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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'
  • Male
  • वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • India
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"आद0 आशीष जी शुक्रियः। सादर"
Sep 13
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"आद0 अजय जी शुक्रियः"
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"आद0 ओमप्रकाश जी सादर अभिवादन। शुक्रियः"
Sep 13
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"आद0 अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन। आभार आपका।"
Sep 13
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"आद0 सुनन्दा झा जी सादर अभिवादन। बहुत बहुत आभार आपका "कलम उठाऊँ लिखने को तो"" पता नहीं कैसे यह डिलीट हो गया है।"
Sep 12
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"विषय : वे भी क्या दिन थे (सरसी छंद) वे भी क्या दिन थे जिनकी अब, बस यादें हैं शेष लिखने को तो, शब्द खोजते श्लेष कच्चे अपने घर थे लेकिन, बुनियादें मजबूत निश्छल सारे रिश्ते नाते, जिनमें प्यार अकूत रोज कहानी कहती दादी, होती थी जब रात सुनते-सुनते कब…"
Sep 12
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आद0 लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर जी सादर अभिवादन। तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई स्वीकार कीजिये"
Aug 29
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आद0 दण्डपाणि नाहक जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और हौसलाफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रियः।"
Aug 29
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आद0 अजय गुप्ता जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर उपस्थिति और हौसलाफजाई के लिए बहुत बहुत आभार"
Aug 29
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आद0 तस्दीक अहमद खान जी सादर अभिवादन। बहुत बहुत आभार आपका।"
Aug 29
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आद0 अनीस अरमान जी सादर अभिवादन। आपकी ग़ज़ल पर उपस्थिति और हौसलाफजाई के लिए शुक्रियः।"
Aug 29
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आद0 राणा प्रताप सिंह जी सादर अभिवादन। आपकी ग़ज़ल पर उपस्थिति मेरे लिए गौरव की बात है। आभार आपका"
Aug 29
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आद0 अमीरुद्दीन साहब सादर प्रणाम। आप ग़ज़ल के लिए समय निकाले, हौसलाफजाई की। बहुत बहुत शुक्रियः। सादर"
Aug 29
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आद0 डिंपल शर्मा जी सादर अभिवादन। तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने। बधाई स्वीकार कीजिये।"
Aug 29
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आद0 शिज्जू शकूर जी सादर अभिवादन। बहुत उम्दः ग़ज़ल कही है आपने। शैर दर शैर बधाई स्वीकार कीजिये"
Aug 29
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-122
"आद0 अनिल कुमार सिंह जी सादर अभिवादन। अच्छी ग़ज़ल कही है आपने।बधाई स्वीकार कीजिए"
Aug 29

Profile Information

Gender
Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a simple leaving man, having hobby to write poems

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s Blog

आज़ादी के पुनीत पर्व पर वीर रस की कविता

आज पुनः जब मना रहे हम, वर्षगाँठ आज़ादी की

आओ थोड़ी चर्चा करलें, जनगण मन आबादी की

जिन पर कविता गीत लिखूँ तो, झर-झर आँसू आते हैं

रोम-रोम में सिहरन होती, भाव सभी मर जाते हैं।।1

ऐसे भी हैं यहाँ कई जो, घर को सर पर ढोते हैं

घोर अँधेरा फुटपाथों पर, बिना बिछौना सोते हैं

गर्मी में तन झुलसे उनका, सर्दी हाड़ कँपाती है

तब जश्ने आज़ादी अपनी, उनको ख़ूब चिढ़ाती है।।2

भूखा प्यासा उलझा बचपन, भटक रहा अँधियारों में

फूटी क़िस्मत खोज रहा वह, कूड़े के गलियारों…

Continue

Posted on August 15, 2020 at 12:07pm — 8 Comments

गजल- कोख में आने से साँसों के ठहर जाने तक

बह्र- 2122   1122   1122  112/22

कोख में आने से साँसों के ठहर जाने तक

ज़िन्दगी में सकूँ मिलता नहीं मर जाने तक

मुफ़लिसी नेक दिली और ज़माने का दर्द

ये सभी सिर्फ़ सियासत में उतर जाने तक

शादी लड्डू ही नहीं एक बला है इसका

होता अहसास नहीं पंख कतर जाने तक

यार बरसात किसे अच्छी नहीं लगती मगर

खेत खलियान नदी ताल के भर जाने तक

हर तरफ़ शह्र में ख़ूँख़ार दरिन्दे घूमें

बेटियाँ ख़ौफ़ज़दा लौट के घर जाने…

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Posted on August 4, 2020 at 6:11am — 10 Comments

ग़ज़ल -दौर वह यारो गया और उसके दीवाने गए

बह्र- 2122  2122  2122  212

मीडिया की फ़ौज लेकर रह्म कब खाने गए

झोपड़ी में सिर्फ़ वे दिल अपने बहलाने गए

रेडियो से ही हुआ करती थी सुब्ह-ओ-शाम जब

दौर वह यारो गया और उसके दीवाने गए

नीम पीपल छाँछ लस्सी बाजरे की रोटियाँ

ज़िन्दगी से गाँव की ये सारे अफ़साने गए

जोड़ते थे जो दिलों को अपनी माटी से यहाँ

फ़ाग चैता और कजरी के वे सब गाने गए

पूछने पर लाल के माँ ने कहा पापा तेरे

ओढ़कर प्यारा तिरंगा चाँद को लाने…

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Posted on July 30, 2020 at 11:16am — 14 Comments

ग़ज़ल- हाँ में हाँ लोग जो होते हैं मिलने वाले

2122  1122  1122  22

हाँ में हाँ लोग जो होते हैं मिलाने वाले

हैं पस-ए पुश्त मियाँ ज़ुल्म वो ढाने वाले

अपने चहरे के उन्हें दाग़ नज़र आ जाते

देखते ख़ुद को जो आईना दिखाने वाले

पाप धुलते नहीं इस तरह बता दो उनको

हैं जो कुछ लोग ये गंगा में नहाने वाले

हो क़फ़स लाख वो फ़ौलाद का लेकिन यारो

रोक सकता नहीं उनको जो हैं जाने वाले

आपसे वादा निभाएँगे भला वो कैसे

वादा ख़ुद का न कभी ख़ुद से निभाने वाले

आप…

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Posted on July 18, 2020 at 4:30pm — 14 Comments

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At 7:03pm on April 11, 2019, Vivek Pandey Dwij said…
आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी आभार आप को इस उत्साह वर्धन के लिए।
At 7:39pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी ग़ज़ल "हाथ से सारे फिसल गए" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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