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Ravi Shukla
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सतविन्द्र कुमार राणा commented on Ravi Shukla's blog post तरही ग़ज़ल फ़िराक़ साहब के मिसरे पर
"आदरणीय रवि सर सादर वन्दन! उम्दा अशआर कहे हैं। हार्दिक बधाई स्वीकारें"
Mar 5
Hariom Shrivastava commented on Ravi Shukla's blog post तरही ग़ज़ल फ़िराक़ साहब के मिसरे पर
"वाह,वाहहह,उम्दा ग़ज़ल कही"
Mar 4
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Ravi Shukla's blog post तरही ग़ज़ल फ़िराक़ साहब के मिसरे पर
"खूबसूरत ग़ज़ल कही है आदरणीय शुक्ला जी बधाई"
Mar 4
नादिर ख़ान commented on Ravi Shukla's blog post तरही ग़ज़ल फ़िराक़ साहब के मिसरे पर
"जो थे साहिल पे तमाशाई यही कहते थे, डूबने वाले को अब तक तो उभर जाना था। बज़्मे अग्यार में है जलवा नुमाई तेरी , इस तग़ाफ़ुल पे तेरे मुझको तो मर जाना था। खूबसूरत गज़ल के लिए ढेरों मुबारकबाद आदरणीय रवि शुक्ला साहब "
Mar 3
Samar kabeer commented on Ravi Shukla's blog post तरही ग़ज़ल फ़िराक़ साहब के मिसरे पर
"जनाब रवि शुक्ला जी आदाब,अव्वल तो ये कि तरही मिसरा 'फ़िराक़'साहिब का नहीं है,टाइटल बदलें । ओबीओ के तरही मिसरे पर उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Mar 2
Balram Dhakar commented on Ravi Shukla's blog post तरही ग़ज़ल फ़िराक़ साहब के मिसरे पर
"आदरणीय रवि सर, सादर अभिवादन। बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है । शेर दर शेर के साथ मुबारकबाद पेश है, कुबूल फरमाएँ।  जो थे साहिल पे तमाशाई यही कहते थे,डूबने वाले को अब तक तो उभर जाना था। इस शेर के लिए अलग से बहुत बहुत बधाई । सादर। "
Mar 1
Ravi Shukla posted a blog post

तरही ग़ज़ल फ़िराक़ साहब के मिसरे पर

थी यही फूल की किस्मत कि बिखर जाना था, ये कहाँ तय था कि जुल्फों में ठहर जाना था।मौज ने चाहा जिधर मोड़ दिया कश्ती को, "मुझको ये भी न था मालूम किधर जाना था"।जो थे साहिल पे तमाशाई यही कहते थे, डूबने वाले को अब तक तो उभर जाना था।बज़्मे अग्यार में है जलवा नुमाई तेरी , इस तग़ाफ़ुल पे तेरे मुझको तो मर जाना था।गर्द हालात की चहरे पे है,लेकिन तुझको, आईना बन के मैं आया तो सँवर जाना था।सुब्ह का भूला तुम्हें कैसे कहूँ मैं बोलो, शाम होते ही तुम्हे लौट के घर जाना था।मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Mar 1
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय सुर्खाब साहब बेहतरीन गजल के लिए दिली मुबारकबाद पेश करता हूं हर शेर उम्दा है"
Feb 23
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय जावेद साहब मतले से मकते तक हर शेर उम्दा है दिली मुबारकबाद पेश करता हूँ। दूसरा शेर मुझे खास पसंद आया ।  "
Feb 23
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय वासुदेव जी ग़ज़ल केलिए दिली बधाई कुबूल करें आखरी शेर बहुत अच्छा  है "
Feb 23
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
" आदरणीय हसरत  साहब अच्छा गिरह के साथ भी इंसाफ हुआ है शेर दर शेर मुबारकबाद पेश करता हूं इस ग़ज़ल के लिए"
Feb 23
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय मिथिलेश जी काफी समय बाद आपको मुशायरे में शिरकत करते हुए देखा है शिकायत इसलिए नहीं क्योंकि मैं खुद भी सक्रिय नहीं हो पा रहा हूं ओ बी ओ में हां मुशायरे में जैसे तैसे हाजिर हो जाता हूं। इस बार गजल के साथ मुशायरे का फीता काटने की आपको बहुत-बहुत…"
Feb 23
dandpani nahak left a comment for Ravi Shukla
"आदरणीय रवि जी बहुत बहुत शुक्रिया"
Jan 27
दिगंबर नासवा commented on Ravi Shukla's blog post गीत दफ्तर पर
"बहुत अच्छी व्यंग धार है इस गीत में ... प्रभावी विश्लेषण ... बधाई हो इस गीत की ..."
Jan 26
Ravi Shukla commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post समझ न आया कि पत्थर से प्यार कैसे हुआ  ( 18)
"आदरणीय गिरधारी सिंह जी अच्छी गजल आपने कहीं मुबारकबाद पेश करता हूं गजल से पहले इसका अरकान लिख देते तो थोड़ी सुविधा हो जाती "
Jan 26
Ravi Shukla commented on सूबे सिंह सुजान's blog post ग़ज़ल - गण हुए तंत्र के हाथ कठपुतलियाँ
"आदरणीय सूबे सिंह जी गजल के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई ग़ज़ल ख्रआ कान भी लिख दीजिये थोड़ी सुविधा हो जाती"
Jan 26

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तरही ग़ज़ल फ़िराक़ साहब के मिसरे पर

थी यही फूल की किस्मत कि बिखर जाना था,

ये कहाँ तय था कि जुल्फों में ठहर जाना था।

मौज ने चाहा जिधर मोड़ दिया कश्ती को,

"मुझको ये भी न था मालूम किधर जाना था"।

जो थे साहिल पे तमाशाई यही कहते थे,

डूबने वाले को अब तक तो उभर जाना था।

बज़्मे अग्यार में है जलवा नुमाई तेरी ,

इस तग़ाफ़ुल पे तेरे मुझको तो मर जाना था।

गर्द हालात की चहरे पे है,लेकिन तुझको,

आईना बन के मैं आया तो सँवर जाना था।

सुब्ह का भूला…

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Posted on March 1, 2019 at 4:30pm — 6 Comments

गीत दफ्तर पर

सिस्टम से अब और निभाना मुश्किल है,

आँसू पीकर हँसते जाना मुश्किल है।।

लंबे चौड़े दफ्तर हैं पर छोटी सोच लिए।

भाँग कुएँ में मिली हुई है पानी कौन पिए।

कागज के रेगिस्तानों में भटक रहा,

मृग तृष्णा से प्यास बुझाना मुश्किल है।

भावुकता में मैदां छोड़ूँ क्या होगा।

कोई और यहाँ आकर रुसवा होगा।।

अजगर बन कर पड़ा रहूँ कैसे संभव,

जोंकों को भी खून पिलाना मुश्किल है।

लानत और मलामत का है भार बहुत।

न्याय नहीं निर्णय का शिष्टाचार…

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Posted on November 16, 2018 at 9:48pm — 5 Comments

तरही ग़ज़ल : साफ छुपते भी नहीं सामने आते भी नहीं

2122  1122  1122  22/112

कोई पूछे तो मेरा हाल बताते भी नहीं,

आशनाई का सबब सबसे छुपाते भी नहीं।

शेर कहते हैं बहुत हुस्न की तारीफ़ में हम

पर कभी अपनी ज़बाँ पर उन्हें लाते भी नहीं।

जब भी देते हैं किसी फूल को हँसने की दुआ,

शाख़ से ओस की बूंदों को गिराते भी नहीं।

ये तुम्हारी है अदा या है कोई मजबूरी,

प्यार भी करते हो और उसको जताते भी नहीं।

सिर्फ़ अल्फ़ाज़ से पहचान…

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Posted on August 29, 2018 at 4:00pm — 17 Comments

गीत : एक भारत श्रेष्ठ भारत

एक भारत श्रेष्ठ भारत आइये मिलकर बनाएं

देश का  सम्मान गौरव लक्ष्य हासिल कर बढ़ाएं

 

शांति के हम पथ प्रदर्शक ध्वज अहिंसा ले चलेंगे

विश्‍व गुरु बन कर पुन: संस्थापना सच की करेंगे

दें नहीं उपदेश अपने आचरण से  कर दिखाएं

 

धर्म पूजा, जाति भाषा, वेश भूषा, बोलियाँ सब

एकता के सूत्र में बंध कर चली है टोलियाँ सब

संगठन में शक्ति है, ऐसी लिखें फिर से कथाएं

 

रेल का हमको दिखाई दे रहा है पथ समांतर

मूल में इसके छिपा है साथ…

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Posted on July 25, 2017 at 11:00am — 9 Comments

Comment Wall (13 comments)

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At 8:08am on January 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय रवि जी
बहुत बहुत शुक्रिया
At 12:59am on October 5, 2018, mirza javed baig said…

मोहतरम जनाब रविरवि शुक्ला जी आदाब 

मुझे अपने फ्रेंड्स लिस्ट में जोड़ने के लिए शुक्रिया 

आपसे बहुत कुछ सीखने का अवसर मिलेगा। 

At 9:25am on September 9, 2018, Ajay Tiwari said…

आदरणीय रवि जी,

आपकी मैत्री हासिल करना किसका सौभाग्य नहीं होगा. और मुझे ख़ुशी है कि ये सौभाग्य अब मुझे भी प्राप्त है. हार्दिक आभार.

At 5:11pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय रवि शुक्ला जी प्रणाम
प्रथम तो मैं देरी से आपका आभार व्यक्त करते हुए शर्मिंदा हूँ और माफ़ी चाहता हूँ अपने मेरी पहली ही ग़ज़ल पढ़ी तथा इस पर अपने विचार व्यक्त किये मैं आपका शुक्रगुज़ार हूँ मेरी पहली ही ग़ज़ल में बहुत ख़ामियां है मुझे भरोषा है की आप जैसे गुणीजनों के सानिध्य में मैं कुछ सीख सकूँगा
आपका बहुत बहुत आभार
At 3:39pm on April 5, 2017, Gurpreet Singh said…

आदरणीय रवि शुक्ला जी आपसे बहुत अच्छी चैटिंग हो रही थी... लेकिन ऐन वक़्त पर मेरे नेट ने धोखा दे दिया ( ये अक्सर मेरे साथ ऐसा ही करता है ) और आप से  बात चीत बीच में ही कट गई ,,, खैर फिर मौका मिला तो बात आगे बढ़ांएंगे,,, संपर्क करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद 

At 11:45pm on July 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रवि शुक्ल जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  ग़ज़ल - व्यापार होना चाहिए को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:23pm on December 17, 2015, Nirdosh Dixit said…
प्रणाम स्वीकारें आदरणीय शुक्ल जी, सादर आभार आपका।
At 11:19pm on November 7, 2015, जयनित कुमार मेहता said…
आपका हार्दिक आभार आदरणीय रवि जी..
At 7:31pm on November 4, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh
said…

क्षमा कीजियेगा आ० रवि शुक्ल जी आज ही आपका कमेंट देखा...

करवाचौथ पर लिखा गया मेरा गीत मात्रिक गीत नहीं है... इसे फायलुन X 4 की आवृति पर  लिखा गया है..

मात्रिक गीतों में मात्रा को गिराकर पढने का कोई विधान नहीं होता .. 

मात्रिक गीत (गीतिका छंद पर आधारित) के  कुछ  उदाहरण देखिये 

http://www.openbooksonline.com/profiles/blogs/5170231:BlogPost:557225

http://www.openbooksonline.com/profiles/blogs/5170231:BlogPost:518431

मंच पर गीत नवगीत पर एक आलेख देखिये 

http://www.openbooksonline.com/group/chhand/forum/topics/5170231:Topic:358338?commentId=5170231%3AComment%3A359492&xg_source=activity&groupId=5170231%3AGroup%3A156482

At 9:36pm on September 16, 2015, shree suneel said…
आदरणीय रवि शुक्ला जी, हार्दिक बधाई आपको 'महीने का सक्रिय सदस्य' चुने जाने पर, मेरी ओर से. सादर.
 
 
 

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