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SALIM RAZA REWA
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आशीष यादव commented on SALIM RAZA REWA's blog post ऐ मेरे दोस्त मोहब्बत को बचाए रखना   - सलीम 'रज़ा' रीवा
"बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति है। अनेकता मे एकता कायम रखना ही हमारा धर्म होना चाहिए। बहुत बहुत बधाई।"
Jan 2, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on SALIM RAZA REWA's blog post ऐ मेरे दोस्त मोहब्बत को बचाए रखना   - सलीम 'रज़ा' रीवा
"आ. भाई सलीम रजा जी, सुंदर रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Dec 28, 2019
SALIM RAZA REWA posted a blog post

ऐ मेरे दोस्त मोहब्बत को बचाए रखना   - सलीम 'रज़ा' रीवा

ऐ मेरे दोस्त मोहब्बत को बचाए रखना  दिल में ईमान की शम्अ' को जलाए  रखना-  इस नए साल में खुशियों का चमन खिल जाएसबको मनचाही  मुरादों का सिला मिल जाएइस नए साल में खुशियों की हो बारिश घर घरइस नए साल को ख़ुश रंग बनाए रखना-जान पुरखों ने लुटाई है वतन की ख़ातिरगोलियाँ सीने में खाई है वतन की ख़ातिरसारे धर्मों से ही ताक़त  है वतन  की मेरेसारे धर्मों की मोहब्बत को बनाए रखना-  ज़ात के नाम पे दंगों को कराने वालोबाज़ आ जाओ मोहब्बत को मिटाने वालोधर्म के नाम पे यूँ आग लगाने वालोख़ुद के दामन को भी जलने से बचाए…See More
Dec 26, 2019
SALIM RAZA REWA posted a blog post

कैसे कहें की इश्क़ ने क्या क्या बना दिया - सलीम 'रज़ा'

 221 2121 1221 212        कैसे कहें की इश्क़ ने क्या क्या बना दिया              राधा को श्याम श्याम को राधा बना दिया                उस बेर की मिठास तो बस जाने राम जी      सबरी ने जिसको चख के है मीठा बना दिया  यूसुफ़ नहीं था चाहने वाला था जो मेरा लेकिन उसी ने मुझको  ज़ुलेख़ा बना दिया        खिलता रहे ख़ुलूस-ओ-वफ़ा प्यार का चमनये सोच के ख़ुदा ने है दुनिया बना दिया ये इश्क़ है जुनूं है मोहब्बत  है या नशा                  मजनू बना दिया कभी राँझा  बना दिया  "मौलिक व अप्रकाशित" See More
Dec 13, 2019
vijay nikore commented on SALIM RAZA REWA's blog post अपने हर ग़म को वो अश्कों में पिरो लेती है - सलीम 'रज़ा'
"बहुत ही सुन्दर रचना पेश की है, मित्र सलीम जी।हार्दिक बधाई।"
Dec 13, 2019
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Dec 12, 2019
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post कैसे कहें की इश्क़ ने क्या क्या बना दिया - सलीम 'रज़ा'
"नज़रे इनायत के लिए बहुत शुक्रिया नीलेश भाई , आप सही कह रहें हैं कुछ मशवरा अत फरमाएं।"
Dec 10, 2019
Nilesh Shevgaonkar commented on SALIM RAZA REWA's blog post कैसे कहें की इश्क़ ने क्या क्या बना दिया - सलीम 'रज़ा'
"आ. सलीम साहब,अच्छा प्रयास है। . पोस्ट करने की जल्दबाज़ी में यूसुफ़ तो नहीं था वो मेरा चाहने वाला..बहर चूक गए इस मिसरे में ये सोच के ख़ुदा ने है दुनिया बना दिया.. दुनिया स्त्रीलिंग है। .बना दिया में पुल्लिंग का भाव है सादर "
Dec 10, 2019
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post अपने हर ग़म को वो अश्कों में पिरो लेती है - सलीम 'रज़ा'
"आदरणीय शुशील सरना जी आपकी पुरख़ुलूस महब्बत का बेहद शुक्रिया।"
Dec 9, 2019
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post अपने हर ग़म को वो अश्कों में पिरो लेती है - सलीम 'रज़ा'
"भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' साहिब आपकी पुरख़ुलूस महब्बत का बेहद शुक्रिया।"
Dec 9, 2019
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post कैसे कहें की इश्क़ ने क्या क्या बना दिया - सलीम 'रज़ा'
"भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' साहिब आपकी पुरख़ुलूस महब्बत का बेहद शुक्रिया।"
Dec 9, 2019
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on SALIM RAZA REWA's blog post कैसे कहें की इश्क़ ने क्या क्या बना दिया - सलीम 'रज़ा'
"आ. भाई सलीम जी, उम्दा गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
Dec 9, 2019
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on SALIM RAZA REWA's blog post अपने हर ग़म को वो अश्कों में पिरो लेती है - सलीम 'रज़ा'
"आ. भाई सलीम जी, इस बेहतरीन मार्मिक ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई।"
Dec 9, 2019
SALIM RAZA REWA posted blog posts
Dec 8, 2019
Sushil Sarna commented on SALIM RAZA REWA's blog post अपने हर ग़म को वो अश्कों में पिरो लेती है - सलीम 'रज़ा'
"अपने हर ग़म को वो अश्कों में पिरो लेती है बेटी मुफ़लिस की खुले घर मे भी सो लेती है मेरे दामन से लिपट कर के वो रो लेती है मेरी तन्हाई मेरे साथ ही सो लेती है वाह आदरणीय सलीम साहिब वाह क्या खूब दर्दीले अहसासों को आपने लफ्ज़ अता किये हैं। इस बेहतरीन…"
Dec 5, 2019
SALIM RAZA REWA posted blog posts
Dec 4, 2019

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REWA M.P.
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ऐ मेरे दोस्त मोहब्बत को बचाए रखना   - सलीम 'रज़ा' रीवा

ऐ मेरे दोस्त मोहब्बत को बचाए रखना  

दिल में ईमान की शम्अ' को जलाए  रखना

-  

इस नए साल में खुशियों का चमन खिल जाए

सबको मनचाही  मुरादों का सिला मिल जाए

इस नए साल में खुशियों की हो बारिश घर घर

इस नए साल को ख़ुश रंग बनाए रखना

-

जान पुरखों ने लुटाई है वतन की ख़ातिर

गोलियाँ सीने में खाई है वतन की ख़ातिर

सारे धर्मों से ही ताक़त  है वतन  की मेरे

सारे धर्मों की मोहब्बत को बनाए रखना

-  

ज़ात के नाम पे दंगों को…

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Posted on December 24, 2019 at 7:00pm — 2 Comments

रुख़ से जो मेरे यार ने पर्दा हटा दिया  - सलीम रज़ा

221 2121 1 221 212  

रुख़ से जो मेरे यार ने पर्दा हटा दिया   

महफ़िल में हुस्न वालों को पागल बना दिया

उसकी  हर एक अदा पे तो क़ुर्बान जाइए        

मौसम को जिसने छू के नशीला बना…

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Posted on December 11, 2019 at 10:16pm

चाहे  दुनिया में कहीं और चले जाएंगे  - सलीम रज़ा

2122 1122 1122 22

चाहे  दुनिया में कहीं और चले जाएंगे            

चाह कर भी वो मुझे भूल नहीं पाएंगें             

 

उनके एल्बम में है तस्वीर पुरानी मेरी        

अब वो देखेंगे तो पहचान नहीं पाएंगे…

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Posted on December 11, 2019 at 10:00pm

कैसे कहें की इश्क़ ने क्या क्या बना दिया - सलीम 'रज़ा'

 221 2121 1221 212      

  

कैसे कहें की इश्क़ ने क्या क्या बना दिया              

राधा को श्याम श्याम को राधा बना दिया               

 

उस बेर की मिठास तो बस जाने राम जी      

सबरी ने जिसको चख के…

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Posted on December 8, 2019 at 5:00am — 4 Comments

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr. Vijai Shanker's blog post विसंगति —डॉo विजय शंकर
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हम तो हल के दास ओ राजा-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
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