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सालिक गणवीर
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सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-142
"आदरणीय भाई  नादिर ख़ान जीसादर अभिवादनतरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने। बधाईयाँ स्वीकार करें."
Apr 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-142
"आदरणीय भाई  Amit swapni  जीसादर अभिवादनतरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने। बधाईयाँ स्वीकार करें."
Apr 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-142
"आदरणीय भाई  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'   जीसादर अभिवादनतरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने। बधाईयाँ स्वीकार करें."
Apr 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-142
"आदरणीय भाई  नादिर ख़ान  जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हृदयतल से आभार।   "
Apr 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-142
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हृदयतल से आभार।   "
Apr 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-142
"आदरणीय  Amit swapnil  जी सादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हृदयतल से आभार।"
Apr 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-142
"आदरणीया  Richa Yadav जी सादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हृदयतल से आभार।"
Apr 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-142
"आदरणीय  Samar kabeer साहिब सादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए हृदयतल से आभार। सलामत रहें."
Apr 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-142
"आदरणीयi Richa Yadav जीसादर अभिवादनतरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने। बधाईयाँ स्वीकार करें.उस्ताद जी की इस्लाह के बाद तरही ग़ज़ल दुरुस्त हो गई है।"
Apr 28
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-142
"आदरणीय भाई  Sanjay Shukla जी सादर अभिवादन तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने। बधाईयाँ स्वीकार करें. मगर नियमानुसार आपने गिरह नहीं लगाई है आदरणीय"
Apr 27
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-142
"1212-1122-1212-22/112 बिछड़ गया है वो जब से मुझे कभी न मिलापुराने यार मिले एक बस वही न मिला (1) उन्हें गिला ये रहा उम्र भर ज़माने सेमिली थी आग मगर क्यों ज़रा सा घी न मिला (2) ज़रूर होंगे भले लोग शह्र में लेकिनतुम्हारे जैसा मुझे एक आदमी न मिला (3) ये…"
Apr 27
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-141
"2122-1122-1122-22/112 घर में चौपाल में इस बात की चर्चा करनाहार कर जीत हुई कैसे ख़ुलासा करना (1) दाम डीज़ल के बढ़ाएँ हैं उन्होंने फिर सेदोस्तों सोच समझ कर कोई सौदा करना (2) पड़ चुकी है उसे इस बात की आदत देखोउसने वो फिर से किया है जो नहीं था करना…"
Mar 25
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"आदरणीय   अमीरुद्दीन 'अमीर' जीआदाबग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए ह्रदय तल से आभार।"
Feb 26
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"आदरणीय  Dayaram Methani   जीआदाबग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए ह्रदय तल से आभार।"
Feb 26
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"उस्ताद -ए - मुहतरम  Samar kabeer साहिबआदाबग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए ह्रदय तल से आभार। आपकी क़ीमती इस्लाह से ग़ज़ल मुरस्सा हो गई है ,एक और शैर कहने की कोशिश करता हूँ ,बहुत शुक्रियः।"
Feb 26
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-140
"आदरणीय Dayaram Methani जीआदाबग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए ह्रदय तल से आभार।"
Feb 26

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhilai, Chhattisgarh
Native Place
Bhilai
Profession
Retired from SAIL,as a Senior Electrical engineer
About me
Reading,writing and photography were my hobbies and after retirement I am totally indulged to fulfill my dreams.

सालिक गणवीर's Blog

झूठ बोले हैं न जाने कितने.......ग़ज़ल- सालिक गणवीर

2122-1122-22/112

झूठ बोले हैं न जाने कितने

उसको आते हैं बहाने कितने (1)

मैं किसी से भी तो नाराज नहीं

आ गए लोग मनाने कितने (2)

अब भी लोगों के नई दुनिया में

हैं ख़यालात पुराने कितने (3)

एक भी लफ़्ज मुझे याद नहीं

याद आते हैं वो गाने कितने (4)

घर जला कोई बुझाने न गया

आ गए आग लगाने कितने (5)

साथ आया न निभाने कोई

रस्म आएंँगे निभाने कितने (6)

अब कहीं पर तू ठहर जा…

Continue

Posted on February 3, 2022 at 9:33am — 4 Comments

यही है शिकायत यही तो गिला है....ग़ज़ल ( सालिक गणवीर)

122-122-122-122

यही है शिकायत यही तो गिला है

चराग़ों तले क्यों अँधेरा हुआ है (1)

लुटाया है सब कुछ कहा जा रहा है

मैं ये सोचता हूँ मुझे क्या मिला है (2)

कभी सामने जो अकड़ता बहुत था

वही उसके क़दमों के नीचे पड़ा है (3)

न आगे कोई है न है कोई पीछे

बयाँ दे रहा बीच सबके खड़ा है (4)

बड़ी मुश्किलों से कटी ज़िंदगी ये

न जाने मुक़द्दर में क्या क्या लिखा है (5)

ख़ुशी के दो पल हाथ आते नहीं पर

ये ग़म है कि…

Continue

Posted on December 24, 2021 at 11:00pm — 4 Comments

अब तो इंसाफ भी करें साहिब.......ग़ज़ल सालिक गणवीर

2122-1212-22/112

अब तो इंसाफ भी करें साहिब

हक़ मिरा मुझको दे भी दें साहिब (1)

ऊँचे पेड़ों ने फिर से की साजिश

लोग सब धूप में रहें साहिब (2)

आप सब क्यों उड़े हवाओं में

हम ज़मीं पर ही क्यों चलें साहिब (3)

काग़ज़ों पर लिखा तो पढ़ते हैं

पीठ पर भी कभी लिखें साहिब (4)

न ज़मीं है न आसमाँ अपना

ये बता दो कहाँ रहें साहिब (5)

इतना अफ़सोस है अगर फिर तो

शर्म से डूब कर मरें साहिब (6)

आप सुनते नहीं…

Continue

Posted on November 13, 2021 at 9:54pm — 10 Comments

जाने क्या लोग कर गए होंगे.......( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)

2122-1212-22/112

जाने क्या लोग कर गए होंगे

जी रहे हैं या मर गए होंगे (1)

वो भरी दोपहर गए होंगे

पाँव छालों से भर गए होंगे (2)

लड़कियाँ माँ की तर्ह सीधी हैं

लड़के तो बाप पर गए होंगे (3)

ख़ौफ़ होता है देख कर जिनको

आइना देख डर गए होंगे (4)

टेढ़े-मेढ़े जलेबी जैसे लोग

है ये मुमकिन सुधर गए होंगे (5)

दफ़्न माज़ी को जब किया होगा

याद के गड्ढे भर गए होंगे (6)

हमको जिन पर नहीं…

Continue

Posted on October 24, 2021 at 10:00am — 8 Comments

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