For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Samar kabeer
Share

Samar kabeer's Friends

  • V.M.''vrishty''
  • mirza javed baig
  • पीयूष कुमार द्विवेदी
  • dandpani nahak
  • Ajay Tiwari
  • श्याम किशोर सिंह 'करीब'
  • santosh khirwadkar
  • Ambesh Tiwari
  • आशीष सिंह ठाकुर 'अकेला'
  • Mirza Hafiz Baig
  • surender insan
  • Kalipad Prasad Mandal
  • KALPANA BHATT ('रौनक़')
  • रामबली गुप्ता
  • Abhishek Kumar Amber
 

Samar kabeer's Page

Latest Activity

Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post "बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ"
"जनाब सुरेन्द्र इंसान जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ।"
5 hours ago
surender insan commented on Samar kabeer's blog post "बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ"
"मोहतरम समर साहब आदाब।वाह जी वाह बेहतरीन ग़ज़ल जी। मतले से मकते तक हर शेर लाजवाब।बहुत बहुत दिली मुबारकबाद जी।"
7 hours ago
Samar kabeer commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ८०
"'  तू समझता है मुझे गर अपना भाई, तो करें' इस मिसरे को यूँ कर लें :- ''आप समझें गर हमें भी अपना भाई,तो करें""
yesterday
Samar kabeer commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ८०
"जनाब राज़ नवादवी साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 'नफ़रतों को ख़त्म कर दिल की सफ़ाई तो करें तू समझता है मुझे गर अपना भाई, तो करें' इस शैर में शुतरगुरबा दोष है,देखें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । '  मेरे कत्ल पर तो उँगलियाँ उठेंगी' इस मिसरे को यूँ कर लें:- 'मेरे क़त्ल पर उंगलियाँ तो उठेंगी'"
yesterday
Samar kabeer commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post अख़बारों की बातें छोड़ो कोई ग़ज़ल कहो (ग़ज़ल)
"जनाब धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी आदाब,बहुत दिनों बाद पटल पर आपको देखकर प्रसन्नता हुई,अपनी सक्रियता बनाये रखें । अच्छी ग़ज़ल कही आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post दो क्षणिकाएं :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,उम्दा क्षणिकाएँ हुई हैं,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -15 (हस्ती ही मिट गई है तेरे इस ग़ुलाम की )
"मतले का ऊला मिसरा दूसरे शैर का ऊला मिसरा तीसरे शैर का सानी मिसरा 5वें का ऊला,छटे का सानी मिसरा ।"
Saturday
Samar kabeer commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ७९
"जी,शुक्रिया ।"
Saturday
Samar kabeer commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ७९
"तबीअत ठीक नहीं थी भाई, वरना ओबीओ के बग़ैर मुझे चैन कहाँ ।"
Friday
Samar kabeer commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post सारे जहाँ से अच्छा (कहानी )
"जनाब डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आदाब,बहुत उम्दा,तंज़ आमेज़,कहानी लिखी है आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Friday
Samar kabeer commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -15 (हस्ती ही मिट गई है तेरे इस ग़ुलाम की )
"जनाब क़मर जौनपुरी साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । शिल्प पर थोड़ा ध्यान देने की आवश्यकता है ।"
Friday
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए
"जनाब मनोज कुमार अहसास जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें । अरकान के बारे में क़मर साहिब बता ही चुके हैं ।"
Friday
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post दिल भी मिलाना है
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल है,बधाई स्वीकार करें । थोड़ा शिल्प पर अभ्यास करें ।"
Friday
Samar kabeer commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ७९
"जनाब राज़ साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Friday
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Friday

Profile Information

Gender
Male
City State
ujjain
Native Place
ujjain
Profession
Poet
About me
poet

Samar kabeer's Blog

"तरही ग़ज़ल नम्बर 4

नोट:-

तरही मुशायरा अंक-100 में 87 ग़ज़लें पोस्ट हुईं,मेरी इस ग़ज़ल में जो क़वाफ़ी इस्तेमाल हुए हैं वो बिल्कुल नये हैं ।

पहले सिल पर घिसा गया है मुझे

फिर जबीं पर मला गया है मुझे

जाल हूँ इक सियासी लीडर का

नफ़रतों से बुना गया है मुझे

कोई बारूद की तरह देखो

सरहदों पर बिछा गया है मुझे

कहदो तक़दीर से बखेरे नहीं

करके वो एक जा गया है…

Continue

Posted on October 24, 2018 at 5:54pm — 38 Comments

"हिन्दी दिवस पर विशेष" हिन्दी ग़ज़ल

कितनी प्यारी ये मनभावन हिन्दी है

भारत की वैचारिक धड़कन हिन्दी है

जो लिखता हूँ हिन्दी में ही लिखता हूँ

मेरी ख़ुशियों का घर आँगन हिन्दी है

रफ़ी, लता,मन्नाडे को तुम सुन लेना

इन सबकी भाषा और गायन हिन्दी है

भारत में कितनी हैं भाषाएँ लेकिन

सारी भाषाओँ का यौवन हिन्दी है

पहले मैं अक्सर उर्दू में लिखता था

अब तो मेरा सारा लेखन हिन्दी है

मुझको तो लगती है ये भाषा…

Continue

Posted on September 13, 2018 at 11:39pm — 31 Comments

"बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ"

ग़ज़ल

बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ

मैं नफ़रतों का ही क़िस्सा तमाम करता चलूँ

अब आख़िरत का भी कुछ इन्तिज़ाम करता चलूँ

दिल-ओ-ज़मीर को अपने मैं राम करता चलूँ

जहाँ जहाँ से भी गुज़रूँ ये दिल कहे मेरा

तेरा ही ज़िक्र फ़क़त सुब्ह-ओ-शाम करता चलूँ

अमीर हो कि वो मुफ़लिस,बड़ा हो या छोटा

मिले जो राह में उसको सलाम करता चलूँ

गुज़रता है जो परेशान मुझको करता है

तेरे ख़याल से…

Continue

Posted on September 1, 2018 at 3:12pm — 42 Comments

जनाब निलेश 'नूर' की ज़मीन में ग़ज़ल नम्बर 2 (कुछ नये क़वाफ़ी के साथ)

मैं तो उसकी पे ब पे अंगड़ाइयाँ गिनता रहा

और वो दामन की मेरे धज्जियाँ गिनता रहा

सौ गुनह होते ही पूरे मारना था इसलिये

मैं भी इक शिशुपाल की बदकारियाँ गिनता रहा

मेरे सीने पर सितम की मश्क़ वो करते रहे

और मैं मासूम दिल की किर्चियाँ गिनता रहा

काम जब कुछ भी नहीं था ओबीओ पर दोस्तो

'नूर' साहिब की मैं कूड़ेदानियाँ गिनता रहा

मेरी बर्बादी पे ख़ुश होकर अज़ीज़ों ने "समर"

कितनी…

Continue

Posted on July 11, 2018 at 10:00am — 31 Comments

Comment Wall (16 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 11:39pm on August 19, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय प्रणाम!
एवम् शुक्रिया मैं निरंतर सुधर करूँगा
At 6:09pm on August 7, 2018, Kishorekant said…

आपका आभार आदरणीय समर कबीर जी । आप की सुचना के अनुसार अभ्यास शुरु कर दिया है । आशा है आगे भी आपका मार्गदर्शन मिलता रहेगा ।भूलों के लिये दरगुजर करें ।

At 8:05pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय
समर कबीर महोदय प्रणाम
आपका आदेश सर माथे पर
आपका बहुत बहुत शुक्रिया
At 5:21pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय समर कबीर जी
आपका बहुत बहुत शुक्रिया
At 10:54am on October 9, 2016, सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' said…
आदरणीय समर कबीर साहिब प्रणाम आपको।

गजल विधा सिखने का इच्छुक हूँ और मैंने दूसरी गजल आज इस पटल पर रखी है।

आपके आने से मेरा घर जग जगमगाया।

आपक नजर कर मुझे कुछ सुझाव देंगे तो आगे से मुझे कुछ सीखने में मदद मिलेगी। सादर
At 11:29am on September 26, 2016, Kalipad Prasad Mandal said…

आदरणीय समीर कबीर साहिब आदाब , आपको थोड़ा कष्ट दे रहा हूँ क्योंकि ग़ज़ल में जितनी जानकारी आपको है शायद मेरी जानकारी में और कोई नहीं है | मैं कुछ शे'र ग़ालिब के पढ़ रहा था और उनके बहर जांच कर रहा था अपनी जानकारी केलिए | दो शेर में अटक गया हूँ ,नीचे लिखा है :-

बेनिया/जी हद से गुज/री , बन्दा पर/वर कब तलक 

२१२/ २२१ २/           1222        / २२१२ 

हम कहें/गे हाले  दिल, और आ/प फरमाएं/गे क्या 

२१२/     २२१    २ /   २१२ /    १  222   /२२(१२)

गर किया /नासेह ने/ हमको कै/द ,अच्छा यूं स/ही 

२१२/      २२१२/      212     /२२ २१/२ 

ये जुनू/ने -इश्क के /अंदाज़ छुट /जायेंगे क्या 

212/   २२१२/        221२/       2212

कृपया आप इस्नके सही बहर बताने का कष्ट करें |

सादर 

At 11:08pm on September 24, 2016, Samar kabeer said…
सरिता जी आप किस विषय में
पूछ रही हैं ?
At 9:14pm on September 24, 2016, sarita panthi said…
आदरणीय सर क्या मैंने अब सही जगह पोस्ट की है ?
At 3:16pm on September 19, 2016, Dipu mandrawal said…
आदरणीय समीर कबीर जी आपने मेरी कविताओं को पढ़ा और पसंद किया इसके लिए मेरा प्रणाम स्वीकार करें । Dipu Mandrawal
At 12:07pm on July 26, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय समर सर मेरे मित्रता के निवेदन को स्वीकार करके आपने मुझे अपना आशीर्वाद दिया है मेरे तकरीबन हर रचना को आपका मार्गदर्शन मिलता  रहा है इससे अगले रचना में एक नयी सोच मिलती है आपका स्नेह और आशीवाद यूं ही सतत मिलता रहे इस कामना के और सदर प्रणाम के साथ सादर 

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अजय गुप्ता commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए
"भाई मनोज जी, सबसे पहले तो अच्छी ग़ज़ल और अलग अंदाज़ अशार के लिए बधाई. अब आपकी ग़ज़ल पर आते है. ///वेदना…"
2 hours ago
Muzammil shah is now a member of Open Books Online
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on TEJ VEER SINGH's blog post कुंठा - लघुकथा -
"आ. भाई तेजवीर जी, बेहतरीन कथा हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
2 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post कुंठा - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय राज नवादवी जी।"
4 hours ago
PHOOL SINGH posted a blog post

जीवन संगिनी

हार हार का टूट चुका जबतुमसे ही आश बाँधी हैमैं नहीं तो तुम सहीसमर्थ जीवन की ठानी है|| मजबूर नहीं…See More
4 hours ago
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post "बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ"
"जनाब सुरेन्द्र इंसान जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ।"
5 hours ago
PHOOL SINGH updated their profile
5 hours ago
surender insan commented on Samar kabeer's blog post "बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ"
"मोहतरम समर साहब आदाब।वाह जी वाह बेहतरीन ग़ज़ल जी। मतले से मकते तक हर शेर लाजवाब।बहुत बहुत दिली…"
7 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

रंगहीन ख़ुतूत ...

रंगहीन ख़ुतूत ...तन्हाई रात की दहलीज़ पर देर तक रुकी रही चाँद दस्तक देता रहा मन उलझा रहा किसका दामन…See More
7 hours ago
राज़ नवादवी commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post अख़बारों की बातें छोड़ो कोई ग़ज़ल कहो (ग़ज़ल)
"आदरणीय धर्मेंद्र कुमार जी, आदाब, सुंदर गजल हुयी है, हार्दिक बधाई. सादर. "
8 hours ago
राज़ नवादवी commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी. सुन्दर गज़ल. सादर. "
8 hours ago
राज़ नवादवी commented on TEJ VEER SINGH's blog post कुंठा - लघुकथा -
"आदरणीय तेज वीर सिंह साहब, बड़े घटनाक्रम वाली एक लघु कथा. बाल एवं अपराध मनोविज्ञान को सफलता पूर्वक…"
8 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service