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V.M.''vrishty''
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Mahendra Kumar commented on V.M.''vrishty'''s blog post इंतेज़ार
"आदरणीया वी.एम.वृष्टि जी, बहुत बढ़िया कविता लिखी है आपने. मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. //कि आकर रोक लेगा....// सादर."
Jan 16
V.M.''vrishty'' commented on V.M.''vrishty'''s blog post इंतेज़ार
"प्रणाम समर कबीर जी! तारीफ कर के मेरा आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए बहुत बहुत आभार!! Obo के सदस्यों की फेहरिश्त में आप सबकी उपस्थिति अनुपस्थिति का ख्याल रखते है,, बहुत मुश्किल है ये! सचमुच आपकी परखी नज़र का जवाब नही!"
Jan 10
V.M.''vrishty'' commented on V.M.''vrishty'''s blog post इंतेज़ार
"PHOOL SINGH ji, bahut bahut dhanyawad!"
Jan 10
Samar kabeer commented on V.M.''vrishty'''s blog post इंतेज़ार
"मुहतरमा वी.एम.वृष्टि जी आदाब,बहुत दिन बाद आपको पटल पर देखकर प्रसन्नता हुई,बहुत उम्दा कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 10
PHOOL SINGH commented on V.M.''vrishty'''s blog post इंतेज़ार
"सूंदर अति सूंदर पंक्तियाँ बधाई स्वीकारें"
Jan 10
V.M.''vrishty'' posted a blog post

इंतेज़ार

इंतज़ार!उसके आने का!की आकर रोक लेगा....मेरे बहते अश्रुधार को!थकान...दर्द..उदासी..तड़प..समेट लेगा सबअपनी बाहों में!!मेरी नाराजगी का बुलबुलाफूट जाएगा..उसकी छुवन से!!शाम हुई!हुआ इंतेज़ार पूरा!वो आया!और कर गया अधूरा!उसका आनासच था...या सपना??मार गया मुझे!उसकाअपरिचित सा मिलना!!मौलिक व अप्रकाशितSee More
Jan 9
V.M.''vrishty'' posted a blog post

बरसात

ये नाज़ुक से नगीने-जिनसे करके श्रृंगार,इठलाता है,सदाबहार!यूँ तोबहुत शीतल हैं..मखमली हैं !पर इन्हें छूते ही,अधरों से,जिस्म मेंआग सी जली है!ये एहसास कुछजाना पहचाना-सा है !तेरे अधरों की तरहइनमें भी,,मयखाना-सा है!मौलिक व अप्रकाशितSee More
Oct 20, 2018
V.M.''vrishty'' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय शिज़्ज़ु शकूर जी, प्रणाम! शुभ संध्या! हौसलाअफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया"
Oct 19, 2018
V.M.''vrishty'' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय डॉ छोटेलाल जी,प्रणाम! हार्दिक धन्यवाद! आपकी प्रशंसा पा कर मेरे सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि हुई। सादर"
Oct 19, 2018
V.M.''vrishty'' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"जनाब मिर्ज़ा जावेद जी,सादर अभिनंदन। बहुत बहुत शुक्रिया सुख़न नवाज़ी के लिए"
Oct 19, 2018
V.M.''vrishty'' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय अजय गुप्ता जी,शुभ संध्या! बहुत बहुत धन्यवाद आपका"
Oct 19, 2018
V.M.''vrishty'' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय प्रभाकर सर, प्रणाम! बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल!  तीसरा छठा और सातवाँ शेर विशेष आकर्षक है। बहुत बहुत बधाई"
Oct 19, 2018
V.M.''vrishty'' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय समर कबीर सर,,सादर नमन! सच कहूँ तो आपके इस्लाह के बगैर ये सम्भव नही था मेरे लिए। इस मुबारकबाद के असली हकदार आप ही हैं। बहुत बहुत शुक्र गुज़ार हूँ मैं आपकी! सादर!"
Oct 19, 2018
V.M.''vrishty'' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"जनाब राज नवादवी जी,आदाब! आपकी दाद के लिए शुक्रगुज़ार हूँ। सादर"
Oct 19, 2018
V.M.''vrishty'' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय राजेश जी,प्रणाम! बहुत बहुत दिली शुक्रिया"
Oct 19, 2018
V.M.''vrishty'' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"जनाब अफ़रोज़ जी,आदाब! बहुत बहुत शुक्रिया"
Oct 19, 2018

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Gender
Female
City State
U.p
Native Place
Gorakhpur
Profession
Student
About me
Love simplicity

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इंतेज़ार

इंतज़ार!
उसके आने का!
की आकर रोक लेगा....
मेरे बहते अश्रुधार को!
थकान...दर्द..
उदासी..तड़प..
समेट लेगा सब
अपनी बाहों में!!
मेरी नाराजगी का बुलबुला
फूट जाएगा..
उसकी छुवन से!!
शाम हुई!
हुआ इंतेज़ार पूरा!
वो आया!
और कर गया अधूरा!
उसका आना
सच था...
या सपना??
मार गया मुझे!
उसका
अपरिचित सा मिलना!!


मौलिक व अप्रकाशित

Posted on January 9, 2019 at 2:34pm — 5 Comments

बरसात

ये नाज़ुक से नगीने-
जिनसे करके श्रृंगार,
इठलाता है,
सदाबहार!
यूँ तो
बहुत शीतल हैं..
मखमली हैं !
पर इन्हें छूते ही,अधरों से,
जिस्म में
आग सी जली है!
ये एहसास कुछ
जाना पहचाना-सा है !
तेरे अधरों की तरह
इनमें भी,,
मयखाना-सा है!

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on October 20, 2018 at 1:06pm

जलती मुस्कुराहटें

कुछ
छिल रहा है!
भीतर-भीतर!
दुख रहा..
नासूर जैसा!!
क्या है ये!
तुम्हारी चुप्पी?
या मेरी उदासी ??
नस-नस में
बेचैनियाँ!
घड़ी-घड़ी घबराहटें !!
क्यों पड़ी हैं आज ?
जलते तवे पर...
रोटियों की जगह-
मेरी मुस्कुराहटें!!

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on October 16, 2018 at 9:16pm — 8 Comments

काली स्याही

सजल आँखें,,बोझल मन !
अनुत्तरित प्रश्न ! टूटता बदन !
कुछ फिक्र ! कुछ लाचारी !
कुछ चाही...........,
कुछ अनचाही जिम्मेदारी !
ये कहानी थी कभी शामों की!
पर अब,,न जाने क्यों...
सूरज सर पे चमकता है,
फिर भी रातों का अंधेरा,,
आँखों से नहीं छंटता है ।
मैं लिख रही दास्तान---
बदलते हुए हालात की !
कि अब सफेद सुबहों में,
घुली है............
काली स्याही...रात की....!


मौलिक व अप्रकाशित

Posted on October 15, 2018 at 12:24pm — 9 Comments

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At 6:47am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

 
 
 

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