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Rakshita Singh
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Rakshita Singh left a comment for Samarth dev
"Welcome !"
Sunday
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-80 (विषय: आकर्षण)
"उस रोज़ तुम पर हाथ उठाते-उठाते, मैं रुक गया। अचानक ज़हन में उठा सुधा का ख़याल, मुझे खींच ले गया मेरे अतीत की ओर। यही उम्र रही थी मेरी भी और यूँ ही, मैं भी खड़ा था नज़रें झुकाये... तब तुम्हारे नाना के थप्पड़ ने मेरे अबोध मन को बड़ी ठेस दी थी, पर मैं…"
Sunday
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"आदरणीय सालिक जी सादर प्रणाम।  गज़ल पर आपकी प्रतिक्रिया और हौसला अफजाई के लिए ह्रदय से आभार।  अवश्य ही आप सभी गुणीजनों से सीखती रहुँगी। "
Oct 29
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"आदरणीय नाहक जी, सादर प्रणाम । आपकी प्रतिक्रिया व हौसला अफजाई के लिए ह्रदय से आभार ।"
Oct 29
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"आदरणीया रिचा जी नमस्कार,  गज़ल पर आपकी प्रतिक्रिया और हौसला अफजाई के लिए तहेदिल से शुक्रिया ।"
Oct 29
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"आदरणीय अमित जी सादर प्रणाम, गज़ल पर प्रतिक्रिया देने व हौसला अफजाई के लिए तहे-दिल से शुक्रिया इसी प्रकार मार्गदर्शन करते रहें। "
Oct 28
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"आदरणीय कबीर जी सादर प्रणाम, रचना पर आपकी प्रतिक्रिया पाकर बहुत खुशी हुयी। आप सभी गुणीजनों से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला है और आगे भी सीखती रहुँगी मार्गदर्शन करने के लिए ह्रदय से आभार।"
Oct 28
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"आदरणीय नाहक जी सादर प्रणाम,  अपने अपने मैं को लेकर वो भी चुप थे हम भी चुप एक ज़रा सी ज़िद ने आख़िर दोनों को बरबाद किया।  बहुत ही सुंदर गज़ल, हार्दिक बधाई स्वीकार करें। "
Oct 28
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"मुझको अपना कहकर तुमने मेरे दिल को शाद कियाख़ाना-ए-पुर-तारीक को आकर, तुमने आवाद किया हालातों की आँधी ने इक रोज़ नशेमन को तोड़ामेरे वादे तेरी कस्में सब कुछ ख़ाक-ओ-बाद किया बाहों से तो छूट गये पर यादों से ना छूट सकेरव ही जाने तुमने मुझको क़ैद किया…"
Oct 28
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-136
"आदरणीय अमित जी, नमस्कार।  "जितने मुँह उतनी बातें सच तो आखिर ये ही है । अपना ठौर मिटा कर हमने घर उसका आबाद किया।"  उम्दा श़ैरों के साथ बहुत ही सुंदर गज़ल हुयी हार्दिक बधाई स्वीकार करें। "
Oct 28
Rakshita Singh commented on TEJ VEER SINGH's blog post हे राम (लघुकथा)-
"आदरणीय वीर जी, सादर प्रणाम  बहुत सुंदर लघुकथा हार्दिक बधाई स्वीकार करें। "
Oct 16
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-134
"शिकारा ले चले ग़र्क़ाब देखने के लिए !ख़िजा में चल दिये शादाब देखने के लिए !! कि इस उल्फ़त में कुछ ऐसे दिवाने हो गये हैं !अमावस को जगे मेहताब देखने के लिए !! खड़े रहते हैं आपनी बाम की दीवारों पर !कई अरसे से हैं बेताब देखने के लिए !! मोहब्बत का…"
Aug 28
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-74 (विषय: अनुभव)
"सादर प्रणाम आदरणीय, कुछ अनुभव वास्तव में कटु होते हैं...कम शब्दों में बहुत ही सटीक व सुंदर लघुकथा हुई, हार्दिक बधाई स्वीकार करें। "
May 31
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-74 (विषय: अनुभव)
"सादर प्रणाम आदरणीय, रचना पर आपकी प्रतिक्रिया पाकर बहुत अच्छा लगा। मार्गदर्शन करने व हौसला बढ़ाने के लिए ह्रदय से आभार, मैं अवश्य ही आपके द्वारा बताई गयीं त्रुटियों को सुधारने का प्रयास करूँगी ।"
May 31
Rakshita Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-74 (विषय: अनुभव)
"सादर प्रणाम आदरणीय, यथार्थ कहा आपने अपना किया तो एक ना एक दिन आगे आना ही है। बहुत अच्छी लघुकथा हार्दिक बधाई स्वीकार करें। "
May 31
Rakshita Singh and amod shrivastav (bindouri) are now friends
May 31

Profile Information

Gender
Female
City State
Noida
Native Place
Ujhani
Profession
Fashion desinger
About me
NA

Comment Wall (1 comment)

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At 10:25pm on June 20, 2018, SudhenduOjha said…

आदरणीया सुश्री रक्षिता सिंह जी, नमस्कार। रचना आपको पसंद आई, धन्यवाद....

Rakshita Singh's Blog

उन्हें मालूम नहीं ...

बड़ी खामोशी से वो कर रहें हैं गुफ्तगू

मगर सब सुन रहे हैं ये उन्हें मालूम नहीं !!

मोहब्बत के खिलें हैं फूल जिनके दर्मियाँ

वो काँटे चुन रहे हैं ये उन्हें मालूम नहीं !!

यूँ शब भर जागकर सौदाई बन तन्हाई का

गलीचा बुन रहे हैं ये उन्हें मालूम नहीं !!

किये हैं ज़ब्त, वादों में जो रिश्ते प्यार के

वो रिश्ते घुन रहें हैं ये उन्हें मालूम नहीं !!

वो हमसे पूंछते हैं इश्क करने की वज़ह

मोहब्बत बेवज़ह है ये उन्हें मालूम नहीं…

Continue

Posted on February 18, 2019 at 9:49am — 2 Comments

अल्फाज़

अल्फाज़ रूठें हैं -
छोटे बच्चों की तरह,  

मेरी शायरी पर -
अपने पैर पटक रहे हैं,

बहुत अरसे के बाद -
आया हूँ मिलने इनसे,

यकीनन इसलिए-
रूठे हैं मुझसे कट रहे हैं !!

(मौलिक व अप्रकाशित)

Posted on February 8, 2019 at 10:25am — 4 Comments

प्रिय

तेरी मीठी बातों से ही

भरता मेरा पेट प्रिय,

जिस दिन तू गुमसुम रहती है-

भूखा मैं सो जाता हूँ !!

मैखाना, ये आँखें तेरी

पीने दे मत रोक प्रिय,

जब जब ये छलका करती हैं-

और बहक मैं जाता हूँ !!

रहता हूँ तेरे दिल में मैं

बनकर तेरा दास प्रिय,

जब भी टूटा है दिल तेरा-

तब मैं बेघर हो जाता हूँ !!

मदहोश सा कुछ हो जाता हूँ

जब होती हो तुम साथ प्रिय,

छू कर निकलूँ जो लव तेरे तो-

ज़ुल्फ़ों में खो जाता हूँ…

Continue

Posted on January 3, 2019 at 6:41pm — 4 Comments

विरह गीत

अश्रु भरे नैन,
नाहीं आवे मोहे चैन
कैसे कटें दिन रैन,
इस विरहा की मारी के...

मन में समायो है,
ये जसुदा को जायो
कोई ले चलो री गाम मोहे,
कृष्ण मुरारी के...

कर गयो टोना,
नंनबाबा को ये छोना
देख सांवरो सलौना,
गाऊँ गीत मल्हारी के...

व्याकुल सो मन
अकुलाये से नयन
बिन धीरज धरें ना
चितवन को निहारि के...

(मौलिक व अप्रकाशित)

Posted on August 19, 2018 at 8:58pm — 11 Comments

 
 
 

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