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Usha Awasthi
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Usha Awasthi's blog post परम चेतना एक (कुछ विचार)
"आ. ऊषा जी, सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Nov 23
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post परम चेतना एक (कुछ विचार)
"आ0 समर कबीर साहेब, आदाब, रचना अच्छी लगी, जान कर हर्ष हुआ। हार्दिक आभार आपका"
Nov 5
Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post परम चेतना एक (कुछ विचार)
"मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 5
Usha Awasthi posted a blog post

परम चेतना एक (कुछ विचार)

सब धर्मों का सार जोवह तो केवल एकबाह्य रूप दिखता अलगपरम चेतना एकफैलाते भ्रम व्यर्थ हीजो विवेक से शून्यवे मतिभ्रष्ट, विवेकहीनउन्हे चढ़ा अहमन्यहुए विषमता से परे जिन्हे सत्य का बोधगुण-अवगुण से हो विलगनित्य बसे मन मोदप्रकृति और चैतन्य काआपस का संयोगउस दर्पण में फलीभूत हो ज्ञानी का योगमौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Nov 3
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post सत्य (अतुकान्त)
"आ0 तेज वीर सिंह जी, हार्दिक आभार आपका"
Nov 1
TEJ VEER SINGH commented on Usha Awasthi's blog post सत्य (अतुकान्त)
"हार्दिक बधाई आदरणीय । बेहतरीन प्रस्तुति।"
Oct 31
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post सत्य (अतुकान्त)
"आदाब , आ0 शेख शहज़ाद उस्मानी साहेब, आपको विचार बेबाक लगे , मेरा लेखन सार्थक हुआ। हार्दिक धन्यवाद"
Oct 30
Sheikh Shahzad Usmani commented on Usha Awasthi's blog post सत्य (अतुकान्त)
"आदाब। कम शब्दों में बेबाक विचारोत्तेजक सत्य अभिव्यक्ति। हार्दिक बधाई आदरणीय उषा अवस्थी जी।"
Oct 30
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post सत्य (अतुकान्त)
"आ0 अमीरुद्दीन 'अमीर' साहेब, रचना पर सुन्दर प्रतिक्रिया हेतु बहुत-बहुत  धन्यवाद आपका"
Oct 30
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post सत्य (अतुकान्त)
"आ0 समर कबीर साहेब, रचना  आपको अच्छी लगी,जानकर खुशी हुई।हार्दिक धन्यवाद आपका"
Oct 30
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Usha Awasthi's blog post सत्य (अतुकान्त)
"मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब, सत्य वचन। सुन्दर अतुकांत कविता के लिए हार्दिक बधाईयाँ स्वीकार करें।  सादर।"
Oct 30
Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post सत्य (अतुकान्त)
"मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब , अच्छी अतुकांत कविता हुई है , बधाई स्वीकार करें I "
Oct 30
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post सत्य (अतुकान्त)
"आ0  सुशील सरन जी , रचना सहज लगने हेतु हार्दिक धन्यवाद आपका"
Oct 29
Sushil Sarna commented on Usha Awasthi's blog post सत्य (अतुकान्त)
"वाह आदरणीया जी भावों की सहज अभिव्यक्ति । हार्दिक बधाई"
Oct 28
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Oct 28
Usha Awasthi posted a blog post

सत्य (अतुकान्त)

ऊँचे तो वही उठ पाएंगेजो सत्य की गहराईझूठ का उथलापनजान जाएंगेजो सत्य को कमजोर समझतेविनम्रता का तिरस्कार करतेवैराग्य का उपहास उड़ाते हैंवह बुद्धि बल से पंगुअपनी दुर्बलता छिपाते हैंजो सत्य को तोड़ते, मरोड़ते हैंवे साहित्यकार नहींचाटुकार होते हैंदिन कहाँ समान रहते हैं?सत्य है, आज इसकीकल उसकी झोली भरते हैंमौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Oct 28

Profile Information

Gender
Female
City State
Lucknow
Native Place
Uttar Pradesh
Profession
Author

ब्राहम्ण

उषा अवस्थी

मान दिया होता यदि तुमने
ब्राम्हण को , सुविचारों को
सदगुण की तलवार काटती
निर्लज्जी व्यभिचारों को

उसको काया मत समझो ,
ज्ञान विज्ञान समन्वय है
द्वैत भाव से मुक्त, जितेन्द्रिय
सत्यप्रतिज्ञ , समुच्चय है

कर्म , वचन , मन से पावन
वह ब्रम्हपथी , समदर्शी है
नहीं जन्म से , सतत कर्म से
तेजस्वी , ब्रम्हर्षि है

मौलिक एवं अप्रकाशित

Usha Awasthi's Blog

परम चेतना एक (कुछ विचार)

सब धर्मों का सार जो

वह तो केवल एक

बाह्य रूप दिखता अलग

परम चेतना एक

फैलाते भ्रम व्यर्थ ही

जो विवेक से शून्य

वे मतिभ्रष्ट, विवेकहीन

उन्हे चढ़ा अहमन्य

हुए विषमता से परे 

जिन्हे सत्य का बोध

गुण-अवगुण से हो विलग

नित्य बसे मन मोद

प्रकृति और चैतन्य का

आपस का संयोग

उस दर्पण में फलीभूत 

हो ज्ञानी का योग

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on November 3, 2021 at 6:44am — 3 Comments

सत्य (अतुकान्त)

ऊँचे तो वही उठ पाएंगे

जो सत्य की गहराई

झूठ का उथलापन

जान जाएंगे

जो सत्य को कमजोर समझते

विनम्रता का तिरस्कार करते

वैराग्य का उपहास उड़ाते हैं

वह बुद्धि बल से पंगु

अपनी दुर्बलता छिपाते हैं

जो सत्य को तोड़ते, मरोड़ते हैं

वे साहित्यकार नहीं

चाटुकार होते हैं

दिन कहाँ समान रहते हैं?

सत्य है, आज इसकी

कल उसकी झोली भरते हैं

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on October 27, 2021 at 10:36pm — 10 Comments

मुझे ना मार पाएगी (अतुकान्त)

खाली हो गई हूँ

इच्छाओं से, आशाओं से

व्यर्थ विचारों से

निरर्थक प्रवाहों से

अस्थिर लगावों से

अनर्गल खिंचावों से

आधुनिक चकाचौंध से

कौन जाने, मौत

कब दरवाजा खटखटा दे

साथ ले जाने को

किन्तु वह क्या साथ

ले जा पाएगी ?

वह तो पंच तत्वों में

तन को मिलाएगी

मुझे ना मार पाएगी

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on September 16, 2021 at 10:59pm — 6 Comments

कोरोना

जिजीवषा जो इन्सा की

वह नहीं  कभी भी हारेगी

जन-जन तक पहुँचाने सुविधा

अपने श्रम बल को वारेगी

उत्पाती कोरोना की यह

सघन श्रृंखला टूटेगी

जकड़न से पाश मुक्त होकर

मानवी हताशा छूटेगी

गहन बुद्धि अन्वेषण से

वैज्ञानिक युक्ति निकालेगा

निर्मित कर अचूक औषधियाँ

 इसको  तो जड़ से मारेगा

भय  जाएगा मन से समूल

कीटाणु सर्वदा हारेगा

मास्क, शुद्धता, शारीरिक 

दूरी का भूत…

Continue

Posted on September 8, 2021 at 9:58pm — 4 Comments

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At 6:29am on August 5, 2018, Kishorekant said…

सुन्दर रचना केलिये हार्दिक अभिनंदन सुश्री उषा अवस्थिजी ।

At 9:01pm on September 9, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है.

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