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सालिक गणवीर
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रवि भसीन 'शाहिद' commented on सालिक गणवीर's blog post रस्ते की बात है न ये रहबर की बात है...(ग़ज़ल-सालिक गणवीर)
"आदरणीय सालिक गणवीर साहिब, लाजवाब ग़ज़ल हुई है जनाब, बधाई स्वीकार करें। तीसरे और चौथे शे'र के लिए विशेष दाद।"
1 minute ago
सालिक गणवीर commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post मेरे ही प्यार में पगी आई. - ग़ज़ल
"भाई बसंत कुमार शर्मा जी सादर अभिवादन उम्दा ग़ज़ल कही है आपने जनाब,दाद और मुबारकबाद स्वीकार करें."
15 minutes ago
सालिक गणवीर commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post है जो कुछ भी धरती का - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' ( गजल)
"भाई लक्ष्मण धामी जी सादर अभिवादन सुंदर ग़ज़ल पाठकों तक पहुँचाने के लिए हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें."
18 minutes ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post उनके ख़्वाबों पे ख़यालात पे रोना आया.(ग़ज़ल : सालिक गणवीर)
"भाई ब्रजेश कुमार 'ब्रज' जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए हृदयतल से आभार व्यक्त करता हूँ. सादर एवं सप्रेम."
5 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post लोग घर के हों या कि बाहर के...(ग़ज़ल : सालिक गणवीर)
"मुहतरमा डिंपल शर्मा जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए हृदयतल से आभार व्यक्त करता हूँ. सादर एवं सप्रेम."
5 hours ago
सालिक गणवीर commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post एक नया दस्तूर (ग़ज़ल - शाहिद फिरोज़पुरी)
"भाई रवि भसीन 'शाहिद' साहिब आदाब बहुत उम्दा ग़ज़ल कही है आपने. दाद और मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए हुजूर. ख़ास दाद मतले और मकते के लिए."
6 hours ago
सालिक गणवीर posted a blog post

रस्ते की बात है न ये रहबर की बात है...(ग़ज़ल-सालिक गणवीर)

221 2121 1221 212रस्ते की बात है न ये रहबर की बात है पा लेना मंज़िलों को मुक़द्दर की बात हैये बोरिया की है मिरे बिस्तर की बात है फूलों की सेज मिलना मुक़द्दर की बात हैउस वाक़िये का ज़िक्र मुनासिब नहीं यहाँ चल घर पे चलके बात करें घर की बात हैकब कौन किसके शाने पे चढ़ जाए क्या पता ऊपर पहुँचना भी तो सुअवसर की बात हैसब की क़लम से एक ही क़िस्सा निकलता था आज़ादी छिन गई थी छिहत्तर की बात हैबरसात मॉनसून की उसको थी ले उड़ी छत आपकी नहीं मेरे छप्पर की बात हैहाकिम ने दे दी आज इजाज़त कि काट दो दर-अस्ल वो जनाब मिरे सर की…See More
9 hours ago
सालिक गणवीर commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post सितारों के बिना ये आसमाँ अच्छा नहीं लगता
"प्रिय रूपम कुमार बहुत उम्दा ग़ज़ल कही है आपने, शैर दर शैर दाद और मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ. फीचर ब्लॉग ग़ज़ल चस्पा हुई है, इसके लिए अलग से असीमित बधाईयाँ."
yesterday
dandpani nahak commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( जाना है एक दिन न मगर फिक्र कर अभी...)
"आदरणीय सालिक गणवीर जी नमस्कार बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें !"
Sunday
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( जाना है एक दिन न मगर फिक्र कर अभी...)
"भाई ब्रजेश कुमार जी सादर अभिवादन ग़ज़ल पर आपकी हाजिरी और सराहना के लिए हृदयतल से आभार."
Saturday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( जाना है एक दिन न मगर फिक्र कर अभी...)
"बड़ी ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है आदरणीय सालिक जी...आदरणीय समर जी एवं रवि जी की विवेचना भी शानदार रही.."
Saturday
Dimple Sharma commented on सालिक गणवीर's blog post लोग घर के हों या कि बाहर के...(ग़ज़ल : सालिक गणवीर)
"आदरणीय हर शेर कमाल है समझ नहीं आ रहा किसे ज्यादा दाद दूं, बस मतला कमजोर लग रहा है , इस ग़ज़ल ने दिल ले लिया वाह बहुत उम्दा आदरणीय।"
Saturday
Dimple Sharma commented on सालिक गणवीर's blog post लोग घर के हों या कि बाहर के...(ग़ज़ल : सालिक गणवीर)
"आदरणीय सालिक गणवीर जी नमस्ते, वाह बहुत ख़ूब,इस खुबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय।"
Saturday
सालिक गणवीर commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अछूतों सा - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' ( गजल )
"भाई लक्षण धामी 'मुसाफिर'सादर अभिवादन अलिफ वस्ल का शानदार इस्तेमाल कर आपने बढ़िया ग़ज़ल कही है.बधाइयाँँ."
Aug 5
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post लोग घर के हों या कि बाहर के...(ग़ज़ल : सालिक गणवीर)
"भाई बृजेश कुमार'ब्रज'सादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए हृदयतल से आभार व्यक्त करता हूँ. सादर एवं सप्रेम."
Aug 5
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on सालिक गणवीर's blog post लोग घर के हों या कि बाहर के...(ग़ज़ल : सालिक गणवीर)
"बड़ी ही खूबसूरत ग़ज़ल हुई ज़नाब सालिक जी..."
Aug 4

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhilai, Chhattisgarh
Native Place
Bhilai
Profession
Retired from SAIL,as a Senior Electrical engineer
About me
Reading,writing and photography were my hobbies and after retirement I am totally indulged to fulfill my dreams.

सालिक गणवीर's Blog

रस्ते की बात है न ये रहबर की बात है...(ग़ज़ल-सालिक गणवीर)

221 2121 1221 212

रस्ते की बात है न ये रहबर की बात है

पा लेना मंज़िलों को मुक़द्दर की बात है

ये बोरिया की है मिरे बिस्तर की बात है

फूलों की सेज मिलना मुक़द्दर की बात है

उस वाक़िये का ज़िक्र मुनासिब नहीं यहाँ

चल घर पे चलके बात करें घर की बात है

कब कौन किसके शाने पे चढ़ जाए क्या पता

ऊपर पहुँचना भी तो सुअवसर की बात है

सब की क़लम से एक ही क़िस्सा निकलता था

आज़ादी छिन गई थी छिहत्तर की बात…

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Posted on August 10, 2020 at 11:55pm — 1 Comment

लोग घर के हों या कि बाहर के...(ग़ज़ल : सालिक गणवीर)

(2122 1212 22/122)

लोग घर के हों या कि बाहर के

प्यार करिएगा उनसे जी भर के

जाने क्या कह दिया है क़तरे ने

हौसले पस्त हैं समंदर के

जिस्म पर जब कोई निशाँ ही नहीं

कौन देखेगा ज़ख़्म अंदर के

दोस्ती उन से कर ली दरिया ने

जो थे दुश्मन कभी समंदर के

एक शीशे से ख़ौफ़ खाते हैं

लोग जो लग रहे थे पत्थर के

एक बस माँ को बाँट पाए नहीं

घर के टुकड़े हुए बराबर के

गरचे हर घर की है कहानी…

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Posted on August 2, 2020 at 3:30pm — 15 Comments

उनके ख़्वाबों पे ख़यालात पे रोना आया.(ग़ज़ल : सालिक गणवीर)

(2122 1122 1122 22/112)

उनके ख़्वाबों पे ख़यालात पे रोना आया

अब तो मत पूछिये किस बात पे रोना आया

देखता कौन भरी आँखों को बरसातों में

फिर से आई हुई बरसात पे रोना आया

आप चाहें तो जो दो दिन में सुधर सकते हैं

उन बिगड़ते  हुए हालात पे रोना आया

मुद्दतों जिनके जवाबात को तरसा हूँ मैं

आज कुछ ऐसे सवालात पे रोना आया

मुझको मालूम था अंजाम यही होना है

जीत रोने से हुई मात पे रोना आया

दिन…

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Posted on July 29, 2020 at 12:00pm — 13 Comments

ग़ज़ल (यहाँ तनहाइयों में क्या रखा है....)

1222 1222 122

यहाँ तनहाइयों में क्या रखा है

चलो भी गाँव में मेला लगा है

तुझे मैं आज पढ़ना चाहता हूँ

मिरी तक़दीर में अब क्या लिखा है

किनारे पर भी आकर डूब जाओ

नदी है,नाख़ुदा तो बह चुका है

निकलना चाहता है मुझसे आगे

मिरा साया मिरे पीछे पड़ा है

ज़रा आगे चलूँ या लौट जाऊँ

गली के मोड़ पर फिर मैक़दा है

उसी पर मर रहे हैं लोग सारे

जो अपने आप पर कब से फ़िदा है

सितारों चैन से…

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Posted on July 27, 2020 at 8:00am — 13 Comments

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"रवि भसीन'शाहिद' जी नमस्कार! बहुत ही सुंदर ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
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