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Samar kabeer
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Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"कोई बात नहीं ।"
12 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"जनाब मोहन बेगोवाल जी आदाब,ग़ज़ल अभी बहुत समय चाहती है,मुशायरे में सहभागिता के लिए आपका धन्यवाद ।"
12 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"जनाब गुरप्रीत सिंह जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।"
12 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"जनाब ज़ैदी साहिब, आपकी ग़ज़ल ज़रूर दुरुस्त कर देता लेकिन एक हफ़्ते से वाइरल में उलझा हुआ हूँ,तबीअत मक़ाम पर नहीं है,यहाँ अपनी ज़िम्मेदारी जैसे तैसे निभा रहा हूँ,ग़ज़ल दुरुस्त करवाने के लिए पर्सनल मुलाक़ात की ज़हमत गवारा फ़रमाएँ ।"
12 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"अंजलि जी,दूसरे शैर तक़ाबुल-ए-रदीफ़ कहाँ है? स्पष्ट करें ।"
12 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"मुहतरमा अंजलि गुप्ता जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।"
14 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"जनाब नाहक़ साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।"
14 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"बहना राजेश कुमारी जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें । 'बेरहम हवाओं ने उसके पर कतर डाले' इस मिसरे में 'बेरहम' ग़लत है,सहीह शब्द है सहीह शब्द है "बेरह्म"221 ।"
14 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"जनाब मुनीश तन्हा जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है बधाई स्वीकार करें । मुहतरमा अंजलि जी से सहमत हूँ । 'जिंदगी कभी रहती थी जहां उजालों में' इस मिसरे में ऐब-ए-शिकस्त-ए-नारवा देखें ।"
14 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"जनाब नादिर ख़ान साहिब आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 'हम न बंध सकेंगे अब मख़मली ख़यालों में' इस मिसरे में 'बंध' को "बँध" कर लें ।"
14 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"जनाब बासुदेव अग्रवाल 'नमन' जी आदाब,तरही मिसरे पर ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन कुछ मिसरों में शिल्प और व्याकरण की कमज़ोरी साफ़ नज़र आती है,बहरहाल बधाई स्वीकार करें । 'सुनिये दर्द पिन्हा जो, मुफ़लिसों के नालों में' इस मिसरे में…"
15 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"जनाब आसिफ़ ज़ैदी साहिब आदाब,तरही मिसरे पर ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'देवता है खुद अपने, आदमी ख़यालों में।तरबियत नहीं पाते,मस्जिदों शिवालों में' मतले के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है,ऊला मिसरे का शिल्प भी कमज़ोर है,देखियेगा…"
15 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आपका स्वागत है"
yesterday
Ram Ashery commented on Samar kabeer's blog post ओ.बी.ओ.की 9 वी सालगिरह का तुहफ़ा
"प्यार और दुआ में ताकत है वह गज़ब की  बहे जिस दिशा में मिटा दे गर्दिश वहाँ की  ओ बी ओ की सफलता है संपादक मण्डल की   शत्रु को मित्र में बदल दे ख्वाहिस समीर की ॥     "
Sunday
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post एक मुश्किल बह्र,"बह्र-ए-वाफ़िर मुरब्बा सालिम" में एक ग़ज़ल
"बहुत शुक्रिय:"
Aug 17
क़मर जौनपुरी commented on Samar kabeer's blog post एक मुश्किल बह्र,"बह्र-ए-वाफ़िर मुरब्बा सालिम" में एक ग़ज़ल
"बहुत उम्दा मुहतरम"
Aug 17

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Samar kabeer's Blog

'देखो हिंदौस्तान फूँकता है'

2122 1212 112/22

जिस्म में पहले जान फूँकता है

बाद-अज़-जाँ अज़ान फूँकता है

सब्र कर शब गुज़र ही जाएगी

क्यों ये अपना मकान फूँकता है

अपनी नफ़रत की आग से कोई

देखो हिंदौस्तान फूँकता है

पास आकर वो गर्म साँसों से

मेरे दिल का जहान फूँकता है

आग तो सर्द हो चुकी कब की

क्यों अबस राखदान फूँकता है

हुक्म से रब के ल'अल मरयम का

देखो मुर्दे में जान फूँकता है

रोज़ आयात पढ़…

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Posted on August 6, 2019 at 3:00pm — 9 Comments

एक मुश्किल बह्र,"बह्र-ए-वाफ़िर मुरब्बा सालिम" में एक ग़ज़ल

अरकान:-12112 12112

न छाँव कहीं,न कोई शजर

बहुत है कठिन,वफ़ा की डगर

अजीब रहा, नसीब मेरा

रुका न कभी,ग़मों का सफ़र

तलाश किया, जहाँ में बहुत

कहीं न मिला, वफ़ा का गुहर

तमाम हुआ, फ़सान: मेरा

अँधेरा छटा, हुई जो सहर

ग़मों के सभी, असीर यहाँ

किसी को नहीं, किसी की ख़बर

बहुत ये हमें, मलाल रहा

न सीख सके, ग़ज़ल का हुनर

हबीब अगर, क़रीब न हो

अज़ाब लगे, हयात…

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Posted on July 4, 2019 at 2:30pm — 34 Comments

ओ.बी.ओ.की 9 वी सालगिरह का तुहफ़ा

है उजागर ये हक़ीक़त ओ बी ओ

मुझको है तुझसे महब्बत ओ बी ओ

तेरे आयोजन सभी हैं बेमिसाल

तू अदब की एक जन्नत ओ बी ओ

कहते हैं अक्सर ,ये भाई योगराज

तू है इक छोटा सा भारत ओ बी ओ

सीखने वाले यही कहते सदा…

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Posted on April 1, 2019 at 11:00am — 35 Comments

एक ग़ज़ल रुबाइ की बह्र में

मफ़ऊल मफ़ाईल मफ़ाईल फ़अल

221     1221   1221    12

पाना जो शिखर हो तो मेरे साथ चलो

ये अज़्म अगर हो तो मेरे साथ चलो

दीवार के उस पार भी जो देख सके

वो तेज़ नज़र हो तो मेरे साथ चलो

होती है ग़रीबों की वहाँ दाद रसी

तुम ख़ाक बसर हो तो मेरे साथ चलो

पत्थर पे खिलाना है वहाँ हमको कँवल

आता ये हुनर हो तो मेरे साथ चलो

हर शख़्स वहाँ कड़वा…

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Posted on March 6, 2019 at 5:55pm — 21 Comments

Comment Wall (29 comments)

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At 12:33am on August 7, 2019, dandpani nahak said…
परम आदरणीय समर कबीर साहब आदाब जी मैं जरूर ग़ज़ल के शिल्प और व्याकरण पर मेहनत करूँगा यक़ीनन मैं जल्दबाज़ी करने लगा हूँ मुआफ़ी चाहता हूँ
At 8:06pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
परम आदरणीय समर कबीर साहब आदाब, बहुत शुक्रिया सब आपकी कृपा है कृपा बनी रहे ! आपकी तबीयत ख़राब होने के बावजूद आप समय निकाल कर जो मदद करते है बहुत शुक्रिया!
At 12:24pm on June 27, 2019, Samar kabeer said…

अब एडिट नहीं होगा,संकलन से पहले,वहाँ लिख दें टंकण त्रुटि है ।

At 12:09pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
परम आदरणीय जनाब समर कबीर साहब आदाब, बहुत शुक्रिया आपका बस आपकी कृपा यूँ ही बनी रहे ! आपने ठीक कहा 'यारो ' का यारों हो गया है जो कि मेरी टाइपिंग भूल है
लेकिन मुझसे एडिट नहीं हो पा रहा
At 9:59pm on May 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय समर कबीर साहब आदाब
हौसला बढ़ाने के लिए बहुत शुक्रिया, सब आपकी कृपा है
कृपा दृस्टि बनाये रखें ! आपका आदेश सर माथे पर
At 10:06pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
जी बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर साहब
अपेक्षा है की गलतियों को भी इंगित करें
At 12:20pm on March 22, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय समर कबीर साहब आदाब
बहुत शुक्रिया सब आपका ही आशीर्वाद है
कृपा बनायें रखें
At 3:34pm on March 12, 2019, dandpani nahak said…
जी बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर सर आपके मार्गदर्शन का हमेशा आकांक्षी रहूँगा!
At 11:42pm on February 23, 2019, dandpani nahak said…
जी बहुत शुक्रिया आदरणीय
ये तो आपकी कृपा से ही संभव हुआ है
At 11:38pm on February 10, 2019, Rafique Nagori said…

बहुत अच्छा और उस्तादाना फन से भरा हुआ कलाम है समर साहब का

 
 
 

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"आ. आनीस जी, अच्छा प्रयास हुआ है । हार्दिक बधाई।"
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"आ.भाई पंकज जी, बेहतरीन बंद के साथ सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आ. भाई मोहन जी, सुंदर प्रयास हुआ है । हार्दिक बधाई ।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आ. भाई गुरप्रीत जी,अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आ. अंजलि जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आ. दण्डपाणि जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आ. राजेश दी, सादर अभिवादन। बेहतरीन गजल हुई है ।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आ. भाई मुनीश जी, प्रयास आच्छा है हार्दिक बधाई ।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आ. भाई नादिर जी, अच्छी गजल के लिए हार्दिक बधाई ।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आ. भाई असद जैदी जी, गजल का सुंदर प्रयास हुआ है हार्दिक बधाई ।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"लोग कम हुए आना, मस्जिदों शिवालों मेंढूँढते खुदा अब वो, डूब मय के प्यालों में।१।***यूँ वफा कहाँ…"
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अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"लग चुका है जंग इक तो, कुंद से कुदालों मेंऔर काम करना है, दुमकटे उजालों में। मकड़ियाँ उदासी की, रात…"
7 hours ago

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