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PHOOL SINGH
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Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post एक अभागिन किन्नर
"जनाब फूल सिंह जी आदाब,किन्नर पर रचना का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । शीर्षक में 'अभागिन' शब्द मेरे ख़याल से उचित नहीं,क्योंकि किन्नर न स्त्री है न पुरुष,इस पर विचार करें ।"
yesterday
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post “भ्रम जाल”
"आप सभी ने मेरी रचना के लिये समय निकाला उसके आप सबका शुक्रिया"
yesterday
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post दंगाइयो से मेरी विनती
"भाई लक्ष्मण कों हौंसलअफजाई के लिये धन्यवाद"
yesterday
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post अच्छा लगा
"आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद"
yesterday
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post एक अभागिन किन्नर
"भाई सुरेन्द्र आपका बहुत बहुत धन्यवाद आपके सुझाव के लिये आपका बहुत शुक्रिया"
yesterday
PHOOL SINGH posted a blog post

आधुनिक नारी

संचालित कर दया करूणा, स्वार्थ पूर्ति का भाव नहींखुद को समर्पित तुझको कर दूँ,इच्छाऐं मेरी खास नहीं ॥ डोली सजा तेरे दर पर आई, उगने वाली कोइ घास नहींहाथ उठाने की गलती ना करना,नहीं सहुंगी वार कोई ॥ तेरे इशारों पर इत-उत डोलूँ, तूँ कोई सरकार नहींक्रोध करो मैं थर्र थर्र कांपू,डरने वाली मैं नार नहीं ॥ तुम जालाओं शमां की महफिल, होके नशे में धुत कहींढूँढ बहाने झूठ भी बोलोइतना तुम पर ऐतबार नहीं ॥ भरोसा करूँ मैं खुद से ज्यादा, धोखा ना देना मुझको कभीछोड़ ने तुझको देर करूँ नादिल्लगी मुझको पसंद नहीं ॥ पढ़ी…See More
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on PHOOL SINGH's blog post एक अभागिन किन्नर
"आद0 फूल सिंह जी सादर अभिवादन। किन्नर आधारित इस रचना के लिए बधाई। इसे आप किसी विधा पर लिखते तो लय बेहतरीन आता"
Monday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on PHOOL SINGH's blog post अच्छा लगा
"आद0 फूल सिंह जी सादर अभिवादन, अच्छी रचना लिखी आपने,, बधाई स्वीकार कीजिये। सादर"
Monday
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post अच्छा लगा
"जनाब फूल सिंह जी आदाब,अच्छी रचना है,बधाई स्वीकार करें । टंकण त्रुटियों की तरफ़ ध्यान दें ।"
Sunday
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post “भ्रम जाल”
"जनाब फूल सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday
vijay nikore commented on PHOOL SINGH's blog post “भ्रम जाल”
"रचना अच्छी लगी। बधाई मित्र फूल सिंह जी।"
Sunday
PHOOL SINGH posted a blog post

एक अभागिन किन्नर

ना मर्म का मेरे भान किसी को, लेकिन फिर भी जिंदा हूँना औरत, ना पुरुष हूँ, कहने को मैं किन्नर हूँ| सारा समाज धुत्कार मै खाती, जैसे समाज पे अभिशाप कोईसोलह शृंगार कर हर दिन सजती, जैसे सुहागिन औरत हूँ | मात-पिता भी कलंक समझते, बदनामी का उनकी कारण हूँदुख-दर्द भी ना कोई पूछता, जैसी उनकी ना मै कोई हूँ | ना रोजी-रोटी का साधन कोई, मांग माँग कर खाती हूँइज्जत आबरू का मान ना जग में, कभी-कभी शरीर पे भी दांव लगाती हूँ| शादी प्रसंग में जा खुशी मनाते, नाच-नाच कर गाती हूँबच्चो के जन्म पर तालियाँ बजाती, दे…See More
Jan 16
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on PHOOL SINGH's blog post अच्छा लगा
"आ. भाई फूलसिंह जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jan 15
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on PHOOL SINGH's blog post “भ्रम जाल”
"आ. भाई फूलसिंह जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
Jan 15
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Jan 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on PHOOL SINGH's blog post दंगाइयो से मेरी विनती
"आ. भाई फूल सिंह जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jan 14

Profile Information

Gender
Male
City State
DELHI
Native Place
DELHI
Profession
KALSHANIA CONSULTANCY
About me
NOTHING MUCH

जीवन संगिनी

हार हार का टूट चुका जब

तुमसे ही आश बाँधी है

मैं नहीं तो तुम सही

समर्थ जीवन की ठानी है||

 

मजबूर नहीं मगरूर नहीं मैं 

मोह माया में चूर नहीं मैं

साथ तुम्हारा मिल जाए तो

लक्ष्य से भी दूर नहीं मैं ||

 

सुख दुःख की घटना तो

जीवन में घटती रहती है

छोटी छोटी नोक झोंक भी

हर रिश्ते में होती है 

छोड़ न देना साथ निभाना

तुमसे, प्रेम की डोर जो बाँधी है||

 

गलत किये थे कुछ निर्णय

ये बात भी स्वीकारी है

मैं  गलत और तुम सही

गलती मैंने मानी है

मझधार में फसीं जिंदगी की

नैया पार लगानी है||

 

जीवन संगिनी बनकर,

मेरी जिंदगी, सँवारी है

घर नहीं मेरे दिल में रहना

बस ख़्वाहिश ये हमारी है

मैं नहीं तो तुम सही

समर्थ जीवन की ठानी है||

 

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आधुनिक नारी

संचालित कर दया करूणा, स्वार्थ पूर्ति का भाव नहीं

खुद को समर्पित तुझको कर दूँ,

इच्छाऐं मेरी खास नहीं ॥

 

डोली सजा तेरे दर पर आई, उगने वाली कोइ घास नहीं

हाथ उठाने की गलती ना करना,

नहीं सहुंगी वार कोई ॥

 

तेरे इशारों पर इत-उत डोलूँ, तूँ कोई सरकार नहीं

क्रोध करो मैं थर्र थर्र कांपू,

डरने वाली मैं नार नहीं ॥

 

तुम जालाओं शमां की महफिल, होके नशे में धुत कहीं

ढूँढ बहाने झूठ भी बोलो

इतना तुम पर ऐतबार…

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Posted on January 21, 2020 at 12:00pm

एक अभागिन किन्नर

ना मर्म का मेरे भान किसी को, लेकिन फिर भी जिंदा हूँ

ना औरत, ना पुरुष हूँ, कहने को मैं किन्नर हूँ|

 

सारा समाज धुत्कार मै खाती, जैसे समाज पे अभिशाप कोई

सोलह शृंगार कर हर दिन सजती, जैसे सुहागिन औरत हूँ |

 

मात-पिता भी कलंक समझते, बदनामी का उनकी कारण हूँ

दुख-दर्द भी ना कोई पूछता, जैसी उनकी ना मै कोई हूँ |

 

ना रोजी-रोटी का साधन कोई, मांग…

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Posted on January 15, 2020 at 11:56am — 3 Comments

अच्छा लगा

अच्छा लगा तेरा प्रेम से मिलना

कुछ अपनी कही, कुछ मेरे सुनना

स्वार्थ से भरी इस दुनियाँ में

सभी के हित की बातें करना ||

 

वक़्त के संग में तेरा बदलना

हसमुखता को धारण करना

उड़ान भर खुली हवा में

सुंदर, ख्वाबो की माला बनुना ||

 

 हौंसलों भर अपने उर में

भूल के बीती बात को  आगे बढ़ना

याद आ जाए कोई भुला-बिसरा

झट से उसका हाल जानना || 

 

काम, क्रोध और…

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Posted on January 14, 2020 at 5:22pm — 4 Comments

“भ्रम जाल”

भ्रम जाल ये कैसा फैला

खुद को खुद ही भूल चुका  

ना वाणी पर संयम किसीका  

उर में माया, द्वेष भरा |

 

कोह में अपना विनती भाव भुलाया  

जो धैर्य भी से दूर हुआ

गरल इतना उर में भरा है कि

क्षमा, प्रेम करना ही भूल गया |

 

करुणा दया भी पास नहीं अब

पशुत्व के जैसा बन चुका

भलाई का दामन ओढ़ की जाने

पीठ पीछे चुरा घोप रहा |

 

आत्महित में अनेत्री बन गए जैसे  

भयंकर बैर का…

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Posted on January 13, 2020 at 4:29pm — 4 Comments

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