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Sheikh Shahzad Usmani
  • Male
  • SHIVPURI M.P.
  • India
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Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-70
"आदाब। रचना पटल पर व लाइव लघुकथा गोष्ठी में हमेशा की तरह सक्रीय सदस्यों में शामिल रहने हेतु व हमें मार्गदर्शित, प्रोत्साहित करते रहने हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी।  नववर्ष की इस पहली गोष्ठी में हम सब अपनी सहभागिता निभा सके,…"
Jan 30
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-70
"आदाब। रचना पटल पर उपस्थित होकर मार्गदर्शक विवेचना, सराहना और समीक्षा/सुझाव हेतु हार्दिक धन्यवाद मुहतरम जनाब कृष मिश्रा 'जान'गोरखपुरी साहिब। पाठकों को विषय भटकाव लग सकता है.... लेकिन लेखक और क्या-क्या कहना चाहता है... इसके सम्प्रेषण में सफल…"
Jan 30
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-70
"आदरणीय मेरे विचार से इस सरल व सहज कथोपकथन में पात्र अनुसार या उस क्षेत्र अनुसार संवादों में क्षेत्रीय बोली की आवश्यकता नहीं लगती। क्षेत्र विशेष के लोग ऐसे सामान्य संवाद भी बोलते हैं। सादर।"
Jan 30
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-70
"खाकी (लघुकथा) : सोसाइटी में अपने फ्लैट के सामने बन रहे फ्लैटों में फ़र्श पर टाइल्स बिछाने का काम वह शिक्षक कुछ दिनों से देख रहा था। खाकी गत्तों में पैक हर टाइल्स खाकी काग़ज़ों में सुरक्षित लिपटा हुआ था। कारीगर और श्रमिक खाकी से टाइल्स पृथक कर खाकी काग़ज़…"
Jan 30
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-70
"आदाब। विषयांतर्गत बढ़िया लघुकथा हेतु हार्दिक बधाई आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। चिरपरिचित कथानक है।"
Jan 30
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-70
"जी। यह भी शीर्षक हो सकता है। लेकिन मेरे विचार से बहुआयामी प्रतीकात्मक शीर्षक 'डॉक्टर' या 'चिकित्सक' या 'वॉरिअर' भी हो सकते हैं। यहाँ यह सब 'माँ' है व 'बेटी' भी! सादर।"
Jan 30
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-70
"आदाब। वाह। हार्दिक स्वागत विषय को भली-भाँँति परिभाषित करती और कथ्य उभारती बेहतरीन लघुकथा का। हार्दिक बधाई आदरणीय कृष मिश्रा 'जान' गोरखपुरी साहिब। संवादों में इंवर्टिड कौमाज़ टंकण में रह गये हैं। विषयांतर्गत रचना में  मौलिक शीर्षक हो,…"
Jan 30
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-70
"आदरणीय आप रचना में ऊपर शीर्षक देना भी भूल गये हैं। सादर सूचनार्थ।"
Jan 29
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-70
"सादर नमस्कार। हार्दिक स्वागत और बधाई गोष्ठी का शुभारंभ करने हेतु जनाब चेतन प्रकाश जी। विषयांतर्गत अच्छा प्रयास। यह पहला ड्राफ्ट लगा कथानक का बहू व बेटे के विरोध के स्वर बेहतर उभारे जा सकते हैं विवरण कम करके। हालाँकि पुराना विषय है। सादर। इस ज्वलंत…"
Jan 29
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-69 विषय: "किसान"
"आदाब। रचना पर समय देकर उसके मर्म पर टिप्पणी कर मुझे प्रोत्साहित करने हेतु बहुत-बहुत शुक्रिया। नववर्ष की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी"
Dec 31, 2020
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-69 विषय: "किसान"
"आदाब। बहुत-बहुत शुक्रिया। नववर्ष की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं आदरणीय तेजवीर सिंह जी।"
Dec 31, 2020
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-69 विषय: "किसान"
"सादर नमस्कार। विषयांतर्गत बिम्ब 'कबूतरों'के कथनोपकथन में बढ़िया विचारोत्तेजक रचना हेतु हार्दिक बधाई जनाब तेजवीर सिंह साहिब। गुटरगूँ ही तो हो पा रही है, बस।"
Dec 31, 2020
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-69 विषय: "किसान"
"आदाब। हार्दिक स्वागत आदरणीया विभारानी श्रीवास्तव जी। विषयांतर्गत बढ़िया सकारात्मक रचना। हार्दिक बधाई। बेहतरी  हेतु अभी इस पर और काम किया जा सकता है मेरे विचार से। "
Dec 31, 2020
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-69 विषय: "किसान"
"बापू तुम कब आओगे? (लघुकथा) : बारहवीं की अंग्रेज़ी की ऑनलाइन कक्षा समाप्त होने के बाद हरियाणा के एक किसान नेता का बेटा महात्मा गांधी जी के एक साक्षात्कार संबंधित पाठ 'इंडिगो' का हिंदी अनुवाद ज़ोर-ज़ोर से पढ़ रहा था। दृढ़ निश्चयी अनपढ़ बंटाईदार…"
Dec 30, 2020
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-69 विषय: "किसान"
"आदाब। गोष्ठी के आग़ाज़ में ही गंभीर समसामयिक. विषयांतर्गत विचारोत्तेजक रचना हेतु हार्दिक बधाई आदरणीया बबीता गुप्ता जी। ऐसा लगा कि इसे कुछ कम शब्दों में भी कहा जा सकता ह "
Dec 30, 2020
Sheikh Shahzad Usmani commented on amita tiwari's blog post थाली खाली लघु -कथा
"आदाब।  समसामयिक ज्वलंत मुद्दों पर  विवरणात्मक शैली की बढ़िया लघुकथा पर हार्दिक बधाई आदरणीया अमिता तिवारी जी।  पूरा अनुच्छेद यदि उस छोटे से बेटे के शब्द हैं, तो इन्वर्टेड कौमाज़ का प्रयोग कर स्पष्ट करना चाहिए। विधा का नाम शीर्षक में सही…"
Dec 30, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
Shivpuri M.P.
Native Place
Shivpuri
Profession
Radio Announcer
About me
A Private School- teacher, Freelancer and a Casual Radio Announcer. Simlple living, high thinking, fond of reading and writing.

Sheikh Shahzad Usmani's Blog

मुंगेरीलाल के वैक्सीन सपने (कहानी) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी :

मुंगेरीलाल और कोरोनाकाल... सबके बहुत बुरे हालचाल! लॉकडाउन पर लॉकडाउन... घर में क़ैद सब जॉब डाउन, रोज़गार डाउन! बेचारे मुंगेरीलाल ने अपनी कम्पनी की नौकरी छोड़कर बड़ी मुसीबत कर ली थी सात साल पहले। उनका काम और रुझान दिलचस्प और संतोषजनक था, फ़िर भी सपनों और दिवास्वप्नों में खोये रहने और बड़ी-बड़ी बातें फैंकने के कारण दफ़्तर, घर, बाज़ार और ससुराल सभी जगह लोग उनका मज़ाक उड़ा-उड़ा कर मौज-मस्ती कर लिया करते थे। उन सबकी बातों को मुंगेरीलाल कभी हल्के में, तो कभी बहुत गंभीरता से ले लेते थे।

एक बार…

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Posted on November 12, 2020 at 8:30am — 2 Comments

गार्गी की बार्बी (लघुकथा)/शेख़ शहज़ाद उस्मानी

भगवान देता है, तो छप्पर फाड़ कर देता है। लेता है, तो एक झटके में ले लेता है। देकर ले लेता है, तो हँसाने के बाद रुला-रुला कर। राजन, रंजीता और गंगा का ज़िन्दगीनामा भी यही साबित करता रहा; गार्गी और गार्गी की बार्बी का भी! बार्बी के साथ कब, क्या, कैसे और क्यूँ होगा; बार्बी ने कभी सोचा न था। सोचती भी कैसे? उसकी सोच तो उसकी मम्मी पर निर्भर थी। उसकी मम्मी ने भी तो न सोचा था वह सब। यही हाल गार्गी का था। गार्गी के साथ कब, क्या, कैसे और क्यूँ होगा; गार्गी ने कभी सोचा न था। सोचती भी कैसे? उसकी सोच तो…

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Posted on November 10, 2020 at 8:30am — 4 Comments

दिल के हाल सुने दिलवाला (लघुकथा)

"अपनी पैरों से रौंदें, दूजी जो भा जाये!"



"घर की मुर्ग़ी दाल बराबर; नयी पीढ़ी को कौन समझाये!"



अपनापन त्याग कर ख़ुदग़र्ज़ी, मनमर्ज़ी, दोगलापन, पागलपन, बचकानापन दिखाती अपने मुल्क की नई पीढ़ी की सोच और पलायन-गतिविधियों पर दो बुजुर्गों ने अपनी-अपनी राय यूं ज़ाहिर की।



"... 'ओल्ड इज़ गोल्ड' कहावत को छोड़ो जी; ओल्ड इज़ सोल्ड! नई पीढ़ी है सो बोल्ड! उन्हें ज़मीनी स्टोरीज़ टोल्ड हों या अनटोल्ड! हम बुड्ढे तो हुए क्लीन-बोल्ड!" उनमें से एक ने दूसरे से कहा, लेकिन ख़ुद के…

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Posted on March 10, 2020 at 2:34pm — 4 Comments

हिताय और सुखाय (संस्मरण)

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Posted on November 23, 2019 at 1:00pm — 7 Comments

Comment Wall (13 comments)

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At 12:50am on October 5, 2018, mirza javed baig said…

आली जनाब शहज़ाद उस्मानी साहिब आदाब, 

मुझे अपनी दोस्तों की फ़ेहरिस्त में जोड़ने का शुक्रिया 

At 6:43am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

"आदरणीय Sheikh Usmani साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर "

At 11:59am on April 12, 2018, MD SHAFIQUE ASHRAF said…

जी बहूत  बहुत शुक्रिया जनाब ... नया हूँ .... थोड़ा सीखने का मौका दीजिये  

At 10:23am on January 8, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय शेख भाई जी आपके मित्रों की सूची में खुद को शामिल पाकर मैं सुखद अनुभूति कर रहा हूँ आपकी लघु कथाएं इस मंच पर मेरे बिशेष आकर्षण का केंद्र है आपकी हर लघु कथा मैं पढता हूँ आपकी कलम सृजन के नए आयाम स्थापित करती रहे ऐसी अपनी शुभकामनाओं के साथ सादर
At 8:23pm on August 5, 2016, pratibha pande said…

आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ  आदरणीय उस्मानी जी  ,आपका रचनाकर्म हर दिन नई बुलंदियां छुएँ ,ये कामना करती हूँ 

At 7:30am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
श्रद्धेय शेख शहजाद उस्मानी साहब ये सब तो आप जैसे मित्रों के सहयोग से ही हुआ है और आशा करता हूं कि भविष्य में भी मेरा मार्गदर्शन करते रहेंगे। हृदय की गहराईयों से धन्यवाद ।
At 8:42am on May 24, 2016, महिमा वर्मा said…

आभार आपका आ.शेख उस्मानी सर जी,अभी जानकारी  पूरी नहीं है ,तो आपको जवाब देने में देर हो गई.पुनः आभार आपका .

At 2:11pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

मित्रता के लिए आभार 

At 8:41am on November 18, 2015, pratibha pande said…

हार्दिक आभार आपका आदरणीय 

At 9:27am on November 4, 2015, kanta roy said…

देखी वफ़ा-ए-फ़ुरसत-ए-रंज-ओ-निशात-ए-दहर

ख़मियाज़ा यक दराज़ी-ए-उमर-ए-ख़ुमार था---- 

मिर्ज़ा ग़ालिब साहब का ये शेर आज आपके लिए
असीम शुभकामनाएँ आपको आदरणीय शहजाद जी।

 

 
 
 

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gumnaam pithoragarhi commented on Chetan Prakash's blog post तरही ग़जलः
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"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार।सर् हुस्न ए मतला सुधारने का प्रयास करती हूँ। हौसला बढ़ाने तथा…"
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"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें…"
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Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"जनाब मुनीश तन्हा जी आदाब, तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है, बधाई स्वीकार करें ।"
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"आदरणीय सालिक गणवीर जी बेहतरीन ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें।"
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"आदरणीय लक्ष्मण धामी'मुसाफ़िर'भाई नमस्कार। भाई अच्छी ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें।"
1 hour ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदरणीय कृष मिश्रा जी बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें।"
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Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"2122 1122 1122 22 /112 1 हमसे पूछी न गई उनसे बताई न गई आँख भी अपने सितमगर से मिलाई न गई 2 ज़िन्दगी…"
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"लाइव आयोजन में रचना एडिट करने का समय रचना पोस्ट करने के बाद सिर्फ़ 15 मिनट तक रहता है,यही हाल…"
1 hour ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदरणीया राजेश कुमारी जी, बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई। बधाई।"
1 hour ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदरणीया ऋचा यादव जी, अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई। मक़्ता बेहतरीन है"
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Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"आदरणीय संजय शुक्ला जी बेहतरीन ग़ज़ल की बधाई स्वीकार करें।मतला अच्छा लगा।"
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