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Sushil Sarna
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Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post मन पर दोहे ...........
"सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी ।बहुत सुंदर सुझाव । हार्दिक आभार सर । संशोधन बनता है सर ।"
yesterday
Sushil Sarna commented on Usha Awasthi's blog post कुछ उक्तियाँ
"वाह भावपूर्ण प्रस्तुति आदरणीया ऊषा जी । हार्दिक बधाई"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

काँटा

मैं काँटा हूँजाने कितने काँटे चुभा दिये लोगों नेमेरे बदन में अपने शूल शब्दों केजमाने ने देखी तो सिर्फमुझसे मिलने वाली वेदना को देखामेरी तीक्ष्ण नोक को देखामेरे से वितृष्णा कीअपशब्दों के तीक्ष्ण शरों से मेरे अन्तस कोक्षत -विक्षित कियामगर मुझसे तो अधिक तीक्ष्ण काँटेलोग अपने दिलों मेंसंजो कर बैठे हैंकाँटे नफरत केस्वार्थ केविनाश केमगर छुपा लेते हैं अपनी मंशा कोकुटिल मुस्कान के पीछेमैंपुष्प की रक्षा करता हूँमैं चुभता हूँ तोपथ की निर्ममता से सचेत करता हूँमेरी चुभनअसावधानी का पूर्व संकेत होता हैइन…See More
yesterday
बसंत कुमार शर्मा commented on Sushil Sarna's blog post मन पर दोहे ...........
"आदरणीय सादर नमस्कार, उत्तम दोहे हुए हैं आपके, बधाई  एक दोहे में लय भंग हो रही है, यदि उचित लगे तो यों कर सकते हैं  केसे मन का हो भला , बुझे न मन की प्यास ।4।"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post गरीबी ........
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार"
Monday
Sushil Sarna posted a blog post

कहानी.........

कहानी ..........पढ़ सको तो पढ़कर देखो जिन्दगी की हर परत कोई न कोई कहानी हैकल्पना की बैसाखियों पर यथार्थ की हवेलियों में शब्दों की खोलियों में दिल के गलियारों में टहलती हुई कोई न कोई कहानी हैपत्थरों के बिछौनों पर लाल बत्ती के चौराहों पर बसों पर लटकी हुई रोटी के लिए भटकी हुई आँखों के बिस्तर पर बे-आवाज कोई न कोई कहानी हैसचपढ़ सको तो पढ़कर देखो हर बीता पल हर छूटा मोड़ आदि से अन्त तक इन्सान सिर्फ़ कहानी ही कहानी हैसुशील सरना मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post गरीबी ........
"आ. भाई सुशील जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

मन पर दोहे ...........

मन पर दोहे ...........मन माने तो भोर है, मन माने तो शाम ।मन के सारे खेल हैं, मन के सब संग्राम । 1।हर मन को मिलता नहीं, मन वांछित परिणाम ।मन फल की चिन्ता करे, मन अशांति का धाम ।2।मन मन्दिर में राम है, मन मन्दिर में श्याम ।मन में गीता है बसी ,मन में मन का धाम ।3।मन भावों का दास है, मन में भोग-विलास ।कैसे मन का हो भला , मन में अतृप्त प्यास ।4।मन चंचल है जीव का, ये दौड़े हर ओर ।मन में तृप्ति कहीं नहीं , मन में गूँजे शोर ।5 ।सुशील सरनामौलिक व अप्रकाशित" See More
Apr 14
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post मन पर दोहे ...........
"आदरणीय अमीरुद्दीन साहिब, आदाब - - - सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभारी है ।"
Apr 13
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post मन पर दोहे ...........
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार । आप सही ✅ हैं सर । मैं अभी संशोधित कर पुनः प्रेषित करता हूँ ।हार्दिक आभार सर ।"
Apr 13
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post मन पर दोहे ...........
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, मन पर अच्छे दोहे हुए हैं, बधाई स्वीकार करें।  हालांकि मैं इस विधा का जानकार नहीं हूँ, पर मुझे दूसरे दोहे में लय बाधित लग रही है, हो सकता है मैं ग़लत हूँ। सादर। "
Apr 13
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post मन पर दोहे ...........
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवाद । मन के दोहे अच्छे हुए हैं । हार्दिक बधाई । पाँचवे दोहे की तुकांतता मेरे हिसाब से ठीक नहीं है । देखिएगा। सादर.."
Apr 13
Sushil Sarna posted a blog post

मन पर दोहे ...........

मन पर दोहे ...........मन माने तो भोर है, मन माने तो शाम ।मन के सारे खेल हैं, मन के सब संग्राम । 1।हर मन को मिलता नहीं, मन वांछित परिणाम ।मन फल की चिन्ता करे, मन अशांति का धाम ।2।मन मन्दिर में राम है, मन मन्दिर में श्याम ।मन में गीता है बसी ,मन में मन का धाम ।3।मन भावों का दास है, मन में भोग-विलास ।कैसे मन का हो भला , मन में अतृप्त प्यास ।4।मन चंचल है जीव का, ये दौड़े हर ओर ।मन में तृप्ति कहीं नहीं , मन में गूँजे शोर ।5 ।सुशील सरनामौलिक व अप्रकाशित" See More
Apr 13
Sushil Sarna commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post कोरोना को हराना है।
"वाह आदरणीय जी आज के संदर्भ में बेहतरीन प्रस्तुति । हार्दिक बधाई सर ।"
Apr 13
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post गरीबी ........
"आदरणीय  अमीरुद्दीन साहिब,  आदाब ---सृजन के भावों को मान देने का दिल से शुक्रिया । "
Apr 13
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post गरीबी ........
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, बहुत उम्दा नज़्म ख़ल्क़ हुई है। बहुत मुबारक हो। सादर।"
Apr 11

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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काँटा

मैं काँटा हूँ
जाने कितने काँटे चुभा दिये लोगों ने
मेरे बदन में अपने शूल शब्दों के
जमाने ने देखी तो सिर्फ
मुझसे मिलने वाली वेदना को देखा
मेरी तीक्ष्ण नोक को देखा…
Continue

Posted on April 19, 2021 at 8:30pm

कहानी.........

कहानी ..........

पढ़ सको तो पढ़कर देखो

जिन्दगी की हर परत

कोई न कोई कहानी है

कल्पना की बैसाखियों पर

यथार्थ की हवेलियों में

शब्दों की खोलियों में

दिल के गलियारों में

टहलती हुई

कोई न कोई कहानी है

पत्थरों के बिछौनों पर

लाल बत्ती के चौराहों पर

बसों पर लटकी हुई

रोटी के लिए भटकी हुई

आँखों के बिस्तर पर बे-आवाज

कोई न कोई कहानी है

सच

पढ़ सको…

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Posted on April 16, 2021 at 5:09pm

मन पर दोहे ...........

मन पर दोहे ...........

मन माने तो भोर है, मन माने तो शाम ।
मन के सारे खेल हैं, मन के सब संग्राम । 1।
हर मन को मिलता नहीं, मन वांछित परिणाम ।
मन फल की चिन्ता करे, मन अशांति का धाम ।2।…
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Posted on April 13, 2021 at 1:30pm — 6 Comments

गरीबी ........

गरीबी..........
कैसी होती है गरीबी
शायद
तिमिर के गहन आवरण को
भेदने में असफल होती
जुगनू की
क्षीण सी रोशनी…
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Posted on April 11, 2021 at 12:00pm — 4 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ( बेजान था मैं फिर भी तो मारा गया मुझे......(ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय भाई बसंत कुमार शर्मा जी सादर अभिवादन ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक आभार."
12 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ( बेजान था मैं फिर भी तो मारा गया मुझे......(ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय भाई आजी तमाम जी आदाब ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक आभार"
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"आदरणीय  atul kushwah  जी सादर नमस्कार  बहुत बढ़िया गजल बधाई आपको "
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"आ0 सुशील सरन जी , हार्दिक आभार आपका"
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