For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Surkhab Bashar
Share
 

Surkhab Bashar's Page

Latest Activity

Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"जनाब क़मर जौनपुरी साहब बेहतरीन ग़ज़ल के लिये दाद के साथ मुबारक बाद कुबूल करें "
Mar 23
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"आ.  सुरेंद्र नाथ सिहं "बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल कही आपने हर शेर काबिले  दाद है मुबारक बाद कुबूल करें"
Mar 23
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"मोहतरमा  राजेश कुमारी साहिब  दिल से शुक्रिया आपका "
Mar 23
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"जनाब आसिफ़ जेदी साहब बहुत बहुत शुक्रिया आपने हिम्मत अफ्ज़ाई की"
Mar 23
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"जनाब नादिर ख़ान साहब ग़ज़ल को पसंद फरमाकर मुझे होसला बख्शा  मैं आपका बहुत शुक्रगुज़ार हूं"
Mar 23
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"जनाब दस्दीक़ अहमद साहब इतनी मुशकिल ज़मीन में आपने इतने सारे  अशआर कहौ हैं आपने  मुबारक बाद"
Mar 22
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"जनाब नादिर खान साहब बेहतरीन ग़ज़ल के लिये मुबारक बाद"
Mar 22
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"जनाब तनवीर साहब,  तरह ग़ज़ल पे बेहतरीन अशआर कहे, है  दिल से, मुबारक बाद "
Mar 22
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"जनाब आसिफ़ ज़ेदी साहिब  उम्दा ग़ज़ल के लिये मुबारक पेश करता हुं कुबूल करें"
Mar 22
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"मोहतरमा  राजेश कुमारी साहिबा  आदाब, उम्दा  ग़ज़ल के  लिए  शेर दर शेर मुबारक बाद कुबूल क"
Mar 22
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"जनाब  अनीस शेख़ साहब आदाब सुख़न नवाजी के लिये ममनून हूं "
Mar 22
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"मोहतरम समर कबीर साहिब  आदाब  सुख़न नवाज़ी का बेहद शुक्रिया"
Mar 22
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"आ.  'सुरेन्द्र  नाथ सिंह  ' जी  आदाब ग़ज़ल को पसंद करने के लिये  दिल से शुक्रिया आपका आपने होसला अफ्ज़ाई की"
Mar 22
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"मोहतरम जनाब समर कबीर साहब  आदब  बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारक बाद कुबूल कीजिये "
Mar 22
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"ग़ज़ल आओ इस देश को मिलजुल के गुलिस्ताँ कर दें इसके उजड़े हुए शहरों में चराग़ाँ कर दें हम वतन के हैं वो जाँबाज़ सिपाही यारो वक़्त आ जाए तो ये जान भी क़ुरबां कर दें अपनी मिहनत के उजालों को बदन पर मल कर ऐसे चमकें कि सितारों को पशेमाँ कर दें पीट…"
Mar 22
Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जी बहुत बहुत शुक्रिया  जनाब नादिर ख़ान साहब "
Feb 23

Profile Information

Gender
Male
City State
Ujjain
Native Place
Ujjain
Profession
Poet

Surkhab Bashar's Blog

ग़ज़ल: फिर ज़िंदगी से अपनी पहचान हो न जाए

फिर ज़िंदगी से अपनी पहचान हो न जाए

साँसों का आना जाना आसान हो न जाए



अपनी शनावरी पे इतरा न ऐ शनावर

शोहरत का ये समुंदर दालान हो न जाए



इस बार भी मैं दफ़्तर ताख़ीर से गया तो

डर है कि नौकरी का नुक़सान हो न जाए



मज़लूम पे सितम के तुम ती मत चलाओ

अशकों से रेज़ा रेज़ा चट्टान हो न जाए



अपना समझ के जिस की देहलीज़ चढ़ रहा हूँ

यारों कहीं वो हम से अंजान हो न जाए



"सुरख़ाब"उड़ न जाएें यादों के ये कबूतर

दिल का…

Continue

Posted on December 12, 2018 at 11:00am — 1 Comment

Comment Wall (2 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 11:47am on December 25, 2018, Samar kabeer said…

बहुत बहुत शुक्रिया,सुरख़ाब बशर साहिब ।

At 6:45am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

ताप संताप दोहे :

ताप संताप दोहे :सूरज अपने ताप का, देख जरा संताप। हरियाली को दे दिया, जैसे तूने शाप।।भानु रशिम कर…See More
10 hours ago
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

2122 2122 212हुस्न का बेहतर नज़ारा चाहिए ।कुछ तो जीने का सहारा चाहिए ।।हो मुहब्बत का यहां पर श्री…See More
18 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post किस तरह होते फ़ना प्यार निभाने के लिए (४६ )
"vijay nikore साहेब बहुत बहुत शुक्रिया हौसला आफजाई के लिए | "
yesterday
Pradeep Devisharan Bhatt posted a blog post

-ट्विंकल ट्विंकल लिट्ल स्टार-

ट्विंकल ट्विंकल लिट्ल स्टारबंद करो ये अत्याचारनज़रो में वहशत है पसरीजीना बच्चों का दुश्वारशहर नया हर…See More
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

औरत.....

औरत.....जाने कितने चेहरे रखती है मुस्कराहट थक गई है दर्द के पैबंद सीते सीते ज़िंदगी हर रात कोई…See More
yesterday
Pradeep Devisharan Bhatt commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"बहुत खूब अच्छि गज़ल  हुई ।बधाई"
yesterday
Pradeep Devisharan Bhatt shared Naveen Mani Tripathi's blog post on Facebook
yesterday
vijay nikore commented on बृजेश नीरज's blog post धारा
"रचना अच्छी लगी, बधाई बृजेश जी"
yesterday
vijay nikore commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post किस तरह होते फ़ना प्यार निभाने के लिए (४६ )
"गज़ल अच्छी लिखी है। बधाई गिरधारी सिंह जी"
yesterday
vijay nikore commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"हरि ओम जी, छ्न्द अच्छे लगे। बधाई।"
yesterday
Sonia is now a member of Open Books Online
yesterday
vijay nikore posted a blog post

सूर्यास्त के बाद

निर्जन समुद्र तटरहस्यमय सागर सपाट अपारउछल-उछलकर मानो कोई भेद खोलतीबार-बार टूट-टूट पड़ती लहरें…See More
yesterday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service