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Nilesh Shevgaonkar
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- तू ये कर और वो कर बोलता है.
"आद0 नीलेश भाई जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कहीं आपने। बहुत दिन बाद आपकी ग़ज़ल से मुखातिब भी हो रहा हूँ। शेर दर शैर बधाई स्वीकार कीजिए"
Tuesday
SALIM RAZA REWA commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- तू ये कर और वो कर बोलता है.
"भाई नीलेश जी (करो हौ ) का ज़बाब नहीं। खूबसूरत ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
Tuesday
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- तू ये कर और वो कर बोलता है.
"बहुत खूब निलेश जी, गज़ल में से अच्छा खासा नूर टपक रहा है "
Monday
Nilesh Shevgaonkar posted a blog post

ग़ज़ल नूर की- तू ये कर और वो कर बोलता है.

तू ये कर और वो कर बोलता है. न जाने कौन अन्दर बोलता है . मेरे दुश्मन में कितनी ख़ामियाँ हैं मगर मुझ से वो बेहतर बोलता है. . जुबां दिल की; मेरे दिल से गुज़रकर मेरे दुश्मन का ख़ंजर बोलता है. . मैं कट जाऊं मगर झुकने न देना मेरे शानों धरा सर बोलता है.…See More
Monday
Nilesh Shevgaonkar commented on SALIM RAZA REWA's blog post जब तलक ख़ुद ख़ुदा नहीं चाहे - सलीम रज़ा
"अब बेहतर है लेकिन काम बाकी है .. दो शेर आदत के ऊला पर खटक रहे हैं सादर "
Saturday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए
"शुक्रिया आ. लक्ष्मण धामी जी "
Saturday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए
"शुक्रिया आ. तेजवीर सिंह जी "
Saturday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए
"शुक्रिया आ. समर सर "
Saturday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए
"शुक्रिया आ. दिगंबर जी "
Saturday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए
"शुक्रिया आ. सलीम साहब "
Saturday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए
"शुक्रिया आ. डॉ. आशुतोष जी "
Saturday
Dr Ashutosh Mishra commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए
"आदरणीय नीलेश भाई जी हमेशा की तरह यह भी आपकी शानदार ग़ज़ल है/ हार्दिक बधाई आपको सादर "
Nov 26
SALIM RAZA REWA commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए
"मुबारकबाद नीलेश भाई अच्छी ग़ज़ल हुई है।"
Nov 21
दिगंबर नासवा commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए
"वाह ... बेहतरीन ग़ज़ल ... दिली दाद कबूल फरमाएं ..."
Nov 21
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए
"जनाब निलेश 'नूर' साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Nov 20
TEJ VEER SINGH commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए
"हार्दिक बधाई आदरणीय नीलेश जी।बेहतरीन गज़ल। यादों की आँधियों ने रँगोली बिगाड़ दीबरसों जमे हुए थे वो चेहरे बिखर गए."
Nov 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए
"आ. भाई नीलेश जी, सादर अभिवादन। गजल उम्दा हुई है । हार्दिक बधाई।"
Nov 20
Nilesh Shevgaonkar posted a blog post

ग़ज़ल नूर की - उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए

उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए, पंछी जो उड़ चले तो घरौंदे बिख़र गए. . सरहद पे गोलियों ने किया रक्स रात भर, कितने घरों के नींद में सपने बिखर गए. . यादों की आँधियों ने रँगोली बिगाड़ दी बरसों जमे हुए थे वो चेहरे बिखर गए. . समझा था जिस को चोर…See More
Nov 17
Nilesh Shevgaonkar commented on SALIM RAZA REWA's blog post जब तलक ख़ुद ख़ुदा नहीं चाहे - सलीम रज़ा
"उनकी आदत है मुकर जाने की...ये मिसरा बहर पर क़हर बन कर टूट पडा है.. देखिएगा .जब तलक ख़ुद ख़ुदा नहीं चाहे बद-दुआओं से मर नहीं सकता... कौन ख़ुदा ??.देखिएगा सादर "
Nov 16
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-111
"अनीस शेख जी अच्छी ग़ज़ल हुई है, बधाई "
Sep 28

Profile Information

Gender
Male
City State
Indore-MP
Native Place
Indore-MP
Profession
Civil Engineer

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ग़ज़ल नूर की- तू ये कर और वो कर बोलता है.

तू ये कर और वो कर बोलता है.

न जाने कौन अन्दर बोलता है

.

मेरे दुश्मन में कितनी ख़ामियाँ हैं

मगर मुझ से वो बेहतर बोलता है.

.

जुबां दिल की; मेरे दिल से गुज़रकर

मेरे दुश्मन का ख़ंजर बोलता है.

.

मैं कट जाऊं मगर झुकने न देना

मेरे शानों धरा सर बोलता है.

.

मैं हारा हर लड़ाई जीत कर भी

जहां सुन ले! सिकंदर बोलता है.

.

बहुत भारी पडूँगा अब कि तुम पर

अकेलों से दिसम्बर बोलता है.

.

नया मज़हब नई दुनिया बनाओ

ये…

Continue

Posted on November 30, 2019 at 11:30pm — 3 Comments

ग़ज़ल नूर की - उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए

उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए,

पंछी जो उड़ चले तो घरौंदे बिख़र गए.

.

सरहद पे गोलियों ने किया रक्स रात भर,

कितने घरों के नींद में सपने बिखर गए.

.

यादों की आँधियों ने रँगोली बिगाड़ दी

बरसों जमे हुए थे वो चेहरे बिखर गए.

.

समझा था जिस को चोर गदागर था वो कोई

ली जब तलाशी रोटी के टुकड़े बिखर गए.

.

तुम जो सँवार लेते तो मुमकिन था ये बहुत

उतना नहीं बिखरते कि जितने बिखर गए .

.

मुझ में कहीं छुपे थे अँधेरों के क़ाफ़िले…

Continue

Posted on November 16, 2019 at 8:30pm — 12 Comments

ग़ज़ल नूर की- लगती हैं बेरंग सारी तितलियाँ तेरे बिना

लगती हैं बेरंग सारी तितलियाँ तेरे बिना

जाने अब कैसे कटेंगी सर्दियाँ तेरे बिना.

.

फैलता जाता है तन्हाई का सहरा ज़ह’न में

सूखती जाती हैं दिल की क्यारियाँ तेरे बिना.

.

साथ तेरे जो मुसीबत जब पड़ी, आसाँ लगी

हो गयीं दुश्वार सब आसानियाँ तेरे बिना.

.

तू कहीं तो है जो अक्सर याद करता है मुझे

क्यूँ सताती हैं वगर्ना हिचकियाँ तेरे बिना?

.

वक़्त लेकर जा चुका आँखों से ख़ुशियों के गुहर   

अब भरी हैं ख़ाक से ये सीपियाँ तेरे बिना.…

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Posted on July 2, 2019 at 7:30am — 7 Comments

ग़ज़ल नूर की- सोचिये फिर डूबने में कितनी आसानी रहे

.

सोचिये फिर डूबने में कितनी आसानी रहे

उनकी आँखों में जो मेरे वास्ते पानी रहे.

.

मैं किसी को जोड़ने में घट भी जाऊँ ग़म न हो

ज़िन्दगानी के गणित में इतनी नादानी रहे.

.

क़त्ल होते वक़्त भी मैं मुस्कुराता ही रहूँ

ताकि क़ातिल को मेरे ता-उम्र हैरानी रहे.

.

क़ाफ़िला यादों का गुज़रे रेगज़ार-ए-दिल से जब

आँखों में लाज़िम है सारी रात तुग़्यानी रहे.

.

क्यूँ भला सोचूँ वो दुश्मन है मेरा या कोई दोस्त

मैं रहूँ…

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Posted on November 2, 2018 at 6:45pm — 29 Comments

Comment Wall (12 comments)

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At 7:53pm on September 27, 2019, dandpani nahak said…
परम आदरणीय नीलेश जी आदाब बहुत बहुत शुक्रिया मैं बता नहीं सकता मैं कितना खुश हूँ आपने मेरी ग़ज़ल को सराहा मेरा तो आज का दिन बन गया ! ह्रदय से शुक्रिया
At 8:17pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
मुआफ़ी चाहता हूँ ! बढ़ाने का
At 8:16pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
हौसला बढ़ने का
At 8:15pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय नीलेश जी आदाब . बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ने का
At 8:49pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय नीलेश सर प्रणाम
बहुत शुक्रिया
At 2:21pm on September 16, 2017, Afroz 'sahr' said…
आदरणीय निलेश जी आपने ख़ाकसार की बात की ताईद की बहुत आभार प्रकट करता हूँ !सादर
At 9:50pm on March 3, 2017, Hemant kumar said…
आदरणीय सर प्रणम ! मै ओ बी ओ मे काफीया पढ़ रहा हूं पर पल्ले कुछ भी नही पड़ रहा है ।
सर आपसे विनम्र आग्रह है काफीया निर्धारण पर पुनः प्रकाश डालने की अनुकंपा करें ।सादर..
At 2:37am on June 29, 2014, Adesh Tyagi said…
जनाबे-मोहतरम निलेश शेव्गाँवकर साहब, अल्फ़ाज़े-तहसीन का तहे-दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
At 4:47am on November 11, 2013, Abhinav Arun said…

महीने का सक्रिय सदस्य (Active Member of the Month)चुने जाने पर आ. नीलेश जी आपको दिली मुबारकबाद !

At 1:45pm on November 7, 2013, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ0 नीलेश भाई जी, आपको महीने का सकिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई।  सादर,

 
 
 

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