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Rupam kumar -'मीत'
  • Male
  • Bihar
  • India
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Rupam kumar -'मीत''s Friends

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Rupam kumar -'मीत''s Groups

 

Welcome, रुपम कुमार -'मीत'!

Latest Activity

Rupam kumar -'मीत' commented on Samar kabeer's blog post तरही ग़ज़ल
"आ, समर कबीर साहिब, प्रणाम आपकी ग़ज़ल पढ़ के बहुत अच्छा लगा, इस मंच पर जब से आया था आज पहली बार आपकी ग़ज़ल पढ़ी जो आपने हाल में लिखी हो,  माल पानी वाला शे'र वाह, यह 2020 का सबसे बड़ा शे'र हुआ, शे'र दर शे'र दाद पेश कर रहा हूँ साहिब,…"
Nov 12
anjali gupta and Rupam kumar -'मीत' are now friends
Nov 3
Rupam kumar -'मीत' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- मेरी आँखों में तुम को ख़ाब मिला?
"आ, नीलेश साहिब,  आप पहेलियों में ही बात करते हैं क्या साहिब?, दिल्ली अभी दूर है साहिब,।।"
Nov 1
Rupam kumar -'मीत' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- मेरी आँखों में तुम को ख़ाब मिला?
"आ, नीलेश साहिब प्रणाम बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें,  "ख़राब मिला" डबल quote में क्यों लिखा है साहिब यह, ?? सादर।"
Oct 31
Rupam kumar -'मीत' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल- नूर की .. शेख़ ओ बरहमन में यारी रहेगी
"आ निलेश साहिब प्रणाम  वाह वाह खूब ग़ज़ल हुई साहिब  हमारे ये तेवर हमारे रहेंगेहमारी अदा बस हमारी रहेगी. यह शे'र हुस्न -ए  -ज़ल है सादर |"
Oct 30
Rupam kumar -'मीत' commented on Richa Yadav's blog post मिस्मार दिल का ये दर-ओ-दीवार हो गया
"आदरणीया , ऋचा जी  बहुत खूब ग़ज़ल कही आपने  दूसरे शे'र पर दाद पेश करता हूँ , सादर |"
Oct 30
Rupam kumar -'मीत' commented on सालिक गणवीर's blog post नहीं दो चार लगता है बहुत सारे बनाएगा.( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय अमीरूद्दीन 'अमीर' साहिबआदाब जी, आपकी बात मैं समझ गया , मिसाल के तौर पर जो आपने शे'र पेश किए बहुत उम्दा है, सादर | "
Oct 24
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post ज़हर पी के मैं तेरे हाथ से मर जाऊँगा (रूपम कुमार 'मीत')
"आ, सालिक सर्, प्रणाम आपका बहुत शुक्रिया ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और हौसला अफ़ज़ाई के लिए मशकूर हूँ, गुणीजनों की बात पर मैं अमल करता हूँ सादर। आपका स्नेह बना रहे बालक पर।"
Oct 22
सालिक गणवीर commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post ज़हर पी के मैं तेरे हाथ से मर जाऊँगा (रूपम कुमार 'मीत')
"प्रिय रुपम एक और बढ़िया ग़ज़ल के लिए ढेर सारी बधाइयाँ स्वीकारो.गुणीजनों की इस्लाह पर अमल करो,तुम तो लंबी रेस के धावक हो,बहुत दूर तक जाना है. सलामत रहो."
Oct 21
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post ज़हर पी के मैं तेरे हाथ से मर जाऊँगा (रूपम कुमार 'मीत')
"आ,  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' साहिब जी , ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई के लिये बेहद मशकूर हूँ। सादर।"
Oct 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post ज़हर पी के मैं तेरे हाथ से मर जाऊँगा (रूपम कुमार 'मीत')
"आ. भाई रूपम जी, अभिवादन। अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Oct 20
Rupam kumar -'मीत' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post उसको भाया भीड़ का होकर खो जाना -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. लक्ष्मण जी,ग़ज़ल के प्रयास के लिए बधाई, बह्र-ए-मीर पर ख़ूब शे'र कहे आपने वाह!!"
Oct 20
Rupam kumar -'मीत' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post जब-जब ख़्वाब सुनहरे देखे - ग़ज़ल
"आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, बहतरीन ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ, सादर।"
Oct 20
Rupam kumar -'मीत' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (न यूँ दर-दर भटकते हम...)
"आ, अमीरुद्दीन साहिब जी, आदाब अच्छी ग़ज़ल हुई वाह!! चौथा शे'र ख़ूब पसंद आया,  "न जाने तुम कहाँ होते न जाने मैं कहाँ होता" यह मिस्रा याद हो गया साहिब वाह!!"
Oct 20
Rupam kumar -'मीत' commented on सालिक गणवीर's blog post नहीं दो चार लगता है बहुत सारे बनाएगा.( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आ, सालिक सर्, प्रणाम बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है, और दूसरा शे'र क्या ही कहने वाह!! फ़लक पर वो नये दो-तीन सय्यारे बनाएगा यह मिसरा विज्ञान के हिसाब से ठीक नहीं, क्यों कि प्लैनेट फ़लक में नहीं कहकशाँ में होता है, जैसे हम सब मिल्की वे गैलेक्सी में रहते…"
Oct 20
Rupam kumar -'मीत' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (ज़िन्दगी भर हादसे दर हादसे होते रहे...)
"आ, अमीरुदीन साहिब जी, आदाब बहुत ख़ूब ग़ज़ल कही आपने वाह वाह!! मुक़म्मल ग़ज़ल पंसद आई साहिब वाह!! बहुत दुआएँ आपको सलामत रहें और लिखते रहें।"
Oct 20

Profile Information

Gender
Male
City State
Motihari
Native Place
Bihar
Profession
Student
About me
मुझे तो सभी बोलते है कि लड़का भला भी नहीं तो बुरा भी नहीं है -'मीत'

Rupam kumar -'मीत''s Blog

ज़हर पी के मैं तेरे हाथ से मर जाऊँगा (रूपम कुमार 'मीत')

बह्र- 2122 1122 1122 22(112)

ज़हर पी के मैं तेरे हाथ से मर जाऊँगा

और हँसते हुए दुनिया से गुज़र जाऊँगा [1]

जो सिला मुझ को मिला है यहाँ सच बोलने से

अब तो मैं झूट ही बोलूँगा जिधर जाऊँगा [2]

रात को ख़्वाब में आऊँगा फ़रिश्ते की तरह

और आँखों से तेरी सुब्ह उतर जाऊँगा [3]

ख़ून छन छन के निकलता है कलेजे से मेरे

रोग ऐसा है कि कुछ रोज़ में मर जाऊँगा [4]

सामना होने पे पूछेगा तू , पहचाना मुझे?

गर मैं पहचान भी…

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Posted on October 15, 2020 at 5:30pm — 12 Comments

हम उनकी याद में रोए भी मुस्कुराए भी (~रूपम कुमार 'मीत')

बह्र- 1212 / 1122 / 1212 / 22 (112)

अज़ाब-ए-हिज्र में सुख-दुख के गीत गाए भी

हम उनकी याद में रोए भी मुस्कुराए भी [1]

ख़ुदा ने ख़ल्क़ किया है चराग़ जैसा हमें

वही जलाए हमें फिर वही बुझाए भी [2]

अजीब साल ये गुज़रा हमारी जिंदगी में

ख़ुदा करे न दुबारा कभी फिर आए भी [3]

हमारे यार का अंदाज़-ए-इश्क़ सबसे जुदा

कभी हँसाए वो हमको कभी रुलाए भी [4]

गुलाब जैसे लबों से वो हमको चूमता है

निशान प्यार के सीने से फिर मिटाए…

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Posted on September 27, 2020 at 1:00am — 17 Comments

अब से झूटा इश्क़ नहीं करना जानाँ (-रूपम कुमार 'मीत')

बह्र-22/22/22/22/22/2

अब से झूटा इश्क़ नहीं करना जानाँ

और किसी को मत देना धोखा जानाँ [1]

जब आँखों को दरिया करने का मन हो

तब मेरी रूदाद-ए-ग़म सुनना जानाँ [2]

दिन से रात तलक मैं तुमको रोता हूँ

तुम भी मुझको आठ-पहर रोना जानाँ [3]

अपने हाथ के कंगन जा पर रखना तुम

वाँ पर मेरी ग़ज़लें मत रखना जानाँ [4]

तुम रिश्तों में मत ढूँडो ख़ुशियाँ सारी

सीखो ख़ुद से मिलकर ख़ुश होना जानाँ [5]

आज जला दी वो…

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Posted on September 16, 2020 at 5:30am — 10 Comments

देख तूफ़ाँ की ये रफ़्तार ख़ुदा ख़ैर करे (-रूपम कुमार 'मीत')

बह्र- 2122 1122 1122 22(112)

देख तूफ़ाँ की ये रफ़्तार ख़ुदा ख़ैर करे

घर की कमज़ोर हैं दीवार ख़ुदा ख़ैर करे [1]

कर न दें मुफ़लिसों पे वार ख़ुदा ख़ैर करे

चंद पैसों के तलबगार ख़ुदा ख़ैर करे [2]

लौटने का मेरा है ख़ुद में इरादा लेकिन

"ये सफ़र है बड़ा दुश्वार ख़ुदा ख़ैर करे" [3]

नौकरी भी नहीं है हाथ में उस पर मेरा

हर समेस्टर गया बे-कार ख़ुदा ख़ैर करे [4]

मुझको हर सम्त से घेरा हुआ है दुश्मन ने

और गर्दन पे है तलवार…

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Posted on August 27, 2020 at 8:00am — 6 Comments

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At 5:49pm on July 3, 2020, Chetan Prakash said…

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