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रवि भसीन 'शाहिद'
  • Male
  • Ferozepur, Punjab
  • India
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रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post चीन के नाम (नज़्म - शाहिद फ़िरोज़पुरी)
"जी कृप्या पहली पंक्ति यूँ पढ़ें: दुनिया के गुलिस्ताँ में फूल सब हसीं हैं पर"
7 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मौत से कह दो न रोके -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' भाई, इस लाजवाब ग़ज़ल पर आपको दाद और मुबारकबाद पेश करता हूँ!"
7 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' posted a blog post

चीन के नाम (नज़्म - शाहिद फ़िरोज़पुरी)

212 / 1222 / 212 / 1222दुनिया के गुलिस्ताँ में मुल्क सब हसीं हैं परएक मुल्क ऐसा है जो बला का है ख़ुद-सरलाल जिसका परचम है इंक़लाब नारा हैज़ुल्म करने में जिसने सबको जा पछाड़ा हैइस जहान का मरकज़ ख़ुद को गो समझता हैराब्ता कोई दुनिया से नहीं वो रखता हैअपनी सरहदों को वो मुल्क चाहे फैलानाइसलिए वो हमसायों से है आज बेगानाबात अम्न की करके मारे पीठ में खंजरऔर रहनुमाँ उसके झूट ही बकें दिन भरइंसाँ की तरक़्क़ी में हिस्सा कुछ नहीं जिसकाबे-हयाई में लेकिन क्या मुक़ाबला उसकाहै वो मुल्क आमादा बस लहू बहाने परवो बशर को ले…See More
7 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Dr. Vijai Shanker's blog post हिसाब-किताब— डॉO विजय शंकर।
"आदरणीय Dr. Vijai Shanker साहिब, इस सुन्दर रचना पर दाद और मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ।"
19 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (क्या नसीब है)
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहिब, इस लाजवाब ग़ज़ल पर दाद और मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ।"
19 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-63 (विषय: मातृभूमि)
"आदरणीय TEJ VEER SINGH साहिब, इस बेहतरीन लघुकथा पर दाद और बधाई स्वीकार करें!"
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-63 (विषय: मातृभूमि)
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी, इस बेहतरीन लघुकथा पर बधाई स्वीकार करें। आपने कहानी में जो प्रश्न उठाया है, वो आत्मा को झिंझोड़ देता है, और बहुत से लोगों के लिए ये उन्हीं की कहानी भी है।"
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-63 (विषय: मातृभूमि)
"आदरणीया babitagupta जी, हौसला-अफ़ज़ाई के लिए आपका बहुत शुक्रिया!"
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-63 (विषय: मातृभूमि)
"आदरणीय मोहन बेगोवाल साहिब, आपकी ज़र्रा-नवाज़ी के लिए तह-ए-दिल शुक्रगुज़ार हूँ जनाब!"
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-63 (विषय: मातृभूमि)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' भाई, लघुकथा तक आने के लिए और प्रोत्साहित करने के लिए आपका हार्दिक आभार!"
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-63 (विषय: मातृभूमि)
"फ़ोर्थ ऑफ़ जुलाई (लघुकथा) जयंत कुलकर्णी अपने आलीशान फ़्लैट की खिड़की से स्टैच्यू ऑफ़ लिबर्टी को निहार रहा था। इतने में उसकी पत्नी ट्रे में चाय के दो कप ले कर आई और उसके पास बैठ गई।"कितनी दूर निकल आये हम, काजल," जयंत ने खिड़की से बाहर नज़रें…"
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post रोज़ देता हूँ बद-दुआ तुमको
"आदरणीय Rupam kumar -'मीत' साहिब, उस्ताद-ए-मुहतरम के सुझाए हुए मिस्रे को ध्यान से पढ़िए, उसके कई पहलू निकल रहे हैं, और ये शे'र में बहुत बड़ी ख़ूबी होती है। /मुझे तो सभी बोलते हैं कि लड़का भला भी नहीं तो बुरा भी नहीं…"
Sunday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वफ़ा के देवता को बेवफ़ा हम कैसे होने दें(११३ )
"आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' बीकानेरी साहिब, इस शानदार ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें। /गुनाहों की दफ़ाओं में नहीं है ज़िक्र उल्फ़त का मुहब्बत में क़ज़ा की हो सज़ा हम कैसे होने दें/ हुज़ूर, दूसरे शेर में आपने जो 'दफ़ाओं' को 122 के…"
Sunday
रवि भसीन 'शाहिद' is now friends with सालिक गणवीर, अमीरुद्दीन 'अमीर' and Vinay Prakash Tiwari (VP)
Sunday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post रोज़ देता हूँ बद-दुआ तुमको
"आदरणीय Rupam kumar -'मीत' साहिब, बहुत ख़ूब ग़ज़ल कही आपने, मैं इस पर आपको दाद और मुबारकबाद पेश करता हूँ। आपसे ये निवेदन है कि मंच पर जब भी ग़ज़ल पेश करें, बह्र, अशआर के नंबर, और मुश्किल अलफ़ाज़ (अगर हों तो) के अर्थ ज़रूर लिखें, जिससे…"
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रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"आदरणीय अजय गुप्ता साहिब, इस ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर दाद और बधाई स्वीकार करें!"
Saturday

Profile Information

Gender
Male
City State
Punjab
Native Place
Ferozepur
Profession
Teacher
About me
Passionate about Urdu poetry and music, an English and IELTS trainer by profession, author of a book of short stories 'And That's the Whole Story'

रवि भसीन 'शाहिद''s Blog

चीन के नाम (नज़्म - शाहिद फ़िरोज़पुरी)

212 / 1222 / 212 / 1222

दुनिया के गुलिस्ताँ में मुल्क सब हसीं हैं पर

एक मुल्क ऐसा है जो बला का है ख़ुद-सर

लाल जिसका परचम है इंक़लाब नारा है

ज़ुल्म करने में जिसने सबको जा पछाड़ा है

इस जहान का मरकज़ ख़ुद को गो समझता है

राब्ता कोई दुनिया से नहीं वो रखता है

अपनी सरहदों को वो मुल्क चाहे फैलाना

इसलिए वो हमसायों से है आज बेगाना

बात अम्न की करके मारे पीठ में खंजर

और रहनुमाँ उसके झूट ही बकें दिन भर

इंसाँ की तरक़्क़ी में हिस्सा कुछ…

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Posted on July 3, 2020 at 1:04am — 1 Comment

ग़ज़ल (वही मंज़र है और मैं) - शाहिद फ़िरोज़पुरी

बहरे मज़ारे मुसम्मन अख़रब मक्फूफ़ महज़ूफ़

221  / 2121  / 1221 /  212

बद-हालियों का फिर वही मंज़र है और मैं

इक आज़माइशों का समंदर है और मैं [1]

अरमान दिल के दिल में घुटे जा रहे हैं सब

महरूमियों का एक बवंडर है और मैं…

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Posted on June 16, 2020 at 11:54am — 18 Comments

ये जो कुछ ख़्वाब पाल बैठे हैं (ग़ज़ल)

ख़फ़ीफ़ मुसद्दस मख़बून महज़ूफ़ मक़तू'अ

2122 / 1212 / 22

ये जो कुछ ख़्वाब पाल बैठे हैं

जान आफ़त में डाल बैठे हैं [1]

दिल से हम को निकाल बैठे हैं

देखिए पुर-मलाल बैठे हैं [2]

कह चुके हैं हमें वो जाने को

फिर भी देखो मजाल बैठे हैं [3]

बढ़ गए आगे सब हुनर वाले

हम यहीं बे-कमाल बैठे हैं [4]

अब ज़रूरत नहीं सलाहों की

हम तो सिक्का उछाल बैठे हैं [5]

मेरे और उनके दरमियाँ जाने

कितने ही माह-ओ-साल बैठे हैं…

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Posted on June 8, 2020 at 12:30pm — 14 Comments

उस बेवफ़ा से (ग़ज़ल)

221 / 2121 / 1221 / 212

उस बेवफ़ा से दिल का लगाना बहुत हुआ

मजबूर दिल से हो ये बहाना बहुत हुआ [1]

छोड़ो ये ज़ख़्म-ए-दिल का फ़साना बहुत हुआ

ये आशिक़ी का राग पुराना बहुत हुआ [2]

चलते ही चलते दूर निकल आये इस क़दर

ख़ुद से मिले हुए भी ज़माना बहुत हुआ [3]

ख़ुद से भी कोई रोज़ मुलाक़ात कीजिये

ये दूसरों से मिलना मिलाना बहुत हुआ [4]

तस्कीन दे न पाएँगे काग़ज़ पे कुछ निशाँ

लिख लिख के उसका नाम मिटाना बहुत हुआ [5]

अब इक…

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Posted on May 24, 2020 at 10:32am — 8 Comments

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At 5:13pm on March 1, 2020,
प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर
said…

आपकी ज़र्रानवाज़ी का तह-ए-दिल से शुक्रिया मोहतरम जनाब रवि भसीन 'शाहिद' साहिब. 

 
 
 

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