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रामबली गुप्ता
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Sushil Sarna commented on रामबली गुप्ता's blog post वागीश्वरी सवैया-रामबली गुप्ता
"आदरणीय रामबली गुप्ता जी अति सुंदर और मनभावन सृजन के लिए दिल से बधाई ।"
12 hours ago
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post वागीश्वरी सवैया-रामबली गुप्ता
"लिखने में टंकण त्रुटि हो गई है आदरणीय गोपाल सर जी।क्षमाप्रार्थी हूँ अभी सुधार लेता हूँ। सादर धन्यवाद"
17 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on रामबली गुप्ता's blog post वागीश्वरी सवैया-रामबली गुप्ता
"प्रिय राम बली जी . आपके सूत्र की मात्रिक व्यवस्था अधूरी है -  (122X 7+ 1 2 )और वर्णिक  व्यवस्था आपने दी  नही (12 वर्ण , 11 वर्ण ) आपके छंद का शिल्प सधा हुआ है i इसके लिए बधाई  I "
19 hours ago
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post वागीश्वरी सवैया-रामबली गुप्ता
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय भाई साहब। सब आप सभी सामीप्य और सहयोग से सीखा है।"
yesterday
Samar kabeer commented on रामबली गुप्ता's blog post वागीश्वरी सवैया-रामबली गुप्ता
"जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब,बहुत मुश्किल छन्द है भाई,कहने में पसीने आ जाते हैं,मगर आपने बहुत ख़ूब कहा, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
रामबली गुप्ता posted a blog post

वागीश्वरी सवैया-रामबली गुप्ता

सूत्र-सात यगण +गा; 122×7+2पड़ी जान है मुश्किलों में करूँ क्या कि नैना मिले और ये हो गया।गई नींद भी औ' लुटा चैन मेरा न जाने जिया ये कहां खो गया।।जिया के बिना भी जिया जाय कैसे अरे! कौन काँटें यहां बो गया।हुआ बावरा या नशा प्यार का है संभालो मुझे हाय! मैं तो गया।।रचनाकार-रामबली गुप्तामौलिक एवं अप्रकाशितSee More
yesterday
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post महाभुजंगप्रयात सवैया-रामबली गुप्ता
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीय समर भाई साहब"
yesterday
Samar kabeer commented on रामबली गुप्ता's blog post महाभुजंगप्रयात सवैया-रामबली गुप्ता
"जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब,बहुत समय बाद आपको पटल पर देख कर प्रसन्न्ता हुई । बहुत उम्द: छन्द लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Tuesday
रामबली गुप्ता commented on रामबली गुप्ता's blog post महाभुजंगप्रयात सवैया-रामबली गुप्ता
"सादर धन्यवाद भाई सुरेन्द्रनाथ जी"
Monday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on रामबली गुप्ता's blog post महाभुजंगप्रयात सवैया-रामबली गुप्ता
"आद0 रामबली गुप्ता जी सादर अभिवादन। बहुत ही बेहतरीन दोनों छंद लिखा आपने। सन्देश परक भी और शिल्पगत भी। बधाई स्वीकार कीजिये।सादर"
Saturday
रामबली गुप्ता posted a blog post

महाभुजंगप्रयात सवैया-रामबली गुप्ता

सूत्र-आठ यगण प्रति पद; 122x8चुनो मार्ग सच्चा करो कर्म अच्छे जहां में तुम्हारा सदा नाम होगा।करो यत्न श्रद्धा व निष्ठा भरे तो न पूरा भला कौन सा काम होगा।।न निर्बाध है लक्ष्य की साधना जूझना मुश्किलों से सरे-आम होगा।इन्हें जीतना पीढ़ियों के लिए भी तुम्हारा नया एक पैगाम होगा।।1।।करे सामना धैर्य से मुश्किलों का न कर्तव्य से पैर पीछे हटाए।नहीं हार से हार माने जहां में कभी कोशिशों से न जो जी चुराए।।अँधेरा घना या निशा हो घनेरी दिये आस के जो दिलों में जलाए।वही आसमां पे लिखे कीर्ति-गाथा जहां को सदा राह…See More
Saturday

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on रामबली गुप्ता's blog post गीतिका(आधार छंद-दोहा) -रामबली गुप्ता
"बहुत बढ़िया(आधार छंद ) छंद गीतिका लिखी है आद० रामबली जी बहुत बहुत बधाई लीजिये  अधर-सुधा घट भौंह-धनु, मुख उज्ज्वल सम चंद्रदृग-मद सर मृदु बोल ज्यों, रति ने गाया गीत----वाह्ह्हह्ह लजवाब "
Nov 21, 2018
Sushil Sarna commented on रामबली गुप्ता's blog post गीतिका(आधार छंद-दोहा) -रामबली गुप्ता
"सोच समझ कर बोलिए, बातें सदा विनीतछूटा धनु से बाण जो, लौटा कब हे! मीत बहुत सुंदर आदरणीय रामबली गुप्ता जी ... इस भावपूर्ण गीतिका के लिए हार्दिक बधाई।"
Nov 19, 2018
Samar kabeer commented on रामबली गुप्ता's blog post गीतिका(आधार छंद-दोहा) -रामबली गुप्ता
"जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 19, 2018
रामबली गुप्ता posted a blog post

गीतिका(आधार छंद-दोहा) -रामबली गुप्ता

सोच समझ कर बोलिए, बातें सदा विनीतछूटा धनु से बाण जो, लौटा कब हे! मीततीर-धनुष-तलवार से, बड़े दया औ' प्रेमइन्हें बना लें शस्त्र यदि, जग को लेंगे जीत।द्वेष-दंभ सम अरि सखे! यहाँ मनुज के कौनबिन इनके संहार के, उपजे कब हिय प्रीतसतत प्रयासों के करें, ऐसे तीव्र प्रहारपर्वत पथ खुद छोड़ दें, होकर भय से भीतअधर-सुधा घट भौंह-धनु, मुख उज्ज्वल सम चंद्रदृग-मद सर मृदु बोल ज्यों, रति ने गाया गीतउसके आने से सदा, हो चेतन तन प्राणमन के सूने साज तब, छेड़ें मृदु संगीतश्री के सम्मुख शारदे! घटा तुम्हारा मानहाय! भरत की भूमि…See More
Nov 19, 2018

Profile Information

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DEORIA
Native Place
KOTHA
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TEACHING
About me
NATIONALIST

रामबली गुप्ता's Blog

वागीश्वरी सवैया-रामबली गुप्ता

सूत्र-सात यगण +गा; 122×7+2

पड़ी जान है मुश्किलों में करूँ क्या कि नैना मिले और ये हो गया।
गई नींद भी औ' लुटा चैन मेरा न जाने जिया ये कहां खो गया।।
जिया के बिना भी जिया जाय कैसे अरे! कौन काँटें यहां बो गया।
हुआ बावरा या नशा प्यार का है संभालो मुझे हाय! मैं तो गया।।

रचनाकार-रामबली गुप्ता

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on April 17, 2019 at 10:29am — 5 Comments

महाभुजंगप्रयात सवैया-रामबली गुप्ता

सूत्र-आठ यगण प्रति पद; 122x8

चुनो मार्ग सच्चा करो कर्म अच्छे जहां में तुम्हारा सदा नाम होगा।

करो यत्न श्रद्धा व निष्ठा भरे तो न पूरा भला कौन सा काम होगा।।

न निर्बाध है लक्ष्य की साधना जूझना मुश्किलों से सरे-आम होगा।

इन्हें जीतना पीढ़ियों के लिए भी तुम्हारा नया एक पैगाम होगा।।1।।

करे सामना धैर्य से मुश्किलों का न कर्तव्य से पैर पीछे हटाए।

नहीं हार से हार माने जहां में कभी कोशिशों से न जो जी चुराए।।

अँधेरा घना या निशा हो घनेरी…

Continue

Posted on April 13, 2019 at 7:32am — 4 Comments

गीतिका(आधार छंद-दोहा) -रामबली गुप्ता

सोच समझ कर बोलिए, बातें सदा विनीत

छूटा धनु से बाण जो, लौटा कब हे! मीत



तीर-धनुष-तलवार से, बड़े दया औ' प्रेम

इन्हें बना लें शस्त्र यदि, जग को लेंगे जीत।



द्वेष-दंभ सम अरि सखे! यहाँ मनुज के कौन

बिन इनके संहार के, उपजे कब हिय प्रीत



सतत प्रयासों के करें, ऐसे तीव्र प्रहार

पर्वत पथ खुद छोड़ दें, होकर भय से भीत



अधर-सुधा घट भौंह-धनु, मुख…

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Posted on November 19, 2018 at 1:21pm — 3 Comments

मत्तगयंद सवैया-रामबली गुप्ता

हे! जगदीश! सुनो विनती अब, भक्त तुम्हें दिन-रैन पुकारे।
व्याकुल नैन निहार रहे पथ, पावन दर्शन हेतु तुम्हारे।।
कौन भला जग में अब हे हरि संकट से यह प्राण उबारे।
आ कर दो उजियार प्रभो! हिय, जीवन के हर लो दुख सारे।।

रचनाकार-रामबली गुप्ता

मौलिक एवं अप्रकाशित

सूत्र-भगण×7+गुरु गुरु; 211×7+22

Posted on October 13, 2018 at 9:48pm — 6 Comments

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At 11:21am on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय रामबली जी आपकी इस सफलता पर आपको तहे दिल बधाई ..
At 11:21am on May 17, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय रामबली जी आपकी इस सफलता पर आपको तहे दिल बधाई ..
At 3:10pm on May 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रामबली गुप्ता जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपका गीत-हृदय का भ्रमर गुनगुनाता चला है को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:47am on May 14, 2016, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ०  रामबली जी

आप जैसा सुन्दर कवि -मित्र पाकर आप्यायित हूँ . आपको सदैव शुभ .  

At 10:17pm on February 25, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

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