For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

amod shrivastav (bindouri)
  • Male
  • फतेहपुर,उत्तर-प्रदेश
  • India
Share

Amod shrivastav (bindouri)'s Friends

  • Abrar Ahmed
  • Kalipad Prasad Mandal
  • DIGVIJAY
  • Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"
  • जयनित कुमार मेहता
  • डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव
  • लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
  • Amod Kumar Srivastava
  • ASHISH KUMAAR TRIVEDI
  • मिथिलेश वामनकर
  • वीनस केसरी
  • Saurabh Pandey

facebook

Loading… Loading feed

 

amod shrivastav (bindouri)'s Page

Latest Activity

Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post शेर लब से लब टहलकर कागजी हो जायेगा
"ऐसा क्या हुआ प्रिय? अध्यन करें और गाहे गाहे लिखते भी रहें,मायूसी अच्छी चीज़ नहीं ।"
Sep 5
amod shrivastav (bindouri) commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post शेर लब से लब टहलकर कागजी हो जायेगा
"आदरणीय समर दादा जी प्रणाम  जी दादा .... ख़याल, ख्याल में मुझे कुछ समझ नहीं आया था इसी लिए  दादा ये अंतिम ही रचना थी आगे अव ग़जल लेखन बंद ही है । मेरी क्षमता जहाँ तक थी मैंने सीखने का प्रयाश किया था पर विधा के आगे के हिस्से अब समझ नहीं आ रहे…"
Sep 4
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post शेर लब से लब टहलकर कागजी हो जायेगा
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । आपको कई बार कह चुका हूँ कि बिना अध्यन के शाइरी करना ऐसा ही है जैसे बिना पतवार के समन्दर में नाव चलाना । 'ख्याल लफ्जों से उतरकर शाइरी हो जाएगा' इस मिसरे में आपने…"
Jul 28
amod shrivastav (bindouri) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"आदरणीय आसिफ़ भाई साहब कमाल है ..बहुत खूब   हार्दिक बधाई"
Jul 26
amod shrivastav (bindouri) commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post उसने इतना कह मुझे मेरी ग़लतियों को रख दिया (ग़जल)
"आदरणीय समर दादा जी प्रणाम , मार्गदर्शन के लिए हृदय से आभार"
Jul 25
amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

शेर लब से लब टहलकर कागजी हो जायेगा

बहर :- 2122-2122-2122-212ख्याल लफ्जों से उतरकर शाइरी हो जाएगा ।।शेर लब से लब टहलकर कागजी हो जायेगा।।अब्र से शबभर गिरेंगी ओश की बूंदें मगर ।दिन ही चढ़ते ये समां इक मस्खरी हो जाएगा।।हाँ खुमार -ए-इश्क है बातें तो होगी रात दिन ।जब भी उतरेगा ये सर से मयकशी हो जाएगा।।उसके हक़ में है सियासत देखना तुम एक दिन।जाने वो बोलेगा क्या क्या औऱ बरी हो जायेगा।।दर्द-ओ-गम शुहरत मुहब्बत सब मिलेगा इश्क में ।इश्क कर के देख ले...खुद जौहरी हो जाएगा।।आमोद बिन्दौरी /मौलिक अप्रकाशितSee More
Jul 25
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post उसने इतना कह मुझे मेरी ग़लतियों को रख दिया (ग़जल)
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,ग़ज़ल अभी समय चाहती है,शिल्प,व्याकरण,और शब्दों को बरतना अभी आपको सीखना है,बहरहाल बधाई स्वीकार ।"
Jul 19
amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

उसने इतना कह मुझे मेरी ग़लतियों को रख दिया (ग़जल)

बहर.2122-2122-2122-212एक दिन उसने मेरी खामोशियों को रख दिया ।।मेरे पेश-ए-आईने मे'री' हिचकियों को रख दिया ।।तोड़ बंदिश हिज्र -ए-दिल ख़ुल कर युँ रोया इक दफा।उसने दिल के सामने जब चिट्ठियों को रख दिया ।।खन्न की आवाज ले सिक्का छुआ कांसे को जब।भूख ने नजरें उठाई सिसकियों को रख दिया ।।जब कभी मेरा वजू अन्धा हुआ इस भीड़ में ।माँ ने अपनी आस के रौशन दियों को रख दिया ।।गर कभी मायूस हो मन देख कर छत घास की।छत में लाकर के पिता ने तितलियों को रख दिया ।।रूठ कर नींदों ने मुझको गर डराया है कभी।माँ ने सिरहाने में ला…See More
Jul 14
amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

आदमीं हूँ ख्वाहिशें होनी नहीं कम ऐ खुदा ...

2122-2122-2122-212मतला:-ख़ुश ही रहता हूँ शिकायत क्या करूँ क्या है अता।।आदमी हूँ ख्वाहिशें होनी नहीं कम ऐ ख़ुदा।।हुश्न-ए-मतला:-तेरे ज़ानिब से मुझे जो भी मिला अच्छा लगा ।मैं तो मुफ़लिस था मेरी हिम्मत कहाँ कुछ माँगता।।मेरा दम घुटने लगा जब महफिलों की शान में ।यार आया हूँ उठा कर दूर खुद का मकबरा।।मेरी मैय्यत में गुलों की बारिशें अच्छी नहीं।शाइरी के भेष में करने लगा था इल्तिज़ा।।देख़ो उल्फ़त के सफर ने चैंन ही छीना है बस।तुम भुला पाओ न पाओ मैं भुलाना चाहता ।।जैसी चाहे जो भी चाहे लिख मेरी क़िस्मत को तू।आख़िरत…See More
Jun 1
amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

मेरी ओर से भी दरवाजा लगता है,,,

बहर :- 22-22-22-22-22-2तुम हो शातिर तुमको ऐसा लगता है ।।मेरी ओर से भी दरवाजा लगता है।। मैं करता तुमसे कैसे दिल की बातें।तुमको मेरा प्रेम ही' सौदा लगता है।।वो मंदिर में गिरजाघर में मस्जिद में।मुझमें तुझमें पहरा जिसका लगता है।।वो पत्थर ख़ुद को समझे क़िस्मत वाला।जिसको छैनी और हथौड़ा लगता है ।।आन पड़े जब मुश्किल घड़ियां जीवन में।एक रु'पइया एक हजारा लगता है ।।हिन्दू मुस्लिम भाई चारे में शामिल ।"चाँद बता तू कौन हमारा लगता है ।।"इनकी उनकी कहता है मेरी सुन अब।तू मेरी ग़जलों का तारा लगता है ।।मौलिक अप्रकाशितSee More
May 27
amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

कुछ और नहीं बस सताया गया मुझे.....

1211-22-1221-212दरोज बुझाया जलाया गया मुझे।।कुछ और नहीं बस सताया गया मुझे।।यूँ पहली नजर की मुहब्बत ही नेक थी ।गलत है क़े रस्ता दिखाया गया मुझे।।मुँड़ेर से महताब जैसा दिखाई दूँ।वही एक रोगन चढ़ाया गया मुझे।।मुझे भी यही दौर आसान कह रहा ।वो दौर बता जो बताया गया मुझे।।गुलाब सी खुश्बू बिखेरुं कभी कहीं।कलम से कलम कर लगाया गया मुझे।।आमोद बिन्दौरी /मौलिक अप्रकाशितSee More
May 24
amod shrivastav (bindouri) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आद Tasdiq Ahmed Khan भाई जी रचना के किये हार्दिक बधाई मै भी अंजलि दी की इस्लाह से असहमत हु"
May 24
amod shrivastav (bindouri) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आद लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' भाई जी स्नेहिल टिप्पणी के लिए आभार"
May 24
amod shrivastav (bindouri) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आद समर दादा प्रणाम मार्गदर्शन के लिए शुक्रिया"
May 24
amod shrivastav (bindouri) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आद अंजलि दी प्रणाम बढ़िया गजल हुई है बधाई"
May 24
amod shrivastav (bindouri) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-107
"आद राजेश कुमारी माता जी प्रणाम माता जी रचना के लिए बधाई खूबसूरत गजल कही है" जिसका दिल बंजारा है़ वो क्या जाने घर बसने में एक जमाना लगता है़" "खाली घर की दीवारें छत कहती हैं घर बच्चों बिन गूँगा बहरा लगता है़" ये दोनों शेर तो मुझे…"
May 24

Profile Information

Gender
Male
City State
फतेहपुर (उत्तर प्रदेश) २१२६५७
Native Place
Bindour
Profession
writing & PVT -JOB
About me
मै--- बस-- साधारण इंसान हूँ -

मेरा परिचय

मै माध्यम वर्ग के कायस्थ परिवार से हूँ । निवास उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिला में बिन्दकी तहसील के अंतर्गत बिन्दौर ग्राम में है।किसी विधा की कोई खास जानकारी नही है। बस लिखता हूँ । जो दिल और दिमाक में आयालेखन मेरा बस एक सौख है । या कहु मेरी मानसिक बीमारी जो कागज पर उतर जाती है।मै खुद नही जनता मै ये भाव कैसे लिखता हु।लेकिन लिखता हु। और बस लिखता हूँ ....आप मेरे कविता ,लेख ,अतुकांत,आदि मेरे ब्लॉग"अहसास के कुछ पन्ने"पर पढ़ सकते है।....सादर नमन ...

amod shrivastav (bindouri)'s Photos

  • Add Photos
  • View All

Amod shrivastav (bindouri)'s Blog

शेर लब से लब टहलकर कागजी हो जायेगा

बहर :- 2122-2122-2122-212

ख्याल लफ्जों से उतरकर शाइरी हो जाएगा ।।

शेर लब से लब टहलकर कागजी हो जायेगा।।

अब्र से शबभर गिरेंगी ओश की बूंदें मगर ।

दिन ही चढ़ते ये समां इक मस्खरी हो जाएगा।।

हाँ खुमार -ए-इश्क है बातें तो होगी रात दिन ।

जब भी उतरेगा ये सर से मयकशी हो जाएगा।।

उसके हक़ में है सियासत देखना तुम एक दिन।

जाने वो बोलेगा क्या क्या औऱ बरी हो जायेगा।।

दर्द-ओ-गम शुहरत मुहब्बत सब मिलेगा इश्क में ।

इश्क…

Continue

Posted on July 25, 2019 at 3:10pm — 3 Comments

उसने इतना कह मुझे मेरी ग़लतियों को रख दिया (ग़जल)

बहर.

2122-2122-2122-212

एक दिन उसने मेरी खामोशियों को रख दिया ।।

मेरे पेश-ए-आईने मे'री' हिचकियों को रख दिया ।।

तोड़ बंदिश हिज्र -ए-दिल ख़ुल कर युँ रोया इक दफा।

उसने दिल के सामने जब चिट्ठियों को रख दिया ।।

खन्न की आवाज ले सिक्का छुआ कांसे को जब।

भूख ने नजरें उठाई सिसकियों को रख दिया ।।

जब कभी मेरा वजू अन्धा हुआ इस भीड़ में ।

माँ ने अपनी आस के रौशन दियों को रख दिया ।।

गर कभी मायूस हो मन देख कर छत घास…

Continue

Posted on July 14, 2019 at 6:37pm — 2 Comments

आदमीं हूँ ख्वाहिशें होनी नहीं कम ऐ खुदा ...



2122-2122-2122-212

मतला:-

ख़ुश ही रहता हूँ शिकायत क्या करूँ क्या है अता।।

आदमी हूँ ख्वाहिशें होनी नहीं कम ऐ ख़ुदा।।

हुश्न-ए-मतला:-

तेरे ज़ानिब से मुझे जो भी मिला अच्छा लगा ।

मैं तो मुफ़लिस था मेरी हिम्मत कहाँ कुछ माँगता।।

मेरा दम घुटने लगा जब महफिलों की शान में ।

यार आया हूँ उठा कर दूर खुद का मकबरा।।

मेरी मैय्यत में गुलों की बारिशें अच्छी नहीं।

शाइरी के भेष में करने लगा था इल्तिज़ा।।

देख़ो उल्फ़त के…

Continue

Posted on May 31, 2019 at 12:20pm

मेरी ओर से भी दरवाजा लगता है,,,

बहर :- 22-22-22-22-22-2



तुम हो शातिर तुमको ऐसा लगता है ।।

मेरी ओर से भी दरवाजा लगता है।। 

मैं करता तुमसे कैसे दिल की बातें।

तुमको मेरा प्रेम ही' सौदा लगता है।।

वो मंदिर में गिरजाघर में मस्जिद में।

मुझमें तुझमें पहरा जिसका लगता है।।

वो पत्थर ख़ुद को समझे क़िस्मत वाला।

जिसको छैनी और हथौड़ा लगता है ।।

आन पड़े जब मुश्किल घड़ियां जीवन में।

एक रु'पइया एक हजारा लगता है ।।

हिन्दू मुस्लिम भाई…

Continue

Posted on May 24, 2019 at 5:46pm

Comment Wall (9 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 8:02am on September 13, 2016, Kalipad Prasad Mandal said…

आदरणीय श्रीवास्तव अमोद जी,  नए मित्र के रूप में आपका स्वागत है |

At 12:29pm on April 17, 2016, Sushil Sarna said…

आदरणीय  श्रीवास्तव अमोद विन्दोरी माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर आपको  बधाई। 

At 11:03pm on April 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

श्रीवास्तव आमोद विन्दोरी जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:19am on March 30, 2016, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आमोद जी , नये मित्र के  रूप में आपका स्वागत . शुभ कामनाएं . 

At 12:39pm on November 11, 2015, ASHISH KUMAAR TRIVEDI said…

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ

At 10:49pm on August 18, 2015, amod shrivastav (bindouri) said…
धन्यवादसर
At 11:48pm on July 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

|

|

|

|

|

|

|

|

आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा वलघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

At 5:43am on July 13, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें
At 2:05am on July 12, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

|

|

|

|

|

|

|

|

आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सव, छंदोत्सव, तरही मुशायरा व लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post हिंदी...... कुछ क्षणिकाएं :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, बहुत उम्द: क्षणिकाएँ हुई हैं,बधाई स्वीकार करें । 'हिंदी' को…"
5 minutes ago
Samar kabeer commented on vijay nikore's blog post अन्तस्तल
"प्रिय भाई विजय निकोर जी आदाब,बहुत सुंदर और प्रभावशाली रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें…"
9 minutes ago
Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post गजल
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।"
12 minutes ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल-लालफीताशाही-बृजेश कुमार 'ब्रज'

मंच को प्रणाम करते हुए ग़ज़ल की कोशिशफ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फाइलुनलालफीताशाही कितनी मिन्नतों को…See More
13 minutes ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a blog post

दु:स्वप्न (लघुकथा )

‘सीते ---- ?’‘कौन --- स्वामी ?’‘नही मैं अभाग्य हूँ I’‘ तो मुझसे क्या चाहती हो ?’‘मैं कुछ चाहती नहीं…See More
15 minutes ago
Samar kabeer commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post मातृभाषा हिन्दी
"जनाब डॉ. छोटेलाल सिंह जी आदाब, हिन्दी दिवस पर अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें । 'दृढ़…"
19 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post हिंदी...... कुछ क्षणिकाएं :
"आ. भाई सुशील जी, उत्तम रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
35 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post गज़ल _तुम चाहे गुज़र जाओ किसी राह गुज़र से
"जनाब भाई लक्ष्मण धामी साहिब 'आपकी इस इनायत का बहुत बहुत शुक्रिया "
2 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post गज़ल _तुम चाहे गुज़र जाओ किसी राह गुज़र से
"मुहतरम जनाब समर साहिब आ दाब 'आपकी इस हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया गुज़र में (  ز) है…"
2 hours ago
Samar kabeer commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post असबंधा छंद "हिंदी गौरव
"जनाब बासुदेव जी आदाब,हिन्दी दिवस पर अच्छे छन्द लिखे,बधाई स्वीकार करें । 'हिंदी' को…"
2 hours ago
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नए ख्वाब दिखाने वाला - ग़ज़ल
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
2 hours ago
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए
"जनाब मनोज कुमार अहसास जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'उन्हें जिंदा रखने…"
2 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service