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रवि भसीन 'शाहिद'
  • Male
  • Ferozepur, Punjab
  • India
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रवि भसीन 'शाहिद''s Page

Latest Activity

Harash Mahajan commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post ग़ज़ल (वही मंज़र है और मैं) - शाहिद फ़िरोज़पुरी
"आदरणीय भसीन जी वाह बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल हूं है आपकी । हर शेर लाज़वाब । मुबारक़बाद कबूल कीजियेगा । सादर ।"
Sep 12, 2020
रवि भसीन 'शाहिद' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दो चार रंग छाँव के हमने बचा लिए - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' भाई, बहुत ख़ूब ग़ज़ल कही है आपने, इस पर दाद और मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाएँ।"
Aug 19, 2020
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post एक नया दस्तूर (ग़ज़ल - शाहिद फिरोज़पुरी)
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' भाई, आप की नवाज़िश और हौसला-अफ़ज़ाई के लिए बेहद शुक्रगुज़ार हूँ।"
Aug 19, 2020
नाथ सोनांचली commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post एक नया दस्तूर (ग़ज़ल - शाहिद फिरोज़पुरी)
"आद0  भाई रवि भसीन जी सादर अभिवादन।  बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल हुई है। इस उम्दः ग़ज़ल पर कोटिश बधाई स्वीकार कीजिये"
Aug 17, 2020
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post बड़ा दिन हो मुबारक
"आदरणीया Rachna Bhatia साहिबा, नज़्म में आपकी शिरकत और सुख़न-नवाज़ी के लिए तह-ए-दिल से आपका शुक्रगुज़ार हूँ।"
Aug 15, 2020
रवि भसीन 'शाहिद' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-जैसा जग है वैसा ही हो जाऊँ तो
"आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' साहिब, नमस्कार। हिन्दी की ख़ुशबू से महकती इस सुंदर ग़ज़ल पर आपको हार्दिक बधाई! बहुत बढ़िया अशआर हुए हैं जनाब!"
Aug 15, 2020
Rachna Bhatia commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post बड़ा दिन हो मुबारक
"आदरणीय रवि भसीन'शाहिद' जी बेहतरीन नज़्म लिखी। बधाई स्वीकार करें।"
Aug 15, 2020
रवि भसीन 'शाहिद' commented on सालिक गणवीर's blog post जिसको हम ग़ैर समझते थे...(ग़ज़ल : सालिक गणवीर)
"आदरणीय सालिक गणवीर साहिब, नमस्कार। बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है जनाब, आपको इस पर ख़ूब सारी दाद और हार्दिक बधाई।"
Aug 13, 2020
रवि भसीन 'शाहिद' commented on S.S Dipu's blog post मशीनी पुतले
"आदरणीया Dipu mandrawal साहिबा, बहुत ख़ूब। बड़ी सच्चाई है आपके अल्फ़ाज़ में। सादर"
Aug 13, 2020
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Madhu Passi 'महक''s blog post यूँ ख़यालों में सनम आने लगे हैं...(ग़ज़ल मधु पासी 'महक')
"आदरणीया Madhu Passi 'महक' साहिबा, बहुत ख़ूब ग़ज़ल कही आपने! ओबीओ के मंच पर आपको इस पहली ग़ज़ल की प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई और भविष्य के लिए अनेकों शुभकामनाएँ!"
Aug 13, 2020
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Sarfaraz kushalgarhi's blog post नाज़ नख़रों का अंदाज़....
"आदरणीय Sarfaraz kushalgarhi भाई, इस सुंदर ग़ज़ल से अपने ओबीओ के सफ़र का आग़ाज़ करने पर आपको हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ!"
Aug 12, 2020
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post एक नया दस्तूर (ग़ज़ल - शाहिद फिरोज़पुरी)
"आदरणीय Sarfaraz kushalgarhi भाई, आपका हार्दिक आभार। मंच पर आपका बहुत स्वागत है।"
Aug 12, 2020
Sarfaraz kushalgarhi commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post एक नया दस्तूर (ग़ज़ल - शाहिद फिरोज़पुरी)
"बहुत ख़ूब भाई लाजवाब "
Aug 12, 2020
रवि भसीन 'शाहिद' left a comment for Sarfaraz kushalgarhi
"आदरणीय Sarfaraz kushalgarhi भाई, आपका बहुत स्वागत है!"
Aug 12, 2020
रवि भसीन 'शाहिद' commented on सालिक गणवीर's blog post रस्ते की बात है न ये रहबर की बात है...(ग़ज़ल-सालिक गणवीर)
"आदरणीय सालिक गणवीर साहिब, लाजवाब ग़ज़ल हुई है जनाब, बधाई स्वीकार करें। तीसरे और चौथे शे'र के लिए विशेष दाद।"
Aug 11, 2020
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post एक नया दस्तूर (ग़ज़ल - शाहिद फिरोज़पुरी)
"आदरणीया Madhu Passi 'महक' साहिबा, ग़ज़ल तक आने के लिए और प्रोत्साहित करने के लिए आपका हार्दिक आभार!"
Aug 11, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
Punjab
Native Place
Ferozepur
Profession
Teacher
About me
Passionate about Urdu poetry and music, an English and IELTS trainer by profession, author of a book of short stories 'And That's the Whole Story'

रवि भसीन 'शाहिद''s Blog

एक नया दस्तूर (ग़ज़ल - शाहिद फिरोज़पुरी)

22 / 22 / 22 / 22 / 22 / 22

एक नया दस्तूर चलाया जा सकता है

ग़म को भी महबूब बनाया जा सकता है [1]

अपने आप को यूँ तड़पाया जा सकता है

बीती बातों पर पछताया जा सकता है [2]

यार की बाँहों में अब दम घुटता है मेरा

जन्नत से भी तो उकताया जा सकता है [3]

आशिक़ सा मासूम कहाँ पाओगे जिस से

अपना कह कर सब मनवाया जा सकता है [4]

पहली बार महब्बत छूती है जब दिल को

उस लम्हे को कैसे भुलाया जा सकता है [5]

जीत…

Continue

Posted on August 9, 2020 at 12:42pm — 18 Comments

वो भी नहीं रही (ग़ज़ल - शाहिद फ़िरोज़पुरी)

बह्रे मज़ारे मुसम्मन अख़रब मकफ़ूफ़ महज़ूफ़

221  /  2121 /  1221  /  212



मुहलत जो ग़म से पाई थी वो भी नहीं रही

इक आस जगमगाई थी वो भी नहीं रही [1]

देकर लहू जिगर का मसर्रत जो मुट्ठी भर

हिस्से में मेरे आई थी वो भी नहीं रही [2]

शाहाना तौर हम कभी अपना नहीं सके

आदत में जो गदाई थी वो भी नहीं रही [3]

दुनिया घिरी है चारों तरफ़ से बुराई में

बंदों में जो भलाई थी वो भी नहीं रही…

Continue

Posted on August 2, 2020 at 3:25pm — 12 Comments

मक़ाम ऐसे चाहत में आने लगे हैं (ग़ज़ल - शाहिद फ़िरोज़पुरी)

122 / 122 / 122 / 122

मक़ाम ऐसे चाहत में आने लगे हैं

अब उनके सितम दिल को भाने लगे हैं [1]

मज़े वस्ल में पहले आते थे जो सब

हमें अब वो फ़ुर्क़त में आने लगे हैं [2]

उन्हीं का तो ग़म हमने ग़ज़लों में ढाला

ये एहसाँ वो हम पर जताने लगे हैं [3]

नया जौर का सोचते हैं तरीक़ा

वो उँगली से ज़ुल्फ़ें घुमाने लगे हैं [4]

मुझे लोग दीवाना समझेंगे शायद

मेरे ख़त वो सबको सुनाने लगे हैं [5]

हुए इतने बेज़ार ज़ुल्मत से…

Continue

Posted on July 27, 2020 at 9:59am — 14 Comments

क्या बताएँ तुम्हें किस बात पे रोना आया (ग़ज़ल - शाहिद फ़िरोज़पुरी)

2122 / 1122 / 1122 / 22

उस अधूरी सी मुलाक़ात पे रोना आया

जो न कह पाए हर उस बात पे रोना आया [1]

दूरियों के थे जो क़ुर्बत के भी हो सकते थे

ऐसे खोए हुए लम्हात पे रोना आया [2]

दे गए जाते हुए वो जो ख़ज़ाना ग़म का

जाने क्यूँ उस हसीं सौग़ात पे रोना आया [3]

रो लिए उनके जवाबात पे हम जी भर के

फिर हमें अपने सवालात पे रोना आया [4]

आँख भर आई अचानक यूँ ही बैठे बैठे

क्या बताएँ तुम्हें किस बात पे रोना आया [5]

दिल तो…

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Posted on July 26, 2020 at 4:46pm — 11 Comments

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At 5:13pm on March 1, 2020,
प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर
said…

आपकी ज़र्रानवाज़ी का तह-ए-दिल से शुक्रिया मोहतरम जनाब रवि भसीन 'शाहिद' साहिब. 

 
 
 

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