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Samar kabeer
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Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब,तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई सवीकार करें । 'जीस्त का यूँ ही नहीं कवर बनता है' इस मिसरे में लगता है,एक शब्द लिखने से रह गया है,इसलिए बह्र में नहीं है । 'रोज़ अख़बार इन्हीं से ख़बर बनता…"
20 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"जनाब ख़ान हसनैन आक़िब साहिब आदाब, तरही मिसरे पर आपने उम्द: और मुरस्सा ग़ज़ल कही, शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । 'सिर्फ़ शानों पे तो पुतलों के रखा होता है  तेरी सरकार में झुक जाय तो सर बनता है' इस शैर में तक़ाबुल-ए-रदीफ़…"
21 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"जनाब सूबे सिंह सुजान जी आदाब,तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । 'जोड़कर ईंट और पत्थर तो मक़ाँ बनते हैं' ये मिसरा बह्र से ख़ारिज है,देखियेगा । 'रोज़ महताब कभी घटता कभी बढ़ता है,"एक दिन में कहाँ अंदाज ए नज़र…"
21 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"जनाब अनीस 'अरमान' जी आदाब,तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 'चाँद तो छोड़ो बना लेंगे तुम्हें हम दिलबर प्यार में इक दिया भी तुमसे अगर बनता है' इस शैर का भाव स्पष्ट नहीं हुआ । 'ज़िन्दगी उसने बना…"
21 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । लगता है ये ग़ज़ल आपने जल्दी में कही है ।"
21 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब,तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 'बात जायज है के कोरोना का डर बनता है' इस मिसरे में 'जायज' को "जाइज़" कर लें । 'घर में टिकना भी तो महफूूूज़…"
22 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"जनाब रवि भसीन 'शाहिद' जी आदाब,तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 'पुख़्तगी भी हो जो रिश्तों में तो घर बनता है' इस मिसरे को यूँ करना उचित होगा:- 'पुख़्तगी होती है रिश्तों में तो घर बनता है' कब…"
22 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"मुहतरमा अंजलि गुप्ता जी आदाब, तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें ।"
22 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"जनाब अशफ़ाक़ अली साहिब आदाब,तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । दोस्तो प्यार का रिश्ता जो अगर बनता है। वो ही रिश्ता है जिसे जोड़ के घर बनता है' 'बात अपनों की नहीं गैर से घर बनता है। बात तो ये है कि रिश्तों में असर बनता…"
22 hours ago
Samar kabeer commented on Dr Ashutosh Mishra's blog post नन्ही सी चीटी हाथी कि ले सकती जान है
"'क़ुरआन' को 'कुरान' नहीं लिख सकते । 'जल्दी चलो हरम में हुयी फिर अजान है' ये मिसरा ठीक है ।"
Wednesday
Samar kabeer commented on vijay nikore's blog post प्रणय-परीक्षा
"प्रिय भाई विजय निकोर जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Tuesday
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post क्यों चलते औरों के पथ पर स्वयं बनाओ अपनी राहें |(७४ )
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब, अच्छा गीत लिखा आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Tuesday
Samar kabeer commented on babitagupta's blog post जीवन का कर्फ्यू
"मुहतरमा बबीता गुप्ता जी आदाब,अच्छी रचना है,बधाई स्वीकार करें । निवेदन है कि रचना के साथ उसकी विधा भी लिखा करें ।"
Tuesday
Samar kabeer commented on सूबे सिंह सुजान's blog post ग़ज़ल -:- ख़ुद ही ख़ुद को निहारते हैं हम
"जनाब सूबे सिंह सुजान जी आदाब,बहुत समय बाद पटल पर आपकी रचना देख कर अच्छा लगा । ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन कुछ मिसरे सुधार चाहते हैं,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । 'ख़ुद को कितना सँवारते हैं हम' इस मिसरे में 'कितना' की जगह…"
Tuesday
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post बाहर के डर से लड़ लेंगे भीतर का डर कैसे भागे |(७३ )
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Tuesday
Samar kabeer commented on amita tiwari's blog post एक अवसर सा मानो हाथ आया जबरन
"मुहतरमा अमिता तिवारी जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Tuesday

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एक ताज़ा ग़ज़ल

7 फेलुन 1 फ़ा

मेरी यादों से वो यारो जब भी घबराते हों गे

माज़ी के क़िस्सों से अपने दिल को बहलाते हों गे

काले बादल शर्म से पानी पानी हो जाते हों गे

बाम प आकर जब वो अपनी ज़ुल्फ़ें लहराते हों गे

जैसे हमको यार हमारे समझाने आ जाते हैं

उसके भी अहबाब यक़ीनन उसको समझाते हों गे

हम तो उनके हिज्र में तारे गिनते रहते हैं शब भर

वो तो अपने शीश महल में चैन से सो जाते हों…

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Posted on February 13, 2020 at 5:55pm — 6 Comments

'देखो हिंदौस्तान फूँकता है'

2122 1212 112/22

जिस्म में पहले जान फूँकता है

बाद-अज़-जाँ अज़ान फूँकता है

सब्र कर शब गुज़र ही जाएगी

क्यों ये अपना मकान फूँकता है

अपनी नफ़रत की आग से कोई

देखो हिंदौस्तान फूँकता है

पास आकर वो गर्म साँसों से

मेरे दिल का जहान फूँकता है

आग तो सर्द हो चुकी कब की

क्यों अबस राखदान फूँकता है

हुक्म से रब के ल'अल मरयम का

देखो मुर्दे में जान फूँकता है

रोज़ आयात पढ़…

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Posted on August 6, 2019 at 3:00pm — 18 Comments

एक मुश्किल बह्र,"बह्र-ए-वाफ़िर मुरब्बा सालिम" में एक ग़ज़ल

अरकान:-12112 12112

न छाँव कहीं,न कोई शजर

बहुत है कठिन,वफ़ा की डगर

अजीब रहा, नसीब मेरा

रुका न कभी,ग़मों का सफ़र

तलाश किया, जहाँ में बहुत

कहीं न मिला, वफ़ा का गुहर

तमाम हुआ, फ़सान: मेरा

अँधेरा छटा, हुई जो सहर

ग़मों के सभी, असीर यहाँ

किसी को नहीं, किसी की ख़बर

बहुत ये हमें, मलाल रहा

न सीख सके, ग़ज़ल का हुनर

हबीब अगर, क़रीब न हो

अज़ाब लगे, हयात…

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Posted on July 4, 2019 at 2:30pm — 34 Comments

ओ.बी.ओ.की 9 वी सालगिरह का तुहफ़ा

है उजागर ये हक़ीक़त ओ बी ओ

मुझको है तुझसे महब्बत ओ बी ओ

तेरे आयोजन सभी हैं बेमिसाल

तू अदब की एक जन्नत ओ बी ओ

कहते हैं अक्सर ,ये भाई योगराज

तू है इक छोटा सा भारत ओ बी ओ

सीखने वाले यही कहते सदा…

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Posted on April 1, 2019 at 11:00am — 42 Comments

Comment Wall (32 comments)

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At 7:06pm on March 9, 2020, अमीरुद्दीन खा़न "अमीर बडौ़तवीं " said…

शुक्रिया जनाब.

At 8:18am on January 21, 2020, Bhupender singh ranawat said…

आदरणीय Samar Kabeer साहब रचना की सराहना  के लिए आपका बहुत बहुत आभार । आपने जो advice दी हैं उनका में ध्यान रखूँगा। पुनः आपका आभार ।

At 9:23am on September 8, 2019, TEJ VEER SINGH said…

आदरणीय समर क़बीर साहब को जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनायें। ईश्वर सदैव आपको सुख, शाँति और समृद्धि प्रदान करें।हमेशा स्वस्थ रहें और दीर्घायु बनें।उन्नति के सर्वोच्च शिखर पर विराजमान हों।

At 12:33am on August 7, 2019, dandpani nahak said…
परम आदरणीय समर कबीर साहब आदाब जी मैं जरूर ग़ज़ल के शिल्प और व्याकरण पर मेहनत करूँगा यक़ीनन मैं जल्दबाज़ी करने लगा हूँ मुआफ़ी चाहता हूँ
At 8:06pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
परम आदरणीय समर कबीर साहब आदाब, बहुत शुक्रिया सब आपकी कृपा है कृपा बनी रहे ! आपकी तबीयत ख़राब होने के बावजूद आप समय निकाल कर जो मदद करते है बहुत शुक्रिया!
At 12:24pm on June 27, 2019, Samar kabeer said…

अब एडिट नहीं होगा,संकलन से पहले,वहाँ लिख दें टंकण त्रुटि है ।

At 12:09pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
परम आदरणीय जनाब समर कबीर साहब आदाब, बहुत शुक्रिया आपका बस आपकी कृपा यूँ ही बनी रहे ! आपने ठीक कहा 'यारो ' का यारों हो गया है जो कि मेरी टाइपिंग भूल है
लेकिन मुझसे एडिट नहीं हो पा रहा
At 9:59pm on May 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय समर कबीर साहब आदाब
हौसला बढ़ाने के लिए बहुत शुक्रिया, सब आपकी कृपा है
कृपा दृस्टि बनाये रखें ! आपका आदेश सर माथे पर
At 10:06pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
जी बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर साहब
अपेक्षा है की गलतियों को भी इंगित करें
At 12:20pm on March 22, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय समर कबीर साहब आदाब
बहुत शुक्रिया सब आपका ही आशीर्वाद है
कृपा बनायें रखें
 
 
 

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