.

.

यादों की आँधियों ने रँगोली बिगाड़ दी

बरसों जमे हुए थे वो चेहरे बिखर गए.

.

समझा था जिस को चोर गदागर था वो कोई

ली जब तलाशी रोटी के टुकड़े बिखर गए.

.

तुम जो सँवार लेते तो मुमकिन था ये बहुत

उतना नहीं बिखरते कि जितने बिखर गए .

.

मुझ में कहीं छुपे थे अँधेरों के क़ाफ़िले…

Continue

Posted on November 16, 2019 at 8:30pm — 13 Comments

ग़ज़ल नूर की- लगती हैं बेरंग सारी तितलियाँ तेरे बिना

लगती हैं बेरंग सारी तितलियाँ तेरे बिना

जाने अब कैसे कटेंगी सर्दियाँ तेरे बिना.

.

फैलता जाता है तन्हाई का सहरा ज़ह’न में

सूखती जाती हैं दिल की क्यारियाँ तेरे बिना.

.

साथ तेरे जो मुसीबत जब पड़ी, आसाँ लगी

हो गयीं दुश्वार सब आसानियाँ तेरे बिना.

.

तू कहीं तो है जो अक्सर याद करता है मुझे

क्यूँ सताती हैं वगर्ना हिचकियाँ तेरे बिना?

.

वक़्त लेकर जा चुका आँखों से ख़ुशियों के गुहर   

अब भरी हैं ख़ाक से ये सीपियाँ तेरे बिना.…

Continue

Posted on July 2, 2019 at 7:30am — 7 Comments

ग़ज़ल नूर की- सोचिये फिर डूबने में कितनी आसानी रहे

.

सोचिये फिर डूबने में कितनी आसानी रहे

उनकी आँखों में जो मेरे वास्ते पानी रहे.

.

मैं किसी को जोड़ने में घट भी जाऊँ ग़म न हो

ज़िन्दगानी के गणित में इतनी नादानी रहे.

.

क़त्ल होते वक़्त भी मैं मुस्कुराता ही रहूँ

ताकि क़ातिल को मेरे ता-उम्र हैरानी रहे.

.

क़ाफ़िला यादों का गुज़रे रेगज़ार-ए-दिल से जब

आँखों में लाज़िम है सारी रात तुग़्यानी रहे.

.

क्यूँ भला सोचूँ वो दुश्मन है मेरा या कोई दोस्त

मैं रहूँ…

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Posted on November 2, 2018 at 6:45pm — 29 Comments

Comment Wall (12 comments)

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At 7:53pm on September 27, 2019, dandpani nahak said…
परम आदरणीय नीलेश जी आदाब बहुत बहुत शुक्रिया मैं बता नहीं सकता मैं कितना खुश हूँ आपने मेरी ग़ज़ल को सराहा मेरा तो आज का दिन बन गया ! ह्रदय से शुक्रिया
At 8:17pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
मुआफ़ी चाहता हूँ ! बढ़ाने का
At 8:16pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
हौसला बढ़ने का
At 8:15pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय नीलेश जी आदाब . बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ने का
At 8:49pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय नीलेश सर प्रणाम
बहुत शुक्रिया
At 2:21pm on September 16, 2017, Afroz 'sahr' said…
आदरणीय निलेश जी आपने ख़ाकसार की बात की ताईद की बहुत आभार प्रकट करता हूँ !सादर
At 9:50pm on March 3, 2017, Hemant kumar said…
आदरणीय सर प्रणम ! मै ओ बी ओ मे काफीया पढ़ रहा हूं पर पल्ले कुछ भी नही पड़ रहा है ।
सर आपसे विनम्र आग्रह है काफीया निर्धारण पर पुनः प्रकाश डालने की अनुकंपा करें ।सादर..
At 2:37am on June 29, 2014, Adesh Tyagi said…
जनाबे-मोहतरम निलेश शेव्गाँवकर साहब, अल्फ़ाज़े-तहसीन का तहे-दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
At 4:47am on November 11, 2013, Abhinav Arun said…

महीने का सक्रिय सदस्य (Active Member of the Month)चुने जाने पर आ. नीलेश जी आपको दिली मुबारकबाद !

At 1:45pm on November 7, 2013, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ0 नीलेश भाई जी, आपको महीने का सकिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई।  सादर,

 
 
 

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