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Vivek Pandey Dwij
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Vivek Pandey Dwij replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-104
"कुण्डलिया यारो! किस ये राह पर, चला आज इंसानवृक्ष हीन धरती किया, कहा इसे विज्ञानकहा इसे विज्ञान, नहीं कुछ ज्ञान लगायासूखा बाढ़ अकाल, मूढ़ क्यूँ समझ न पायाकह विवेक कविराय, नहीं खुद को यूँ मारोनिशदिन बढ़ता ताप, इसे अब समझो यारो।।1 अभिलाषा प्रारम्भ है,…"
Jun 15
Vivek Pandey Dwij posted a blog post

पर्यावरण पर कुंडलिया

यारो! किस ये राह पर, चला आज इंसानवृक्ष हीन धरती किया, कहा इसे विज्ञानकहा इसे विज्ञान, नहीं कुछ ज्ञान लगायासूखा बाढ़ अकाल, मूढ़ क्यूँ समझ न पायाकह विवेक कविराय, नहीं खुद को यूँ मारोनिशदिन बढ़ता ताप, इसे अब समझो यारो।।1 अभिलाषा प्रारम्भ है, मृगतृष्णा का यारअंधी दौड़ विकास की, हुई जगत पे भारहुई जगत पे भार, मस्त फिर भी है मानवहर कोई है त्रस्त, विकास लगे अब दानवकह विवेक कविराय, प्रकृति की समझो भाषापर्वत नदियाँ झील, नष्ट करती अभिलाषा।।2मौलिक एवं अप्रकाशित ।See More
Jun 15
Vivek Pandey Dwij commented on Vivek Pandey Dwij's blog post 'आम चुनाव और नेता'
"आ० लक्क्षमण धमी 'मुसाफिर' जी मेरे उत्साह वर्धन हेतु कोटिशः धन्यवाद."
Apr 19
Vivek Pandey Dwij commented on Vivek Pandey Dwij's blog post 'आम चुनाव और नेता'
"आ० समर कबीर जी मेरे उत्साह वर्धन हेतु सहृदय आभार."
Apr 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Vivek Pandey Dwij's blog post 'आम चुनाव और नेता'
"आ. विवेक जी, चुनावी माहौल में सुंदर आल्हा छंद हुए है । हार्दिक बधाई।"
Apr 19
Samar kabeer commented on Vivek Pandey Dwij's blog post 'आम चुनाव और नेता'
"जनाब विवेक पाण्डेय जी आदाब,बहुत अच्छे छन्द लिखे आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Apr 16
vijay nikore commented on Vivek Pandey Dwij's blog post नवरात्र पर दोहे
"दोहे अच्छे लगे। बधाई , आदरणीय विवेक जी"
Apr 16
Vivek Pandey Dwij commented on Vivek Pandey Dwij's blog post नवरात्र पर दोहे
"आदरणीय समर कबीर जी आप के इस स्नेह पूर्ण बधाई के लिए कोटिशः धन्यवाद।"
Apr 14
Samar kabeer commented on Vivek Pandey Dwij's blog post नवरात्र पर दोहे
"जनाब विवेक पाण्डेय जी आदाब,अच्छे दोहे रचे,बधाई स्वीकार करें ।"
Apr 14
Vivek Pandey Dwij commented on Vivek Pandey Dwij's blog post 'आम चुनाव और नेता'
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह ' कुशक्षत्रप' जी उत्साह वर्धन हेतु साधुवाद।"
Apr 13
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Vivek Pandey Dwij's blog post 'आम चुनाव और नेता'
"आद0 विवेक पांडेय द्विज जी सादर अभिवादन। आल्हा छंद में बढ़िया लिखा है आपने वर्तमान परिदृश्य पर। इस समसामयिक रचना पर आपको कोटिश बधाइयां"
Apr 13
Vivek Pandey Dwij commented on Vivek Pandey Dwij's blog post नवरात्र पर दोहे
"आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी दोहे पर उत्साह वर्धन हेतु आप को धन्यवाद।"
Apr 13
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Vivek Pandey Dwij's blog post नवरात्र पर दोहे
"वाह उत्तम दोहे..जय माँ दी.."
Apr 13
Vivek Pandey Dwij posted blog posts
Apr 13
Vivek Pandey Dwij left a comment for सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी आभार आप को इस उत्साह वर्धन के लिए।"
Apr 11
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Vivek Pandey Dwij's blog post नवरात्र पर दोहे
"आद0 विवेक पांडेय द्विज जी सादर अभिवादन। ओ बी ओ पर पहली बार आपकी रचना से रूबरू हो रहा हूँ। बढ़िया दोहे सृजित किये हैं आपने। बधाई स्वीकार कीजिये"
Apr 11

Profile Information

Gender
Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
Writing is my hobby

Vivek Pandey Dwij's Blog

पर्यावरण पर कुंडलिया

यारो! किस ये राह पर, चला आज इंसान

वृक्ष हीन धरती किया, कहा इसे विज्ञान

कहा इसे विज्ञान, नहीं कुछ ज्ञान लगाया

सूखा बाढ़ अकाल, मूढ़ क्यूँ समझ न पाया

कह विवेक कविराय, नहीं खुद को यूँ मारो

निशदिन बढ़ता ताप, इसे अब समझो यारो।।1

 अभिलाषा प्रारम्भ है, मृगतृष्णा का यार

अंधी दौड़ विकास की, हुई जगत पे भार

हुई जगत पे भार, मस्त फिर भी है मानव

हर कोई है त्रस्त, विकास लगे अब दानव

कह विवेक कविराय, प्रकृति की समझो भाषा

पर्वत नदियाँ झील, नष्ट करती…

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Posted on June 15, 2019 at 9:46am

'आम चुनाव और नेता'

आल्हा छंद (16, 15 अंत में गुरु लघु)

लोकतंत्र के महापर्व में, हुए सभी नेता तैयार

शब्द बाण से वार करें वे, छोड़ छाड़ के शिष्टाचार।।

युध्द भूमि सा लगता भारत, जहाँ मचा है हाहाकार

येन केन पाने को सत्ता, अपशब्दों की हो बौछार।।

खून करें वे लोकतंत्र का, जुमले हैं इनके हथियार

हित जनता का भूल गए वे, ऐसा इनका है आचार

हे जन मन तुम जाग उठो अब, व्यर्थ न जाये यह त्योहार

ऐसा कुछ इस बार करो तुम, राजनीति बदले आकार ।।

रंग बराबर बदलें ऐसे,…

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Posted on April 13, 2019 at 8:27am — 6 Comments

नवरात्र पर दोहे

घर- घर हो घट स्थापना, लगे नए पंडाल

हर मन उल्लासित दिखे, ले पूजा की थाल।।

चैत्र मास नवरात्र में, हो माँ का गुण गान

दुर्गुण सारा जल उठे, हो इसका भी ध्यान।।

यह सारा संसार ही, माँ का है दरबार

माँ ही बस इक सत्य है, बाकी सब बेकार।।

बालक बृंद अबोध मैं, माँ ममता की खान

जैसा भी हूँ मैं अभी, रखना माँ तू ध्यान।।

माँ के ही सब लाल हम, माँ ही खेवनहार

दया दृष्टि जब माँ करे, हों भवसागर पार।।

(मौलिक व…

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Posted on April 9, 2019 at 7:00pm — 6 Comments

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At 3:15pm on March 6, 2019, Ahmed Maris said…

Good Day,

How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day

Thanks God bless

Stella.

 
 
 

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