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Usha Awasthi
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  • UP
  • India
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Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post साक्षात्कार
"मुह्तारमा ऊषा अवस्थी जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें I "
6 hours ago
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post वसन्त
"हार्दिक धन्यवाद आपका, फूलसिंह जी, सादर।"
Friday
PHOOL SINGH commented on Usha Awasthi's blog post वसन्त
"महोदया बहुत ही अच्छी रचना साधुवाद "
Friday
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post वसन्त
"हार्दिक आभार आपका मनोज अहसास जी, सादर"
Friday
मनोज अहसास commented on Usha Awasthi's blog post वसन्त
"बसंत पर आधारित बहुत सुंदर रचना हुई आदरणीय बहुत-बहुत बधाई"
Thursday
Usha Awasthi posted a blog post

वसन्त

 वसन्तउषा अवस्थीपतझड़ हुआ विराग काखिले मिलन के फूल प्रेम, त्याग, आनन्द कीचली पवन अनुकूलचिन्ता, भय,और शोक का मिटा शीत अवसादशान्ति, धैर्य, सन्तोष संग प्रकटा प्रेम प्रसादसरस नेह सरसों खिली अन्तर भरे उमंगपीत वसन की ओढ़नी, थिर सब हुईं तरंगशिव शक्ती का यह मिलन,अद्भुत, अगम, अनन्तगति मति अविचल,अपरिमित, अव्याख्येय वसन्तमौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Wednesday
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post साक्षात्कार
"आ0 लक्ष्मण धामी जी, हार्दिक आभार आपका"
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Usha Awasthi's blog post साक्षात्कार
"आ. ऊषा जी, अभिवादन। अच्छी रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Wednesday
Usha Awasthi posted a blog post

साक्षात्कार

उषा अवस्थीसबकी अलग देनदारियां हैंजीवन-नदिया में,कर्म-नौका पर सवारसुख-दुख से उत्पन्नअपरिहार्य लहरेंसहने की मजबूरियां हैंजब तरंगे "सम" पर आती हैंपहुँचाती हैं सहजता सेइच्छित गन्तव्य तकसमस्त उलझनों के पारकराती हैं, स्वयं से स्वयं का "साक्षात्कार"प्रकृति आईना दिखाने को सन्नद्ध हैनियमों से आबद्ध हैजो अपना धर्म सदैव निभाती है"मैं" त्याग, व्यापक अहं मेंसमाती हैमौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Jan 21
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post सौन्दर्य का पर्याय
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी ,रचना पसंद आई, जानकर खुशी हुई, हार्दिक धन्यवाद आपका।"
Jan 8
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Usha Awasthi's blog post सौन्दर्य का पर्याय
"आ. ऊषा जी, सादर अभिवादन। उत्तम समसामयिक रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jan 8
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post सौन्दर्य का पर्याय
"आदरणीय दयाराम जी ,रचना सुन्दर लगी , जानकर हर्ष हुआ। हार्दिक आभार आपका"
Jan 7
Dayaram Methani commented on Usha Awasthi's blog post सौन्दर्य का पर्याय
"आदरणीय उषा अवस्थी जी, सुंदर एवं सामयिक सृजन के लिए बधाई स्वीकार करें।"
Jan 7
Usha Awasthi posted a blog post

सौन्दर्य का पर्याय

उषा अवस्थी"नग्नता" सौन्दर्य का पर्याय बनता जा रहा हैफिल्म चलने का बड़ा आधारबनता जा रहा है"तन मेरा मैंजो भी चाहे सो करूँ"की विषैली सोच का उन्माद बढ़ता जा रहा हैआधुनिकता शब्द कानव अर्थ गढ़संक्रमण का बीज धरती परबिखरता जा रहा हैमार्ग मध्यम छोड़कर है दिन-ब-दिनअमर्यादित आचरणविस्तार करता जा रहा है"नग्नता" सौन्दर्र का पर्यायबनता जा रहा हैमौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Jan 7
Usha Awasthi posted a blog post

शोक से परे हो जाओ

उषा अवस्थीयह कोरा उपदेश नहींकोई झूठा संदेश नहींसत्य ही आधार हैन स्त्री, न पुरुष एक निराकार हैमौत हमारा क्या बिगाड़ेगी?हम उससे डरें क्यों?भूत हो, वर्तमान हो,भविष्य होहम काल के महाकाल हैंसदा चैतन्य; नहीं इन्द्रजाल हैंआत्मा कहाँ मरती है?अतः इस जगत की वैतरणी के पारसच्चिदानन्द में समाओशोक से परे हो जाओमौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Dec 24, 2022
Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post दुनिया
"मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 21, 2022

Profile Information

Gender
Female
City State
Lucknow
Native Place
Uttar Pradesh
Profession
Author

ब्राहम्ण

उषा अवस्थी

मान दिया होता यदि तुमने
ब्राम्हण को , सुविचारों को
सदगुण की तलवार काटती
निर्लज्जी व्यभिचारों को

उसको काया मत समझो ,
ज्ञान विज्ञान समन्वय है
द्वैत भाव से मुक्त, जितेन्द्रिय
सत्यप्रतिज्ञ , समुच्चय है

कर्म , वचन , मन से पावन
वह ब्रम्हपथी , समदर्शी है
नहीं जन्म से , सतत कर्म से
तेजस्वी , ब्रम्हर्षि है

मौलिक एवं अप्रकाशित

Usha Awasthi's Blog

वसन्त

 वसन्त

उषा अवस्थी

पतझड़ हुआ विराग का

खिले मिलन के फूल

 

प्रेम, त्याग, आनन्द की

चली पवन अनुकूल

चिन्ता, भय,और शोक का 

मिटा शीत अवसाद

शान्ति, धैर्य, सन्तोष संग 

प्रकटा प्रेम प्रसाद

सरस नेह सरसों खिली 

अन्तर भरे उमंग

पीत वसन की ओढ़नी, 

थिर सब हुईं तरंग

शिव शक्ती का यह मिलन,

अद्भुत, अगम, अनन्त

गति मति…

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Posted on January 25, 2023 at 6:35pm — 4 Comments

साक्षात्कार

उषा अवस्थी

सबकी अलग देनदारियां हैं

जीवन-नदिया में,

कर्म-नौका पर सवार

सुख-दुख से उत्पन्न

अपरिहार्य लहरें

सहने की मजबूरियां हैं

जब तरंगे "सम" पर आती हैं

पहुँचाती हैं सहजता से

इच्छित गन्तव्य तक

समस्त उलझनों के पार

कराती हैं, स्वयं से स्वयं का 

"साक्षात्कार"

प्रकृति आईना दिखाने को सन्नद्ध है

नियमों से आबद्ध है

जो अपना धर्म 

सदैव निभाती है

"मैं"…

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Posted on January 21, 2023 at 6:57pm — 3 Comments

सौन्दर्य का पर्याय

उषा अवस्थी

"नग्नता" सौन्दर्य का पर्याय 

बनता जा रहा है

फिल्म चलने का बड़ा आधार

बनता जा रहा है

"तन मेरा मैं

जो भी चाहे सो करूँ"

की विषैली सोच का उन्माद 

बढ़ता जा रहा है

आधुनिकता शब्द का

नव अर्थ गढ़

संक्रमण का बीज धरती पर

बिखरता जा रहा है

मार्ग मध्यम छोड़कर 

है दिन-ब-दिन

अमर्यादित आचरण

विस्तार करता जा रहा है

"नग्नता" सौन्दर्र का…

Continue

Posted on January 7, 2023 at 11:33am — 4 Comments

शोक से परे हो जाओ

उषा अवस्थी

यह कोरा उपदेश नहीं

कोई झूठा संदेश नहीं

सत्य ही आधार है

न स्त्री, न पुरुष 

एक निराकार है

मौत हमारा क्या बिगाड़ेगी?

हम उससे डरें क्यों?

भूत हो, वर्तमान हो,भविष्य हो

हम काल के महाकाल हैं

सदा चैतन्य; नहीं इन्द्रजाल हैं

आत्मा कहाँ मरती है?

अतः इस जगत की 

वैतरणी के पार

सच्चिदानन्द में समाओ

शोक से परे हो जाओ

मौलिक एवं…

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Posted on December 24, 2022 at 11:14am

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At 6:29am on August 5, 2018, Kishorekant said…

सुन्दर रचना केलिये हार्दिक अभिनंदन सुश्री उषा अवस्थिजी ।

At 9:01pm on September 9, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है.

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"आदरणीय मुसाफिर साहब हार्दिक आभार सादर"
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मनोज अहसास commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब सुधार का प्रयास करता हूँ सादर"
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मिथिलेश वामनकर posted a discussion

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"आ. भाई मनु जी, अभिवादन। अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई। भाई समर जी की बात का संज्ञान लें।"
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"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। गीत आपको अच्छा लगा लेखन सफल हुआ। हार्दिक धन्यवाद।"
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"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post बहुत अकेले जोशीमठ को रोते देख रहा हूँ- गीत १३(लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। गीत पर उपस्थिति और उत्साह वर्धन के लिए आभार ।"
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