For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Richa Yadav
Share

Richa Yadav's Friends

  • Rupam kumar -'मीत'
 

Welcome, Richa Yadav "Riya"

Latest Activity

Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय लक्ष्मण जी, नमस्कार बहुत शुक्रिया आपका। सादर"
Jan 23
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय अमीर जी,अभिवादन बहुत शुक्रिया आपका। सादर।"
Jan 23
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय दिनेश जी नमस्कार अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करिये।"
Jan 23
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय अमीर जी नमस्कार बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करिये।"
Jan 23
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय रचनाजी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करिये।"
Jan 23
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय नाहक़ जी नमस्कार हौसला अफ़ज़ाई का बहुत शुक्रिया सादर।"
Jan 23
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय रचना जी नमस्कार बहुत बहुत आभार आपका। सादर।"
Jan 23
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय राजेश कुमारी जी नमस्कार बहुत ही अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करिये। सादर।"
Jan 23
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय sir जी, अभिवादन बहुत बहुत शुक्रिया आपका इस correction के लिए, बहुत बेहतर है। सादर।"
Jan 22
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय कबीर sirji आपके मार्गदर्शन के बाद कुछ सुधार किये हैं गज़ल में कृपया देखियेगा। सादर। ज़ब्त पे अपने महारत भी अगर पाई होहै ज़रूरी ये कभी आँख भी भर आई हो।1 ज़िंदगी भी तो चला करती है चालें ऐसीकोई है जिसने यहाँ मुँह की नहीं खाई हो।2 ग़म ख़ुशी साथ ही…"
Jan 22
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय समर कबीर Sirji, नमस्कार बहुत बहुत शुक्रिया आपका इतनी बारीक़ी से ग़ज़ल की त्रुटियां बताने,समझाने के लिए पूरा प्रयास करूँगी सुधारने का। सादर।"
Jan 22
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदणनीय सालिक जी बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का। सादर"
Jan 22
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय Aazi जी सादर अभिवादन अच्छी गज़ल हुई बधाई स्वीकार कीजिये।"
Jan 22
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय Tasqid जी सादर अभिवादन अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करिये।"
Jan 22
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आदरणीय संजय जी सादर अभिवादन बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार कीजिए।"
Jan 22
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"2122 1122 1122 22/112 ज़ब्त पे अपने महारत भी अगर पाई होहै ज़रूरी ये कभी आँख भी भर आईं हो।1 ज़िंदगी भी तो चला करती है चालें ऐसीकोई होगा न बशर मुँह की नहीं खाई हो।2 ग़म ख़ुशी साथ में रहते हैं इन्हीं आँखों मेंये झलकती हैं कहीं मौत या शहनाई हो।3 है बहुत…"
Jan 22

Profile Information

Gender
Female
City State
Faridabad Haryana
Native Place
Alaahabad U.P.
Profession
home maker
About me
computer engineer by heart Shayar

Richa Yadav's Blog

ग़ज़ल-हर बात अपने दिल की बताई नहीं जाती।

221 2121 1221 212



हर बात अपने दिल की बताई नहीं जाती

करके कोई दुआ भी यूँ गाई नहीं जाती।1

दिल आपकेे है बस में ये अब जानते हैं हम

जादूगरी ऐसी भी दिखाई नहीं जाती।2

हैं दर्द-ओ-ग़म भरे हुए इतने कि क्या कहें

ये दास्तान दिल की सुनाई नहीं जाती।3

ये बदगुमानी आपकी आई है बीच में

बिगड़ी है इतनी बात बनाई नहीं जाती।4

फिर साथ होगी होली दीवाली की धूम भी

हमसे अकेले ईद मनाई नहीं जाती।5

दिल आपका दुखा तो…

Continue

Posted on December 7, 2020 at 1:29pm — 4 Comments

मिस्मार दिल का ये दर-ओ-दीवार हो गया

बह्र:- 221 2121 1221 212

मिस्मार दिल का ये दर-ओ-दीवार हो गया

मुद्दत हुई तो यार का दीदार हो गया

वो जो चला गया है मेरा शह्र छोड़ कर

लगता है ऐसा मुझको मैं बीमार हो गया

बेमोल ही रहे न किया ज़िंदगी से ग़म

तूने छुआ मुझे तो मैं दीनार हो गया

था मर्ज़ ऐसा जिसकी नहीं थी दवा कोई

तू हाथ थाम कर मेरा तीमार हो गया

तूने गले लगाया "रिया" को मेरे ख़ुदा

लगता है जैसे क़द मेरा मीनार हो गया

"मौलिक व…

Continue

Posted on October 30, 2020 at 3:30pm — 11 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Samar kabeer commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल: 'नेह के आँसू'
"जनाब जान गोरखपुरी जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिम बहुत ज़ियादा मात्रा पतन से मिसरे रवानी में…"
2 hours ago
Krish mishra 'jaan' gorakhpuri commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल: 'नेह के आँसू'
"आदरणीय समर सर ग़ज़ल पर आपका बेसब्री से इंतजार था। पोस्ट में अरकान लिखना भूल गया।  2122 2122 212"
4 hours ago
Samar kabeer commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल: 'नेह के आँसू'
"जनाब जान गोरखपुरी जी आदाब, इस ग़ज़ल पर कुछ लिखने से पहले जानना चाहता हूँ कि आपने अरकान क्या लिये हैं?"
4 hours ago
Samar kabeer commented on gumnaam pithoragarhi's blog post अब क्या करें
"जनाब गुमनाम पिथौरगढ़ी जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'इश्क़ पहला जो हुआ…"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post रातें तमस भरी हैं उलझन भरे दिवस हैं-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आ. भाई गुमनाम जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति , प्रशंसा और स्नेह के लिए आभार ।"
6 hours ago
gumnaam pithoragarhi commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post रातें तमस भरी हैं उलझन भरे दिवस हैं-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"वाह बहुत खूब ग़ज़ल हुई है बधाई ......"
7 hours ago
gumnaam pithoragarhi commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल~ 'इश्क मुहब्बत चाहत उल्फत'
"वाह बहुत खूब ग़ज़ल हुई है बधाई ......"
7 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post हमारे वारे न्यारे हो रहे हैं
"आदरणीय आज़ी तमाम जी ग़ज़ल तक आने के लिए तथा हौसला बढ़ाने के लिए आभार ‌"
9 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post हमारे वारे न्यारे हो रहे हैं
"आदरणीय अमीरुद्दीन'अमीर'जी नमस्कार। ग़ज़ल तक आने तथा हौसला बढ़ाने के लिए आभारी हूँ।फेयर…"
9 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post हमारे वारे न्यारे हो रहे हैं
"आदरणीय अमीरुद्दीन'अमीर'जी नमस्कार। ग़ज़ल तक आने तथा हौसला बढ़ाने के लिए आभारी हूँ।फेयर…"
11 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post हमारे वारे न्यारे हो रहे हैं
"आदरणीय लक्ष्मण धामी'मुसाफ़िर'भाई नमस्कार। ग़ज़ल तक आने तथा हौसला बढ़ाने के लिए आभारी हूँ।"
11 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post हमारे वारे न्यारे हो रहे हैं
"आदरणीय कृष मिश्रा जी ंंनमस्कार। ग़ज़ल तक आने तथा हौसला बढ़ाने के लिए आभारी हूँ।"
11 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service