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PHOOL SINGH
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PHOOL SINGH posted a blog post

आओ मिलकर घर बनाये

ईट पत्थर से बना मकानउसमें रहते दो इंसानरिश्तों को वो कदर न करतेएक-दूजे से बात ना करतेकहने को एक मकान में रहतेपर एक-दूजे से घृणा करतेमकान की परिभाषाको सिद्ध करते || कच्ची मिटटी का एक, छोटा घरस्वर्ग से सुंदर, प्यारा घरएक परिवार की जान था, जो  प्रेम की सुंदर मिशाल था, वोसब सदस्य साथ में रहतेहसतें-खेलतें घुल-मिल रहतेनारी के सम्मान के संग सब  एक दूजे का आदर करतेंमुश्किल यदि कोई, घर पर आयेमिलजुल कर समाधान खोजतेऐसे अपने घर में रहते || आओ मिलकर धेय बनायेमकान नहीं, हम घर बनायेसंग में रहने की मंशा…See More
21 hours ago
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post हैरान हो जाता हूँ, जब कभी
"कबीर साहब, हौसलाअफजाई के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद, मुझे खुशी है कि आप मेरी रचना को पढ़ते है और कुछ अच्छा लिखने के लिए प्ररित भी|"
Tuesday
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post हैरान हो जाता हूँ, जब कभी
"जनाब फूल सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Tuesday
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Tuesday
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हैरान हो जाता हूँ, जब कभी

आँखों में अश्रु निकल आते है मेरेइतिहास में जा, जब खोजता हूँनारी उत्पीडन की प्रथाओ कीकड़ी से कड़ी मै जोड़ता हूँहैरान हो जाता हूँ, जब कभीइतिहास में जा, जब खोजता हूँ कैसी नारी कुचली जातीचुप होके क्यों, सब सहती थीबालविवाह जैसी, कुरूतियों की खातिरसूली क्यों चढ जाती थीसती होने की कुप्रथा में क्योंइतिहास नया लिख जाती थीचुप होके क्यों, सब सहती थीसूली क्यों चढ जाती थी || जब कभी में सोचता हूँइंसा नहीं क्या पशु थी वोजो काम नरबलि में भी आती थीरही सही जो कसर बची तोदेवदासी बन जाती थीविधवा होने पर ना कभीशादी वो…See More
Tuesday
vijay nikore commented on PHOOL SINGH's blog post जीना हमकों सिखा दिया
"रचना अच्छी लिखी है, आदरणीय फूल सिंह जी"
Tuesday
PHOOL SINGH commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post नवगीत-वेदना ने नेत्र खोले-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"रातरानी खिलखिलाईरुत रचाती है सगाई आ गया मौसम बसंती प्रीत पंछी ले हिंडोले वेदना ने नेत्र खोले ब्रिजेश जी, सुंदर रचना बधाई स्वीकारें|"
Monday
PHOOL SINGH commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post गांव का युवा और शहर के गिद्ध
"एक अच्छा प्रस्तुतिकरण सुंदर बधाई स्वीकारें|"
Monday
PHOOL SINGH commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post श्वान  का दर्द
"श्वान हैरान परेशान घूमता रहता इधर उधर जाए भी तो जाए कहाँ गली ना कूंचा ना घर आश्चर्य अब उसे कोई भी नहीं करता है तंग अब वो भी रहता है मौन नही करता निंद्रा भंग अच्छी रचना के लिए बधाई स्वीकारें|"
Monday
PHOOL SINGH commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नवगीत- राजनीति के पंडे
"खंडित जन विश्वास हो रहा संबंधों का ह्रास हो रहा जंगल, दंगल की भाषा का, अद्भुत यहाँ विकास हो रहा   अब वादों की फसलें होंगी, मुर्गे देंगे अंडे बहुत सुंदर बधाई स्वीकारे|"
Monday
PHOOL SINGH commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post संविधान शिल्पी
"बहुत सुंदर रचना बधाई स्वीकारे|"
Monday
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देशभक्ति का चोला

देशभक्ति का चोला पहनदेश का युवा घूम रहामतवाला होके डोल रहाऐसा देशभक्ति में डूब रहा|| घूम घूम कर,झूम झूम करवीरो की गाथा खोज रहाऐसा देशभक्ति में डूब रहा|| बलिदान को अपने वीरो केहर पल हर क्षण कोरम रमा कर यादों में अपनीखोया-खोया फिर रहा||ऐसा देशभक्ति में डूब रहा|| "मौलिक और अप्रकाशित" See More
Monday
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post जीना हमकों सिखा दिया
"हौसलाअफजाई के लिए सुक्रिया कबीर जी|"
Monday
PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post कर्म ओर किस्मत
"आपका बहुत बहुत धन्यवाद हौसलाअफजाई के लिए सुक्रिया कबीर जी|"
Monday
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post कर्म ओर किस्मत
"जनाब फूल सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post जीना हमकों सिखा दिया
"जनाब फूल सिंह जी आदाब,अच्छी रचना हुई,बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday

Profile Information

Gender
Male
City State
DELHI
Native Place
DELHI
Profession
KALSHANIA CONSULTANCY
About me
NOTHING MUCH

जीवन संगिनी

हार हार का टूट चुका जब

तुमसे ही आश बाँधी है

मैं नहीं तो तुम सही

समर्थ जीवन की ठानी है||

 

मजबूर नहीं मगरूर नहीं मैं 

मोह माया में चूर नहीं मैं

साथ तुम्हारा मिल जाए तो

लक्ष्य से भी दूर नहीं मैं ||

 

सुख दुःख की घटना तो

जीवन में घटती रहती है

छोटी छोटी नोक झोंक भी

हर रिश्ते में होती है 

छोड़ न देना साथ निभाना

तुमसे, प्रेम की डोर जो बाँधी है||

 

गलत किये थे कुछ निर्णय

ये बात भी स्वीकारी है

मैं  गलत और तुम सही

गलती मैंने मानी है

मझधार में फसीं जिंदगी की

नैया पार लगानी है||

 

जीवन संगिनी बनकर,

मेरी जिंदगी, सँवारी है

घर नहीं मेरे दिल में रहना

बस ख़्वाहिश ये हमारी है

मैं नहीं तो तुम सही

समर्थ जीवन की ठानी है||

 

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आओ मिलकर घर बनाये

ईट पत्थर से बना मकान

उसमें रहते दो इंसान

रिश्तों को वो कदर न करते

एक-दूजे से बात ना करते

कहने को एक मकान में रहते

पर एक-दूजे से घृणा करते

मकान की परिभाषा

को सिद्ध करते ||

 

कच्ची मिटटी का एक, छोटा घर

स्वर्ग से सुंदर, प्यारा घर

एक परिवार की जान था, जो  

प्रेम की सुंदर मिशाल था, वो

सब सदस्य साथ में रहते

हसतें-खेलतें घुल-मिल रहते

नारी के सम्मान के संग सब  

एक दूजे का आदर…

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Posted on April 16, 2019 at 4:47pm

हैरान हो जाता हूँ, जब कभी

आँखों में अश्रु निकल आते है मेरे

इतिहास में जा, जब खोजता हूँ

नारी उत्पीडन की प्रथाओ की

कड़ी से कड़ी मै जोड़ता हूँ

हैरान हो जाता हूँ, जब कभी

इतिहास में जा, जब खोजता हूँ

 

कैसी नारी कुचली जाती

चुप होके क्यों, सब सहती थी

बालविवाह जैसी, कुरूतियों की खातिर

सूली क्यों चढ जाती थी

सती होने की कुप्रथा में क्यों

इतिहास नया लिख जाती थी

चुप होके क्यों, सब सहती थी

सूली क्यों चढ जाती थी ||

 

जब कभी…

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Posted on April 16, 2019 at 10:45am — 2 Comments

देशभक्ति का चोला

देशभक्ति का चोला पहन

देश का युवा घूम रहा

मतवाला होके डोल रहा

ऐसा देशभक्ति में डूब रहा||

 

घूम घूम कर,

झूम झूम कर

वीरो की गाथा खोज रहा

ऐसा देशभक्ति में डूब रहा||

 

बलिदान को अपने वीरो के

हर पल हर क्षण को

रम रमा कर यादों में अपनी

खोया-खोया फिर रहा||

ऐसा देशभक्ति में डूब रहा||

 

"मौलिक और अप्रकाशित"

 

Posted on April 12, 2019 at 3:30pm

कर्म ओर किस्मत

उम्र संग ये बढती है

कर्म से अपने चलती है

परीक्षा धैर्य की लेकर

मार्ग प्रशस्त ये करती है||

 

कर्म के पथ पर चढ़कर

ये, अगले कदम को रखती है

हार-जीत के थपेड़े दे देकर

निखार हुनर में करती है||

 

त्रुटी को सुधार के तेरी

आत्मविश्वास से बढ़ती है

उतार चढ़ाव के मार्ग बना

हर परस्थितियो लड़ने को  

तैयार हमें ये करती है||

 

तरक्की की सीढी चढ़े सदा

लक्ष्य निर्धारित करती है

उठा-गिरा…

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Posted on April 12, 2019 at 3:05pm — 2 Comments

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