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Rupam kumar -'मीत'
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Welcome, रुपम कुमार -'मीत'!

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सालिक गणवीर commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post सितारों के बिना ये आसमाँ अच्छा नहीं लगता
"प्रिय रूपम कुमार बहुत उम्दा ग़ज़ल कही है आपने, शैर दर शैर दाद और मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ. फीचर ब्लॉग ग़ज़ल चस्पा हुई है, इसके लिए अलग से असीमित बधाईयाँ."
18 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post सितारों के बिना ये आसमाँ अच्छा नहीं लगता
"बहुत ही भावपूर्ण ग़ज़ल कही है मित्र...बधाई मेरा दम शहर में घुटता है कुछ दुख गाँव में भी हैं यहाँ अच्छा नहीं लगता वहाँ अच्छा नहीं लगता [2]...बेहतरीन शे'र है लेकिन "यहाँ अच्छा नहीं वहाँ अच्छा नहीं"में पहले अच्छा नहीं की जगह कुछ और बेहतर…"
Saturday
Dimple Sharma commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post सितारों के बिना ये आसमाँ अच्छा नहीं लगता
"आदरणीय रूपम कुमार 'मीत' जी इस खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें। वाह बहुत उम्दा।"
Saturday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post सितारों के बिना ये आसमाँ अच्छा नहीं लगता
"आद0 रूपम कुमार मीत जी सादर अभिवादन बेहतरीन ग़ज़ल पर शैर दर शैर दिली मुबारकबादक़ुबूल कीजिये"
Friday
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post सितारों के बिना ये आसमाँ अच्छा नहीं लगता
"आदरणीय अमीरुद्दीन साहिब, हौसला अफजाई का बहुत शुक्रिया। आपने ग़ज़ल किस ज़मीन पर है यह बता कर मेरी नॉलेज में इज़ाफ़ा किया, हृदय तल से आपका शुक्रिया। आपका स्नेह बना रहे सरकार☺️"
Friday
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post सितारों के बिना ये आसमाँ अच्छा नहीं लगता
"आदरणीय, रवि भसीन साहिब, आपकी इस्लाह पर अमल किया है मैंने और मक़्ता जरा बदल दिया है, एक नज़र देख लें।। और बहुत शुक्रिया आपका, यह स्नेह बना रहे बालक पर।"
Friday
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post सितारों के बिना ये आसमाँ अच्छा नहीं लगता
"आदरणीय लक्ष्मण साहिब, आदाब। बहुत नवाज़िश साहब और बहुत शुक्रिया हौसला अफजाई का।"
Friday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post सितारों के बिना ये आसमाँ अच्छा नहीं लगता
"जनाब रूपम कुमार 'मीत' जी आदाब, आल-ए-अहमद सुरूर साहिब की ज़मीन में अच्छी ग़ज़ल कही है आपने शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। फ़ीचर ब्लॉग में ग़ज़ल शामिल होने की मुबारकबाद अलग से पेश है। "
Thursday
Rupam kumar -'मीत' and आशीष यादव are now friends
Thursday
Rupam kumar -'मीत' posted blog posts
Thursday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post सितारों के बिना ये आसमाँ अच्छा नहीं लगता
"आदरणीय Rupam kumar -'मीत' साहिब, बढ़िया ग़ज़ल हुई है, मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाएँ! चौथे शे'र में 'हमारे' से बिंदु हटा लीजिए, और 'ख़ुशियों' में नुक़्ता लगा लीजिये। और आख़िरी शे'र में 'यारों' को…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post सितारों के बिना ये आसमाँ अच्छा नहीं लगता
"आ. भाई रूपम जी, बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Thursday
Rupam kumar -'मीत''s blog post was featured

सितारों के बिना ये आसमाँ अच्छा नहीं लगता

बह्र- 1222×4ज़मीं भाती नहीं और आसमाँ अच्छा नहीं लगता कहाँ ले जाएँ दिल को ये जहाँ अच्छा नहीं लगता[1]मेरा दम शहर में घुटता है  कुछ दुख गाँव में भी हैं यहाँ अच्छा नहीं लगता वहाँ अच्छा नहीं लगता [2]वो अपने हाथ से जुगनू  नहीं ऊपर उड़ाता तो सितारों के बिना ये आसमाँ अच्छा नहीं लगता [3]हमारे घर में भी ख़ुशियाँ सभी मौजूद हैं लेकिन हमें बरसात में अपना मकाँ अच्छा नहीं लगता [4]नहीं हो हम-सफ़र जब साथ उस तन्हा मुसाफ़िर को सड़क से हर गुज़रता कारवाँ अच्छा नहीं लगता [5]किसी की चाह में जब से हुए बर्बाद हमको 'मीत'यकीं…See More
Wednesday
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post मियाँ हमको ज़मीन-ओ-आसमाँ अच्छा नहीं लगता
"आदरणीय आशीष यादव जी, बहुत नवाज़िश हौसला अफजाई का। "
Wednesday
आशीष यादव commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post मियाँ हमको ज़मीन-ओ-आसमाँ अच्छा नहीं लगता
"यह ग़ज़ल पढ़कर बहुत अच्छा लगा। बेहतरीन ग़ज़ल बनी है। बधाई स्वीकारें।"
Wednesday
Rupam kumar -'मीत' posted a blog post

सितारों के बिना ये आसमाँ अच्छा नहीं लगता

बह्र- 1222×4ज़मीं भाती नहीं और आसमाँ अच्छा नहीं लगता कहाँ ले जाएँ दिल को ये जहाँ अच्छा नहीं लगता[1]मेरा दम शहर में घुटता है  कुछ दुख गाँव में भी हैं यहाँ अच्छा नहीं लगता वहाँ अच्छा नहीं लगता [2]वो अपने हाथ से जुगनू  नहीं ऊपर उड़ाता तो सितारों के बिना ये आसमाँ अच्छा नहीं लगता [3]हमारे घर में भी ख़ुशियाँ सभी मौजूद हैं लेकिन हमें बरसात में अपना मकाँ अच्छा नहीं लगता [4]नहीं हो हम-सफ़र जब साथ उस तन्हा मुसाफ़िर को सड़क से हर गुज़रता कारवाँ अच्छा नहीं लगता [5]किसी की चाह में जब से हुए बर्बाद हमको 'मीत'यकीं…See More
Wednesday

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Motihari
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Bihar
Profession
Student
About me
मुझे तो सभी बोलते है कि लड़का भला भी नहीं तो बुरा भी नहीं है -'मीत'

Rupam kumar -'मीत''s Blog

सितारों के बिना ये आसमाँ अच्छा नहीं लगता

बह्र- 1222×4

ज़मीं भाती नहीं और आसमाँ अच्छा नहीं लगता

कहाँ ले जाएँ दिल को ये जहाँ अच्छा नहीं लगता[1]

मेरा दम शहर में घुटता है  कुछ दुख गाँव में भी हैं

यहाँ अच्छा नहीं लगता वहाँ अच्छा नहीं लगता [2]

वो अपने हाथ से जुगनू  नहीं ऊपर उड़ाता तो

सितारों के बिना ये आसमाँ अच्छा नहीं लगता [3]

हमारे घर में भी ख़ुशियाँ सभी मौजूद हैं लेकिन

हमें बरसात में अपना मकाँ अच्छा नहीं लगता [4]

नहीं हो हम-सफ़र जब साथ उस तन्हा…

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Posted on August 5, 2020 at 1:00pm — 12 Comments

किनारों ने इसे बाँधा हुआ है(ग़ज़ल)

बह्र-1222/1222/122

समंदर आज तक ठहरा हुआ है

किनारों ने इसे बाँधा हुआ है[1]

जुदा आँचल से मत करना अभी तो

परिंदा छाँव में बैठा हुआ है[2]

मियाँ तक़दीर में बस मुफ़लिसों की

ज़मीन-ओ-आसमाँ लिक्खा हुआ है[3]

हमारे जिस्म की क़ीमत वही जो

हमारे इल्म में ख़र्चा हुआ है[4]

उसे तोहफे में देना आइना जो

ग़ुरूर-ए-हुस्न में डूबा हुआ है[5]

हमें लगता था तारे हम-क़दम हैं

निगाहों को बड़ा धोखा हुआ…

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Posted on July 18, 2020 at 6:30am — 4 Comments

वो शह्र-ए-दिल सदा के लिए छोड़ क्या गया

बह्र-221/2121/1221/212

वो शह्र-ए-दिल सदा के लिए छोड़ क्या गया

आँखों से मेरी प्यार का मौसम चला गया[1]

उसको ख़बर थी ख़ौफ़ मुझे तीरगी से है

जलते हुए चराग़ तभी तो बुझा गया[2]

आँखों में था मलाल वो रुख़सत हुआ था जब

मुड़ मुड़ के दूर तक वो मुझे देखता गया[3]

आँखों में जिसकी 'मीत' में रहता था रात दिन

मुझको वो आज अपनी नज़र से गिरा गया[4]

रूपम कुमार 'मीत'

"मौलिक व…

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Posted on July 10, 2020 at 10:00am — 12 Comments

रोज़ देता हूँ बद-दुआ तुमको

2122/1212/22 (112)

रोज़ देता हूँ बद-दुआ तुमको

ग़म-ज़दा ही रखे ख़ुदा तुमको[1]

जान-ए-जाँ मौसम-ए-ख़िज़ाँ में भी

हमने रक्खा हरा भरा तुमको[2]

बे-तरह चीख़ कर लिखा हमने

अपनी ग़ज़लों में बे-वफ़ा तुमको[3]

सुर्ख़ आँखें गवाही देती है

कल की शब भी थी रत-जगा तुमको[4]

हिज्र ने हमको बे-क़रार किया

मिल गया फ़ासलों से क्या तुमको[5]

बीच दरिया में हाथ छोड़ दिया

डूब जाऊँगा इल्म था तुमको[6]

अपनी मंज़िल…

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Posted on June 27, 2020 at 11:00am — 7 Comments

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At 5:49pm on July 3, 2020, Chetan Prakash said…

मित्र, आपका स्वागत है !

 
 
 

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