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Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय संजय शुक्ला जी, मुझे अलग अंदाज़ लिए ग़ज़ल बहुत अच्छी लगी। सर् की इस्लाह के अनुसार ग़ज़ल सुधार के बाद  बेहतरीन हो जाएगी। सादर"
27 minutes ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय सर् संज्ञान हेतु आभ। सर् लाजवाब शे'र है। "
33 minutes ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय अमीरुद्दीन अमीर जी, हौसला बढ़ाने के लिए आभार। जी, जरूर ।"
45 minutes ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीया ऋचा जी, हौसला बढ़ाने के लिए आभार। जी, जरूर "
46 minutes ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, हौसला बढ़ाने के लिए हार्दिक आभार। आदरणीय, सुधार करके दिखाती हूँ। "
48 minutes ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय संजय शुक्ला जी, आपसे सहमत हूँ। ठीक करके दिखाती हूँ। "
52 minutes ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। सर् हौसला बढ़ाने के लिए बेहद शुक्रियः।  सर् मतला इस तरह से कर दूँ क्या  काश महफ़िल में तुम्हारी भूलकर शर्माना हम  जाम आँखों के पिलाते खोलकर मयख़ाना हम  या  रात महफ़िल में तुम्हारी भूलकर…"
54 minutes ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई बधाई।स्वीकार करें।"
7 hours ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय सालिक गणवीर जी बेहतरीन ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें।"
7 hours ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"2122  2122   2122  212 1 कल तुम्हारी बज़्म में भूलकर शर्माना हम पी रहे थे जाम आँखों का बने रिंदाना हम 2 देखते हैं दर्द /ज़ख़्म की गहराइयों को आज भी रख के अपने टूटे दिल में सब्र का पैमाना हम 3 चाँदनी रातों में टूटे ख़्वाबों की ले कर…"
7 hours ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-133
"आदरणीय लक्ष्मण धामी "मुसाफिर' भाई बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई।मतला विशेष रूप से पसंद आया।"
7 hours ago
Rachna Bhatia commented on Samar kabeer's blog post एक ताज़ा ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर सर् नमस्कार।सर् शानदार ग़ज़ल हुई। सर् हर शे'र पर दाद क़ुबूल करें।"
Monday
सालिक गणवीर commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-दिल दिया हमने
"आदरणीया रचना जी सादर अभिवादन एक उम्दः ग़ज़ल के लिए बधाइयाँ स्वीकार करें"
Friday
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-दिल दिया हमने
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी हौसला बढ़ाने के लिए आभार। आदरणीय बहुत ध्यान रखती हूँ फिर भी नुक़्ते कहीं न कहीं रह जाते हैं। मैं सुधार कर लेती हूँ। आभार।"
Friday
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-दिल दिया हमने
"आदरणीय समर कबीर सर् आदाब।सर् हौसला बढ़ाने के लिए बेहद शुक्रिय:।सर् फेयर में आपके कहे अनुसार सुधार कर लिया है। सादर"
Friday
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-दिल दिया हमने
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'एक बेहिस को दिल दिया हमने कह के अपना उसे ख़ुदा हमने' मतले के ऊला को सानी और सानी को ऊला कर लें । खफ़ा--"ख़फ़ा""
Jul 21

Profile Information

Gender
Female
City State
Delhi
Native Place
Delhi
Profession
Teacher
About me
nothing special... just start my journey ....

Rachna Bhatia's Blog

ग़ज़ल-दिल दिया हमने

2122 1212 22

1

एक बेहिस को दिल दिया हमने

कह के अपना उसे ख़ुदा हमने

2

रहके तुमसे खफ़ा खफ़ा हमने

ख़ुद को बर्बाद कर लिया हमने…

Continue

Posted on July 15, 2021 at 7:12pm — 7 Comments

अच्छा महफ़िल में तमाशा बना मेरा कल शब

2122 1122 1122 22 /112

1

अच्छा महफ़िल में तमाशा बना मेरा कल शब

दिल मेरा तोड़ा गया कह के ख़िलौना कल शब

2

ज़ख़्मी दिल पर तेरा जब नाम उकेरा कल शब

हाय रब्बा मेरे तब होंठों से निकला कल शब

3

झूठ की सुब्ह तलक माँग है बाज़ारों में

और मैं एक भी सच बेच न पाया कल शब

4

मेरे हाथों की लकीरें भी बदल जाएँगी

ख़्वाब आँखों ने दिखाया मुझे ऐसा कल शब

5

उस तरफ़ चाँद सितारों की चमक थी "निर्मल"

इस तरफ़ था…

Continue

Posted on April 4, 2021 at 7:00am

ग़ज़ल- ज़ार ज़ार रोते हैं

212 1222

1

ज़ार ज़ार रोते हैं

जब वो होश ख़ोते हैं

2

ख़्वान ए इश्क वाले ही

तो फ़कीर होते हैं

3

लोग क्यों अदावत में

हाथ खूँ से धोते हैं

4

डोरी में वो सांसों की

आरज़ू पिरोते हैं

5

चाहतों की गठरी सब

उम्र भर सँजोते हैं

6

क्यों अज़ीज़ अपने ही

अश्कों में डुबोते हैं

7

ख़्वाब देखने वाले

रात भर न सोते हैं

मौलिक व अप्रकाशित

रचना…

Continue

Posted on March 30, 2021 at 8:30pm — 2 Comments

ग़ज़ल- उफ़ किया न करे

मुफ़ाइलुन फ़इलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन

1212 1122 1212 22

1

जो सह के ज़ुल्म हज़ारों भी उफ़ किया न करे

दुआ करो कि उसे ग़म कोई मिला न करे

2

मुझे बहार की रंगीनियाँ मिलें न मिलें

मगर ख़िज़ा ही रहे उम्र भर ख़ुदा न करे

3

मुझे वो बज़्म में चाहे मिले नहीं खुल कर

मगर मज़ाक में भी ग़ैर तो कहा न करे

4

मैं ज़र्द पत्ते सा घबरा के काँप जाता हूँ

कहे हवा से कोई तेज़ वो चला न करे

5

नशा किसी प महब्बत…

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Posted on March 21, 2021 at 8:30am — 7 Comments

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