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Usha Awasthi
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Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post मनुज कभी न हारेगा
"हार्दिक धन्यवाद आपको आदरणीया"
Jan 10
pratibha pande commented on Usha Awasthi's blog post मनुज कभी न हारेगा
"मानव की शक्ति का विश्वास जगाती उत्सव मनाती इस प्रभावी रचना के लिये हार्दिक बधाई आदरणीया"
Jan 10
Usha Awasthi posted a blog post

मनुज कभी न हारेगा

समय का चक्र घूमताकठोर काल झूमताप्रचंड वेग धारतादहाड़ता , पछाड़तालपक- लपक, झपक - झपकनगर - नगर , डगर- डगरमृत्यु - बिगुल फूँकताबन के वज्र टूटतासिरिंज की कमान सेवैक्सिन के वाण सेसंक्रमण को नष्ट करयह कोरोना ध्वस्त करनिकालेगा जहान सेखड़ा हुआ वो शान सेविजय ध्वजा को धारेगामनुज कभी न हारेगामौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Jan 10
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post डरे भला क्यों मौत से ?
"आ0 समर कबीर साहेब,आदाब हार्दिक धन्यवाद आपको"
Dec 29, 2020
Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post डरे भला क्यों मौत से ?
"मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 27, 2020
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Dec 23, 2020
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Dec 23, 2020
Usha Awasthi posted a blog post

डरे भला क्यों मौत से ?

जब तक इन्द्रिय भोग में होती मन की वृत्तिसकल दुखों ,भव - ताप से मिलती नहीं निवृत्तिउस असीम की शक्ति से संचालित सब कर्मपरम विवेकी संत ही जाने उसका मर्मपंच तत्व के मेल से बनें प्रकृति के रूपयह दर्पण , इसमें दिखे सत्य ,'अरूप' , अनूपदृढ़ संकल्पित यदि रहे नित्य , सनातन जानडरे भला क्यों मौत से ? अजर , अजेय , अमानमौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Dec 23, 2020
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post सृष्टि का संगीत
"आ0 समर कबीर साहेब एवं बृजेश कुमार 'ब्रज जी हार्दिक धन्यवाद"
Dec 12, 2020
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Usha Awasthi's blog post सृष्टि का संगीत
"बढ़िया सुन्दर रचना आदरणीया..."
Dec 12, 2020
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post योग क्षेम नाशित ना हो
"आ0 समर कबीर साहेब,आदाब हार्दिक धन्यवाद आपको"
Dec 10, 2020
Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post सृष्टि का संगीत
"मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 10, 2020
Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post योग क्षेम नाशित ना हो
"मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Dec 10, 2020
Usha Awasthi posted a blog post

योग क्षेम नाशित ना हो

किसी समय मानवी सनक सेयह धरणी शापित ना होकरे ध्वंस क्षण में अवनी कावह कुशस्त्र चालित ना होज्ञान,शक्ति,आनन्द त्रिवेणीकी धारा बाधित ना होजाति-धर्म की सीमाओं मेंबंध कोई त्रासित ना होरहे सदा वसुधा का आँचल हरा - भरा तापित ना होफैले नव प्रकाश जीवन मेंयोग क्षेम नाशित ना होमौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Dec 6, 2020
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Dec 5, 2020
Usha Awasthi posted a blog post

सृष्टि का संगीत

उस असीम , विराट में  इस सृष्टि का संगीत ताल,लय,सुर से सुसज्जित  नित्य नव इक गीत नृत्य करती रश्मियाँ  उतरें गगन से भोर मृदु स्वरों की लहरियों पर थिरकतीं चँहु ओर गगन पर जब विचरता  आदित्य , ज्योतिर्पुंज विसहँते सब वृक्ष,पर्वत, नदी ,पाखी , कुन्ज.मौलिक  एवं अप्रकाशितSee More
Dec 5, 2020

Profile Information

Gender
Female
City State
Lucknow
Native Place
Uttar Pradesh
Profession
Author

ब्राहम्ण

उषा अवस्थी

मान दिया होता यदि तुमने
ब्राम्हण को , सुविचारों को
सदगुण की तलवार काटती
निर्लज्जी व्यभिचारों को

उसको काया मत समझो ,
ज्ञान विज्ञान समन्वय है
द्वैत भाव से मुक्त, जितेन्द्रिय
सत्यप्रतिज्ञ , समुच्चय है

कर्म , वचन , मन से पावन
वह ब्रम्हपथी , समदर्शी है
नहीं जन्म से , सतत कर्म से
तेजस्वी , ब्रम्हर्षि है

मौलिक एवं अप्रकाशित

Usha Awasthi's Blog

मनुज कभी न हारेगा

समय का चक्र घूमता

कठोर काल झूमता

प्रचंड वेग धारता

दहाड़ता , पछाड़ता

लपक- लपक, झपक - झपक

नगर - नगर , डगर- डगर

मृत्यु - बिगुल फूँकता

बन के वज्र टूटता

सिरिंज की कमान से

वैक्सिन के वाण से

संक्रमण को नष्ट कर

यह कोरोना ध्वस्त कर

निकालेगा जहान से

खड़ा हुआ वो शान से

विजय ध्वजा को धारेगा

मनुज कभी न हारेगा

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on January 8, 2021 at 7:44pm — 2 Comments

डरे भला क्यों मौत से ?

जब तक इन्द्रिय भोग में होती मन की वृत्ति

सकल दुखों ,भव - ताप से मिलती नहीं निवृत्ति

उस असीम की शक्ति से संचालित सब कर्म

परम विवेकी संत ही जाने उसका मर्म

पंच तत्व के मेल से बनें प्रकृति के रूप

यह दर्पण , इसमें दिखे सत्य ,'अरूप' , अनूप

दृढ़ संकल्पित यदि रहे नित्य , सनातन जान

डरे भला क्यों मौत से ? अजर , अजेय , अमान

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on December 23, 2020 at 11:03am — 2 Comments

योग क्षेम नाशित ना हो

किसी समय मानवी सनक से

यह धरणी शापित ना हो

करे ध्वंस क्षण में अवनी का

वह कुशस्त्र चालित ना हो

ज्ञान,शक्ति,आनन्द त्रिवेणी

की धारा बाधित ना हो

जाति-धर्म की सीमाओं में

बंध कोई त्रासित ना हो

रहे सदा वसुधा का आँचल 

हरा - भरा तापित ना हो

फैले नव प्रकाश जीवन में

योग क्षेम नाशित ना हो

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on December 6, 2020 at 9:43am — 2 Comments

सृष्टि का संगीत

उस असीम , विराट में 
इस सृष्टि का संगीत
ताल,लय,सुर से सुसज्जित 
नित्य नव इक गीत

नृत्य करती रश्मियाँ 
उतरें गगन से भोर
मृदु स्वरों की लहरियों पर
थिरकतीं चँहु ओर

गगन पर जब विचरता 
आदित्य , ज्योतिर्पुंज
विसहँते सब वृक्ष,पर्वत,
नदी ,पाखी , कुन्ज

.

मौलिक  एवं अप्रकाशित

Posted on December 4, 2020 at 7:30pm — 3 Comments

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At 6:29am on August 5, 2018, Kishorekant said…

सुन्दर रचना केलिये हार्दिक अभिनंदन सुश्री उषा अवस्थिजी ।

At 9:01pm on September 9, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है.

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