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Sushil Sarna
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Sushil Sarna posted a blog post

चले आओ .....

चले आओ .....जाने कौन बात कर गया चुपके से दे के दस्तक नैनों के वातायन परदौड़ पड़ापागल मन मिटाने अपने तृषित नैनों की दरस अभिलाषापवन के ठहाके मेरे पागलपन का द्योतक बन वातायन के पटों को बजाने लगेअंतस का एकांत अभिसार की अनल कोनिरंतरप्रज्वलित करने लगाकौन था जिसका छौना सा खयाल स्पर्शों की आंधी बन मेरी बेचैनियों को झिंझोड़ गयाकौन था जिसकी दस्तक ने मेरे अंतस को दूधिया सपनों से रंग दियाबुझ न जाएँ कहीं प्रतीक्षा की देहरी के जलते दिएचले आओ ओ ! मेरी स्मृति अश्व के सारथी चले आओ प्रतीक्षा के अभिशप्त पलों का…See More
yesterday
Sushil Sarna commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post प्रवृत्ति (लघुकथा )
"वाह आदरणीय डॉ गोपाल जी .... आपकी लेखनी के पैनेपन को सलाम ... इतने कम शब्दों में इतना सुंदर सन्देश ... नमन नमन नमन सर आपको। इस श्रेष्ठ प्रस्तुति के लिए दिल से बधाई।"
Wednesday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post संतान (क्षणिकाएं ) ....
"आदरणीय  Samar kabeer जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। "
Aug 17
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post तिरंगे तुझे सुनानी है ....
"आदरणीय  TEJ VEER SINGH  जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। "
Aug 17
TEJ VEER SINGH commented on Sushil Sarna's blog post तिरंगे तुझे सुनानी है ....
"हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना जी। सुंदर रचना।"
Aug 17
Sushil Sarna posted a blog post

तिरंगे तुझे सुनानी है ....

तिरंगे तुझे सुनानी है ....सन ४७ की रात में आज़ादी की बात में दर्दीले आघात में छुपी जो एक कहानी है तिरंगे तुझे सुनानी हैआज़ादी के शोलों में रंग बसन्ती चोलों में जय हिन्द के बोलों में छुपी जो एक कहानी है तिरंगे तुझे सुनानी हैराजगुरु सुखदेव भगत और मंगल पण्डे लक्ष्मी बाई गाँधी शेखर और शिवा की छुपी जो एक कहानी है तिरंगे तुझे सुनानी हैआज़ादी के दीवानों की सरहद के जवानों की वर्दी अफसानों की छुपी जो एक कहानी है तिरंगे तुझे सुनानी हैअटल के अटल इरादों की शास्त्री जी के वादों की शांति दूत की यादों की छुपी जो…See More
Aug 17
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post संतान (क्षणिकाएं ) ....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत अच्छी क्षणिकाएँ लिखीं आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 16
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post संतान (क्षणिकाएं ) ....
"आदरणीय  vijay nikore जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार। "
Aug 14
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अभिव्यक्ति का संत्रास ...
"आदरणीय  C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार। "
Aug 14
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post संतान (क्षणिकाएं ) ....
"बहुत ही खूबसूरत लिखी हैं....हार्दिक बधाई, आदरणीय सुशील जी।"
Aug 14
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on Sushil Sarna's blog post अभिव्यक्ति का संत्रास ...
"Sushil Sarna जी,सुन्दर रचना के लिए बधाई स्वीकार करें | "
Aug 14
Sushil Sarna replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"वाह बहुत बहुत हार्दिक बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ आदरणीया ऊषा जी । माँ शारदे की आप पर कृपा बनी रहे।"
Aug 13
Sushil Sarna replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"सम्पूर्ण ओ बी ओ मंच को ईद मुबारक।"
Aug 12
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post संतान (क्षणिकाएं ) ....
"आदरणीय  TEJ VEER SINGH जी सृजन पर आपकी मन मुदित करती प्रशंसा का दिल से आभार। "
Aug 12
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post अभिव्यक्ति का संत्रास ...
"आदरणीय  TEJ VEER SINGH जी सृजन पर आपकी मन मुदित करती प्रशंसा का दिल से आभार। "
Aug 12
TEJ VEER SINGH commented on Sushil Sarna's blog post अभिव्यक्ति का संत्रास ...
"हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना जी।लाज़वाब प्रस्तुति।"
Aug 10

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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Sushil Sarna's Blog

चले आओ .....

चले आओ .....

जाने कौन

बात कर गया

चुपके से

दे के दस्तक

नैनों के

वातायन पर

दौड़ पड़ा

पागल मन

मिटाने अपने

तृषित नैनों की

दरस अभिलाषा

पवन के ठहाके

मेरे पागलपन का

द्योतक बन

वातायन के पटों को

बजाने लगे

अंतस का एकांत

अभिसार की अनल को

निरंतर

प्रज्वलित करने लगा

कौन था

जिसका छौना सा खयाल

स्पर्शों की आंधी बन

मेरी बेचैनियों को…

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Posted on August 21, 2019 at 12:56pm

तिरंगे तुझे सुनानी है ....

तिरंगे तुझे सुनानी है ....

सन ४७ की रात में

आज़ादी की बात में

दर्दीले आघात में

छुपी जो एक कहानी है

तिरंगे तुझे सुनानी है

आज़ादी के शोलों में

रंग बसन्ती चोलों में

जय हिन्द के बोलों में

छुपी जो एक कहानी है

तिरंगे तुझे सुनानी है

राजगुरु सुखदेव भगत

और मंगल पण्डे लक्ष्मी बाई

गाँधी शेखर और शिवा की

छुपी जो एक कहानी है

तिरंगे तुझे सुनानी है

आज़ादी के दीवानों की

सरहद के जवानों की…

Continue

Posted on August 16, 2019 at 6:44pm — 2 Comments

संतान (क्षणिकाएं ) ....

संतान (क्षणिकाएं ) ....

बुझ गए बुजुर्ग
करते करते
रौशन
अपने ही चिराग

.....................

कर रही
वृक्षारोपण
वृद्धाश्रम में
वृद्धों की हाथों
उनकी ही संतान

.......................

हो गया
संस्कारों का
दाहसंस्कार
मौन बिलखता रहा
कहकहों में
संतान के


सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on August 8, 2019 at 12:57pm — 6 Comments

अभिव्यक्ति का संत्रास ...

अभिव्यक्ति का संत्रास ...

वरण किया
आँखों ने
यादों का ताज
पूनम की रात में

होती रही स्रावित
यादें
नैन तटों से
अविरल
तन्हा बरसात में

वीचियों पर
यादों की
तैरती रही
परछाईयाँ
देर तक
तन्हा अवसाद में

कर न सके व्यक्त
अधरों से
अन्तस् के
सिसकते जज्बातों की
अव्यक्त अभिव्यक्ति का संत्रास
शाब्दिक अनुवाद में

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on August 6, 2019 at 5:06pm — 10 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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