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Sushil Sarna
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post आशा ......
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
May 3
Sushil Sarna posted a blog post

आशा ......

आशा .......बहुत कोशिश की मगर हार गई मैं उस अनुपस्थिति से जो हर लम्हा मेरे जहन में जीती है एक खौफ के लिबास में मुझे ठेंगा दिखाते हुएभोर से लेकर साँझ तक दिनभर की व्यस्ततम गतिविधियों के बीच हमेशा झकझोरती है किसी ग़ैर की मौजूदगी मेरे अंतःस्थल कोउस की अनुपस्थिति के लिएनिराशा की स्वर वीचियों के बीच कहाँ लुप्त होते हैं आशा को प्रज्वलित करते अनुपस्थिति के स्वर थकान की पराकाष्ठा पर जब बदन निढाल होकर नींद से बतियाता है किताब पढ़ते - पढ़ते खुली रह जाती है तब अनुपस्थिति की दहलीज पर आशा मन्द - मन्द…See More
May 2
Sushil Sarna posted a blog post

पाकीज़गी .......

पाकीज़गी ......मैं जिस्म से रूह तक तुम्हारी हूँ मेरी नींदें तुम्हारी हैं मेरे ख़्वाब तुम्हारे हैं मेरी आस भी तुम हो मेरी प्यास भी तुम हो मेरी साँसों का विश्वास भी तुम हो मेरे प्राणों का मधुमास भी तुम हो मगर ख़याल रहे मेरे जिस्म को दिखावटी पर्दों से नफ़रत है मेरे पास आना तो ज़माने के बेबस लिबास को ज़माने में ही छोड़ आना क्योंकि मेरे जिस्म को पाकीज़गी पसंद हैसुशील सरनामौलिक एवं अप्रकाशित See More
Apr 29
Sushil Sarna commented on vijay nikore's blog post यह रास्ते ... यह मोड़
"आदरणीय विजय निकोर जी वाह गहन भावों की सहज अभिव्यक्ति । हार्दिक बधाई सर"
Apr 27
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कहानी.........
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार ।"
Apr 27
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post काँटा
"आदरणीय Aazi Tamam ji सृजन आपकी स्नेहिल प्रशंसा का दिल से आभारी है सर"
Apr 27
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post काँटा
"आदरणीय श्री लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभारी है सर ।"
Apr 27
Aazi Tamaam commented on Sushil Sarna's blog post काँटा
"सुंदरता से कांटे की अहमियत का वर्णन करती रचना अच्छी लगी सादर प्रणाम आ सरना जी"
Apr 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post काँटा
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन । अच्छी प्रस्तुति हुई है। हार्दिक बधाई।"
Apr 26
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post कहानी.........
"आ. भाई सुशील जी, सुन्दर रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
Apr 25
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post मन पर दोहे ...........
"सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी ।बहुत सुंदर सुझाव । हार्दिक आभार सर । संशोधन बनता है सर ।"
Apr 20
Sushil Sarna commented on Usha Awasthi's blog post कुछ उक्तियाँ
"वाह भावपूर्ण प्रस्तुति आदरणीया ऊषा जी । हार्दिक बधाई"
Apr 20
Sushil Sarna posted a blog post

काँटा

मैं काँटा हूँजाने कितने काँटे चुभा दिये लोगों नेमेरे बदन में अपने शूल शब्दों केजमाने ने देखी तो सिर्फमुझसे मिलने वाली वेदना को देखामेरी तीक्ष्ण नोक को देखामेरे से वितृष्णा कीअपशब्दों के तीक्ष्ण शरों से मेरे अन्तस कोक्षत -विक्षित कियामगर मुझसे तो अधिक तीक्ष्ण काँटेलोग अपने दिलों मेंसंजो कर बैठे हैंकाँटे नफरत केस्वार्थ केविनाश केमगर छुपा लेते हैं अपनी मंशा कोकुटिल मुस्कान के पीछेमैंपुष्प की रक्षा करता हूँमैं चुभता हूँ तोपथ की निर्ममता से सचेत करता हूँमेरी चुभनअसावधानी का पूर्व संकेत होता हैइन…See More
Apr 20
बसंत कुमार शर्मा commented on Sushil Sarna's blog post मन पर दोहे ...........
"आदरणीय सादर नमस्कार, उत्तम दोहे हुए हैं आपके, बधाई  एक दोहे में लय भंग हो रही है, यदि उचित लगे तो यों कर सकते हैं  केसे मन का हो भला , बुझे न मन की प्यास ।4।"
Apr 20
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post गरीबी ........
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार"
Apr 19
Sushil Sarna posted a blog post

कहानी.........

कहानी ..........पढ़ सको तो पढ़कर देखो जिन्दगी की हर परत कोई न कोई कहानी हैकल्पना की बैसाखियों पर यथार्थ की हवेलियों में शब्दों की खोलियों में दिल के गलियारों में टहलती हुई कोई न कोई कहानी हैपत्थरों के बिछौनों पर लाल बत्ती के चौराहों पर बसों पर लटकी हुई रोटी के लिए भटकी हुई आँखों के बिस्तर पर बे-आवाज कोई न कोई कहानी हैसचपढ़ सको तो पढ़कर देखो हर बीता पल हर छूटा मोड़ आदि से अन्त तक इन्सान सिर्फ़ कहानी ही कहानी हैसुशील सरना मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Apr 18

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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Sushil Sarna's Blog

आशा ......



आशा .......

बहुत कोशिश की

मगर हार गई मैं

उस अनुपस्थिति से

जो हर लम्हा मेरे जहन में जीती है

एक खौफ के लिबास में

मुझे ठेंगा दिखाते हुए

भोर से लेकर साँझ तक

दिनभर की व्यस्ततम गतिविधियों के बीच

हमेशा झकझोरती है

किसी ग़ैर की मौजूदगी

मेरे अंतःस्थल को

उस की अनुपस्थिति के लिए

निराशा की स्वर वीचियों के बीच कहाँ लुप्त होते हैं

आशा को प्रज्वलित करते अनुपस्थिति के स्वर

थकान की पराकाष्ठा पर

जब बदन निढाल होकर…

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Posted on April 30, 2021 at 4:15pm — 1 Comment

पाकीज़गी .......

पाकीज़गी ......

मैं

जिस्म से रूह तक

तुम्हारी हूँ

मेरी नींदें तुम्हारी हैं

मेरे ख़्वाब तुम्हारे हैं

मेरी आस भी तुम हो

मेरी प्यास भी तुम हो

मेरी साँसों का विश्वास भी तुम हो

मेरे प्राणों का मधुमास भी तुम हो

मगर ख़याल रहे

मेरे जिस्म को

दिखावटी पर्दों से नफ़रत है

मेरे पास आना तो

ज़माने के बेबस लिबास को

ज़माने में ही छोड़ आना

क्योंकि

मेरे जिस्म को

पाकीज़गी पसंद है

सुशील सरना

मौलिक एवं…

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Posted on April 28, 2021 at 12:57pm

काँटा

मैं काँटा हूँ
जाने कितने काँटे चुभा दिये लोगों ने
मेरे बदन में अपने शूल शब्दों के
जमाने ने देखी तो सिर्फ
मुझसे मिलने वाली वेदना को देखा
मेरी तीक्ष्ण नोक को देखा…
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Posted on April 19, 2021 at 8:30pm — 4 Comments

कहानी.........

कहानी ..........

पढ़ सको तो पढ़कर देखो

जिन्दगी की हर परत

कोई न कोई कहानी है

कल्पना की बैसाखियों पर

यथार्थ की हवेलियों में

शब्दों की खोलियों में

दिल के गलियारों में

टहलती हुई

कोई न कोई कहानी है

पत्थरों के बिछौनों पर

लाल बत्ती के चौराहों पर

बसों पर लटकी हुई

रोटी के लिए भटकी हुई

आँखों के बिस्तर पर बे-आवाज

कोई न कोई कहानी है

सच

पढ़ सको…

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Posted on April 16, 2021 at 5:09pm — 2 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on विनय कुमार's blog post हम क्यों जीते हैं--कविता
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"वाह वाह आदरणीय लक्ष्मण धामी जी । मात्र दिवस पर मां को समर्पित बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही आप ने ।…"
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