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Samar kabeer
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Samar kabeer commented on विनय कुमार's blog post पिता--लघुकथा
"जनाब विनय कुमार जी आदाब, अच्छी लघुकथा लिखी आपने, बधाई स्वीकार करें ।"
Thursday
Samar kabeer commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post अब से झूटा इश्क़ नहीं करना जानाँ (-रूपम कुमार 'मीत')
"जनाब रूपम कुमार 'मीत' जी आदाब, बह्र-ए-मीर पर बहुत उम्द: ग़ज़ल कही आपने, शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । 'चार महीने खेल के दिल को थोड़ दिया' इस मिसरे में टंकण त्रुटि सुधार लें ।"
Thursday
Samar kabeer commented on Neeta Tayal's blog post अब तो जीवन ऑफलाइन हो जाए
"मुहतरमा नीता तायल जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें । टंकण त्रुटियों की तरफ़ जनाब हर्ष जी ने बता ही दिया है, मैं भी मोबाइल का ही प्रयोग करता हूँ मुझे तो ये परेशानी नहीं होती ।"
Thursday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post हिन्दी दिवस पर कुछ दोहे :
"// यहां दासता का भाव हमारी सोच में भाषा की गुलामी से है ।// इसके लिये 'दास्ता' नहीं "दाश्त:" सहीह शब्द है ।"
Thursday
Samar kabeer commented on Harash Mahajan's blog post यार जब लौट के दर पे मेरे आया होगा
"मेरे कहे को मान देने के लिए आपका धन्यवाद ।"
Wednesday
Samar kabeer commented on Harash Mahajan's blog post यार जब लौट के दर पे मेरे आया होगा
"'याद क़समें न बिछुड़ने की वो आई होंगी,फिर वो अश्क़ों के समंदर में नहाया होगा' उचित लगे तो इस शैर को यूँ कर सकते हैं:- 'याद कर कर के वो तोड़ी हुई क़समें अपनी आज अश्कों के समंदर में नहाया होगा'"
Wednesday
Samar kabeer commented on Harash Mahajan's blog post यार जब लौट के दर पे मेरे आया होगा
"बाक़ी अशआर अब ठीक हैं,लेकिन 'क़समें खाईं थीं बिछुड़ कर न वो रोयेगा कभी,आज अश्क़ों के समंदर में नहाया होगा' इस शैर के सानी मिसरे का ऊला से रब्त पैदा करने का प्रयास करें । "
Wednesday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post हिन्दी दिवस पर कुछ दोहे :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, हिन्दी दिवस पर अच्छे दोहे लिखे आपने, बधाई स्वीकार करें । 'हिन्दी हिन्दुस्तान के,माथे का सरताज। जन-जन की ये आत्मा,हर मन की आवाज' इस दोहे में 'ताज' और 'आवाज़' की तुकांतता उचित नहीं है,दूसरी पंक्ति…"
Tuesday
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया
"उचित लगे तो मतले का सानी यूँ कर सकते हैं:- 'तो क्या उसने तेरी यादों का भी कमरा देख लिया'"
Tuesday
Samar kabeer commented on Saurabh Pandey's blog post हिंदी-दिवस : चार दोहे // सौरभ
"जनाब सौरभ पाण्डेय जी आदाब, बहुत उम्द: तंज़ में डूबे अच्छे दोहे कहे आपने, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । बचपन से हम 'हिन्दी' शब्द को आधे न से लिखते पढ़ते आये हैं,लेकिन आजकल जिसे देखो इस शब्द की "हिंदी" अनुस्वार से लिखने लगा…"
Tuesday
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post बैठी हैं घर किये वहाँ अब तो रुदालियाँ -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'रहती हैं साथ उसके पर बरबादियाँ बहुत' ये मिसरा बह्र में नहीं है, यूँ कर सकते हैं:- 'पर उसके साथ रहती हैं बरबादियाँ बहुत'"
Tuesday
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -वो कहता है मेरे दिल का कोना कोना देख लिया
"जनाब निलेश 'नूर' जी आदाब, बह्र-ए-मीर पर अच्छी ग़ज़ल कही आपने, दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । 'यानी तेरी यादों वाला वो भी कमरा देख लिया? इस मिसरे में 'वो भी कमरा' वाक्य विन्यास मुझे ठीक नहीं लगा, सहीह वाक्य होगा…"
Monday
Samar kabeer commented on सालिक गणवीर's blog post किसी की नज़र में वो शैतान हैं..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"'किसी की नज़र में वो शैतान हैंहमारे लिए वो भी इंसान हैं' मतला यूँ कर लें:- 'जहाँ की नज़र में जो शैतान हैं समझते हैं हम वो भी इंसान हैं' पहली टिप्पणी में बताना भूल गया था ।"
Monday
Samar kabeer commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post अतुकांत : अमावस की कविता (गणेश बाग़ी)
"जनाब गणेश जी  "बाग़ी" साहिब आदाब, बहुत उम्द: कविता लिखी है आपने, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । 'बहुत ही प्यारे' इस पंक्ति में 'प्यारे' की जगह "प्यारी" शब्द उचित होगा । 'दोपहर में देखास इस…"
Monday
Samar kabeer commented on सालिक गणवीर's blog post किसी की नज़र में वो शैतान हैं..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"'सुना है वो बेचैन हैं आजकल' इस मिसरे को यूँ कर लें:- 'नहीं उनको हमसे महब्बत अगर' 'कई लोग ऐसे घरों में मिलेदरीचे नहीं हैं हवा-दान हैं ज़माने को कैसे ख़बर हो गईयहाँ की दीवारों में भी कान हैं' ये दो शैर ग़ज़ल से हटा दें ।"
Monday
Samar kabeer commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post मातृभाषा हिंदी
"जनाब सुरेश कुमार कल्याण जी आदाब, हिन्दी दिवस पर बहुत सुंदर रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें । जहाँ तक मेरी जानकारी है 'हिंदी' को "हिन्दी" लिखना उचित होता है ?"
Monday

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"ओबीओ की सालगिरह का तुहफ़ा"

2122 2122 212

.

देख साँसों में बसा है ओ बी ओ

मेरी क़िस्मत में लिखा है ओ बी ओ




कितने आए और कितने ही गए

शान से अब तक खड़ा है ओ बी ओ




बढ़ गई तौक़ीर मेरी और भी

तू मुझे जब से मिला है ओ बी ओ




हों वो 'बाग़ी' या कि भाई 'योगराज'

तू सभी का लाडला है ओ बी ओ



भाई 'सौरभ' शान से कहते…

Continue

Posted on April 1, 2020 at 9:00pm — 19 Comments

एक ताज़ा ग़ज़ल

7 फेलुन 1 फ़ा

मेरी यादों से वो यारो जब भी घबराते हों गे

माज़ी के क़िस्सों से अपने दिल को बहलाते हों गे

काले बादल शर्म से पानी पानी हो जाते हों गे

बाम प आकर जब वो अपनी ज़ुल्फ़ें लहराते हों गे

जैसे हमको यार हमारे समझाने आ जाते हैं

उसके भी अहबाब यक़ीनन उसको समझाते हों गे

हम तो उनके हिज्र में तारे गिनते रहते हैं शब भर

वो तो अपने शीश महल में चैन से सो जाते हों…

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Posted on February 13, 2020 at 5:55pm — 6 Comments

'देखो हिंदौस्तान फूँकता है'

2122 1212 112/22

जिस्म में पहले जान फूँकता है

बाद-अज़-जाँ अज़ान फूँकता है

सब्र कर शब गुज़र ही जाएगी

क्यों ये अपना मकान फूँकता है

अपनी नफ़रत की आग से कोई

देखो हिंदौस्तान फूँकता है

पास आकर वो गर्म साँसों से

मेरे दिल का जहान फूँकता है

आग तो सर्द हो चुकी कब की

क्यों अबस राखदान फूँकता है

हुक्म से रब के ल'अल मरयम का

देखो मुर्दे में जान फूँकता है

रोज़ आयात पढ़…

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Posted on August 6, 2019 at 3:00pm — 18 Comments

एक मुश्किल बह्र,"बह्र-ए-वाफ़िर मुरब्बा सालिम" में एक ग़ज़ल

अरकान:-12112 12112

न छाँव कहीं,न कोई शजर

बहुत है कठिन,वफ़ा की डगर

अजीब रहा, नसीब मेरा

रुका न कभी,ग़मों का सफ़र

तलाश किया, जहाँ में बहुत

कहीं न मिला, वफ़ा का गुहर

तमाम हुआ, फ़सान: मेरा

अँधेरा छटा, हुई जो सहर

ग़मों के सभी, असीर यहाँ

किसी को नहीं, किसी की ख़बर

बहुत ये हमें, मलाल रहा

न सीख सके, ग़ज़ल का हुनर

हबीब अगर, क़रीब न हो

अज़ाब लगे, हयात…

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Posted on July 4, 2019 at 2:30pm — 36 Comments

Comment Wall (39 comments)

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At 10:27am on June 27, 2020, Chetan Prakash said…

आदरणीय, मोहतरम समीर कबीर साहब प्रत्युत्तर के लिए आपका आभारी हूँ। रू का शाब्दिक
अर्थ आपने चहरा, (उक्त मिसरे में ) बता या , लेकिन मैंने मूल प्रति में रूह लिखा था। लेकिन कुछ लोग वहाँ ह की गणना कर ले ते हैं, सो मैंने रू चुना। एक और बात रू , वहाँ आत्मा की प्रतिच्छाया है न कि चहरा।आदरणीय, बिम्ब की दृष्टिसे रू का प्रयोग सर्वथा उचित है। माननीय, कवि का संसार ( काव्य ) बिम्ब के माध्यम से अभिव्यक्त होता है, जो लक्षणा और
व्य्ंजना से ही बोध गम्य है। शब्द ही ब्रह्म है, इसी हेतु मनीषियों ने कहा है। और, दूसरे मिसरे की बह्र से खारिज...बतायाआपने, मेहरबानी होगी, आपकी, तक्तीअ कर मार्ग- दर्शन करें!

At 7:03am on May 10, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय समर कबीर साहब
आदाब
यह जानकर खुशी हुई कि आपके अनुज और बेटे की सेहत ठीक है. ओबीओ पर आपकी उपस्थिती से हम जैसे नये शायरों को संबल मिलता है. एक ताज़ा ग़ज़ल पोस्ट की है. वक़्त मिलने पर पढ़कर सलाह दें तो मेहरबानी होगी.
At 11:04pm on May 7, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय समर कबीर साहब
बहुत ममनून हूँ कि इतनी जल्दी शंका समाधान कर दिया. एक दफा फिर शुक्रिया.
At 9:38am on May 5, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय समर कबीर साहब
आदाब
बहुत दिनों बाद अपनी एक ग़ज़ल पोस्ट कर रहा हूँ, आपकी नज़रे इनायत की दरकार है. समय मिलने पर पढ़ कर सलाह एवं प्रतिक्रिया देकर अनुग्रहित करें.
सालिक गणवीर
At 6:04pm on April 23, 2020, सालिक गणवीर said…

आदरणीय समर कबीर साहब

अपने ब्लाग पर एक ग़ज़ल पोस्ट की है, प्रतिक्रिया एवं सुझाव अपेक्षित है. समय निकाल कर मुझे भी पढ़कर आवश्यक सुझाव देंं.

At 12:25pm on April 1, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय कबीर साहब
अपने ब्लॉग में एक ग़ज़ल पोस्ट कर रहा हूँ. साथ ही साथ आपको फ्रैंड रिक्वेस्ट भी भेजा है. कृपया स्वीकार करें. ग़ज़ल पर प्रतिक्रिया एवं सुझाव अपेक्षित है. पहले तरही ग़ज़ल,ज़रूरी रद्दोबदल के साथ पोस्ट किया था, प्रभाकर जी का मेल आने के बाद इसे हटा दिया है.
शुभेच्छु
सालिक गणवीर
At 1:52pm on March 29, 2020, Bhupender singh ranawat said…

shri maan aapki hosla afjayI k liye aabhar

At 7:06pm on March 9, 2020, अमीरुद्दीन 'अमीर' said…

शुक्रिया जनाब.

At 8:18am on January 21, 2020, Bhupender singh ranawat said…

आदरणीय Samar Kabeer साहब रचना की सराहना  के लिए आपका बहुत बहुत आभार । आपने जो advice दी हैं उनका में ध्यान रखूँगा। पुनः आपका आभार ।

At 9:23am on September 8, 2019, TEJ VEER SINGH said…

आदरणीय समर क़बीर साहब को जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनायें। ईश्वर सदैव आपको सुख, शाँति और समृद्धि प्रदान करें।हमेशा स्वस्थ रहें और दीर्घायु बनें।उन्नति के सर्वोच्च शिखर पर विराजमान हों।

 
 
 

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