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Sushil Sarna
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Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .

दोहा पंचक. . . .साथ चलेंगी नेकियाँ, छूटेगा जब हाथ । बन्दे तेरे कर्म बस , होंगे   तेरे  साथ ।।मिथ्या इस  संसार में,  अर्थहीन सम्बंध। देह घरोंदा जीव का, साँसों का अनुबंध ।।रह जाएगी जगत में, कर्मों की बस गंध । इस जग में है जिंदगी, दो पल का अनुबंध ।।आभासी संसार के,  आभासी संबंध । मिट जाता जब सब यहाँ, रहती कर्म सुगंध ।।जब तक साँसें देह में, चलें देह सम्बंध । शेष रहे संसार में, जीव कर्म  की  गंध ।।सुशील सरना / 3-2-23मौलिक एवं अप्रकाशित See More
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .
"जी सृजन के भावों को मान देने और त्रुटि इंगित करने का दिल से आभार । सहमत एवं संशोधित"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। अच्छे दोहे हुए है। हार्दिक बधाई। लेकिन यह दोहा पंक्ति में मात्राएं अधिक हो रही हैं - "बन्दे तेरे कर्म बस , चलेंगे  तेरे  साथ" इसे यूँ कर सकते हैं - "बन्दे तेरे कर्म ही , जायेंगे बस साथ""
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .

दोहा पंचक. . . .साथ चलेंगी नेकियाँ, छूटेगा जब हाथ । बन्दे तेरे कर्म बस , होंगे   तेरे  साथ ।।मिथ्या इस  संसार में,  अर्थहीन सम्बंध। देह घरोंदा जीव का, साँसों का अनुबंध ।।रह जाएगी जगत में, कर्मों की बस गंध । इस जग में है जिंदगी, दो पल का अनुबंध ।।आभासी संसार के,  आभासी संबंध । मिट जाता जब सब यहाँ, रहती कर्म सुगंध ।।जब तक साँसें देह में, चलें देह सम्बंध । शेष रहे संसार में, जीव कर्म  की  गंध ।।सुशील सरना / 3-2-23मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा मुक्तक .....
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी"
Friday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा मुक्तक .....
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुन्दर मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा मुक्तक .....

दोहा मुक्तक. . . .दर्द   भरी   हैं   लोरियाँ, भूखे    बीते    रैन।दृगजल  से  रहते  भरे, निर्धन  के  दो  नैन ।हुआ कटोरा भीख का, सिक्कों का मुहताज -दूर तलक मिलता नहीं,अब निर्धन को  चैन ।                     *****आँसू  शोभित  गाल  का, कौन यहाँ हमदर्द ।सूखे  होठों  पर  जमी , निर्धनता  की   गर्द ।पैर पेट  से  मिल  गए, थर - थर  काँपे  देह -जीण-क्षीण सा आवरण, लगे पवन भी सर्द ।सुशील सरना / 22-1-23मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Thursday
Sushil Sarna commented on Samar kabeer's blog post तरही ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर जी आदाब, क्या बहतरीन अंदाज़ है, इस शानदार ग़ज़ल के लिए दिल से मुबारक कबूल करें सर ।"
Jan 10
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा ग़ज़ल -चाय

दोहा ग़ज़ल- चायप्याली से हो चाय की ,जाड़े  का  सत्कार ।फिर चुस्की से नेह का, बढ़े  प्रणय  संसार ।नैन मिले  जब नैन से, स्वरित  हुआ  संदेश,किया अधर अभिसार ने,जाड़े का  शृंगार  ।रैन अलावों  में हुए , क्षीण  सभी  अनुबंध  ,अन्धकार  की   कैद  में, हार  गए   इंकार ।बढ़ी शीत होने लगा , मन में मिलन  प्रभात,दम  तोड़ा  इंकार  ने, जीत  गए   स्वीकार ।मौन चरम मुखरित हुए, चली  प्रेम की नाव ,वाह्य  अगन  शीतल  हुई, जले  प्रेम  अंगार।सुशील सरना / मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Jan 4
Sushil Sarna posted a blog post

भिखारी छंद

भिखारी छंद - 24 मात्रिक - 12 पर यति पदांत-गा लाजब -जब सर्दी आती ,कब वृद्धों को भाती । गिरे  आँख  से पानी ,खाँसी  बहुत  सताती । रोटी  गिर -गिर  जाती ,चाल संभल न पाती । लड़ते-लड़ते  आख़िर ,काया चुप  हो  जाती ।                          * * *      ठहर जरा दीवानी , तेरी  उम्र  सयानी ।      आशिक़ नज़रें घूरें, तेरी मस्त  जवानी ।      अक्सर मीठे धोखे ,इन  राहों  पर होते ।       पड़ न जाए महंगी , थोड़ी सी नादानी ।            सुशील सरना / 25-12-22                मौलिक एवं अप्रकाशित See More
Dec 31, 2022
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post भिखारी छंद
"आदरणीय समर कबीर जी आदाब, सृजन आपकी स्नेहिल प्रशंसा और सुझाव का दिल से आभारी है सर । 'चाल संभल न पाती '12 मात्रा शेष सहमत एवं संशोधित"
Dec 31, 2022
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post भिखारी छंद
"आदरणीय बृजेश जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय"
Dec 31, 2022
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post भिखारी छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार"
Dec 31, 2022
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post भिखारी छंद
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, छंदों का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'चाल संभल न पाती'--11 मात्रा? 'आशिक नजरें घूरे, तेरी मस्त  जवानी' इस पंक्ति में 'घूरे' को "घूरें" कर लें । 'पड़ न जाए…"
Dec 30, 2022
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post भिखारी छंद
"सुन्दर सरस छंद के लिए बधाई आदरणीय ..."
Dec 28, 2022
Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post गीत-८ (लक्ष्मण धामी "मुसाफिर")
"वाहहहहहह आदरणीय लक्ष्मण धामी जी अनुपम सृजन के लिए हार्दिक बधाई सर"
Dec 27, 2022

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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दोहा पंचक. . . . .

दोहा पंचक. . . .

साथ चलेंगी नेकियाँ, छूटेगा जब हाथ ।

बन्दे तेरे कर्म बस , होंगे   तेरे  साथ ।।

मिथ्या इस  संसार में,  अर्थहीन सम्बंध।

देह घरोंदा जीव का, साँसों का अनुबंध ।।

रह जाएगी जगत में, कर्मों की बस गंध ।

इस जग में है जिंदगी, दो पल का अनुबंध ।।

आभासी संसार के,  आभासी संबंध ।

मिट जाता जब सब यहाँ, रहती कर्म सुगंध ।।

जब तक साँसें देह में, चलें देह सम्बंध ।

शेष रहे संसार में, जीव कर्म  की …

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Posted on February 3, 2023 at 2:00pm — 2 Comments

दोहा मुक्तक .....

दोहा मुक्तक. . . .

दर्द   भरी   हैं   लोरियाँ, भूखे    बीते    रैन।

दृगजल  से  रहते  भरे, निर्धन  के  दो  नैन ।

हुआ कटोरा भीख का, सिक्कों का मुहताज -

दूर तलक मिलता नहीं,अब निर्धन को  चैन ।

                     *****

आँसू  शोभित  गाल  का, कौन यहाँ हमदर्द ।

सूखे  होठों  पर  जमी , निर्धनता  की   गर्द ।

पैर पेट  से  मिल  गए, थर - थर  काँपे  देह -

जीण-क्षीण सा आवरण, लगे पवन भी सर्द ।

सुशील सरना…

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Posted on January 30, 2023 at 3:37pm — 2 Comments

दोहा ग़ज़ल -चाय

दोहा ग़ज़ल- चाय

प्याली से हो चाय की ,जाड़े  का  सत्कार ।

फिर चुस्की से नेह का, बढ़े  प्रणय  संसार ।

नैन मिले  जब नैन से, स्वरित  हुआ  संदेश,

किया अधर अभिसार ने,जाड़े का  शृंगार  ।

रैन अलावों  में हुए , क्षीण  सभी  अनुबंध  ,

अन्धकार  की   कैद  में, हार  गए   इंकार ।

बढ़ी शीत होने लगा , मन में मिलन  प्रभात,

दम  तोड़ा  इंकार  ने, जीत  गए   स्वीकार ।

मौन चरम मुखरित हुए, चली  प्रेम की नाव ,

वाह्य  अगन …

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Posted on January 4, 2023 at 3:45pm

भिखारी छंद

भिखारी छंद - 24 मात्रिक - 12 पर यति

पदांत-गा ला

जब -जब सर्दी आती ,कब वृद्धों को भाती ।

गिरे  आँख  से पानी ,खाँसी  बहुत  सताती ।

रोटी  गिर -गिर  जाती ,चाल संभल न पाती ।

लड़ते-लड़ते  आख़िर ,काया चुप  हो  जाती ।

                         * * *

     ठहर जरा दीवानी , तेरी  उम्र  सयानी ।

     आशिक़ नज़रें घूरें, तेरी मस्त  जवानी ।

     अक्सर मीठे धोखे ,इन  राहों  पर होते ।

      पड़ न जाए महंगी , थोड़ी सी नादानी ।

            सुशील सरना /…

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Posted on December 25, 2022 at 1:30pm — 8 Comments

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At 9:12pm on August 13, 2021, Om Parkash Sharma said…

आदरणीय सुशील सरना जी ,

सादर अभिवादन , आपके नाम और सावन पर लिखे सभी दोहे मन मोह गए । दोनों कविताएं 'मौसम को' व प्रश्न गंभीर भावों को लिए हुए है। साधुवाद । 

At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
 
 
 

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