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Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"
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Latest Activity

Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post ओबीओ को एक छोटी सी भेंट---ग़ज़ल
"आदरणीय ब्रज जी बहुत बहुत आभार"
Apr 11
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post गिरगिटी रंगबाज़ी की आदत तेरी----- ग़ज़ल
"आदरणीय ब्रज जी सादर स्वागत आभार"
Apr 11
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post ओबीओ को एक छोटी सी भेंट---ग़ज़ल
"भई वाह क्या ही खूब कहा आदरणीय..."
Apr 11
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post गिरगिटी रंगबाज़ी की आदत तेरी----- ग़ज़ल
"बहुत खूब कहा आदरणीय मिश्रा जी...हार्दिक बधाई"
Apr 11
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post ओबीओ को एक छोटी सी भेंट---ग़ज़ल
"आदरणीय लक्ष्मण सर सादर आभार, हार्दिक अभिवादन"
Apr 10
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post ओबीओ को एक छोटी सी भेंट---ग़ज़ल
"आदरणीय मिथिलेश सर सादर अभिवादन सहित हार्दिक आभार"
Apr 10
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post गिरगिटी रंगबाज़ी की आदत तेरी----- ग़ज़ल
"आदरणीय लक्ष्मण सर बहुत बहुत आभार।"
Apr 10
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post गिरगिटी रंगबाज़ी की आदत तेरी----- ग़ज़ल
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी ग़ज़ल पर उपस्थिति के लिए सादर आभार। 1.इसमें ऐब-ए-तनाफुर कहाँ है? 2. मैं ग़ज़ल के उच्चारण आधारित लक्षण को ध्यान में रखता हूँ.....चूँकि मैं आदत और तेरी का सुस्पष्ट और अलग अलग उच्चारण कर पा रहा हूँ इस लिए इस मिसरे को भी मैं दोष रहित…"
Apr 10
Chetan Prakash commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post गिरगिटी रंगबाज़ी की आदत तेरी----- ग़ज़ल
"आदाब, बंधु, बह्रे मुतदारिक मुसम्मन सालिम में ग़ज़ल कहने का अच्छा प्रयास किया है, आपने ! हाँ, एकाधिक मिसरे 'एब -ए - तनाफुर ' के दोष से ग्रसित हैं ; 1."जख़्म जब भी लगा दिल से दरिया कोई " 2.रंग बदलने की आदत तेरी गिरगिट" देखिएगा…"
Apr 10
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post गिरगिटी रंगबाज़ी की आदत तेरी----- ग़ज़ल
"आ. भाई पंकज जी, सादर अभिवादन। सुन्दर गजल हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Apr 10
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post ओबीओ को एक छोटी सी भेंट---ग़ज़ल
"आ. भाई पंकज जी, वर्षगाँठ पर सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
Apr 8

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post ओबीओ को एक छोटी सी भेंट---ग़ज़ल
"आदरणीय पंकज जी, बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने। हार्दिक बधाई। सादर।"
Apr 8
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Samar kabeer's blog post ओबीओ की बारहवीं सालगिरह का तुहफ़ा
"आदरणीय बाऊजी आपकी गज़लें....आपके अशआर....सीखने की किताबें हैं...इस ख़ूबरु ग़ज़ल के माध्यम से ओबीओ को जन्म दिवस की बधाई देने और सीखने वालों को ऊर्जान्वित करने के लिए आपको बार बार साधुवाद। शेष जिस मारक शेर की चर्चा अधिक होनी थी वह तो अग्रज नें पहले ही कि…"
Apr 7
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कहता हूँ तुझसे जन्मों का नाता है ओबीओ
"आदरणीय लक्ष्मण सर, अच्छी ग़ज़ल हुई है....साधुवाद"
Apr 7
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल -दिल लगाना छोड़ दें
"आदरणीय रचना जी बाऊजी ने समुचित सुझाव दिए हैं, इसलिए इस ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर और कहने की आवश्यकता नहीं है। उनके सुझावों को अमल में लायें.... लेखनी में निखार आएगा।"
Apr 7
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Usha Awasthi's blog post वसन्त (अतुकान्त )
"आदरणीय सादर प्रणाम आपकी रचना निःसन्देह दोहा छन्द आधारित है। सभी दोहे भावात्मक दृष्टि से ठीक हैं...मात्र आपको मात्रा गणना पर ध्यान देना होगा और ध्यान दिया जाना आवश्यक भी है, क्योंकि आप रचना कर रही हैं अतः रचना मानकानुरूप होनी ही चाहिये। शुभम भवतु"
Apr 7

Profile Information

Gender
Male
City State
Azamgarh
Native Place
Azamgarh
Profession
Teaching

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ओबीओ को एक छोटी सी भेंट---ग़ज़ल

212 212 212 212

साल बारह का अब है हुआ ओबीओ 

उम्र तरुणाई की पा गया ओबीओ

शाइरी गीत कविता कहानी ग़ज़ल

के अमिय नीर का है पता ओबीओ

संस्कार औ अदब का यहाँ मोल है

लेखनी के नियम पर टिका ओबीओ 

गर है साहित्य संसार का आइना

तब तो दर्पण ही है दुनिया का ओबीओ

सीखने व सिखाने की है झील तू

ये भी पंकज तुझी में खिला ओबीओ 

मौलिक अप्रकाशित

Posted on April 3, 2022 at 11:30am — 16 Comments

गिरगिटी रंगबाज़ी की आदत तेरी----- ग़ज़ल

212 212 212 212

जब कभी दर्द हद से गुज़रने लगा
शाइरी का हुनर तब निखरने लगा

ज़ख़्म जब भी लगा दिल से दरिया कोई
हर्फ़ बन कागज़ों पर बिखरने लगा

तन के भीतर जो उस आइने में उतर
कौन ऐसा है जो अब सँवरने लगा

बेवफ़ाई का ऐसा हुआ है असर
एक सन्नाटा दिल में पसरने लगा

रँग बदलने की आदत तेरी गिरगिटी 
सो जहाँ तू नज़र से उतरने लगा

मौलिक अप्रकाशित

Posted on April 3, 2022 at 11:00am — 8 Comments

दौड़ पड़ा याद का तौसन कोई----ग़ज़ल

2122 1122 1122 22

फिर खुला याद के कमरे का ज्यूँ रौज़न कोई

त्यों ही फिर दौड़ पड़ा याद का तौसन कोई

शेर में ज़िक्र है कोचिंग व घने कुहरे का

चाहता हूँ किसी रिक्शे पे चले मन कोई

मैंने कुछ शेर केमिस्ट्री के कहे हैं, जिससे

मेरे महबूब के दिल में हो रिएक्शन कोई

किस तरह मैंने सजाया है मेरे दिलबर को

आके देखे मेरी ग़ज़लों का ये गुलशन कोई

शायरी गीत सभी कुछ जो लिखा है मैंने

जान तेरा है असर मेरा नहीं फ़न…

Continue

Posted on January 14, 2021 at 2:08pm — 6 Comments

ईंटा पत्थर कंकड़ बजरी ले कर आऊँगा---ग़ज़ल

22 22 22 22 22 22 2 

ईंटें पत्थर कंकड़ बजरी ले कर आऊँगा

सुन; तेरे शीशे के घर पर सब बरसाऊँगा

फूँक-फाँक कर वर्ग विभाजन वाला हर अध्याय

क्या है सनातन सब को यह अहसास कराऊँगा

जान रहा, जग की रानी है मुद्रा-माया धारी

किन्तु मनुज से प्रीत ज़रूरी रोज़ सिखाऊँगा

मठ अधिपति को पूज रहे, जबकि नहीं हो निर्बल

वायु-अनल से युक्त बली हो, याद धराऊँगा

तीव्र प्रज्ज्वलित शब्द हैं मेरे ताप भयंकर है

किंतु स्वर्ण-मन-शोधन को मैं…

Continue

Posted on September 9, 2019 at 11:00am — 2 Comments

Comment Wall (7 comments)

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At 10:57am on August 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय पंकज कुमार मिश्रा जी आदाब बहुत बहुत शुक्रिया
At 1:01am on August 7, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय पंकज कुमार मिश्रा जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें
At 4:23pm on February 28, 2016, kanta roy said…

स्वागत आपका तहेदिल आदरणीय पंकज जी।  

At 6:34pm on October 26, 2015, kanta roy said…

महीने के सक्रीय सदस्य चुने जाने के इस गौरव पल के  लिए ढेरों बधाई आपको आदरणीय पंकज जी।  

At 11:27pm on October 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

पंकज कुमार मिश्रा 'वात्स्यायन' जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:35pm on August 7, 2015, Ravi Shukla said…

स्‍वागत है पंकज जी आपका

At 11:39am on July 26, 2015, Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" said…
सभी लोगों का सादर अभिवादन
 
 
 

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