For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

atul kushwah
Share

Atul kushwah's Friends

  • somesh kumar
  • harivallabh sharma
  • Dr. Vijai Shanker
  • Yamit Punetha 'Zaif'
  • kalpna mishra bajpai
  • sakhi singh
  • MUKESH SRIVASTAVA
  • Poonam Priya
  • savitamishra
  • शकील समर
  • DR. HIRDESH CHAUDHARY
  • sunita dohare
  • गिरिराज भंडारी
  • Vasundhara pandey
  • Sulabh Agnihotri
 

atul kushwah's Page

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on atul kushwah's blog post मेरे किरदार को ऐसी कहानी कौन देता है...
"आ. अतुल जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
Apr 26
Aazi Tamaam commented on atul kushwah's blog post मेरे किरदार को ऐसी कहानी कौन देता है...
"सुंदर रचना के लिए सहृदय बधाई सादर प्रणाम आदरणीय अतुल जी"
Apr 22
बसंत कुमार शर्मा commented on atul kushwah's blog post मेरे किरदार को ऐसी कहानी कौन देता है...
"आदरणीय  atul kushwah  जी सादर नमस्कार  बहुत बढ़िया गजल बधाई आपको "
Apr 21
atul kushwah posted a blog post

मेरे किरदार को ऐसी कहानी कौन देता है...

जो पहले मौत दे, फिर जिंदगानी कौन देता है मेरे किरदार को ऐसी कहानी कौन देता हैयहां तालाब नदियां जब कई बरसों से सूखे हैं खुदा जाने हमें पीने को पानी कौन देता हैहमारी जिंदगी ठहरी हुई इक झील है लेकिन ये उम्मीदों के दरिया को रवानी कौन देता हैजमीं से आसमां तक का सफर हम कर चुके लेकिन नहीं मालूम मंजिल की निशानी कौन देता हैपरिंदे भी समझते हैं कि पर कटने का खतरा है इन्हें फिर हौसला ये आसमानी कौन देता है।।.                                           (मौलिक व अप्रकाशित)See More
Apr 20
नाथ सोनांचली commented on atul kushwah's blog post बस यही सोच के फेंका था जाल आंखों में...
"आद0 अतुल कुशवाह जी सादर अभिवादन। इस रचना का शिल्प क्या है क्योंकि यह किसी निश्चित बह्र में नहीं लगी। मंच पर शिल्प लिखने की परंपरा रही है जिससे रचना को देखा और उससे कुछ सीखा जा सके। बहरहाल बधाई स्वीकारें। सादर"
May 2, 2020
atul kushwah posted a blog post

बस यही सोच के फेंका था जाल आंखों में...

पूछते क्या हो यूं लेकर सवाल आंखों मेंपढ सको पढ लो मेरा सारा हाल आंखों मेंदेखना था कि समंदर से क्या निकलता हैबस यही सोच के फेंका था जाल आंखों मेंवो मिरे सामने आती है झुकाए पलकेंहया को रखा है उसने संभाल आंखों मेंनजर से नब्ज पकडकर इलाज कर भी कर देवो लेकर चलती है क्या अस्पताल आंखों मेंजो उसका साथ है तो तीरगी से डर कैसाइश्क में जलने लगती है मशाल आंखों में।। #अतुल                                                   (मौलिक व अप्रकाशित)See More
Apr 28, 2020
atul kushwah posted a blog post

संकट इस वसुंधरा पर है...

विश्व आपदा में ईश्वर से प्रार्थनाहे मनुष्यता के पृतिपालक हे प्रति पालक हे मनुष्यता क्या भूल हुई क्या गलती है अब क्षमा करो हे परमपिता।अब राह दिखाओ दुनिया को मुश्किल सबकी आसान करो हे कायनात के संचालक सारे जग का कल्याण करो।ये कैसी विपदा है भगवन कैसा ये शोर धरा पर है जो सदियों से जीवित है अब संकट उस परम्परा पर है।जग त्राहि माम कर बैठा है नेतृत्व विफल है प्राणनाथ शाखों के परिंदों को अपने इन्द्रियातीत मत कर अनाथ।हे दसों दिशाओं के मालिक शहरों और गांवों के मालिक आकाश में सूरज के मालिक धरती पर छांवों के…See More
Apr 6, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
gwalior
Native Place
kannauj up
Profession
journalist
About me
journalist n poet

atul kushwah's Photos

  • Add Photos
  • View All

Atul kushwah's Blog

मेरे किरदार को ऐसी कहानी कौन देता है...

जो पहले मौत दे, फिर जिंदगानी कौन देता है

मेरे किरदार को ऐसी कहानी कौन देता है

यहां तालाब नदियां जब कई बरसों से सूखे हैं

खुदा जाने हमें पीने को पानी कौन देता है

हमारी जिंदगी ठहरी हुई इक झील है लेकिन

ये उम्मीदों के दरिया को रवानी कौन देता है

जमीं से आसमां तक का सफर हम कर चुके लेकिन

नहीं मालूम मंजिल की निशानी कौन देता है

परिंदे भी समझते हैं कि पर कटने का खतरा है

इन्हें फिर हौसला ये आसमानी कौन देता…

Continue

Posted on April 20, 2021 at 5:30pm — 3 Comments

बस यही सोच के फेंका था जाल आंखों में...

पूछते क्या हो यूं लेकर सवाल आंखों में

पढ सको पढ लो मेरा सारा हाल आंखों में

देखना था कि समंदर से क्या निकलता है

बस यही सोच के फेंका था जाल आंखों में

वो मिरे सामने आती है झुकाए पलकें

हया को रखा है उसने संभाल आंखों में

नजर से नब्ज पकडकर इलाज कर भी कर दे

वो लेकर चलती है क्या अस्पताल आंखों में

जो उसका साथ है तो तीरगी से डर कैसा

इश्क में जलने लगती है मशाल आंखों में।। #अतुल

                   …

Continue

Posted on April 27, 2020 at 4:50pm — 1 Comment

संकट इस वसुंधरा पर है...

विश्व आपदा में ईश्वर से प्रार्थना

हे मनुष्यता के पृतिपालक हे प्रति पालक हे मनुष्यता

क्या भूल हुई क्या गलती है अब क्षमा करो हे परमपिता।

अब राह दिखाओ दुनिया को मुश्किल सबकी आसान करो

हे कायनात के संचालक सारे जग का कल्याण करो।

ये कैसी विपदा है भगवन कैसा ये शोर धरा पर है

जो सदियों से जीवित है अब संकट उस परम्परा पर है।

जग त्राहि माम कर बैठा है नेतृत्व विफल है प्राणनाथ

शाखों के परिंदों को अपने इन्द्रियातीत मत कर…

Continue

Posted on April 6, 2020 at 10:30pm

मुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर...

एक करतब दूसरे करतब से भारी देखकर

मुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर,

 

जिनके चेहरे साफ दिखते हैं मगर दामन नहीं

शक उन्हें भी है तेरी ईमानदारी देखकर,

 

उम्रभर जो भी कमाया मिल गया सब खाक में

चढ गया फांसी के फंदे पर उधारी देखकर,

 

मुल्क में हालात कैसे हैं पता चल जाएगा

देखकर कश्मीर या कन्याकुमारी देखकर,

 

सर्द मौसम है यहां तो धूप भी बिकने लगी

हो रही हैरत तेरी दूकानदारी देखकर,

 

इस…

Continue

Posted on November 16, 2016 at 5:00pm — 16 Comments

Comment Wall (5 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 2:11am on July 31, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें.

At 9:40pm on January 29, 2015, sunita dohare said…

अतुल जी, नमस्कार आपका स्वागत है 

At 11:03pm on October 28, 2014, somesh kumar said…

sukriya,

At 8:09am on June 22, 2014, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का स्वागत है आदरणीय अतुल जी

सादर!

At 7:02pm on February 19, 2014, annapurna bajpai said…

हमारे ओबीओ परिवार मे एम मित्र मंडली मे स्वागत है आपका । 

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हम तो हल के दास ओ राजा-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. अमिता जी, गजल पर उपस्थिति व स्नेह के लिए आभार ।"
2 hours ago
amita tiwari commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हम तो हल के दास ओ राजा-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"पीता  हर  उम्मीद  हमारीकैसी तेरी प्यास ओ राजा बहुत उत्तम ,बहुत सटीक  गागर मे…"
12 hours ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' updated their profile
20 hours ago
अजेय commented on amita tiwari's blog post दस वर्षीय का सवाल
"हा हा हा। बहुत मस्त कविता। उत्तम हास्य"
20 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on amita tiwari's blog post दस वर्षीय का सवाल
"आ. अमिता जी, अच्छी व सीख देती रचना हुई है । प्रक्रिति भी निश्चित तौर पर दण्डित कर रही है कि कुछ…"
21 hours ago
amita tiwari posted a blog post

दस वर्षीय का सवाल

सपूत को स्कूल वापिसी पर उदास देखाचेहरा लटका हुआ आँखों में घोर क्रोध रेखाकलेजा मुंह को आने लगाकुछ…See More
yesterday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

मुहब्बतनामा (उपन्यास अंश)

दूसरी मुहब्बत के नाममेरे दूसरे इश्क़,तुम मेरे जिंदगी में न आते तो मैं इसके अँधेरे में खो जाता, मिट…See More
yesterday
TEJ VEER SINGH replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"बहुत ही दुखद समाचार है..ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। "
yesterday
Usha Awasthi shared their blog post on Facebook
Monday
Usha Awasthi posted a blog post

कुछ उक्तियाँ

पृथ्वी सम्हलती नहींमंगल सम्हालेंगेयहाँ ऑक्सीजन नष्ट कीवहाँ डेरा डालेंगेबहुत मनाईं देवियाँबहुत मनाए…See More
Monday
सुचिसंदीप अग्रवालl is now friends with DR ARUN KUMAR SHASTRI, बासुदेव अग्रवाल 'नमन' and Aazi Tamaam
Monday
सुचिसंदीप अग्रवालl replied to बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s discussion लावणी छन्द (ईश गरिमा) in the group धार्मिक साहित्य
"बेजोड़ शब्दों का प्रयोग करते हुए बहुत ही मनभावक ईश वंदना हुई है। बधाई स्वीकारें।"
Monday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service