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Samar kabeer
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Latest Activity

अजय गुप्ता commented on Samar kabeer's blog post एक ग़ज़ल रुबाइ की बह्र में
"इस बेमिसाल ग़ज़ल को पढ़कर मन प्रसन्न हो गया। इस प्रस्तुति के लिए आभार समर साहब। एक शंका का निवारण कीजिये। क्या रुबाई को 2222 2222 22 के मीटर पर लिया जा सकता है। "
2 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post प्रतीक्षा लौ ...
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी कविता हुई,बधाई स्वीकार करें ।"
10 hours ago
Samar kabeer commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post कनक मंजरी छंद "गोपी विरह"
"जनाब बासुदेव अग्रवाल 'नमन' जी आदाब,अच्छे छन्द लिखे आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
10 hours ago
Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post आम चुनाव और समसामायिक संवाद (लघुकथाएं) :
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,अच्छी लघुकथाएं हुईं,बधाई स्वीकार करें ।"
10 hours ago
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post कोई तो दीद के क़ाबिल है आया
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । शिल्प और व्याकरण पर क़ाबू पाना अतिआवश्यक है,ध्यान दें ।"
10 hours ago
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सभी कुछ बता दिया - ग़ज़ल
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'वंजर जमीन दिल की’ हुई अब हरी-भरी' इस मिसरे में 'वंजर' को "बंजर" कर लें ।"
10 hours ago
Samar kabeer commented on दिगंबर नासवा's blog post गज़ल - दिगंबर नास्वा - 4
"जनाब दिगंबर नासवा जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।"
11 hours ago
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सीढ़ी हो उनके वास्ते कुर्सी की राह पर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'मत खाक उनका आप ये अरमान कीजिये' इस मिसरे में 'मत ख़ाक' का प्रयोग ठीक नहीं,इसे बदलने का प्रयास करें ।"
11 hours ago
Samar kabeer commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छे कुण्डलिया छन्द हुए हैं,बधाई स्वीकार करें ।"
11 hours ago
Samar kabeer commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post एल.ओ.सी (लघुकथा)
"बहना कल्पना भट्ट रौनक़ जी आदाब,अच्छी लघुकथा हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
11 hours ago
Samar kabeer commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post अहीर छंद "प्रदूषण"
"जनाब बासुदेव अग्रवाल 'नमन'जी आदाब, अच्छे छन्द हुए हैं,बधाई स्वीकार करें ।"
11 hours ago
Samar kabeer commented on SALIM RAZA REWA's blog post जनाबे मीर के लहजे की नाज़ुकी कि तरह - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें । 'जनाबे मीर के लहजे की नाज़ुकी कि तरह' इस मिसरे में 'कि तरह' को "की तरह" कर लें । "
11 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post वेदना ...
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
11 hours ago
Samar kabeer commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post यार पंकज, चुन सुकूँ, रख बन्द आँखें, मौन धर-----ग़ज़ल
"अज़ीज़म पंकज कुमार मिश्रा आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'मौन रह अपनी ज़रूरत के लिए ए मित्रवरतू समस्याओं पे काहें को फ़िराता है नज़र' मतले में शुतरगुरबा दोष है,ऊला में 'मित्रवर' शब्द आदर सूचक है,और सानी में…"
11 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"पुराने शाइरों में कई उस्ताद शाइरों ने इसका प्रयोग किया है,और ये उर्दू में क़तई ग़लत नहीं,हाँ हिन्दी में हो सकता है ।"
Sunday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,इस सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday

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Samar kabeer's Blog

ओ.बी.ओ.की 9 वी सालगिरह का तुहफ़ा

है उजागर ये हक़ीक़त ओ बी ओ

मुझको है तुझसे महब्बत ओ बी ओ

तेरे आयोजन सभी हैं बेमिसाल

तू अदब की एक जन्नत ओ बी ओ

कहते हैं अक्सर ,ये भाई योगराज

तू है इक छोटा सा भारत ओ बी ओ

सीखने वाले यही कहते सदा…

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Posted on April 1, 2019 at 11:00am — 28 Comments

एक ग़ज़ल रुबाइ की बह्र में

मफ़ऊल मफ़ाईल मफ़ाईल फ़अल

221     1221   1221    12

पाना जो शिखर हो तो मेरे साथ चलो

ये अज़्म अगर हो तो मेरे साथ चलो

दीवार के उस पार भी जो देख सके

वो तेज़ नज़र हो तो मेरे साथ चलो

होती है ग़रीबों की वहाँ दाद रसी

तुम ख़ाक बसर हो तो मेरे साथ चलो

पत्थर पे खिलाना है वहाँ हमको कँवल

आता ये हुनर हो तो मेरे साथ चलो

हर शख़्स वहाँ कड़वा…

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Posted on March 6, 2019 at 5:55pm — 9 Comments

'वतन को आग लगाने की चाल किसकी है'

मफ़ाइलुन फ़इलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन

1212     1122     1212      22

ग़ज़ल

उठा है ज़ह्न में सबके सवाल,किसकी है

तू जिस पे नाच रहा है वो ताल किसकी है

खड़े हुए हैं सर-ए-राह आइना लेकर

हमारे सामने आए मजाल किसकी है

ज़रा सा ग़ौर करोगे तो जान जाओगे

वतन को आग लगाने की चाल किसकी है

हमें तू बेवफ़ा कहता है ,ये तो देख ज़रा

लबों पे सबके वफ़ा की मिसाल किसकी…

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Posted on January 16, 2019 at 8:30pm — 20 Comments

"तरही ग़ज़ल नम्बर 4

नोट:-

तरही मुशायरा अंक-100 में 87 ग़ज़लें पोस्ट हुईं,मेरी इस ग़ज़ल में जो क़वाफ़ी इस्तेमाल हुए हैं वो बिल्कुल नये हैं ।

पहले सिल पर घिसा गया है मुझे

फिर जबीं पर मला गया है मुझे

जाल हूँ इक सियासी लीडर का

नफ़रतों से बुना गया है मुझे

कोई बारूद की तरह देखो

सरहदों पर बिछा गया है मुझे

कहदो तक़दीर से बखेरे नहीं

करके वो एक जा गया है…

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Posted on October 24, 2018 at 5:54pm — 40 Comments

Comment Wall (25 comments)

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At 10:06pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
जी बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर साहब
अपेक्षा है की गलतियों को भी इंगित करें
At 12:20pm on March 22, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय समर कबीर साहब आदाब
बहुत शुक्रिया सब आपका ही आशीर्वाद है
कृपा बनायें रखें
At 3:34pm on March 12, 2019, dandpani nahak said…
जी बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर सर आपके मार्गदर्शन का हमेशा आकांक्षी रहूँगा!
At 11:42pm on February 23, 2019, dandpani nahak said…
जी बहुत शुक्रिया आदरणीय
ये तो आपकी कृपा से ही संभव हुआ है
At 11:38pm on February 10, 2019, Rafique Nagori said…

बहुत अच्छा और उस्तादाना फन से भरा हुआ कलाम है समर साहब का

At 10:48pm on January 26, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय आपकी कृपा है
At 9:05am on January 25, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय जनाब समर कबीर साहब
प्रणाम
तरही मुशायरा 103 के लिए प्रयास किया है

इत्तिला की फिर से वो न आएँ मुझे न दो
मैं जा चुका हूँ अब तो सदाएँ मुझे न दो

खामोश सच है,झूठ हुआ बातुनी बहुत
उस पे चुप रहने की अदाएँ मुझे न दो

मैं थक चुका हूँ उस का इन्तजार कर कर के
अब और जिंदगी की दुआएँ मुझे न दो

इस बार जो गया न कभी लौट पाउंगा
'हर बार दूर जा के सदाएँ मुझे न दो

आवाम हूँ मुल्क का कुछ तो रहम करो
सब के जुर्म की अब तो सजाएँ मुझे न दो

कृपा कर सुझाव देवें
At 12:57pm on January 14, 2019, गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' said…

कोई बारूद की तरह देखो

सरहदों पर बिछा गया है मुझे ---क्या बात है समर कबीर साहेब लाजवाब अशआर हुए हैं | दाद ही दाद क़ुबूल फ़रमाएं | 

At 11:38am on December 25, 2018, Surkhab Bashar said…

जनाब समर कबीर साहब बहुत ही उम्दा ग़ज़ल कही है आपने 

हर शेर का़बिले दाद है 

  • मुबारक बाद कुबूल करें
At 11:39pm on August 19, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय प्रणाम!
एवम् शुक्रिया मैं निरंतर सुधर करूँगा
 
 
 

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"लाजवाब सर"
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"आदरणीय समर कबीर जी इस छंद बद्ध रचना को आपकी प्रशंसा मिली लेखन सार्थक हुआ। आपका हृदय तल से आभार।"
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मापनी २२१२ १२१ १२२ १२१२ हमने रखा न राज़ सभी कुछ बता दियाखिड़की से आज उसने भी परदा हटा दिया बंजर जमीन…See More
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बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सभी कुछ बता दिया - ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर जी सादर नमस्कार, जी कर देता हूँ ,आपकी हौसलाअफजाई के लिए दिल से शुक्रिया "
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Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post प्रतीक्षा लौ ...
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Samar kabeer commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post कनक मंजरी छंद "गोपी विरह"
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