For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Sushil Sarna
Share

Sushil Sarna's Friends

  • Om Parkash Sharma
  • अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी
  • Dr. Geeta Chaudhary
  • Pratibha Pandey
  • नाथ सोनांचली
  • Mohammed Arif
  • रामबली गुप्ता
  • Arpana Sharma
  • सतविन्द्र कुमार राणा
  • S.S Dipu
  • Samar kabeer
  • Hari Prakash Dubey
  • Ganga Dhar Sharma 'Hindustan'
  • harivallabh sharma
  • narendrasinh chauhan
 

Sushil Sarna's Page

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा मुक्तक .....
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुन्दर मुक्तक हुए हैं । हार्दिक बधाई।"
3 minutes ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा मुक्तक .....

दोहा  मुक्तक ........कड़- कड़ कड़के दामिनी, घन बरसे घनघोर ।    उत्पातों  के  दौर  में, साँस का  मचाए  शोर  ।        रात   बढ़ी  बढ़ते   गए,  आलिंगन   के   बंध -           पागल दिल को भा गया , दिल का प्यारा चोर ।                       * * * * * एक दिवानी को हुआ, दीवाने  से  प्यार ।     पलकों में सजने लगा, सपनों का संसार ।           गुपचुप-गुपचुप फिर हुए, नैनों में संकेत  -                 चरम पलों में हो  गए, शर्मीले  अभिसार ।सुशील सरना / 4-7-22मौलिक एवं अप्रकाशित See More
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post पाँच दोहे मेघों पर. . . . .
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार आदरणीय"
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post पाँच दोहे मेघों पर. . . . .
"आदरणीय अमीरुद्दीन साहिब, आदाब - सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभारी है सर"
Friday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post पाँच दोहे मेघों पर. . . . .
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुन्दर दोहावली हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jun 28
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Sushil Sarna's blog post पाँच दोहे मेघों पर. . . . .
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, वर्षा ऋतु के आगमन पर सुंदर दोहावली हुई है, हार्दिक बधाई स्वीकार करें। "
Jun 28

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . .
"वाह वाह ! आदरणीय सुशील सरनाजी, छंदों के सांगोपांग रूप तो हमने बहुरे देखे-सुने हैं. लेकिन इस दोहा-पंचक ने तो सचमुच ही चकित कर दिया है जो आपकी दोहा पर लगातार सशक्त होती पकड़ का परिचायक है.  हार्दिक बधाई.. बार-बार बधाई.. "
Jun 27
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . .
"//परम आदरणीय चेतन प्रकाश जी मेरी अक्षम्य त्रुटियों को नजरअंदाज करते हुए जिस विशालता का परिचय दिया है उसके लिए हृदय की असीम गहराईयों से हार्दिक आभार । सुझाव पर थोड़ा और मार्गदर्शन करेंगे तो बन्दा आभारी होगा।// आदरणीय सुशील सरना जी, आप की उक्त टिप्पणी…"
Jun 27
Sushil Sarna posted a blog post

पाँच दोहे मेघों पर. . . . .

पाँच दोहे मेघों पर . . . . .अम्बर में विचरण करे, मेघों का विस्तार  । सावन की देने लगी, दस्तक अब बौछार ।।मेघों का मेला करे, अम्बर का शृंगार । आज दिवाकर लग रहा, थोड़ा सा लाचार ।।थोड़ी सी है धूप तो, थोड़ी सी बरसात । अम्बर में  आदित्य को, बादल देते मात ।।बादल नभ को चूमते, पहन श्वेत परिधान । हंसों की ये टोलियाँ, आसमान की शान ।।नील वसन पर कर दिया, मेघों ने शृंगार । धरती पर चलने लगी, शीतल मस्त बयार ।।सुशील सरना / 24-6-22मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Jun 27
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . .
"परम आदरणीय चेतन प्रकाश जी मेरी अक्षम्य त्रुटियों को नजरअंदाज करते हुए जिस विशालता का परिचय दिया है उसके लिए हृदय की असीम गहराईयों से हार्दिक आभार । सुझाव पर थोड़ा और मार्गदर्शन करेंगे तो बन्दा आभारी होगा ।"
Jun 27
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . .
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, शानदार अंदाज़ में 'दोहा पंचक' के रूप में प्रस्तुत की गयी आपकी यह रचना बेशक कोई नई विधा नहीं है जैसा कि आपने इसका कोई दावा भी नहीं किया है, लेकिन फिर भी आपकी पाँच दोहों की यह रचना जिस रोचक ढंग से सृजित की गयी है…"
Jun 26
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post पाँच दोहे मेघों पर. . . . .
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, सादर प्रणाम - सृजन पर आपकी आत्मीय सराहना और सुन्दर सुझाव का दिल से आभार । ऐसे संशोधन निश्चित रूप से सृजन के भावों को समृद्ध करते हैं । दिल से आभार आदरणीय जी ।"
Jun 25
Chetan Prakash commented on Sushil Sarna's blog post पाँच दोहे मेघों पर. . . . .
"नमस्कार,  आदरणीय सुशील सरना साहब,  सुन्दर  मेघ- दोहावली  रची, आपने  ! आ. यदि आप  अन्यथा  न ले,  'संसार' होते विचरण का रूप सहज आत्मसात  नहीं होता, सो, कदाचित  विस्तार अपेक्षाकृत …"
Jun 25
Sushil Sarna posted a blog post

पाँच दोहे मेघों पर. . . . .

पाँच दोहे मेघों पर . . . . .अम्बर में विचरण करे, मेघों का विस्तार  । सावन की देने लगी, दस्तक अब बौछार ।।मेघों का मेला करे, अम्बर का शृंगार । आज दिवाकर लग रहा, थोड़ा सा लाचार ।।थोड़ी सी है धूप तो, थोड़ी सी बरसात । अम्बर में  आदित्य को, बादल देते मात ।।बादल नभ को चूमते, पहन श्वेत परिधान । हंसों की ये टोलियाँ, आसमान की शान ।।नील वसन पर कर दिया, मेघों ने शृंगार । धरती पर चलने लगी, शीतल मस्त बयार ।।सुशील सरना / 24-6-22मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Jun 25
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post पितृ दिवस पर कुछ क्षणिकाएँ. . .
"आदरणीय नाथ जी सृजन के भावों को मान और सुझाव का दिल से आभार"
Jun 23
Sushil Sarna commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- दर्द हरने लगते हैं
"वाह आदरणीया जी बहुत खूबसूरत सृजन है । हार्दिक बधाई आदरणीया जी"
Jun 23

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

Sushil Sarna's Photos

  • Add Photos
  • View All

Sushil Sarna's Blog

दोहा मुक्तक .....

दोहा  मुक्तक ........

कड़- कड़ कड़के दामिनी, घन बरसे घनघोर ।

   उत्पातों  के  दौर  में, साँस का  मचाए  शोर  ।

        रात   बढ़ी  बढ़ते   गए,  आलिंगन   के   बंध -

           पागल दिल को भा गया , दिल का प्यारा चोर ।

                       * * * * *

एक दिवानी को हुआ, दीवाने  से  प्यार ।

     पलकों में सजने लगा, सपनों का संसार ।

           गुपचुप-गुपचुप फिर हुए, नैनों में संकेत  -

                चरम पलों में हो  गए, शर्मीले  अभिसार…

Continue

Posted on July 4, 2022 at 9:38pm — 1 Comment

पाँच दोहे मेघों पर. . . . .

पाँच दोहे मेघों पर . . . . .

अम्बर में विचरण करे, मेघों का विस्तार  ।

सावन की देने लगी, दस्तक अब बौछार ।।

मेघों का मेला करे, अम्बर का शृंगार ।

आज दिवाकर लग रहा, थोड़ा सा लाचार ।।

थोड़ी सी है धूप तो, थोड़ी सी बरसात ।

अम्बर में  आदित्य को, बादल देते मात ।।

बादल नभ को चूमते, पहन श्वेत परिधान ।

हंसों की ये टोलियाँ, आसमान की शान ।।

नील वसन पर कर दिया, मेघों ने शृंगार ।

धरती पर चलने लगी, शीतल मस्त बयार…

Continue

Posted on June 24, 2022 at 2:30pm — 6 Comments

हंसगति छन्द. . . . .

हंसगति छन्द. . . .(11,9)

जले  शमा  के   साथ, रात   परवाने ।
करें   इश्क  की  बात, शमा   दीवाने ।
दिल को दिल दिन-रात, सुनाता बातें ।
आती रह -रह याद, तन को  बरसातें ।
                  * * * *
बिखरी-बिखरी ज़ुल्फ,कहे अफसाने ।
तन्हा - तन्हा   आज,  लगे   मैख़ाने  ।
पैमानों   से   रिन्द ,  करें   मनमानी  ।
अब  लगती  है  जीस्त , यहाँ बेमानी ।

मौलिक एवं अप्रकाशित 

सुशील सरना / 23-6-22

Posted on June 23, 2022 at 1:14pm

दोहा पंचक. . .

दोहा पंचक. . . . .

अद्भुत है ये जिंदगी, अद्भुत इसकी प्यास ।

श्वास-श्वास में आस का, रहता हरदम वास ।।

श्वास-श्वास में  आस का, रहता हरदम वास ।

इच्छाओं की वीचियाँ, दिल में करतीं रास ।।

इच्छाओं की वीचियाँ, दिल में करतीं रास ।

जीवन भर होती नहीं, पूर्ण जीव की आस ।।

जीवन भर होती नहीं, पूर्ण जीव की आस ।

अन्तकाल में जिन्दगी, होती बहुत  उदास ।।

अन्तकाल में जिन्दगी, होती बहुत उदास ।

अद्भुत है ये जिंदगी, अद्भुत…

Continue

Posted on June 22, 2022 at 6:12pm — 8 Comments

Comment Wall (35 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 9:12pm on August 13, 2021, Om Parkash Sharma said…

आदरणीय सुशील सरना जी ,

सादर अभिवादन , आपके नाम और सावन पर लिखे सभी दोहे मन मोह गए । दोनों कविताएं 'मौसम को' व प्रश्न गंभीर भावों को लिए हुए है। साधुवाद । 

At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा मुक्तक .....
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुन्दर मुक्तक हुए हैं । हार्दिक बधाई।"
3 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post भोर सुख की निर्धनों ने पर कहीं देखी नहीं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर'
"आ. भाई गुमनाम जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
14 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on gumnaam pithoragarhi's blog post गजल
"//सुनहरे की मात्रा गणना 212 ही होगी ॥ शायद ॥ 122 नहीं  । // सु+नह+रा = 1 2 2 .. यगणात्मक शब्द…"
16 hours ago
gumnaam pithoragarhi commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post भोर सुख की निर्धनों ने पर कहीं देखी नहीं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर'
"वाह अच्छा है मुसाफिर साहब ॥ वाह "
17 hours ago
gumnaam pithoragarhi commented on gumnaam pithoragarhi's blog post गजल
"धन्यवाद दोस्तो ..   आपके सलाह सुझाव का स्वागत है । सुनहरे की मात्रा गणना 212 ही होगी ॥…"
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on gumnaam pithoragarhi's blog post गजल
"आ. भाई गुमनाम जी , सादर अभिवादन। सुन्दर गजल हुई है। हार्दिक वधाई। हिन्दी में "वहम" बोले…"
19 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कालिख दिलों के साथ में ठूँसी दिमाग में - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"//कालिख दिलों के साथ में ठूँसी दिमाग में// यूँ पढ़े कालिख दिलों के साथ ही ठूँसी दिमाग में"
19 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा मुक्तक .....

दोहा  मुक्तक ........कड़- कड़ कड़के दामिनी, घन बरसे घनघोर ।    उत्पातों  के  दौर  में, साँस का …See More
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on gumnaam pithoragarhi's blog post गजल
"जनाब गुमनाम पिथौरागढ़ी जी आदाब, एक ग़ैर मानूस (अप्रचलित) बह्र पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (जबसे तुमने मिलना-जुलना छोड़ दिया)
"जनाब गुमनाम पिथौरागढ़ी जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और ज़र्रा नवाज़ी का तह-ए-दिल से शुक्रिया।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

भोर सुख की निर्धनों ने पर कहीं देखी नहीं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर'

२१२२/२१२२/२१२२/२१२*जब कोई दीवानगी  ही  आप ने पाली नहींजान लो ये जिन्दगी भी जिन्दगी सोची नहीं।।*पात…See More
yesterday

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service