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Tasdiq Ahmed Khan
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Ajay Tiwari commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (मिट चुके हैं प्यार में कितने ही सूरत देख कर)
"'इश्क़ में भी अब तिजा रत हो रही तस्दीक हैतुम किसी भी महजबीं से करना उलफत देख कर' इस शेर की एक सूरत ये भी हो सकती है : इश्क़ में भी याँ तिजारत है मियाँ तस्दीक तुम अब किसी भी महजबीं से करना उलफत देख कर सादर "
Saturday
Ajay Tiwari commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (मिट चुके हैं प्यार में कितने ही सूरत देख कर)
"आदरणीय तस्दीक साहब, खूबसूरत अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई. इश्क़ में भी अब तिजारत हो रही तस्दीक है > इश्क़ में भी अब तिजारत है मियाँ तस्दीक याँ"
Saturday
dandpani nahak left a comment for Tasdiq Ahmed Khan
"आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब आदाब , बहुत शुक्रिया साहब हौसला अफ़जाई का"
Jun 29
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"जनाब रवि साहिब, बहुत ही उम्दा गज़ल हुई है मुबारकबाद कुबूल फरमाएं "
Jun 28
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"जनाब बासु देव साहिब, अच्छी गज़ल हुई है मुबारकबाद कुबूल फरमाएं "
Jun 28
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"जनाब अरुण कुमार साहिब, अच्छी गज़ल हुई है मुबारकबाद कुबूल फरमाएं "
Jun 28
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"जनाब राज साहिब, अच्छी गज़ल हुई है मुबारकबाद कुबूल फरमाएं  शेर 7 और 10 की बह्र देख लीजिए l"
Jun 28
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"जनाब मुनीश साहिब, अच्छी गज़ल हुई है मुबारकबाद कुबूल फरमाएं  भीड़ पीछे थी लगी और बना नेता जो ""
Jun 28
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"मोहतरमा राजेश कुमारी साहिबा, उम्दा गज़ल हुई है मुबारकबाद कुबूल फरमाएं "
Jun 28
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"जनाब मनन साहिब,, गज़ल की अच्छी कोशिश की है आपने, मुबारकबाद कुबूल फरमाएं "
Jun 28
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"जनाब दण्ड पानी साहिब, गज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है मुबारकबाद कुबूल फरमाएं "
Jun 28
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"जनाब आसिफ़ साहिब, गज़ल की अच्छी कोशिश की है आपने, मुबारकबाद कुबूल फरमाएं l गज़ल सभी और वक़्त चाहती है l"
Jun 28
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"जनाब सुरेंद्र साहिब, अच्छी गज़ल हुई है, मुबारकबाद कुबूल फरमाएं l"
Jun 28
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"जनाब सुरेंद्र साहिब, गज़ल पसन्द करने और आपकी हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया "
Jun 28
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"जनाब अनीस साहिब, गज़ल पसंद करने और आपकी हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया "
Jun 28
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"जनाब रवि साहिब, गज़ल पसन्द करने और आपकी हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया l"
Jun 28

Profile Information

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Male
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Ajmer
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qannauj
Profession
Govt. servant
About me
i have interest in writing urdu/hindi gazal &geet etc.

Tasdiq Ahmed Khan's Blog

गज़ल - अकेले ईद हम कैसे मनाएँ

गज़ल(ईद मनाएं)

(मफाईलुन - मफाईलुन - फ ऊलन)

न घर आएं न वो हम को बुलाएं

अकेले ईद हम कैसे मनाएं

यही है ईद का पैग़ाम लोगों

दिलों को आज हम दिल से मिलाएँ

मुबारक बाद मैं दूँ उनको कैसे

कभी वो सामने मेरे न आएं

मनाई साथ ही थी हम ने होली

सिवइयां साथ ही हम आज खाएँ

गिले शिकवे भुला दें आज के दिन

गले मिल कर मुहब्बत को बढ़ाएं

वतन से ख़त्म हो फिरका परस्ती

ख़ुदा से आज ये…

Continue

Posted on June 5, 2019 at 9:00pm — 3 Comments

ग़ज़ल _किसी से प्यार किसी से क़रार ख़ैर ख़ुदा

ग़ज़ल

( मफाइलुन_फ इ लातुन_मफाइलुन_फेलुन) 

किसी से प्यार किसी से क़रार ख़ैर ख़ुदा

करे वो तीर से दो दो शिकार ख़ैर ख़ुदा

अलम छुपाने की कोशिश तो हँस के की लेकिन

निगाहे नम ने किया आश कार ख़ैर ख़ुदा

नज़र पे पहरा है दीवाना फ़िर भी कूचे में

सनम को अपने रहा है पुकार ख़ैर ख़ुदा

तवक्को उनसे है फैसल की, कर रहे हैं जो

फरेबियों में हमारा शुमार ख़ैर ख़ुदा

लगा ये देख के उनको उदास महफ़िल में

खिज़ा के साथ…

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Posted on May 18, 2019 at 12:34pm — 4 Comments

ग़ज़ल _वो कुछ न इसके सिवा करेंगे

ग़ज़ल _(वो कुछ न इसके सिवा करेंगे)

(मफा इला तुन _मफा इला तुन)

वो कुछ न इसके सिवा करेंगे l

बना के अपना दगा करेंगे l

किसी से हो जाए उनको उलफत

यही ख़ुदा से दुआ करेंगे l

सितम जफ़ा जिनकी ख़ास फितरत

वो कह रहे हैं वफ़ा करेंगे l

कभी हमें आज़मा के देखो

ये दिल है क्या जाँ फिदा करेंगे l

नज़र पे पहरे अगर लगे तो

खयाल में हम मिला करेंगे l

लगा के इलज़ामे बे…

Continue

Posted on April 30, 2019 at 1:14pm — 6 Comments

ग़ज़ल _(रहबरी उनकी मुझको हासिल है)

(फाइ ला तुन _मफा इलुन _फ़ेलुन)

रहबरी उनकी मुझको हासिल है l

अब भला किसको फिकरे मंज़िल है l

दे सफ़ाई न क़त्ल पर वर्ना

लोग समझेंगे तू ही क़ातिल है l

उस हसीं से गिला है सिर्फ यही

वो वफ़ाओं से मेरी गाफिल है l

दोस्तों से वो राय लेते हैं

सिर्फ़ उलफत में ये ही मुश्किल है l

ढूँढ कर लाए तो कोई ऎसा

मेरा महबूब माहे कामिल है l

जो बचाता है बदनज़र से उन्हें

उनके रुखसार का ही वो तिल है…

Continue

Posted on April 15, 2019 at 12:00pm — 11 Comments

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At 7:39am on June 29, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब आदाब , बहुत शुक्रिया साहब हौसला अफ़जाई का
At 5:33pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब आदाब
मैं बहुत आभारी हूँ कि आपने मेरी ग़ज़ल पढ़ी शुक्रिया
मुझमें अभी बहुत कमी है मैं जानता हूँ लेकिन आप जैसे गुणीजनों के सानिध्य में कुछ सीख पाउँगा ऐसी आशा करता हूँ आपका बहुत बहुत आभार और शुक्रिया
At 9:21pm on September 3, 2017, SALIM RAZA REWA said…
जनाब तस्दीक साहब अपना मोबाइल नंबर देने की मेहरबानी करें
At 3:51pm on February 17, 2016, Sushil Sarna said…

आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी,माह के सक्रिय सदस्य के रूप में ओ बी ओ द्वारा चयनित होने पर आपको हार्दिक बधाई। 

At 11:43pm on February 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

तस्दीक अहमद खान जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:11pm on October 22, 2015, Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' said…
आपका इस बज्म में तहेदिल से इस्तक़बाल है......|
At 6:28pm on October 20, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।
 
 
 

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