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Sushil Sarna
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Sushil Sarna posted a blog post

ख़्वाबों के रेशमी धागों से .......

ख़्वाबों के रेशमी धागों से .......कितना बेतरतीब सा लगता है आसमान का वो हिस्सा जो बुना था हमने मोहब्बत के अहसासों से ख़्वाबों के रेशमी धागों से ढक गया है आज वो कुछ अजीब से अजाबों से शफ़क़ के रंगबड़े दर्दीले नज़र आते हैं बेशर्म अब्र भी कुछ हठीले नज़र आते हैं उल्फ़त की रहगुज़र पर शज़र कुछ अफ़सुर्दा से नज़र आते हैं हाँ मगर गुजरी हुई रहगुज़र के किनारों पर लम्हों के मकानों में सुलगते अरमान हरे नज़र आते हैं क्यूँ जीते हैं ये लम्हे आख़िर रूहानी अफसानों के मुर्दा मकानों में फिर भी जीती है मोहब्बत इन्हीं लम्हों के…See More
5 hours ago
Sushil Sarna's blog post was featured

550 वीं रचना मंच को सादर समर्पित : सावनी दोहे :

गौर वर्ण पर नाचती, सावन की बौछार। श्वेत वसन से झाँकता, रूप अनूप अपार।। १ चम चम चमके दामिनी, मेघ मचाएं शोर। देख पिया को सामने, मन में नाचे मोर।।२ छल छल छलके नैन से, यादों की बरसात। सावन की हर बूँद दे, अंतस को आघात।।३ सावन में प्यारी लगे, साजन की मनुहार। बौछारों में हो गई, इन्कारों की हार।। ४ कोरे मन पर लिख गईं, बौछारें इतिहास। यौवन में आता सदा, सावन बनकर प्यास।।५ भावों की नावें चलीं, अंतस उपजा प्यार। बौछारों ने देह पर, रचा नृत्य संसार।। ६ कहीं गीत है प्रीत का, कहीं मधुर संगीत। सावन में…See More
5 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post 550 वीं रचना मंच को सादर समर्पित : सावनी दोहे :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, आपको 550 वीं रचना की हार्दिक बधाई । अच्छे दोहे रचे आपने,बधाई स्वीकार करें ।  पारिवारिक कारणों से कुछ समय ओबीओ पर हाज़िर नहीं हो सकूँगा,सिर्फ़ तरही मुशाइर: में हाज़िरी हो सकैगी, मेरी कहीं ज़रूरत महसूस हो तो फ़ोन पर सम्पर्क कर…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post बारिश पर चंद दोहे :
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन, सुन्दर दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई ।"
Saturday
Sushil Sarna posted blog posts
Friday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post आँखों के सावन में ......
"आ. भाई सुशील जी सादर अभिवादन। इस भावपूर्ण रचना पर हार्दिक बधाई ।"
Friday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post बारिश पर चंद दोहे :
"आदरणीय सुशील सरना जी, आदाब। सुन्दर दोहे हुए हैं, बधाई स्वीकार करें। सादर। "
Wednesday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post आँखों के सावन में ......
"आदरणीय सुशील सरना जी, आदाब। अहसास को लफ़्ज़ों में पिरो कर इस लाजवाब रचना के सृजन के लिए बहुत बहुत दाद और मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।"
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post पितृ दिवस पर चंद दोहे :
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन । सुन्दर दोहे हुए हैं हार्दिक बधाई ।"
Jun 30
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post आँखों के सावन में ......
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें l"
Jun 28
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sushil Sarna's blog post बारिश पर चंद दोहे :
"आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। अच्छे दोहे सृजित हुए हैं। बधाई स्वीकार कीजिये"
Jun 28
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sushil Sarna's blog post आँखों के सावन में ......
"आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। हर बार की तरह एक भावपूर्ण रचना पर बधाई स्वीकार कीजिये। सादर"
Jun 28
Sushil Sarna posted a blog post

आँखों के सावन में ......

आँखों के सावन में ......ओ ! निर्दयी घन जाने कितनी अक्षत स्मृतियों को अपनी बूँदों में समेटे तुम फिर चले आये मेरे हृदय के उपवन में शूल बनकरक्यों मेरे घावों की देहरी को अपनी बूँदों की आहटों सेमरहम लगाने का प्रयास करते होबहुत रिस्ते हैं ये जब -जब बरसात होती है बहुत याद आते हैं मेरे भीगे बदन से बातें करते उसके वो मौन स्पर्शवो छत की मुंडेर से उसकी आँखों का बरसात में भीगते हुए मेरा पीछा करनाउफ्फ कितना अंगार भरा था वो लम्हा जब उसने बरसात में मेरी जुल्फों से गिरी बूँद को अपनी हथेली में समेटा था मेरी…See More
Jun 28
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post बारिश पर चंद दोहे :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, बारिश पर अच्छे दोहे लिखे आपने, बधाई स्वीकार करें ।"
Jun 28
Sushil Sarna posted a blog post

बारिश पर चंद दोहे :

मेघ -मेघ में धड़कनें , बूँद- बूँद में प्यार।हरी चुनरिया से हुआ, धरती का शृंगार।।१ बरस रही है प्रीत की , मेघों से बरसात।साजन से सजनी कहे,अपने मन की बात।।२ सावन आया आ गई,जैसे मस्त बहार।मीठी -मीठी फिर हुई, नैनों में तकरार।। ३ कड़ कड़ कड़के दामिनी, घन बरसें घनघोर।कोयल कूके बाग़ में, मोर मचाए शोर।।४ बिन साजन सूनी लगे,सावन की बौछारतन पर बारिश यूँ लगे, जैसे हो अंगार।। ५ मन में जागे प्रीत का, सावन में उन्माद।मौन स्वरों में देह पर, स्पर्श करें संवाद।।६ गौर वर्ण जैसे गज़ल, अंग अंग ज्यूँ गीत।सावन में दहका बदन,…See More
Jun 27
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post प्रेम पर कुछ क्षणिकाएँ :
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब, सृजन के भावों को समृद्ध करती आपकी प्रेरक प्रतिक्रिया का दिल से शुक्रिया।"
Jun 26

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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ख़्वाबों के रेशमी धागों से .......

ख़्वाबों के रेशमी धागों से .......

कितना बेतरतीब सा लगता है

आसमान का वो हिस्सा

जो बुना था हमने

मोहब्बत के अहसासों से

ख़्वाबों के रेशमी धागों से

ढक गया है आज वो

कुछ अजीब से अजाबों से

शफ़क़ के रंग

बड़े दर्दीले नज़र आते हैं

बेशर्म अब्र भी

कुछ हठीले नज़र आते हैं

उल्फ़त की रहगुज़र पर शज़र

कुछ अफ़सुर्दा से नज़र आते हैं

हाँ मगर

गुजरी हुई रहगुज़र के किनारों पर

लम्हों के मकानों में

सुलगते अरमान

हरे नज़र आते…

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Posted on July 5, 2020 at 9:32pm

दोहा मुक्तक :

झूठा तन का आवरण, झूठी इसकी शान।
झूठी दम्भी श्वास का, सत्य सिर्फ़ अवसान।
किसने देखा जीव का, कैसा नभ में धाम -
इस जग में तो जीव का, अंतिम घट शमशान। (1)…

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Posted on July 1, 2020 at 9:30pm

550 वीं रचना मंच को सादर समर्पित : सावनी दोहे :

गौर वर्ण पर नाचती, सावन की बौछार।

श्वेत वसन से झाँकता, रूप अनूप अपार।। १



चम चम चमके दामिनी, मेघ मचाएं शोर।

देख पिया को सामने, मन में नाचे मोर।।२



छल छल छलके नैन से, यादों की बरसात।

सावन की हर बूँद दे, अंतस को आघात।।३



सावन में प्यारी लगे, साजन की मनुहार।

बौछारों में हो गई, इन्कारों की हार।। ४



कोरे मन पर लिख गईं, बौछारें इतिहास।

यौवन में आता सदा, सावन बनकर प्यास।।५



भावों की नावें चलीं, अंतस उपजा प्यार।

बौछारों…

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Posted on June 30, 2020 at 9:30pm — 1 Comment

आँखों के सावन में ......

आँखों के सावन में ......

ओ ! निर्दयी घन

जाने कितनी

अक्षत स्मृतियों को

अपनी बूँदों में समेटे

तुम फिर चले आये

मेरे हृदय के उपवन में

शूल बनकर

क्यों

मेरे घावों की देहरी को

अपनी बूँदों की आहटों से

मरहम लगाने का प्रयास करते हो

बहुत रिस्ते हैं

ये

जब -जब बरसात होती है

बहुत याद आते हैं

मेरे भीगे बदन से

बातें करते

उसके वो मौन स्पर्श

वो छत की मुंडेर से

उसकी आँखों का…

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Posted on June 27, 2020 at 8:42pm — 4 Comments

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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