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Rachna Bhatia
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  • Aazi Tamaam
  • अमीरुद्दीन 'अमीर'
  • DR ARUN KUMAR SHASTRI
 

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Rachna Bhatia commented on सालिक गणवीर's blog post अब तो इंसाफ भी करें साहिब.......ग़ज़ल सालिक गणवीर
"आदरणीय सालिक गणवीर जी बेहतरीन रदीफ़ के साथ आपने अच्छी ग़ज़ल कही। हार्दिक बधाई। 4 समझने में मुश्किल आ रही है। 5 में "अगर फिर तो" को आपको है तो में बदल सकते हैं। सादर।"
Nov 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-जय गान पर
"आ. रचना बहन, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Nov 11
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-जय गान पर
"आदरणीय अमीरुद्दीन अमीर जी, ग़ज़ल तक आने आभार। बहुत अच्छी राय दी आपने। आभार। "
Nov 6
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-जय गान पर
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ।  आज़मा ले लाख अपना रौब रुतबा शान पर.    मुनासिब समझें तो इस मिसरे को यूँ कर लें : 'कोशिशें बेकार होंगी आज़मा के देख ले'  'फ़ख़्र करते हैं प…"
Nov 6
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-जय गान पर
"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। ग़ज़ल पर इस्लाह करने के लिए तहेदिल से शुक्रिय:। सर्, जी, सुधार करके दिखाती हूँ। सादर।"
Nov 5
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-जय गान पर
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'आज़मा ले लाख अपना रौब रुतबा शान पर हो न पाएगा कभी हावी तू हिन्दुस्तान पर' इस मतले का ऊला बदलने का प्रयास करें और इसे मतले की जगह शे'र कर लें ।"
Nov 4
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"बहुत दुःखद समाचार, विनम्र श्रद्धांजलि।"
Nov 3
Rachna Bhatia posted a blog post

ग़ज़ल-जय गान पर

2122 2122 2122 2121जब भी छाए अब्र मुश्किल के वतन की आन परखेले हैं तब तब हमारे तिफ़्ल अपनी जान पर2आज़मा ले लाख अपना रौब रुतबा शान परहो न पाएगा कभी हावी तू हिन्दुस्तान पर3हम नहीं होते परेशाँ धर्म से या ज़ात सेख़ूँ जले अपना तो झूठे और बेईमान पर4माना हैं मतभेद भाषा वेष भूषा धर्म मेंफ़ख़्र करते हैं प सब भारत के बढ़ते मान पर5एक दिन ऐसा भी "निर्मल" देखना तुम आएगामुस्कुराएगा फ़लक भी हिन्द के जय गान परमौलिक व अप्रकाशितSee More
Nov 1
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-ज़माने को बताना चाहे
"आदरणीय अमीरुद्दीन अमीर जी ग़ज़ल तक दुबारा आने के लिए आभार।"
Oct 30
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-ज़माने को बताना चाहे
"आदरणीय समर कबीर सर् नमस्कार।सर् ,जी,आपके कहे अनुसार सुधार कर लेती हूँ। दुबारा ग़ज़ल तक आने के लिए बेहद शुक्रिय:।"
Oct 30
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-ज़माने को बताना चाहे
"मुहतरम मुआफ़ी चाहूँगा क़रीं के मआनी पर मुझे ग़लत-फ़हमी हुई। आप सहीह हैं। 'क़रीं' के मआनी भी वही हैं जो 'क़रीब' के हैं। सादर। "
Oct 30
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-ज़माने को बताना चाहे
"//-इस मिसरे को यूँ कर सकती हैं :- "दिल क़रीं और क़रीं यार के आना चाहे "// मुहतरम आदाब, क्या ये मिसरा शिल्प और भाव की दृष्टि से उचित होगा ? क्योंकि क़रीं के मआनी क़रीब या नज़दीकी तो नहीं है। सादर। "
Oct 30
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-ज़माने को बताना चाहे
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब , ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है ,बधाई स्वीकार करें I  'दिल करीब और करीब यार के आना चाहे'---इस मिसरे को यूँ कर सकती हैं :- "दिल क़रीं और क़रीं यार के आना चाहे " 2"
Oct 30
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"आदरणीय तस्दीक़ अहमद ख़ान जी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें। मक़्ता विशेष पसंद आया। बधाई "
Oct 29
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"आदरणीय आज़ी तमाम जी, अच्छी ग़ज़ल हुई, बधाई स्वीकार करें। "
Oct 29
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"आदरणीय आज़ी तमाम जी, हौसला बढ़ाने के लिए आपकी आभारी हूँ। जी, जी। "
Oct 29

Profile Information

Gender
Female
City State
Delhi
Native Place
Delhi
Profession
Teacher
About me
nothing special... just start my journey ....

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ग़ज़ल-जय गान पर

2122 2122 2122 212

1

जब भी छाए अब्र मुश्किल के वतन की आन पर

खेले हैं तब तब हमारे तिफ़्ल अपनी जान पर

2

आज़मा ले लाख अपना रौब रुतबा शान पर

हो न पाएगा कभी हावी तू हिन्दुस्तान पर

3

हम नहीं होते परेशाँ धर्म से या ज़ात से

ख़ूँ जले अपना तो झूठे और बेईमान पर

4

माना हैं मतभेद भाषा वेष भूषा धर्म में

फ़ख़्र करते हैं प सब भारत के बढ़ते मान पर

5

एक दिन ऐसा भी "निर्मल" देखना तुम…

Continue

Posted on November 1, 2021 at 11:00am — 5 Comments

ग़ज़ल-ज़माने को बताना चाहे

2122 1122 1122 22 /112

1

शोर धड़कन का ज़माने को बताना चाहे

दिल करीब और करीब यार के आना चाहे

2

दिल की बैचेनी भी अब एक ठिकाना चाहे

थोड़ा ख़ुशियों के समंदर में नहाना चाहे

3

साथ जितना भी लिखा उसने तेरा मेरा सनम

ज़िन्दगी उतनी ही साँसों का तराना चाहे

4

ख़ुशबू बनकर मेरी साँसों में उतरने वाले

क्या तेरा दिल भी महक ऐसी न पाना चाहे

5

चंद अशआर महब्बत प सुना कर यह मन

बीच महफ़िल में तुम्हें…

Continue

Posted on October 26, 2021 at 9:16pm — 12 Comments

ग़ज़ल-घर बसाना था

2122 / 1212 / 22





1

दिल का रिश्ता यूँ भी निभाना था

फिर से रूठा ख़ुदा मनाना था

2

चार ईंटें टिका के निस्बत की

आदमीयत का घर बसाना था…

Continue

Posted on October 2, 2021 at 12:23pm — 7 Comments

ग़ज़ल-इश्क़ महब्बत धोखा था

22 22 22 2



1

आँख खुली तो जाना था

इश्क़ मुहब्बत धोका था

2

उधड़ी सीवन रिश्तों की

चुपके से वो सिलता था

3…

Continue

Posted on September 13, 2021 at 11:00am — 3 Comments

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