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Sushil Sarna
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Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post दस्तक :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Wednesday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post बड़ी नज़ाकत से हमने .....
"जनाव सुशील सरना जी आदाब, सुंदर रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 24
Sushil Sarna posted a blog post

दस्तक :

दस्तक :वक़्त बुरा हो तो तो पैमानें भी मुकर जाते हैंमय हलक से न उतरे तोसैंकड़ों गम उभर आते हैंफ़िज़ूल है होश का फ़लसफ़ा समझाना हमको उनके दिए ज़ख्म ही हमें यहां तक ले आते हैं वो क्या जानें कितने बेरहम होते हैं यादों के खंज़र हर नफ़स उल्फ़त की ज़ख़्मी कर जाते हैं तिश्नगी बढ़ती गई उनको भुलाने के आरज़ू में क्या करें इन बेवफ़ा क़दमों का लाख रोका फिर भी ये उनके दर तक ले जाते हैं उनकी दहलीज़ पर अपनी उल्फ़त की दस्तक छोड़ आते हैंसुशील सरना मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Nov 21
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"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन । सुन्दर रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Nov 21
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post जीने से पहले ......
" आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी, सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया ।"
Nov 20
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अनजाने से .....
" आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी, सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया ।"
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Nov 20
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post अनजाने से .....
"khub sundar rachna sir "
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बड़ी नज़ाकत से हमने .....

बड़ी नज़ाकत से हमने .....बड़ी नज़ाकत से हमने यादों को दिल में पाला है अपने -अपने दर्दों को मुस्कराहटों में ढाला है मुद्दा ये नहीं कि चराग़ बेवफ़ाई का जलाया किसने सच तो ये है अश्क चश्म मेंदोनों ने संभाला है ये हाला है उल्फत की उल्फत का ये प्याला है पाक मोहब्बत का दोनों के दिल में पाक शिवाला है बड़ी नज़ाकत से हमने यादों को दिल में पाला हैसुशील सरना मौलिक एवं अपक्राशितSee More
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Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अनजाने से .....
""आदरणीय  Samar kabeer जी, सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का आभारी है"
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Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post जीने से पहले ......
""आदरणीय    narendrasinh chauhan जी, सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का आभारी है"
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Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post गुज़रे हुए मौसम, ,,,
""आदरणीय    narendrasinh chauhan जी, सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का आभारी है"
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narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post गुज़रे हुए मौसम, ,,,
"खूब सुंदर रचना सर"
Nov 9
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post जीने से पहले ......
"khub sundar rachna sir "
Nov 9

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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Sushil Sarna's Blog

दस्तक :

दस्तक :

वक़्त बुरा हो तो

तो पैमानें भी मुकर जाते हैं

मय हलक से न उतरे तो

सैंकड़ों गम

उभर आते हैं

फ़िज़ूल है

होश का फ़लसफ़ा

समझाना हमको

उनके दिए ज़ख्म ही

हमें यहां तक ले आते हैं

वो क्या जानें

कितने बेरहम होते हैं

यादों के खंज़र

हर नफ़स उल्फ़त की

ज़ख़्मी कर जाते हैं

तिश्नगी बढ़ती गई

उनको भुलाने के आरज़ू में

क्या करें

इन बेवफ़ा क़दमों का

लाख रोका

फिर भी

ये

उनके दर तक ले जाते हैं

उनकी…

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Posted on November 20, 2020 at 8:43pm — 1 Comment

बड़ी नज़ाकत से हमने .....

बड़ी नज़ाकत से हमने .....

बड़ी नज़ाकत से हमने
यादों को दिल में पाला है
अपने -अपने दर्दों को
मुस्कराहटों में ढाला है
मुद्दा ये नहीं कि
चराग़ बेवफ़ाई का
जलाया किसने
सच तो ये है अश्क चश्म में
दोनों ने संभाला है
ये हाला है उल्फत की
उल्फत का ये प्याला है
पाक मोहब्बत का दोनों के
दिल में पाक शिवाला है
बड़ी नज़ाकत से हमने
यादों को दिल में पाला है

सुशील सरना
मौलिक एवं अपक्राशित

Posted on November 18, 2020 at 6:07pm — 1 Comment

अनजाने से .....

अनजाने से .....

मैं

व्यस्त रही

अपने बिम्ब में

तुम्हारे बिम्ब को

तराशने में

तुम

व्यस्त रहे

स्वप्न बिम्बों में

अपना स्वप्न

तराशने में

हम

व्यस्त रहे

इक दूसरे में

इक दूसरे को

तलाशने में

वक्त उतरता रहा

धूप के सायों की तरह

मन की दीवारों से

हम के आवरण से निकल

मैं और तू

रह गए कहीं

अधूरी कहानी के

अपूर्ण से

अफ़साने…

Continue

Posted on November 4, 2020 at 7:30pm — 7 Comments

जीने से पहले ......

जीने से पहले ......

मिट गई

मेरी मोहब्बत

ख़्वाहिशों के पैरहन में ही

जीने से पहले

जाने क्या सूझी

इस दिल को

संग से मोहब्बत करने का

वो अज़ीम गुनाह कर बैठा

अपने ख़्वाबों को

अपने हाथों

खुद ही तबाह कर बैठा

टूट गए ज़िंदगी के जाम

स्याह रातों में

ज़िंदगी

जीने से पहले

डूबता ही गया

हसीन फ़रेबों के ज़लज़ले में

ये दिल का सफ़ीना

भूल गया

मौजों की तासीर

साहिल कब बनते हैं

सफ़ीनों की…

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Posted on November 2, 2020 at 6:05pm — 8 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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