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Samar kabeer
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Samar kabeer commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post मुँह ज़ख्मों के शे'र सुनाकर सीता है
"// "तू पहले से ज़्यादा सिगरेट पीता है"// 'ज़्यादा' शब्द पर जनाब अमीर साहिब से सहमत हूँ,इस मिसरे को उचित लगे तो यूँ कर सकते हैं:- 'और ज़ियादा अब तू सिगरेट पीता है'"
50 minutes ago
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post "तरही ग़ज़ल नम्बर 4
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिय: ।"
1 hour ago
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post "तरही ग़ज़ल नम्बर 4
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिय: ।"
1 hour ago
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post "तरही ग़ज़ल नम्बर 4
"जनाब रवि भसीन 'शाहिद' जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिय: ।"
1 hour ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post जीवन पर कुछ दोहे :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छे दोहे लिखे आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
1 hour ago
Samar kabeer commented on Dimple Sharma's blog post कहीं नायाब पत्थर है , कहीं मन्दिर मदीना है
"मुहतरमा डिम्पल शर्मा जी आदाब,ओबीओ पटल पर आपका स्वागत है । ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।"
1 hour ago
Naveen Mani Tripathi commented on Samar kabeer's blog post "तरही ग़ज़ल नम्बर 4
"वाह वाह वाह बहुत खूब सर लाजवाब ग़ज़ल हुई । हार्दिक बधाई ।"
13 hours ago
Sushil Sarna commented on Samar kabeer's blog post "तरही ग़ज़ल नम्बर 4
"पहले सिल पर घिसा गया है मुझे फिर जबीं पर मला गया है मुझे जाल हूँ इक सियासी लीडर का नफ़रतों से बुना गया है मुझे वाह आदरणीय समर कबीर साहिब वाह आप ग़ज़ल के बेताज बादशाह हैं। इस बेहतरीन और खूबसूरत दिल को छूती ग़ज़ल के लिए दिल से मुबारकबाद कबूल फरमाएं सर।"
15 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Samar kabeer's blog post "तरही ग़ज़ल नम्बर 4
"आदरणीय समर कबीर साहिब, इस बा-कमाल ग़ज़ल पर बधाई क़ुबूल फ़रमाएँ। एक एक शे'र में आपका फ़न और उस्तादी झलक रही है। और मक़्ता तो वाक़ई लाजवाब है। आपको सादर नमन।"
16 hours ago
Samar kabeer commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( ये नया द्रोहकाल है बाबा...)
"मोहतरम मैने गूगल भी किया तब ख़्याल लिखा.// आपको यही बताना चाहता हूँ कि गूगल ने कई लोगों की नैया डुबोई है,इसके भरोसे न रहें, क्या आप किसी शाइर का शैर मिसाल में पेश कर सकते हैं जिसमें 'ख़्याल' 21 पर लिया गया हो? वैसे जानकारी देना मेरा काम…"
yesterday
Samar kabeer commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post मुँह ज़ख्मों के शे'र सुनाकर सीता है
"मैंने रूपम जी का मूल शैर नहीं पढ़ा,मैं सिर्फ़ ये अर्ज़ कर रहा हूँ कि ज़ख़्म सिये जाते हैं,इसमें ज़ख़्म का मुँह सीना ज़रूरी नहीं पूरे ज़ख़्म को सिया जाता है । और 'दर्ज़ी' यहाँ इस्तिआरा है । अब इस पर आगे बहस नहीं करूँगा ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post मुँह ज़ख्मों के शे'र सुनाकर सीता है
"//मतले का ऊला मिसरा "दिल के ज़ख़्म को शे'र सुनाकर सीता है" फिट नहीं है क्योंकि ज़ख़्मों को भरा जाता है सिया नहीं जाता// जनाब अमीर साहिब,क्या आपने डॉक्टरों को ज़ख्मों पर टाँके लगाते नहीं देखा? "
yesterday
Samar kabeer commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post मुँह ज़ख्मों के शे'र सुनाकर सीता है
"जनाब रूपम कुमार जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । आपकी ग़ज़ल के अरकान है 5 फ़ेलुन 1 फ़ा   'तू पहले से ज़ियादा सिगरेट पीता है' इन अरकान पर इस मिसरे की तक़ती'अ कर के देखें । किसी भी शैर या मिसरे में बदलाव कुछ…"
yesterday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post अधूरे अफ़साने :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें । 'तारीक में डूबी हुई ' इस पंक्ति में 'तारीक' को "तारीकी" कर लें । 'ग़ुम कर लिया है' इस पंक्ति में 'ग़ुम' को "गुम" कर लें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post परम पावनी गंगा
"जनाब डॉ. छोटेलाल सिंह जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post गंगादशहरा पर कुछ दोहे
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, अच्छे दोहे लिखे आपने, बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday

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"ओबीओ की सालगिरह का तुहफ़ा"

2122 2122 212

.

देख साँसों में बसा है ओ बी ओ

मेरी क़िस्मत में लिखा है ओ बी ओ




कितने आए और कितने ही गए

शान से अब तक खड़ा है ओ बी ओ




बढ़ गई तौक़ीर मेरी और भी

तू मुझे जब से मिला है ओ बी ओ




हों वो 'बाग़ी' या कि भाई 'योगराज'

तू सभी का लाडला है ओ बी ओ



भाई 'सौरभ' शान से कहते…

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Posted on April 1, 2020 at 9:00pm — 19 Comments

एक ताज़ा ग़ज़ल

7 फेलुन 1 फ़ा

मेरी यादों से वो यारो जब भी घबराते हों गे

माज़ी के क़िस्सों से अपने दिल को बहलाते हों गे

काले बादल शर्म से पानी पानी हो जाते हों गे

बाम प आकर जब वो अपनी ज़ुल्फ़ें लहराते हों गे

जैसे हमको यार हमारे समझाने आ जाते हैं

उसके भी अहबाब यक़ीनन उसको समझाते हों गे

हम तो उनके हिज्र में तारे गिनते रहते हैं शब भर

वो तो अपने शीश महल में चैन से सो जाते हों…

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Posted on February 13, 2020 at 5:55pm — 6 Comments

'देखो हिंदौस्तान फूँकता है'

2122 1212 112/22

जिस्म में पहले जान फूँकता है

बाद-अज़-जाँ अज़ान फूँकता है

सब्र कर शब गुज़र ही जाएगी

क्यों ये अपना मकान फूँकता है

अपनी नफ़रत की आग से कोई

देखो हिंदौस्तान फूँकता है

पास आकर वो गर्म साँसों से

मेरे दिल का जहान फूँकता है

आग तो सर्द हो चुकी कब की

क्यों अबस राखदान फूँकता है

हुक्म से रब के ल'अल मरयम का

देखो मुर्दे में जान फूँकता है

रोज़ आयात पढ़…

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Posted on August 6, 2019 at 3:00pm — 18 Comments

एक मुश्किल बह्र,"बह्र-ए-वाफ़िर मुरब्बा सालिम" में एक ग़ज़ल

अरकान:-12112 12112

न छाँव कहीं,न कोई शजर

बहुत है कठिन,वफ़ा की डगर

अजीब रहा, नसीब मेरा

रुका न कभी,ग़मों का सफ़र

तलाश किया, जहाँ में बहुत

कहीं न मिला, वफ़ा का गुहर

तमाम हुआ, फ़सान: मेरा

अँधेरा छटा, हुई जो सहर

ग़मों के सभी, असीर यहाँ

किसी को नहीं, किसी की ख़बर

बहुत ये हमें, मलाल रहा

न सीख सके, ग़ज़ल का हुनर

हबीब अगर, क़रीब न हो

अज़ाब लगे, हयात…

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Posted on July 4, 2019 at 2:30pm — 36 Comments

Comment Wall (38 comments)

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At 7:03am on May 10, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय समर कबीर साहब
आदाब
यह जानकर खुशी हुई कि आपके अनुज और बेटे की सेहत ठीक है. ओबीओ पर आपकी उपस्थिती से हम जैसे नये शायरों को संबल मिलता है. एक ताज़ा ग़ज़ल पोस्ट की है. वक़्त मिलने पर पढ़कर सलाह दें तो मेहरबानी होगी.
At 11:04pm on May 7, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय समर कबीर साहब
बहुत ममनून हूँ कि इतनी जल्दी शंका समाधान कर दिया. एक दफा फिर शुक्रिया.
At 9:38am on May 5, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय समर कबीर साहब
आदाब
बहुत दिनों बाद अपनी एक ग़ज़ल पोस्ट कर रहा हूँ, आपकी नज़रे इनायत की दरकार है. समय मिलने पर पढ़ कर सलाह एवं प्रतिक्रिया देकर अनुग्रहित करें.
सालिक गणवीर
At 6:04pm on April 23, 2020, सालिक गणवीर said…

आदरणीय समर कबीर साहब

अपने ब्लाग पर एक ग़ज़ल पोस्ट की है, प्रतिक्रिया एवं सुझाव अपेक्षित है. समय निकाल कर मुझे भी पढ़कर आवश्यक सुझाव देंं.

At 12:25pm on April 1, 2020, सालिक गणवीर said…
आदरणीय कबीर साहब
अपने ब्लॉग में एक ग़ज़ल पोस्ट कर रहा हूँ. साथ ही साथ आपको फ्रैंड रिक्वेस्ट भी भेजा है. कृपया स्वीकार करें. ग़ज़ल पर प्रतिक्रिया एवं सुझाव अपेक्षित है. पहले तरही ग़ज़ल,ज़रूरी रद्दोबदल के साथ पोस्ट किया था, प्रभाकर जी का मेल आने के बाद इसे हटा दिया है.
शुभेच्छु
सालिक गणवीर
At 1:52pm on March 29, 2020, Bhupender singh ranawat said…

shri maan aapki hosla afjayI k liye aabhar

At 7:06pm on March 9, 2020, अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " said…

शुक्रिया जनाब.

At 8:18am on January 21, 2020, Bhupender singh ranawat said…

आदरणीय Samar Kabeer साहब रचना की सराहना  के लिए आपका बहुत बहुत आभार । आपने जो advice दी हैं उनका में ध्यान रखूँगा। पुनः आपका आभार ।

At 9:23am on September 8, 2019, TEJ VEER SINGH said…

आदरणीय समर क़बीर साहब को जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनायें। ईश्वर सदैव आपको सुख, शाँति और समृद्धि प्रदान करें।हमेशा स्वस्थ रहें और दीर्घायु बनें।उन्नति के सर्वोच्च शिखर पर विराजमान हों।

At 12:33am on August 7, 2019, dandpani nahak said…
परम आदरणीय समर कबीर साहब आदाब जी मैं जरूर ग़ज़ल के शिल्प और व्याकरण पर मेहनत करूँगा यक़ीनन मैं जल्दबाज़ी करने लगा हूँ मुआफ़ी चाहता हूँ
 
 
 

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"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिय: ।"
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"जनाब सुशील सरना जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिय: ।"
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Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post "तरही ग़ज़ल नम्बर 4
"जनाब रवि भसीन 'शाहिद' जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिय:…"
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"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छे दोहे लिखे आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
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