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Pradeep Devisharan Bhatt
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Pradeep Devisharan Bhatt posted a blog post

माँ भी बोझ लगती है

बोझ उठाती हैअकेली माँ कई बच्चोँ काकई बच्चोँ को मगर माँ भी बोझ लगती है लहू से सींचकर जिसको बडा किया उसकोबहु के साथ ही रहने में मौज लगती है रुठ जाता था सड्क पे जो एक खिलौने कोटूटी ऐनक भी उसे अब माँ की बोझ लगती है वो पूछ्ता ही नही क्या खाना खा लिया तुमनेभूख तो भूख है माँ को भी रोज़ लगती है पांव जब से बहू के भारी हो गये हैं ‘प्रदीप’सास में माँ की उसको फिरोज़ लगती है-प्रदीप देविशरण भट्ट-मौलिक व अप्रकाशितSee More
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Pradeep Devisharan Bhatt commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "रिश्तोँ की घुटन"
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Pradeep Devisharan Bhatt commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "रिश्तोँ की घुटन"
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"श्वान हैरान परेशान घूमता रहता इधर उधर जाए भी तो जाए कहाँ गली ना कूंचा ना घर आश्चर्य अब उसे कोई भी नहीं करता है तंग अब वो भी रहता है मौन नही करता निंद्रा भंग अच्छी रचना के लिए बधाई स्वीकारें|"
Apr 15
babitagupta commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post श्वान  का दर्द
"बेहतरीन रचना के लिए बधाई स्वीकार कीजिएगा आदरणीय प्रदीप सरजी ।"
Apr 9
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post श्वान  का दर्द
"अच्छी रचना है आदरणीय..हालाँकि कई टाइपिंग मिस्टेक हैं।"
Apr 9

Profile Information

Gender
Male
City State
Mumbai
Native Place
Roorkie
Profession
Government
About me
Superintendent in KVIC, Mumbai

Pradeep Devisharan Bhatt's Blog

माँ भी बोझ लगती है

बोझ उठाती हैअकेली माँ कई बच्चोँ का

कई बच्चोँ को मगर माँ भी बोझ लगती है

 

लहू से सींचकर जिसको बडा किया उसको

बहु के साथ ही रहने में मौज लगती है…

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Posted on May 30, 2019 at 3:00pm

श्वान  का दर्द

जब से शहर में चुनाव का बिगूल बज गया

श्वान का भी श्वान से खौफ निकल गया

शोर और सिर्फ शोर मच रहा सुबह शाम

पांच साल बाद नेता को पडा जनता से काम

  

श्वान हैरान परेशान घूमता रहता इधर उधर…

Continue

Posted on April 4, 2019 at 11:00am — 4 Comments

पथ के पथगामी-

नारी तो केवल है नारी है    

नर भी तो केवल है नर      

दोनोँ के विचार अलग हैं

दोनोँ के किरदार अलग

ना इसका कुछ हिस्सा ज्यादा

ना ही उसका है कुछ कम

 

कभी…

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Posted on April 2, 2019 at 6:30pm — 4 Comments

"रिश्तोँ की घुटन"

 

भीड भरे रस्ते पे एक दिन,

बरसोँ पुराना दोस्त मिला । 

चेहरे से मुस्कान थी गायब,

स्वर भी कुछ रुखा सा मिला । । 

 

मैंने पूछा कैसे हो तुम,

वो बोला कुछ ठीक नहीं । 

मैंने पूछा और हाल-ए-इश्क,

सोच के बोला ली भीख नही । । 

 

उसके इस उत्तर से अचम्भित,

ठिठक  गया  मैं  चलते-चलते । 

फिर काँधे पे हाथ रख पूछा,

किसी से नहीं क्या मिलते-जुलते…

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Posted on March 30, 2019 at 7:00pm — 6 Comments

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At 7:12am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

 
 
 

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